लिफ्ट में शीशा लगाने के पीछे होते हैं ये कारण, जानें

लिफ्ट के अंदर कई आपको शीशा दिखा होगा। जानते हैं, यह किस कारण लगाया जाता है। अगर सोच रहे हैं कि चेहरा और कपड़े देखने के लिए इसे लगाया जाता है, तो आप का अंदाजा बिल्कुल गलत है। दरअसल, लिफ्ट या एलिवेटर में शीशा लगाने के पीछे अनेक कारण होते हैं। ये न केवल तकनीक से जुड़े होते हैं, बल्कि मनोविज्ञान से भी इनका वास्ता होता है। लिफ्ट या एलिवेटर में शीशा सुरक्षा संबंधी कारणों से लगाया जाता है। मसलन आप को पता चल सके कि बाकी के लोग क्या कर रहे हैं। भारत के अलावा तमाम देशों में चोरी और उत्पीड़न के मामलों में आरोपी अंदर लगे शीशे के जरिए धरे गए।

कुछ लिफ्ट्स-एलिवेटर्स में सीमित जगह होती है, जिसके कारण उसमें व्हीलचेयर या स्ट्रेचर घूम नहीं पाता। कई बार इसी वजह से हादसे की नौबत तक आ जाती है। ऐसे में उस पर बैठे या लेटे मरीज व उन्हें साधने वाले लोग पीछे नहीं मुड़ पाते, लिहाजा शीशा होने से पीछे के दृश्य साफ दिखता है। नतीजतन वे आसानी से व्हीलचेयर और स्ट्रेचर को लाते-ले जाते हैं।

शीशा से लिफ्ट में लोग क्लॉस्टरफोबिया (सीमित जगह में होने वाली घबराहट) का शिकार होने से भी बच जाते हैं। चूंकि कई लोगों को सीमित या कम जगह में घबराहट व डर लगता है। लिफ्ट बंद होने पर वे घुटन सी महसूस करते हैं लिहाजा उनकी यह घबराहट कम हो, इस मकसद से भी लिफ्ट में शीशे लगाए जाते हैं।

ऊंची इमारतों में सीढ़ियों से जाना सबके लिए संभव नहीं होता, लिहाजा लोग एलिवेटर का सहारा लेते हैं। उदाहरण के तौर पर 30 मंजिला इमारत में जब किसी को 29वें माले पर पहुंचना होता है, तो उसे समय लगता है। ऊपर पहुंचने तक व बोरियत न महसूस करे, इसलिए ध्यान भटकाने लिए शीशा लगाए जाते हैं। कुछ देशों में साधारण लिफ्टें होने के कारण तो पूर्व में लोग शिकायतें भी कर चुके हैं कि इमारत में ऊपर पहुंचने तक उनका अधिक समय खराब हो जाता है।

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