अपने परमाणु हथियार छिपाने के रास्‍ते तलाश रहा किम जोंग

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हाथियारों को छिपाने की जुगत में है और वह अपनी गुप्त उत्पादन सुविधाएं भी रखता है। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक अमेरिकी खुफिया अधिकारी इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि उत्तर कोरिया पूरी तरह से अपने परमाणु जखीरे को खत्म करने का इरादा नहीं रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के खुफिया अधिकारियों के हाथ ऐसे साक्ष्य लगे हैं जो इशारा करते हैं कि उत्तर कोरिया अमेरिका को धोखा देने की तैयारी में है। वह अपने शस्त्रागार में मौजूद परमाणु हथियारों के साथ साथ परमाणु बम बनाने वाली विस्फोटक सामग्री तैायर करने वाली अनजानी सुविधाओं के बारे में अमेरिका को भनक नहीं लगने देना चाहता है। अखबार की खबर कहती है कि चार अधिकारियों के द्वारा इस बारे में हासिल की गई, जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के बीच पिछले दिनों सिंगापुर में हुई शिखर वार्ता के बाद के हफ्तों में स्थिति पर आधारित है।

कुछ अमेरिकी अधिकारियों का यकीन है कि उत्तर कोरिया के पास 65 परमाणु हथियार हैं। ऐसा माना जाता है कि उत्तर कोरिया की ज्ञात यूरेनियम-संवर्द्धन सुविधा के अलावा उत्तरी प्योंगयांग से करीब 60 मील दूर कांगसन के नाम से जाना जाने वाला एक गुप्त भूमिगत यूरेनियम संवर्द्धन स्थल भी संचालित किया जाता है। उत्तर कोरिया की परमाणु गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था 38 नॉर्थ ने दावा किया है कि उपग्रह से ऐसी तस्वीरें मिली हैं जो दिखाती है कि उत्तर कोरिया के योंगब्यॉन परमाणु वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र में “तेज” सुधार हो रहा है।

बता दें कि बीते 12 जून को किम जोंग उन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच परमाणु हथियारों को सरेंडर करने की सहमति बनी थी। इस मुलाकात के 10 दिनों बाद वॉशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उत्तर कोरिया को गंभीर खतरा मानते हुए उस पर लंबे समय से लगे आर्थिक प्रतिबंध जारी रखने का फैसला किया है। ट्रंप ने जिस घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किया था, उसमें कहा गया था, “कोरियाई प्रायद्वीप पर हथियार के प्रयोग, प्रसार और जोखिम के मद्देनजर (और उत्तर कोरियाई सरकार की गतिविधियों व नीतियों के मद्देनजर) राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था के लिए उत्तर कोरिया अभी भी असामान्य और असाधारण खतरा बना हुआ है।”

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