संचार सेवाएं बंद होने के बीच कश्मीर में डीटीएच टीवी, रेडियों की मांग बढ़ी
Thursday, 05 September 2019 08:54

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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने के बाद सुरक्षा कारणों से घाटी में इंटरनेट व संचार सेवाएं 5 अगस्त के बाद बंद कर दी गई थी,। ऐसे में कश्मीर में केबल टीवी सर्विस और इंटरनेट के अभाव में डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) डिश टीवी कनेक्शन और ट्रांजिस्टर रेडियो की जबरदस्त मांग है।

हालांकि, 20 दिनों के बाद घाटी के कुछ हिस्सों में बीएसएनएल लैंडलाइन कनेक्शन बहाल कर दिए गए थे, लेकिन मोबाइल फोन कनेक्टिविटी और इंटरनेट सेवाएं पिछले 31 दिनों से बंद हैं।

जैसा कि केबल टीवी ऑपरेटरों ने भी सेवाएं बंद कर दी हैं,टीवी चैनलों को देखने में असमर्थ होने के कारण कश्मीर में डीटीएच डिश टीवी कनेक्शन की मांग काफी बढ़ गई है।

श्रीनगर में डिश टीवी विक्रेता अब्दुल हमीद ने कहा, "मैंने पिछले 30 दिनों के दौरान श्रीनगर शहर के कुछ हिस्सों में तीन दर्जन से अधिक डीटीएच कनेक्शन लगाए हैं और प्रतिबंधों के बावजूद बड़ी संख्या में ग्राहक उमड़ रहे हैं और इनकी कतारें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं।"

हामिद ने कहा, "नए डीटीएच कनेक्शनों को सक्रिय करने के लिए कोई इंटरनेट नहीं होने के कारण लोग डीटीएच सेवा प्रदाताओं को फोन करने और नए कनेक्शनों को सक्रिय करने के लिए लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करते हैं। मौजूदा डिश टीवी कनेक्शन भी इस तरह रिचार्ज किए जा रहे हैं।

घाटी के कई हिस्सों में प्रतिबंध के कारण खबरें मुश्किल से मिल पा रही हैं, ऐसे में घरेलू और विदेशी टीवी चैनल लोगों के लिए समाचार का एक प्राथमिक स्रोत बन गए हैं।

उत्तरी कश्मीर के गांदरबल जिले में रहने वाले मुहम्मद शफी ने कहा, "अब हम अलग-अलग टीवी चैनलों द्वारा प्रसारित समाचारों पर पूरी तरह से निर्भर हैं क्योंकि संचार सेवाओं के बंद होने के कारण राज्य के बाकी हिस्सों में क्या हो रहा है, यह जानना असंभव सा हो गया है।"

संचार सेवाओं के बंद होने के बीच ट्रांजिस्टर रेडियो सेटों की मांग भी बढ़ी है, जिसे लोगों ने एक तरह से भुला ही दिया था।

डीटीएच कनेक्शन का खर्च उठाने में असमर्थ लोग समाचार के लिए ट्रांजिस्टर रेडियो सेट का रुख कर रहे हैं। लगभग रातों रात रेडियो ने कश्मीर में अच्छी वापसी की है।

सोपोर के रहने वाले गुलाम हसन ने कहा, "टीवी चैनलों पर भड़काऊ और भ्रामक खबरें आधारित चर्चाओं के शोरशराबे को छोड़कर मैं इन दिनों रेडियो को प्रामाणिक समाचार का एक बहुत भरोसेमंद स्रोत मानता हूं। यहां तक कि मेरे बच्चे, जिनके पास सुनहरे रेडियो दिनों की कोई याद नहीं है,एफएम संगीत और अन्य मनोरंजन कार्यक्रम सुन रहे हैं।"

--आईएएनएस

 

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