दिल्ली में बिहार की गरिमा पर चर्चा
Monday, 02 October 2017 19:10

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यहां के नेहरू युवा केंद्र में 'पूर्वाचल भाषा संगम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बिहार की गरिमा, विरासत, भाषाओं और संस्कृति पर चर्चा चली और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर रचित कविता 'मगध-महिमा' का गान किया गया। प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए पत्रिकाएं व पुस्तकें प्रकाशित करने वाले किरण प्रकाशन के 50वें स्थापना दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य, मीडिया व सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। प्रबुद्ध वक्ताओं ने दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले प्रवासी पूर्वाचलियों की आपसी एकजुटता, भाईचारा एवं उनके समग्र विकास से जुड़े मसलों पर अपने सुझाव दिए।

रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में पहुंचे डीडी बिहार के निदेशक पी.एन. सिंह ने कहा कि बिहार की उपेक्षा कर भारत के विश्वगुरु बनने की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बिहार की गरिमा का बखान करते हुए महाकवि रामधारी सिंह दिनकर रचित 'मगध-महिमा' की कुछ पंक्तियां गाकर सुनाईं- "कल्पने! धीरे-धीरे बोल! पग-पग पर सैनिक सोता है, पग-पग सोते वीर/कदम-कदम पर यहां बिछा है ज्ञानपीठ गंभीर..।"

सिंह ने कहा कि दिनकर की ये पंक्तियां बताती हैं कि इसी बिहारभूमि को लेकर देश को जगद्गुरु बनने का सौभाग्य मिला।

दूरदर्शन से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार विनोद मिश्र ने प्रवासी बिहारियों की समस्याओं के समाधान के लिए नई दिल्ली स्थित बिहार भवन में एक सेल खोले जाने की जरूरत बतई। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार की सकल आय में प्रवासी बिहारियों का बड़ा योगदान है, लेकिन उनके पैतृक गांव में मौजूद जायदाद की सुरक्षा के लिए उनकी गुहार सुनने वाला वहां कोई नहीं है।

संगोष्ठी में मिथिलालोक फाउंडेशन की ओर से शिक्षाविद् डॉ. बीरबल झा के सौजन्य से पाग-सम्मान का विशेष आयोजन किया गया। किरण प्रकाशन के प्रमुख सत्यनारायण साह ने मुख्य अतिथि डीडी बिहार के निदेशक को पाग पहनाकर सम्मानित किया। साथ ही, कार्यक्रम में पहुंचे सभी अथितियों को मुख्य अतिथि के हाथों पाग से सम्मानित किया गया।

भारत सरकार ने 'पाग' को मिथिला की धरोहर मानकर हाल ही में इस पर डाक टिकट जारी किया है।

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