इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला का होगा सुधार
Friday, 27 June 2014 18:09

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में अब फिल्म स्लॉट पर आधारित शो नहीं दिखाए जाएंगे। अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा और इसके सुधार के प्रस्ताव पर सरकारी मुहर लग गई तो इसकी सहूलियतें बढ़ जाएंगी। स्थानीय स्तर पर ही कार्यक्रम में नए-नए विषयों को शामिल किया जा सकेगा और अतिरिक्त खर्च में भी कमी होगी।

विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी परिषद के प्रदेश परियोजना समन्वयक अनिल यादव के अनुसार, तारामंडल प्रशासन ने सुधार के लिए 15 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव पर सरकारी मुहर लगी तो कुछ ही महीनों में तारामंडल डिजिटल स्क्रीन से सुसज्जित होगा और दर्शक साफ -साफ दिखने वाले शो का आनंद ले सकेंगे।

विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी परिषद उत्तर प्रदेश की देखरेख में लखनऊ में स्थापित इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला निर्माण के बाद से ही होनहारों को नक्षत्रों के बारे में विभिन्न प्रकार की जानकारियां देते आ रहा है।

इसमें सौरमंडल से जुड़ी जानकारियों के अलावा आकाश के रहस्यों और विस्मयकारी घटनाओं के बारे में दी जाने वाली जानकारियां अब भी जारी है।

गोमती तट पर बनाया गया यह नक्षत्रशाला शनि ग्रह के आकार का होने के नाते विश्व के नक्षत्रशालाओं में अद्वितीय माना जाता है। इसमें अंतरिक्ष के विलक्षण व असीमित विस्तार का दृश्यावलोकन होता है। दर्शक ऐसा अनुभव करते हैं "मानो वे हाथ ऊपर करें और चांद, तारों को अपनी मुट्ठियों में बंद कर लें।"

उन्होंने बताया कि कुछ ही मिनटों में अनेक खगोलीय घटनाएं दिखाने वाले इस नक्षत्रशाला में आकाशीय घटनाओं को दिखाने के लिए अब तक पुरानी तकनीक यानी फिल्म स्लॉट विधि का उपयोग किया जाता है। लेकिन कुछ ही महीनों में इसे सुधारा जाना है। दर्शकों को आकाशीय घटनाओं को दिखाने के लिए डिजिटल स्क्रीन का उपयोग किया जाएगा।

बकौल यादव, "डिजिटल स्क्रीन होने से नक्षत्रशाला में दिखने वाली पिक्चर न सिर्फ साफ दिखेगी बल्कि अतिरिक्त खर्च भी कम होगा। विभाग को जिन फिल्मों को सुधारने के लिए बार-बार बाहर के तकनीशियनों का सहयोग लेना पड़ता था और उन्हें मेहनताना देना पड़ता था, अब वह नहीं देना होगा। स्थानीय स्तर पर ही पिक्चर को अपग्रेड किया जा सकेगा।"

अनिल यादव कहते हैं, "तारामंडल को सुधारने का कार्य चल रहा है। अभी सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। अगर प्रस्ताव पर मुहर लगी तो शीघ्र ही तारामंडल आधुनिक होगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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