ऐसे विश्व का निर्माण करें, जहां सभी सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें : यूएन में पीएम मोदी
Saturday, 26 September 2015 09:17

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यूयार्क: संयुक्त राष्ट्र की 70वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और इसका प्रतिनिधित्व व्यापक करने की जोरदार वकालत करते हुए शुक्रवार को कहा कि इसकी विश्वसनीयता और औचित्य बनाये रखने के लिए ऐसा करना अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने विकसित देशों से कहा कि विकास और जलवायु परिवर्तन की अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को वे पूरा करें।

मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास सम्मेलन 2015 को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र में सुधार अनिवार्य है ताकि इसकी विश्वसनीयता और औचित्य बना रहे सके। साथ ही व्यापक प्रतिनिधित्व के द्वारा हम अपने उद्देश्यों की प्राप्ति अधिक प्रभावी रूप से कर सकेंगे।’’ उन्होंने कहा कि साथ ही हम ऐसे विश्व का निर्माण कर सके जहां प्रत्येक जीव मात्र सुरक्षित महसूस कर सके, सभी को अवसर और सम्मान मिले।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि 70 साल पहले जब एक भयानक विश्व युद्ध का अंत हुआ था तब इस संगठन के रूप में नई आशा ने जन्म लिया था। आज हम फिर मानवता की नई दिशा तय करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। ‘‘मैं इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए महासचिव को हृदय से बधाई देता हूं।’’ मोदी ने कहा कि आज भी जैसा कि हम देख रहे हैं कि दूरी के कारण चुनौतियों से छुटकारा नहीं है। सुदूर देशों में चल रहे संघर्ष और अभाव की छाया से भी वह उठ खड़ी हो सकती है ।

समूचा विश्व एक दूसरे से जुड़ा है, एक दूसरे पर निर्भर है और एक दूसरे से संबंधित है। इसलिए हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को भी पूरी मानवता के कल्याण को अपने केंद्र में रखना होगा। जलवायु परिवर्तन के विषय को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि विकसित देश विकास और जलवायु परिवर्तन के विषयों पर अलग अलग मदों में अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे।’’

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरूआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के इस विचार से शुरू की, ‘‘आधुनिक महानायक महात्मा गांधी ने कहा था कि हम सब उस भावी विश्व के लिए भी चिंता करें जिसे हम नहीं देख पाएंगे।’’ साथ ही उन्होंने जनसंघ के चिंतक और भाजपा की विचारधारा के जनक माने जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जिक्र करते हुए कहा कि ‘भारत के महान विचारक’ के विचारों का केंद्र अंत्योदय रहा और संयुक्त राष्ट्र का एजेंडा 2030 में भी अंत्योदय की महक आती है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज 70 वर्ष की आयु वाले संयुक्त राष्ट्र में हम सबसे अपेक्षा है कि हम अपने विवेक, अनुभव, उदारता, सहृदयता, कौशल एवं तकनीकी के माध्यम से सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर सके।’’ उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि हम सब गरीबी से मुक्त विश्व का सपना देख रहे हैं। हमारे निर्धारित लक्ष्यों में गरीबी उन्मूलन सबसे उपर है क्योंकि आज दुनिया में 1.3 अरब लोग गरीबी की दयनीय जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे सामने प्रश्न केवल यह नहीं है कि गरीबों को आवश्यक्ताओं को कैसे पूरा किया जाए, और न ही यह केवल गरीबों के अस्तित्व और सम्मान तक ही सीमित प्रश्न है। साथ ही यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी मात्र है, ऐसा मानने का भी प्रश्न नहीं है। अगर हम सबका साझा संकल्प है कि विश्व शांतिपूर्ण हो, व्यवस्था न्यायपूर्ण हो और विकास सतत हो, तो गरीबी के रहते यह कभी भी संभव नहीं होगा। इसलिए गरीबी को मिटाना यह हम सबका परम दायित्व है।

जलवायु परिवर्तन पर उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम जलवायु परिवर्तन की चिंता करते हैं तो कहीं न कहीं हमारे निजी सुख को सुरक्षित करने की बू आती है, लेकिन यदि हम जलवायु न्याय की बात करते हैं तो गरीबों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने का एक संवेदनशीन संकल्प उभर कर सामने आता है।’’

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में उन समाधानों पर बल देने की आवश्यकता है जिनसे हम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल हो सके। हमें एक वैश्विक जनभागीदार का निर्माण करना होगा जिसके बल पर प्रौद्योगिकी नवोन्मेष और वित्त का उपयोग करते हुए हम स्वच्छ और नवीकरणीय उर्जा को सर्व सुलभ बना सके।

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