मंदिर मस्जिद विवाद : श्री श्री रविशंकर अयोध्या में लेकिन राम मंदिर आंदोलन से जुड़े नेता खुश नहीं

लखनऊ: श्री श्री रविशंकर अयोध्या मसले को हल करने के लिए आज अयोध्या का दौरा कर रहे हैं.अयोध्या में वे रामलला के दर्शन के अलावा मसले को हल करने के लिए संतों-महंतों से राय मशविरा भी कर रहे हैं. कहते हैं कि उन्हें इसलिए आगे किया गया है क्योंकि उनके साथ कोई साम्प्रदायिक विवाद नहीं जुड़ा है और मुसलमानों को उनसे कोई परहेज़ भी नहीं है. लेकिन अभी उन्हें लेकर मंदिर आंदोलन के नेता ही बहुत खुश नहीं दिखते….उन्हें लग रहा है कि आंदोलन उन्होंने किया और उसका श्रेय श्री श्री रविशंकर लेना चाहते हैं.

श्री श्री की राह में अड़चनें हज़ार हैं…एक अड़चन मंदिर आंदोलन के नेताओं का अहम् भी है..मंदिर आंदोलन के नेताओं को लग रहा है कि वे बाहर से आकर समझौते का श्रेय लेना चाहते हैं. उनका पहला विरोध राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य रामविलास वेदांती ने किया..जिनका कहना है कि वे मंदिर आंदोलन में 25 बार जेल गए और 35 बार नज़रबंद हुए, इसलिए उन्हें अहमियत जरूर मिलनी चाहिए.

वेदांती ने  कहा कि,”अयोध्या के साधु-संतों को जब तक विश्वास में नहीं लिया जाएगा, तब तक समझौता नहीं हो सकता, समस्या का समाधान नहीं हो सकता. हमारे अयोध्या के पूज्य नृत्य गोपालदास जी महाराज हैं…हमारे अयोध्या के किशोरीशरण जी महाराज हैं…हमारे अयोध्या के कन्हैया दास जी महाराज हैं…अयोध्या के हम हैं…अयोध्या के मंदिरों के महंत हैं. इन सबको विश्वास में लेना चाहिए.”

1984 से शुरू हुए मंदिर आंदोलन ने तमाम लोगों को बहुत बड़ा नेता बना दिया…बहुतों की बड़ी हैसियत बन गई…श्री श्री रविशंकर मंदिर आंदोलन का हिस्सा नहीं रहे हैं..लेकिन देश में उनका नाम बहुत बड़ा है…मंदिर आंदोलन के कई नेताओं को लग रहा है कि उनके आने से उनकी हैसियत कहीं छोटी न हो जाए.

दिगंबर अखाड़े के महंत रामचंद्र परमहंस मरते दम तक मंदिर के लिए लड़ते रहे. उनके उत्तराधिकारी महंत सुरेश दास श्री श्री के अयोध्या आने की बात से खुश नहीं दिखे. उन्होंने  कहा कि, ”रविशंकर जी आ रहे हैं अयोध्या में…स्वागत है…बाक़ी निर्णय हम लोग अयोध्यावासी ही करेंगे. समझौता हम लोग करेंगे…उनके आने से नहीं. उनके आने से कोई फर्क़ नहीं पड़ता.”

बीजेपी नेता विनय कटियार पहले ही पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं..कहते हैं कि वे मोदी और योगी दोनों से खुश नहीं हैं. मंगलवार को योगी  आदित्यनाथ की अयोध्या में हुई रैली में भी वे शामिल नहीं हुए. वे शुरू से ही मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं. वे श्री श्री रविशंकर से मिलने तो पहुंचे, लेकिन उनकी कोशिशों से बहुत संतुष्ट नहीं दिखे. विनय कटियार ने कहा कि “श्री श्री  जिन लोगों से बातचीत कर रहे हैं उनमें से कोई भी अयोध्या विवाद के मुकदमे में मुद्दई नहीं है, इसलिए यह कसरत पूरी बेकार है.”

विवादित जगह पर दावे को लेकर ही संतों-महंतों में कई गुट हैं…जिनमें आपसी टकराव सामने आने लगा है..उससे निपटना भी श्री श्री के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. फिर अभी मस्जिद पक्ष को भी विश्वास में लेना है…ऐसे में चुनौतियां कई हैं.