योगी आदित्‍यनाथ व मायावती के बाद मेनका और आजम के चुनाव प्रचार पर रोक
Monday, 15 April 2019 23:18

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्लंघन के मामले में सख्त कदम उठाया है। प्रचार के दौरान विद्वेष फैलाने वाले भाषणों के चलते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व सपा नेता आजम खां पर 72 घंटे और बसपा प्रमुख मायावती व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर 48 घंटे तक चुनाव प्रचार करने पर देशव्यापी प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध 16 अप्रैल यानी मंगलवार सुबह छह बजे से शुरू हो जाएगा।

इस दौरान ये नेता न किसी रैली में बोल पाएंगे और न ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकेंगे। किसी को साक्षात्कार देने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। उधर, आजम खां के खिलाफ जयाप्रदा पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में एफआइआर दर्ज हो गई है।

चुनाव आयोग का यह फैसला ऐसे वक्त आया जब सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार सुबह ही चुनाव आयोग से पूछा कि आयोग ने अभी तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आयोग अभी तक सिर्फ नोटिस ही जारी कर रहा है। कोई सख्त एक्शन क्यों नहीं ले रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मायावती के देवबंद की रैली में दिए गए भाषण पर आपत्ति जताई थी।

हालांकि आयोग का कहना है कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से जोड़ना गलत है। आयोग रविवार को ही इस मामले में बैठक कर चुका था और कार्रवाई तय की जा चुकी थी। चुनाव आयोग के फैसले से साफ है कि अब योगी आदित्यनाथ और आजम खां 16, 17 और 18 अप्रैल को कोई प्रचार नहीं कर पाएंगे। जबकि मायावती और मेनका गांधी 16 और 17 अप्रैल को कोई चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगी। मायावती को 16 अप्रैल को आगरा में एक रैली को संबोधित करना था।

सात अप्रैल को देवबंद, सहारनपुर में गठबंधन की संयुक्त रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा था कि मुसलमान अपने वोट बंटने न दें। एकमुश्त गठबंधन प्रत्याशी को वोट करें। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने 11 अप्रैल को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था। आयोग उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ।

 

योगी ने मेरठ में अपने बयान में कहा था कि अगर कांग्रेस, सपा और बसपा को अली पर विश्वास है तो हमें भी बजरंग बली पर विश्वास है। योगी ने देवबंद में मायावती के उस भाषण की तरफ इशारा करते हुए यह टिप्पणी की थी। योगी की जनसभा के दौरान एक खास संदर्भ में 'हरा वायरस' और 'बजरंग बली' शब्द के प्रयोग को आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन माना है।

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