नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के लिए दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन (AAP- Congress Alliance) को लेकर शीला दीक्षित अभी भी अपने रुख पर कायम हैं. उन्होंने पार्टी आलाकमान को साफ-साफ कह दिया है कि कांग्रेस और आप का गठबंधन नहीं होना चाहिए. इससे कांग्रेस को नुकसान होगा. शीला दीक्षित ने इस मुद्दे पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बैठक भी की. इस बैठक में निर्णय लिया गया कि वे पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलकर स्थिति साफ करने को कहेंगे. दूसरी तरफ, दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गठबंधन के लिए मध्यस्थता की कोशिश भी शुरू हो गई है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार सुबह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिले हैं. इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह से भी मुलाकात की है.

पिछले सप्ताह पार्टी आलाकमान को लिखे गए पत्र में दीक्षित (Sheila Dikshit) और कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ, दवेंद्र यादव और राजेश लिलोठिया ने गठबंधन पर कार्यकर्ताओं का मूड जानने के लिए फोन सर्वेक्षण पर विरोध जताया है. दिल्ली कांग्रेस के एक नेता ने बताया, ‘दीक्षित और कार्यकारी अध्यक्षों ने कांग्रेस प्रमुख से गुजारिश की है कि वह ‘आप' से गठबंधन नहीं करें क्योंकि यह आग चलकर पार्टी को नुकसान पहुंचाएगा.' साथ ही नेता ने कहा कि उन्होंने पार्टी की शक्ति ऐप के जरिए किए गए फोन सर्वेक्षण पर भी ऐतराज जताया है. यह सर्वेक्षण दिल्ली कांग्रेस के एआईसीसी प्रभारी पीसी चाको ने कराया है. सर्वेक्षण में दिल्ली कांग्रेस के करीब 52,000 कार्यकर्ताओं की राय मांगी गई थी कि क्या पार्टी को आप से गठबंधन करना चाहिए या नहीं.

हाल ही एक रिपोर्ट आई थी कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की अनिश्चितताओं के बीच कांग्रेस पार्टी का एक अंदरूनी सर्वे कांग्रेस नेताओं को रुख बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है. एनडीटीवी को सूत्रों ने बताया कि इस सर्वे में भाजपा को 35 फीसदी वोटों के साथ आम आदमी पार्टी और कांग्रेस से आगे दिखाया गया है. इस सर्वे को पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली प्रमुख शीला दीक्षित देख चुके हैं.

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मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकपा) ने गुरुवार को लोकसभा चुनावों के लिए अपने गठबंधन के एक साथी स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के एक उम्मीदवार और लक्षद्वीप से एक उम्मीदवार समेत 12 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की। राज्य पार्टी अध्यक्ष जयंत पाटिल ने हालांकि मावल लोकसभा सीट से उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की, जहां से अजीत पवार के बेटे पार्थ के चुनाव लड़ने की संभावना है।

वहीं पार्टी ने माढ़ा सीट के लिए भी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की। इस संसदीय सीट पर मौजूदा सांसद विजय सिंह मोहिते-पाटिल और उनके बेटे रंजीत सिंह के बीच सीट को लेकर जबरदस्त खींचातानी चल रही है, जहां रंजीत सिंह ने टिकट नहीं मिलने पर भाजपा में जाने की धमकी दी है।

उन्होंने कहा, "आने वाले कुछ दिनों में बाकी बचे दो सूचियों की घोषणा की जाएगी, हालांकि पार्टी कुछ सीटों को लेकर कांग्रेस से बातचीत भी कर रही है।"

--आईएएनएस

 

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मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार को जहां 2019 लोकसभा चुनाव की दौड़ से बाहर रहने की घोषणा की, वहीं पार्टी उनके भतीजे अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार को मेवाल संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बना सकती है। बी-कॉम से स्नातक पार्थ(28) के पिता अजीत अनंतराव पवार राज्य के पूर्व उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों और गठबंधन को अंतिम रूप देने और इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बारामती में पार्टी कार्यकारणी की बैठक हुई जिसके बाद पवार ने यह घोषणा की।

--आईएएनएस

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मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार महाराष्ट्र के मढ़ा निर्वाचन क्षेत्र से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। पार्टी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि इसकी आधिकारिक घोषणा बहुत जल्द की जाने की उम्मीद है। इससे सप्ताह भर से चल रही अटकलों पर विराम लग जाएगा।

हालांकि, राकांपा के एक राज्यसभा सदस्य ने कहा कि 'पवार की लोकसभा के उम्मीदवारी पर अभी फैसला नहीं किया गया है।' लेकिन, राज्य के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट तौर पर आईएएनएस से इसकी पुष्टि की।

शरद पवार (78) तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वह केंद्र में रक्षा व कृषि मंत्री भी रहे हैं।

वर्तमान में पवार राज्यसभा सदस्य हैं। यह घटनाक्रम पवार के बीते दो सालों में बार-बार 'चुनावी राजनीति' छोड़ने की व पार्टी में अगली पीढ़ी को मौका देने की इच्छा जाहिर करने के बाद आया है। लेकिन, बीते सप्ताह उन्होंने फिर से चुनावी क्षेत्र में वापसी के संकेत दिए।

--आईएएनएस

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लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को हटाने के विपक्ष के लक्ष्य को पाने के लिए सभी राज्यों में दो तरह के गठजोड़ होंगे, एक तो 'संपूर्ण एकता' और दूसरा 'संभव एकता'। 

यादव ने आईएएनएस से साक्षात्कार में कहा कि अतीत में गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री का नाम आमतौर से लोकसभा चुनाव के बाद उभर कर सामने आता था और ऐसा ही आने वाले लोकसभा चुनाव के बाद होगा।

शरद यादव ने कहा कि अखिल भारतीय स्तर पर विपक्ष का गठबंधन काम करता नहीं दिख रहा है, ऐसे में राज्य आधारित गठजोड़ होंगे।

शरद यादव ने कहा, "संपूर्ण एकता हो सकती है और संभव एकता हो सकती है। प्रयास संपूर्ण एकता के लिए है लेकिन अगर यह संभव नहीं हुआ तो फिर संभव एकता होगी।" 

शरद यादव ने माना है कि कई राज्यों में विपक्षी दलों के अपने-अपने दावों के कारण पूर्ण एकता हासिल करना मुश्किल है।

तीन राज्यों से लोकसभा चुनाव जीत चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में गठबंधन करने का सही फैसला लिया है। यह भाजपा को चुनौती देने की दिशा में बड़ा कदम है।

शरद यादव ने कहा है कि पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में पूर्ण एकता हासिल करना मुश्किल है लेकिन जो भी हो, विपक्षी पार्टियां भाजपा को हराने के लिए एकजुट होंगी।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में विपक्षी पार्टियां आसानी से पूर्ण एकता हासिल कर सकती हैं। 

सात बार लोकसभा चुनाव जीत चुके शरद यादव ने कहा कि देश की जनता ने तय कर लिया है कि अब भाजपा को आने वाले चुनाव में बाहर का रास्ता दिखाना है। उन्होंने कहा, "पहली प्राथमिकता भाजपा को हराना है। सरकार गठन पर बाद में फैसला हो जाएगा।"

शरद यादव ने कहा है कि 1977, 1990, 1996 और 2004 में गठबंधन व अन्य सरकारें बनीं लेकिन तब भी पहले से प्रधानमंत्री उम्मीदवार के बारे में पता नहीं था। इस बार भी भाजपा चुनाव में हारती है तो प्रधानमंत्री चुनना मुश्किल नहीं होगा। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि लोकसभा में लोगों को मजबूत सरकार और मजबूर सरकार के बीच में से किसी एक को चुनना होगा, इस पर यादव ने कहा कि इस तरह के नारों का कोई अर्थ नहीं है। लोग ही अंत में संप्रभु प्राधिकारी हैं।

उन्होंने कहा है कि ऐसी सरकार से देश को कोई लाभ नहीं है, जो अपने आप को मजबूत सरकार बोलती है लेकिन 'संविधान के तहत काम नहीं करती है।' 

शरद ने कहा कि मोदी सरकार देश की जनता में फूट डाल रही है, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर रही है और लोगों से किए अपने वादों को पूरा करने में असफल रही है।

बिहार में लोकतंत्रिक जनता दल विपक्षी महागठबंधन का हिस्सा है।

--आईएएनएस

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जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व नेता शरद यादव ने यहां शनिवार को अस्पताल में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद से मुलाकात की और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ निजी टिप्पणी करने के लिए खेद जताया। उन्होंने मीडिया से कहा, "हां, मैंने उनका बयान देखा। मेरा उनसे परिवारिक रिश्ता है। अगर मेरे शब्दों से उन्हें दुख हुआ है, तो मैं खेद जताता हूं। मैं उन्हें इस बाबत पत्र भी लिखूंगा।"

शरद यादव ने बुलंदशहर हिंसा के दौरान पुलिस इंस्पेक्टर और एक नागरिक के मारे जाने की निंदा की।

उन्होंने कहा, "बुलंदशहर की घटना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। भीड़ द्वारा एक पुलिसकर्मी को पीट-पीट कर मार डालना काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।"

उन्होंने कहा, "बीते साढ़े चार सालों में, प्रतिवर्ष दो करोड़ नौकरी देने जैसे अन्य कई वादों को भाजपा सरकार ने नहीं निभाया।"

यादव ने कहा, "25 पार्टियां, जो एक साथ आई हैं, वे मौजूदा सरकार को 2019 में बाहर का रास्ता दिखाएंगी।"

यह पूछे जाने पर कि लालू प्रसाद और उनके बीच क्या बातचीत हुई? उन्होंने कहा, "हमने राजनीति से संबंधित बातचीत की, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।"

--आईएएनएस

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देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई को कथित रूप से 'बंधक' बनाए जाने को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार को कहा कि इससे देश को भारी नुकसान होगा और इसके विनाशकारी परिणाम सामने आएंगे। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निष्पक्ष जांच करने की एक स्वतंत्र संस्था बताते हुए शरद पवार ने कहा कि इसके शीर्ष अधिकारियों को मध्यरात्रि को हटाया जाना देश के खराब दशा में जाने का पूर्वसूचक है।

राकांपा की महिला शाखा की रैली को संबोधित करते हुए पवार ने कहा, "यह साफ है कि सरकार चाहती है कि हर चीज उसकी मर्जी से, उसके तय की गई दिशा में चले। वर्तमान स्थिति यही दिखाती है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का संविधान, न्यायापालिका के प्रति सम्मान या देश के नियम या लैंगिक समानता वगैरह में कोई विश्वास नहीं है।

पवार ने कहा, "सबरीमाला मंदिर के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने महिलाओं के पक्ष में आदेश दिया, लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सवाल उठाया कि शीर्ष अदालत कैसे इस तरह का फैसला दे सकती है? इस तरह की सोच वाले लोगों को सत्ता की बागडोर सौंपना खतरनाक है।"

पवार ने भाजपा पर लैंगिक समानता के प्रति सम्मान या यहां तक कि शीर्ष अदालत के फैसले का सम्मान न करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना सरकार बने लगभग चार साल पूरे हो गए, लेकिन जनहित में एक भी फैसला नहीं लिया गया है, राज्य गंभीर जलसंकट की चपेट में है।"

--आईएएनएस

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 राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को अनुमान जताया कि 2019 चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं होगा और केंद्र व महाराष्ट्र दोनों जगह की सरकारें बदलेंगी। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य की तुलना 2004 से करते हुए, वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह संभव नहीं दिख रहा कि 2019 में कोई एक पार्टी सत्ता में आए।

पवार ने इंडिया टूडे समूह द्वारा मंगलवार को आयोजित 'मुंबई मंथन' में कहा, "मुझे नहीं लगता कि सत्ता का समीकरण महाराष्ट्र और केंद्र में समान रहेगा। यह 2004 की स्थिति होगी, जब किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ था, लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में एक सरकार 10 वर्षो तक कायम रही।"

उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) चुनाव में 'शाइनिंग इंडिया' अभियान के साथ उतरी था, लेकिन चुनाव जीतने में विफल रहा।

पवार ने कहा, "वाजपेयी के कद और नेतृत्व की मौजूदा प्रधानमंत्री के कद और नेतृत्व से तुलना करने पर, मैं महसूस करता हूं कि वाजपेयी भाजपा के सबसे बड़े नेता थे। मुझे नहीं लगता है कि पार्टी में आज वैसी स्थिति है।"

'राजनीति में खालीपन' के बहस को खारिज करते हुए उन्होंने पूछा, "किसने 2004 में यह सोचा था कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनेंगे?"

उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के सोमवार को दिए बयान का संदर्भ दिया। चिदंबरम ने सोमवार को कहा था कि कांग्रेस ने 2019 चुनाव के लिए अपने अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीवार घोषित नहीं किया है।

पवार ने कहा, "चिदंबरम ने सच कहा है और कांग्रेस पार्टी की स्थिति को सामने रखा है। कांग्रेस नेताओं से मेरी बातचीत के आधार पर, यह स्पष्ट है कि पार्टी बदलाव चाहती है, लेकिन पार्टी ने यह कभी नहीं कहा कि वह किसी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को तौर पर पेश करना चाहती है और न ही कभी दूसरे दलों पर इसे थोपने की कोशिश की है।"

उन्होंने सलाह दिया कि विपक्ष की तरफ से किसी भी नेता को 2019 चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश नहीं करना चाहिए और प्रधानमंत्री उम्मीदवार के बारे में चुनाव बाद ही गठबंधन के साथियों द्वारा निर्णय लिया जाना चाहिए।

'महागठबंधन' के बारे में उन्होंने कहा, "हम (राकांपा) इस तरह के किसी महागठबंधन के बारे में बात नहीं करते। मैंने भाजपा का विकल्प मुहैया कराने के लिए सभी पार्टियों से एक विपक्षी गठबंधन को लेकर बात की है, लेकिन इस तरह के किसी गठबंधन के अस्तित्व में आने की स्थितियां नहीं दिख रही हैं। हरेक राज्य में जमीनी वास्तविकता बहुत अलग है।"

--आईएएनएस

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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए बुधवार को यहां कहा कि देश आगामी संसदीय चुनाव में सांप्रदायिक ताकतों को उखाड़ फेंकने की तैयारी में है। उन्होंने यहां अपनी पार्टी के एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा, "मैं राजग सरकार की नीतियों और कार्यों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हूं, जो न केवल विभाजनकारी, विनाशकारी और विध्वंसकारक प्रचार करती है, बल्कि देश की अखंडता के लिए भी एक खतरा है।"

पवार ने देश के सांप्रदायिक राजनीति की गिरफ्त में होने का दावा करते हुए कहा कि दक्षिणपंथियों ने सांप्रदायिकता और विकास के बीच कोई विरोधाभास नहीं देखा है।

उन्होंने कहा, "उनका मानना है कि सांप्रदायिकता भारत के सबसे बड़े समूह को एकजुट करेगी और जब अल्पसंख्यक उन्हें एकजुट होते हुए देखेंगे, तब वे मुख्यधारा में राजनीतिक रूप से छोटे भागीदारों के रूप में शामिल होंगे। हमारा देश विभिन्न संस्कृतियों, संप्रदायों व धर्मों का राष्ट्र है, जो केवल मानवता के धर्मनिरपेक्ष सार के साथ एकजुट रह सकता है। 'एक धर्म, एक राष्ट्र' का सिद्धांत बेतुका है और भारत के संदर्भ में अव्यवहारिक है।" 

उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे वर्ष में हैं, जब देश सांप्रदायिक ताकतों को उखाड़ फेंकने के लिए तैयार है, जो केंद्र की सत्ता पर काबिज है।" उन्होंने घोषणा की कि राकांपा हमेशा धर्मनिरपेक्ष और आधुनिक भारत के प्रति बचनबद्ध रही है।

कृषि व रोजगार जैसे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में सरकार के प्रदर्शन और नोटबंदी से हुए आर्थिक नुकसानों पर हमला बोलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, "अब हम इस स्थिति को और आगे जारी नहीं रख सकते। उस देश का भविष्य क्या हो सकता है, जहां डर का माहौल बढ़ रहा हो, जहां लोग बेरोजगारी के अधीन हो रहे हों, जहां किसान और मजदूर व्यवस्थित रूप से गरीब हो रहे हों, जहां कुछ चुनिंदा लोगों के लाभ के लिए अर्थव्यवस्था का उपयोग किया जा रहा हो?" 

उन्होंने कहा, "हमें अपने मतभेदों को खत्म करना होगा और भय, सांप्रदायिकता व अवसरवाद के इस शासन को समाप्त करने के लिए एक संयुक्त लड़ाई लड़नी होगी।" 

पवार ने कहा, "भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में किए सभी वादों को पूरा नहीं किया। लोग उनके झूठे वादों से परेशान हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में हालिया उप-चुनावों ने मोदी सरकार के खिलाफ लोगों के फैसले को दिखाया है।" 

राकांपा प्रमुख ने कहा कि बढ़ते आतंकवाद के साथ कश्मीर घाटी में अभूतपूर्व बंदी, सड़क पर विशाल प्रदर्शन और सीमा पार रोजाना गोलीबारी को संवाद की कमी से जोड़ा जा सकता है।

उन्होंने मोदी सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया और उत्पादन लागत पर 150 प्रतिशत तक कृषि फसलों की कीमतों में वृद्धि करने के उनके दावे को आंख में धूल झोंकने वाला करार दिया।

उन्होंने कहा कि 2016 में नोटबंदी के आर्थिक नुकसान ने पूरे देश को अत्यधिक तनाव में डाला हुआ है। 

पवार ने कहा कि मात्र दो वर्षों में अर्थव्यवस्था आठ फीसदी की दर से आगे बढ़ रही थी, मुद्रास्फीति नियंत्रण में था, एफडीआई आ रही थी और बाजार में तेजी थी। "इसे फिक्सिंग की आवश्यकता नहीं थी। इसे और गति देने की आवश्यकता थी और यह सुधारों के लिए तैयार थी।"

उन्होंने कहा, "लेकिन मोदी ने अपने शानदार विचारों के साथ निर्णय लिया, जिससे देश संकट में आ गया।" 

--आईएएनएस

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वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बीजेपी के खिलाफ राष्‍ट्रीय स्‍तर पर गठबंधन बनाने की प्रक्रिया ने अभी रफ्तार नहीं पकड़ी है, लेकिन आगामी चुनाव में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार कौन होगा इसको लेकर बयानबाजी का दौर शुरू हो चुका है। राहुल गांधी ने यूरोप यात्रा के दौरान पीएम पद की रेस में शामिल न होने की बात कही थी। राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस अध्‍यक्ष के बयान पर खुशी जताई है। मुंबई में पार्टी नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए पवार ने कहा, ‘मैं खुश हूं कि कांग्रेस नेता ने भी कहा कि वह प्रधानमंत्री पद की दौर में शामिल नहीं हैं।’ बता दें कि विपक्षी दलों की ओर से शरद पवार को भी पीएम के सशक्‍त उम्‍मीदवारों में से एक माना जा रहा है। उनके अलावा ममता बनर्जी भी गैर बीजेपी दलों में सबसे ज्‍यादा प्रभावशाली और मुखर हैं।

एनसीपी प्रमुख ने पीएम पद के लिए दिया ‘फॉर्मूला’: शरद पवार ने पार्टी नेताओं की बैठक में वर्ष 2019 में विपक्षी खेमे से पीएम बनने का फॉर्मूला भी पेश किया। विपक्षी एकता में अहम भूमिका निभाने के इच्‍छुक एनसीपी प्रमुख ने चुनाव होने तक इस मसले को टालने की भी बात कही। पवार ने कहा, ‘पहले चुनाव तो होने दीजिए…इन लोगों (बीजेपी) को सत्‍ता से हटाना है। उसके बाद हमलोग इकट्ठे बैठेंगे। जिस दल को ज्‍यादा सीटें मिलेंगी, वह प्रधानमंत्री पद के लिए दावा ठोक सकेगा।’ पवार ने स्‍पष्‍ट किया कि 1977 और 2004 के आम चुनावों की तर्ज पर पीएम पद के प्रत्‍याशी का चयन होना चाहिए। महाराष्‍ट्र के दिग्‍गज नेता ने कहा कि पहला लक्ष्‍य बीजेपी को सत्‍ता से हटाना होना चाहिए।

राज्‍य स्‍तर पर गठजोड़ की वकालत: बीजेपी के बढ़ते प्रभाव ने क्षेत्रीय दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में ये दल वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में खुद को प्रासंगिक रखने की कोशिश में जुटे हैं। शरद पवार विरोधी खेमे के कद्दावर नेताओं में से एक हैं। उन्‍होंने बीजेपी को हटाने के लिए भी फॉर्मूला दिया। उन्‍होंने कहा कि बीजेपी विरोधी दलों को राज्‍य स्‍तर पर गठबंधन करना चाहिए। उन्‍होंने ईवीएम से छेड़छाड़ का भी मुद्दा उठाया। साथ ही चुनाव आयोग से बैलट पेपर के जरिये चुनाव कराने का आग्रह किया।

 

सीट बंटवारे पर चर्चा जल्‍द: शरद पवार ने कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे पर जल्‍द ही चर्चा करने की बात कही है। उन्‍होंने कहा कि इस मसले पर अगले सप्‍ताह कांग्रेस नेता अशोक गहलोत और अशोक चव्‍हाण के साथ प्रफुल्‍ल पटेल और जयंत पाटिल चर्चा करेंगे। पवार ने नरेंद्र मोदी को मजबूत विरोधी बताया। साथ ही कहा कि इससे चिंतित होने की बात नहीं है, क्‍योंकि देश की आम जनता हमलोगों से ज्‍यादा चौकन्‍नी और स्‍मार्ट है।

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