समुद्र के झाग की तरह जल्द बिखर जाएगी चार देशों की चौकड़ी : चीन

चीन ने गुरुवार को कहा कि उसे साधने के लिए अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के बीच समझौते से बनी चौकड़ी 'समुद्र में उठते झाग की तरह जल्द ही बिखर' जाएगी। 

भारत और आस्ट्रेलिया ने चतुष्कोणीय सुरक्षा उपक्रम में शामिल होने की उत्सुकता दिखाई है। यह सुझाव 2007 में जापान ने दिया था। प्रशांत व हिंद महासागरीय क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए बने इसे चतुष्कोणीय गुट से चीन घबराया हुआ है। 

चीन के विदेशमंत्री वांग यी ने कहा, "ऐसा लगता है कि सुर्खियों में रहने के खयालात में कोई कमी नहीं है लेकिन ये खयालात प्रशांत और हिंद महासागरों में समुद्री लहरों के झाग की तरह हैं, जिन पर ध्यान तो जाएगा लेकिन वे जल्द ही बिखर जाएंगे।"

वांग चीन और उसके अरबों डॉलर की लागत वाली बेल्ट व रोड परियोजना का प्रतिरोध करने के मकसद से गुट के अस्तित्व में आने के सवालों का जवाब दे रहे थे। 

बताया जा रहा है कि चारों देश मिलकर बेल्ट व रोड परियोजना के विकल्प के तौर पर संयुक्त क्षेत्रीय ढांचागत स्कीम तैयार करने पर एक दूसरे से बातचीत कर रहे हैं। 

हालांकि कुछ शैक्षणिक जगत के लोगों व मीडिया संस्थानों ने दावा किया गया है कि हिंद-प्रशांत रणनीति का मकसद चीन को साधना है, लेकिन चारों देशों का आधिकारिक रुख इसके विपरीत है, जिसके मुताबिक किसी को साधने का उनका लक्ष्य नहीं है। 

वांग ने कहा, "हमें आशा है कि वे जो कहते हैं उसी के अनुरूप उनका अभिप्राय भी होगा और उनकी कथनी व करनी में समता होगी।"

उन्होंने आगे कहा, "जहां तक हिंद-प्रशांत रणनीति और बेल्ट व रोड परियोजना (बीआरआई) के बीच संबंध की बात है तो हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि बीआरआई को एक सौ से अधिक देशों का समर्थन प्राप्त है।"

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और इसकी महात्वाकांक्षी बेल्ट व रोड संपर्क परियोजना से अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया की चिंता बढ़ गई है। 

भारत ने अरबों डॉलर के बेल्ट व रोड परियोजना का विरोध किया है क्योंकि इसका मुख्य मार्ग, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, पाकिस्तान के कब्जे में स्थित कश्मीर से गुजरता है। 

आस्ट्रेलिया में भी एक समूह का मानना है कि यह सिर्फ आर्थिक परियोजना नहीं है बल्कि यह भू-राजनीतिक प्रयास का हिस्सा है। हिंद महासागर में चीन की मौजूदगी से भारत की चिंता बढ़ गई है।

चीन की नौसेना की शक्ति में इजाफा होने से जापान चिंतित है। पूर्वी चीन सागर स्थित द्वीपों को लेकर चीन और जापान के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है। 

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