सीपीएम का आरोप- पूरे त्रिपुरा में भाजपा वालों ने हमारे ऑफिस जलाए

त्रिपुरा चुनाव के नतीजों के बाद सीपीएम ने अपने दफ्तरों पर हमले का आरोप लगाया है। कहा है कि कहीं पार्टी कार्यकर्ताओं को पीटा जा रहा है तो कहीं पर दफ्तर जलाए जा रहे है। राज्यभर में ऐसी दो सौ हिंसा की घटनाओं की बात कहते हुए पार्टी ने बीजेपी कार्यकर्ताओ पर हिंसा का ठीकरा फोड़ा है। राज्यभर में बीजेपी और सीपीएम के युवा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें हैं। त्रिपुरा के लोकप्रिय कम्युनिस्ट नेताओं में से एक और सांसद जितेंद्र उपाध्याय कहते हैं,”कम से कम कैडर और पार्टी दफ्तर पर दो सौ हिंसा की घटनाएं हुई हैं। त्रिपुरा में सीपीएम मुख्यालय पर हिंसा की घटनाओं की रिपोर्ट तैयार हो रही है। त्रिपुरा सीपीएम स्टेट सेक्रेटरी बिजन धर ने आरोप लगाया कि हिंसा की घटनाओं को रोकने और बीजेपी वर्कर पर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।”

त्रिपुरा सांसद ने भाजपा पर आदिवासियों को भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगालियों और आदिवासियों के बीच विभाजन कर भाजपा ने अपना वोटबैंक बढ़ाया। लेकिन उन्होंने कहा कि आईपीएफटी एक अलगाववादी पार्टी है, भाजपा के साथ ज्यादा देर तक रिश्ता नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सातवे वेतन आयोग की सिफारिशें नहीं लागू कर पाएगी। जिसके बारे में पार्टी ने इतना ज्यादा प्रचार किया। सांसद ने कहा कि सातवां वेतनमान लागू करना इतना आसान नहीं है, जितना बीजेपी समझती है।
बता दें कि त्रिपुरा में पिछले 25 साल से कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार रही। माणिक सरकार लगातार पांच बार से मुख्यमंत्री रहे। मगर, इस बार हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अप्रत्याशित तरीके से त्रिपुरा में सीपीएम की सरकार की विदाई कर दी। राज्य की 60 में से 59 सीटों पर हुए चुनाव में सभी सीटों के नतीजे घोषित हुए। जिसमें बीजेपी को खुद जहां 35 सीटें मिलीं, वहीं सहयोगी पार्टी आईपीएफटी के साथ कुल 43 सीटों पर विजय मिली। जबकि सत्ताधारी सीपीएम को महज 16 सीटों से संतोष करना पड़ा। सभी सीटों पर 18 फरवरी को मतदान हुआ था।

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