सामान्य होते कश्मीर में डर का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे आतंकवादी
Saturday, 07 September 2019 09:35

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श्रीनगर: अनुच्छेद-370 के रद्द होने के बाद कश्मीर की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। मगर, यह बात आतंकवादियों व अलगाववादियों को हजम नहीं हो रही है। आतंकवादी लोगों में डर का माहौल पैदा करने के लिए लोगों की हत्याओं का सहारा ले रहे हैं। एक शीर्ष खुफिया अधिकारी ने कहा, "अलगाववादी अनुच्छेद-370 के रद्द होने के बाद जम्मू एवं कश्मीर के देश के बाकी हिस्सों से पूर्ण एकीकरण के खिलाफ एक हिंसक सार्वजनिक आक्रोश की उम्मीद कर रहे थे। उनका यह भी मानना था कि सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में नागरिक हताहत भी होंगे, मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं।"

उन्होंने कहा, "सार्वजनिक जीवन और संपत्ति की रक्षा के लिए हमारे द्वारा उठाए गए सभी निवारक उपायों के बावजूद शांति सुनिश्चित करने का श्रेय कश्मीर में आम आदमी को जाता है। लोगों ने अलगाववादियों के इशारे पर चलने से इनकार कर दिया है।"

अधिकारी ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा त्राल इलाके में दो घुमंतू चरवाहों की हत्या कर दी गई। इसके अलावा श्रीनगर शहर के एक दुकानदार की हत्या और बिजबेहरा क्षेत्र में एक आतंकवादियों के इशारे पर हुए पथराव में ट्रक चालक की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि ये सभी अलगाववादियों की हताशा के उदाहरण हैं।

सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़प के दौरान पथराव में घायल हुए एक युवक की दुर्भाग्यपूर्ण मौत एकमात्र नागरिक मृत्यु है, जिसके बारे में भी अलग-अलग धारणाएं बताई जा रही हैं।

युवक के परिवार ने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा दागी गई गोलियों से घायल होने के बाद युवक की मौत हो गई, जबकि पुलिस का कहना है कि पत्थरबाजी में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था।

जैसे ही घाटी में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई है, जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के पोस्टर उत्तरी और दक्षिण कश्मीर जिलों की स्थानीय मस्जिदों के बाहर कई स्थानों पर दिखाई दिए हैं। पोस्टरों के जरिए दुकानदारों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों को संदेश दिया गया है कि अगर वे सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू करने का प्रयास करते हैं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

कुछ नकाबपोश युवक भी कथित तौर पर श्रीनगर और सोपोर की कुछ मस्जिदों में दिखाई दिए। उन्होंने लोगों को सामान्य गतिविधियों को फिर से शुरू नहीं करने की चेतावनी दी।

पहले से उलट, इस बार मस्जिदों का इस्तेमाल भी भावनाएं भड़काने के लिए नहीं हो पा रहा है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "यह आतंकवादियों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। इसीलिए वे नागरिकों की हत्याओं का सहारा ले रहे हैं और धमकियां दे रहे हैं। इस तरह की रणनीति उनके लिए ही नुकसानदेह है क्योंकि आम आदमी ने उनके इशारों पर चलने से मना कर दिया है।"

--आईएएनएस

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