उप्र के करोड़ों किसानों की समृद्धि का आधार बनेगी जैविक खेती
Friday, 20 November 2020 13:41

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लखनऊ: जैविक खेती प्रदेश के करोड़ों किसानों की समृद्धि का आधार बनेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा प्रदेश को जैविक खेती का हब बनाने की है। इसके लिए पहले चरण में प्रदेश के 63 जिलों के 68 हजार हेक्टेयर रकबे में जैविक फसलें लहलहाएंगी। गंगा की अविरलता और निर्मलता के मद्देनजर इसके किनारे के सभी जिलों को इसमें शामिल किया गया है। जिन जिलों को जैविक खेती के लिए चुना गया है उनमें 36 जिले परंपरागत कृषि जिले हैं और 27 जिले नमामि गंगे परियोजना में शामिल हैं। खेती नियोजित रूप से हो, इसकी बेहतर तरीके से मॉनीटरिंग हो इसके लिए सरकार का एप्रोच क्लस्टर खेती का होगा। हर क्लस्टर 50 एकड़ का होगा।

खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार तीन साल में प्रति क्लस्टर 10 लाख रुपये का अनुदान भी देगी। इसमें से 3,30,000-3,30,000 रुपये पहले और तीसरे साल देय होंगे। बीच के वर्ष में यह अनुदान 3,40,000 रुपये का होगा। देय राशि में से 38 फीसद क्लस्टर के गठन, किसानों की क्षमता बढ़ाने, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और पैकेजिंग आदि पर खर्च होगा।

जैविक खेती का तौर तरीका इसमें प्रयुक्त होने वाले कृषि निवेशों के बारे में जागरूकता के लिए क्लस्टर में शामिल किसानों को जैविक खेती के प्रक्षेत्रों पर विजिट कराया जाएगा। विजिट के बाद उनको खेत की तैयारी, हरी खाद का प्रबंधन, नर्सरी की तैयारी, पंचगव्य, जीवामृत, वर्मी कंपोस्ट, जैविक तरीके से कीटों और रोगों के प्रबंधन और वैल्यू एडीशन के लिए किसानों को उत्पाद की सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, लेवलिंग का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार की योजना सभी मंडल मुख्यालयों पर जैविक मंडी खोलने की भी है।

आय के साथ सेहत के प्रति बढ़ती जागरुकता के कारण जैविक उत्पादों की मांग बढ़ी है। लोग इनके अच्छे दाम देने को तैयार हैं। शर्त यह है कि ग्राहक को इस बात का भरोसा हो कि वह जो खरीद रहा है वह गुणवत्ता में खरा है। इसके लिए सरकार पीजीएस इंडिया गाजियाबाद से इन उत्पादों का प्रमाणीकरण भी करवाएगी।

कृषि विभाग के अपर निदेशक (प्रसार) आनन्द त्रिपाठी का कहना है कि सरकार जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रही है। इसको ध्यान में रखते हुए, गंगा नदी उत्तर प्रदेश में जिन 27 जिलों से होकर गुजरती है, उसके तट पर बसे सभी 1,038 ग्राम पंचायतों में भी जैविक खेती होगी। इसमें से कृषि विभाग और यूपी डास्प क्रमश: 16 और 11 जिलों में जैविक खेती कराएगा।

मालूम हो कि भारतीय परंपरा में गंगा को मां का दर्जा प्राप्त है। इस रूप में गंगा की कोख (कैचमेंट इलाका) में दुनिया की प्राचीनतम सभ्यता पल्लवित पुष्पित हुई। इंडो गैंजेटिक बेल्ट दुनिया की सबसे उर्वर भूमि में शुमार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर निजी बातचीत और सार्वजनिक सभाओं में इसका जिक्र भी करते हैं। उनका कहना है कि सिर्फ इंडो गैंजेटिक बेल्ट की भूमि ही पूरी दुनिया का अन्नागार बन सकती है। शर्त यह है कि इसमें खेती के अद्यतन तौर-तरीके की मदद ली जाए। रासायनिक जहर जीवनदायनी गंगा में न जाएं इसके लिए सरकार ने ये नयी पहल की है।

परंपरागत कृषि योजना में शामिल जिले

झांसी, जालौन, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, मीरजापुर, गोरखपुर, पीलीभीत, गोंडा, आगरा, मथुरा, वाराणसी, कौशांबी, फतेहपुर, देवरिया, फरुखार्बाद, उन्नाव, रायबरेली, बहराईच, बाराबंकी, श्रावस्ती, फैजाबाद, कानपुर देहात, आजमगढ़, सुल्तानपुर,कानपुर नगर, फिरोजाबाद, बदांयू, अमरोहा, बिजनौर, चंदौली, सोनभद्र, बलरामपुर और सिद्धाथनगर।

नमामि गंगे योजना में शामिल जिले

चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, मीरजापुर, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, कानुपर नगर, कन्नौज, अलीगढ़, अमरोहा, संभल, हापुड़, मेरठ, मुजफ्पनगर,बलिया, गाजीपुर, कौशांबी,उन्नाव, फरुखार्बाद, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, कासगंज,बुलंदशहर और बिजनौर।

--आईएएनएस

विकेटी-एसकेपी

 

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