डीडीए ने मास्टर प्लान, 2021 में संशोधनों को दी मंजूरी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने दिल्ली मास्टर प्लान, 2021 में संशोधनों को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को उपराज्यपाल की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद विपक्ष के नेता व प्राधिकरण के सदस्य विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि डीडीए ने शॉप कम रेजिडेंशियल एरिया प्लॉटों के लिए एक समान एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) को मंजूरी दे दी है जिससे हजारों व्यापारियों को राहत मिलेगी। उन्होंने जानकारी दी कि अब व्यापारियों को दस साल का ही कन्वर्जन शुल्क देना होगा।

गुप्ता ने कहा कि दिल्ली मास्टर प्लान, 2021 में केंद्र लारा प्रस्तावित संशोधन दिल्लीवासियों की जीत है। सरकार ने 741 आपत्तियों और सुझावों पर विचार करते हुए केवल दो महीने में व्यापारियों को सीलिंग से राहत पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाया। संशोधनों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने कारोबारियों को सीलिंग से बचाने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गुप्ता ने कहा कि अब साल 1962 से पहले और बाद में बने सभी शॉप कम रेजिडेंशियल एरिया प्लॉटों और परिसरों के लिए एक समान फ्लोर एरिया रेशियो तय किया गया है। इसके साथ ही इन प्लॉटों या परिसरों पर बने बेसमेंट पर भी एक समान नियम लागू होंगे। इसके अलावा बेसमेंट को व्यापारिक गतिविधियों की शर्तों के साथ मंजूरी मिल जाएगी।

गुप्ता ने बताया कि बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी के सभी सुझाव अनुमोदित कर दिए गए हैं और सीलिंग की समस्या का समाधान निकालने का एक ईमानदार प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को राहत पहुंचाते हुए सभी देय शुल्कों जैसे पार्किंग व कन्वर्जन शुल्क को पुनर्गठित कर तर्कसंगत बनाया गया है। अब व्यापारियों को सिर्फ दस साल तक ही कन्वर्जन शुल्क देना होगा। उन्होंने कहा कि भुगतान संबंधी नियमों को पहले से कहीं अधिक सरल व तर्कसंगत बनाया गया है। अब संपत्ति कर की श्रेणी के अनुसार कन्वर्जन शुल्क लिया जाएगा। कन्वर्जन चार्ज पैनल्टी शुल्क दस गुना से घटाकर डेढ़ गुना कर दिया गया है। मालिकों को अब एकमुश्त पार्किंग चार्ज देना होगा और यह एक ही साल में चार किस्तों में दिया जा सकेगा। गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के असहयोगपूर्ण रवैये को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा स्थानीय निकायों के विचार-विमर्श के आधार पर 351 मिक्स्ड लैंड यूज और पब्लिक पेडिस्ट्रियन स्ट्रीट के अध्यादेश लागू किए जाने को भी स्वीकृति दे दी है। अब इन सड़कों को संबंधित नगर निगम द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर शहरी विकास मंत्रालय इसे अपने स्तर पर ही अधिसूचित करेगा। दिल्ली सरकार के पास यह मामला 11 साल से लंबित पड़ा है।