भोपाल: मध्य प्रदेश के भोपाल संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) का उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ट्वीट किया है कि भोपाल की जनता दिग्विजय सिंह को हराने के लिए बेताब है। उन्होंने कहा कि सिंह को तो भाजपा का कार्यकर्ता ही हरा देगा।

उमा ने रविवार को कई ट्वीट किए। उन्होंने कहा, "भोपाल से उम्मीदवार तय करने का अधिकार मेरे पास नहीं है। उस पर निर्णय पार्टी का संसदीय दल करता है। किंतु, एक बात तो ध्यान में रखनी पड़ेगी कि दिग्विजय सिंह को हराना बिल्कुल भी कठिन काम नहीं है। अब मैं आपको अतीत की याद दिलाती हूं। भाजपा के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे से मध्य प्रदेश के उस समय के मुख्यमंत्री कैलाश नाथ काटजू विधानसभा का चुनाव हार गए थे।"

उन्होंने आगे लिखा, "सुमित्रा महाजन से 1989 के लोकसभा चुनाव में इंदौर से पूर्व मुख्यमंत्री पी.सी. सेठी हार गए थे। फिर सतना में कुशवाहा से एवं होशंगाबाद में सरताज सिंह से पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह चुनाव हार गए थे।"

उमा भारती ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, "भोपाल में तो आलोक संजर, कृष्णा गौर, रामेश्वर शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, आलोक शर्मा, भगवान दास सबनानी, विश्वास सारंग, इनमें से कोई भी दिग्विजय सिंह को चुनाव हरा देगा। इस संबंध में मेरा योगदान तो 2003 में ही पूरा हो चुका। मैं दिग्विजय सिंह जी को 2003 में ही शासन से बेदखल कर चुकी हूं। मेरा तो रोल ही पूरा हो चुका।

उन्होंने आगे लिखा, "हराने और जीताने में जनता और कार्यकर्ता का रोल होता है, नेताओं को घमंड नहीं पालना चाहिए। आप भोपाल की तासीर को समझ लीजिए, भोपाल के लोग दिग्विजय सिंह को हराने के लिए बेताब हैं।"

उल्लेखनीय है कि भाजपा अभी तक भोपाल लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है।

--आईएएनएस

 

 

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भोपाल: मध्य प्रदेश के भोपाल संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यहां सशक्त उम्मीदवार को मैदान में उताने की तैयारी में है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को मैदान में उतारने की जमावट तेज कर दी गई है। उमा हालांकि इस बारे में अभी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

भोपाल भाजपा का गढ़ है और वर्ष 1989 के बाद से भाजपा यहां लगातार जीतती आई है। कांग्रेस ने इस बार एक बड़ा दांव खेलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। सिंह एक पखवाड़े से ज्यादा समय से भोपाल संसदीय क्षेत्र में सक्रिय हैं। दूसरी ओर, भाजपा में उम्मीदवारी को लेकर अंर्तद्वंद्व जारी है। भाजपा के नेता बाहरी व्यक्ति को चुनाव लड़ाने की संभावनाओं का खुलकर विरोध कर चुके हैं।

पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अनुषांगिक संगठनों की भोपाल में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में भोपाल, विदिशा व इंदौर की सीटों को लेकर मंथन किया गया था। संघ के प्रतिनिधियों ने भोपाल से दिग्विजय सिंह के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उमा भारती को सबसे सशक्त उम्मीदवार माना था। चौहान किसी भी सूरत में लोकसभा चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं। इन स्थितियों में संघ ने उमा भारती से चर्चा की है।

उमा भारती हालांकि पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि वह इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी।

भाजपा के सूत्रों का कहना है कि उमा भारती ने भोपाल से चुनाव लड़ने से इनकार नहीं किया है, मगर हामी भी नहीं भरी है। उमा अपनी शर्तो पर चुनाव लड़ना चाहती हैं। बीते रोज उमा भारती झांसी में थीं। इस दौरान पत्रकारों ने उनसे जब भोपाल से चुनाव लड़ने के बारे में पूछा तो उन्होंने बस इतना कहा कि 'यह सवाल सुना ही नहीं है। मैंने तय कर लिया है कि मुझे यह सवाल सुनाई ही नहीं देगा, जब सुनाई ही नहीं देगा तो बोलूंगी कहां से।'

उमा भारती के भोपाल से चुनाव लड़ने के सवाल पर दिए गए जवाब ने इतना तो साफ कर ही दिया है कि अभी तक बात पूरी तरह बनी नहीं है, साथ ही यह संदेश छुपा है कि आगामी चुनाव भोपाल से लड़ सकती हैं। यह बात अलग है कि उमा भारती ने पिछले दिनों चुनाव न लड़कर गंगा नदी के लिए काम करने का ऐलान किया था।

राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटेरिया का कहना है कि भोपाल में दिग्विजय सिंह के मुकाबले भाजपा के पास जो सशक्त चेहरे हैं, उनमें से एक नाम उमा भारती है, वहीं उमा भारती मध्य प्रदेश की राजनीति में सम्मानजनक वापसी चाहती हैं। संघ और उमा भारती के बीच फलदायी बात होती है तो वे भोपाल से चुनाव लड़ भी सकती हैं, इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

भाजपा द्वारा भोपाल सहित कई प्रमुख सीटों से उम्मीदवार घोषित करने में हो रही देरी के सवाल पर पटेरिया का कहना है कि, भाजपा की रणनीति का यह हिस्सा भी हो सकता है, इसे खाली और भरा आधा गिलास के तौर पर देखना चाहिए। भाजपा इस बात पर भी नजर रखे हुए कि उसके किसी निर्णय से कहीं असंतोष मुखरित तो नहीं हो रहा। भोपाल के मामले में संघ और संगठन दोनों ही सतर्क है, इसलिए पार्टी संभलकर आगे बढ़ रही है।

कांग्रेस ने भोपाल से दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाकर भाजपा को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार के लिए मजबूर कर दिया है। भाजपा जहां भोपाल को अपना गढ़ मानकर चल रही थी, वहीं उसे उम्मीदवार चयन में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पार्टी के अंदरखाने से भी यही बात सामने आ रही है कि भोपाल से किसी हिंदूवादी चेहरे को मैदान में उतारने का मन बनाया जा रहा है और उसमें उमा का नाम सबसे पहले है।

उमा भारती वर्ष 1999 से 2004 तक भोपाल से सांसद रह चुकी हैं। और भोपाल संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने युवा मतदाताओं से सीधे संवाद और संपर्क करने के लिए 'युवा विजय, संकल्पित दिग्विजय' अभियान शुरू किया है।

दिग्जिवय सिंह ने गुरुवार को अपने ट्विटर एकाउंट पर एक वीडियो साझा कर लिखा है, "युवाओं के साथ पारस्परिक संवाद स्थापित करने हेतु, उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं व आकांक्षाओं को समझने तथा उस संदर्भ में सकारात्मक कार्य करने को लक्षित एक नई पहल 'युवा विजय, संकल्पित दिग्विजय' शुरू की जा रही है।"

पूर्व मुख्यमंत्री ने इसके लिए एक मोबाइल नंबर भी जारी किया है, मोबाइल नंबर 9911186200 पर युवा मतदाता अपनी बात उन तक पहुंचा सकते हैं।

दिग्विजय सिंह ने ट्वीट के साथ साझा किए गए वीडियो में कहा है कि इस देश के युवा इस देष का भविष्य है, मेरी प्राथमिकता होगी, लिहाजा युवा अपनी प्राथमिकताएं और उम्मीद से अवगत कराएं, जिन्हें पूरा करने का प्रयास करेंगे। साथ ही युवाओं की कसौटी पर खरा उतरने का भरोसा दिलाया है।

कांग्रेस द्वारा भोपाल से दिग्जिवय सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से ही उनके मुख्यमंत्रित्वकाल वर्ष 1993 से 2003 तक के कामकाज को भाजपा अपनी तरह से प्रचारित करती है और राज्य की बदहाली के लिए उसी काल को जिम्मेदार ठहराती है। भाजपा के आरोपों का जवाब देने के लिए दिग्विजय सिंह ने भी रणनीति बनाई है।

दिग्विजय ने पिछले दिनों अपने समर्थकों व कार्यकर्ताओं से कहा था कि वर्ष 2000 के बाद जन्मे मतदाताओं तक वास्तवकिता का संदेश पहुंचाएं। वर्ष 1993 से 2003 के बीच किस तरह के विकास कार्य हुए, यह बताया जाए। सिंह ने युवाओं से संवाद करने के लिए सोशल मीडिया को माध्यम चुना है।

--आईएएनएस

 

 

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को 24 उम्मीदवारों की सूची जारी की। इस सूची में सात से ज्यादा राज्यों की लोकसभा सीटों को ध्यान में रखा गया है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती और रांची से पांच बार सांसद रहे राम टहल चौधरी सहित 10 मौजूदा सांसदों को टिकट नहीं मिल पाया।

भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा तय की गई सूची में हरियाणा से आठ, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से चार-चार, मध्य प्रदेश और झारखंड से तीन-तीन, पश्चिम बंगाल व ओडिशा से एक-एक उम्मीदवार का नाम है।

उमा भारती चुनाव न लड़ने की घोषणा पहले ही कर चुकी हैं। झांसी सीट से उनकी जगह बैद्यनाथ ग्रुप के मालिक अनुराग शर्मा को टिकट दिया गया है।

पार्टी ने उत्तर प्रदेश में बांदा से सांसद भैरों प्रसाद मिश्र को टिकट न देकर उनकी जगह आर.के. पटेल को उम्मीदवार बनाया है। लालगंज सीट पर नीलम सोनकर इस बार फिर पार्टी का चेहरा होंगी। फूलपुर से उपचुनाव हारने के बाद पार्टी ने इस बार केशरी देवी पटेल पर भरोसा जताया है।

हरियाणा से तीन मौजूदा सांसदों का टिकट काटकर भाजपा ने जिन आठ नाम घोषित किए हैं, उनमें से पांच इस बार फिर टिकट पाने में कामयाब रहे।

सूची के मुताबिक, रतन लाल कटारिया (अंबाला), रमेश चंद्र कौशिक (सोनीपत), केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह (गुड़गांव), धर्मवीर सिंह (भिवानी-महेंद्रगढ़) और कृष्णपाल गुर्जर (फरीदाबाद) इस बार भी टिकट पाने में कामयाब रहे।

पार्टी ने इस बार करनाल से दैनिक 'पंजाब केसरी' के मालिक अश्विनी कुमार को टिकट न देकर उनकी जगह संजय भाटिया पर भरोसा जताया है। कुरुक्षेत्र में राजकुमार सैनी के बजाय नायब सिंह और सिरसा में सुनीता दुग्गल की जगह चरणजीत सिंह रोरी पार्टी क चेहरा होंगे।

राजस्थान में तीन मौजूदा सांसदों का टिकट इस बार कट गया है। वर्ष 2014 में पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह को हराने वाले कर्नल सोनाराम भी इस बार टिकट न पा सके। उनकी जगह कैलाश चौधरी मैदान में उतारे गए हैं।

राजसमंद से हारून सिंह की जगह इस बार दीया कुमारी और भरतपुर से बहादुर सिंह कोली की जगह रंजीता कोली पार्टी का चेहरा होंगी। करौली-ढोलापुर सीट से मनोज राजुरिया को इस बार फिर उम्मीदवार बनाया गया है।

झारखंड में राम टहल चौधरी की जगह संजय सेठ भाजपा उम्मीदवार होंगे। कोडरमा के मौजूदा सांसद रवींद्र कुमार राय को टिकट न देकर पार्टी ने इस बार अन्नपूर्णा देवी यादव को उम्मीदवार बनाया है।

मध्य प्रदेश में ग्वालियर सीट से मौजूदा सांसद नरेंद्र सिंह तोमर के बजाय विवेक शेजवाल्कर पार्टी का चेहरा होंगे। तोमर इस बार मुरैना सीट से लड़ेंगे। छिंदवाड़ा में मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ के सामने भाजपा ने नत्थन शाह को मैदान में उतारा है, जबकि देवास में महेंद्र सोलंकीको उम्मीदवार बनाया गया है।

छिंदवाड़ा में विधानसभा उपचुनाव भी होना है। कांग्रेस प्रत्याशी मुख्यमंत्री कमलनाथ का मुकाबला यहां भाजपा के विवेक साह करेंगे। सांसद कमलनाथ के लिए मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के भीतर विधायक बनाना अनिवार्य है, इसलिए यहां उपचुनाव होने जा रहा है।

पश्चिम बंगाल की पुरुलिया संसदीय सीट से भाजपा ने ज्योर्तिमय महतो को और ओडिशा के जगतपुर सीट से बिभूति प्रसाद तराई को उम्मीदवार बनाया है।

--आईएएनएस

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लखनऊ: लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान होने के साथ ही नेताओं की बयानबाजी का दौर तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) मुखिया मायावती पर तंज कसते हुए कहा, "इस बार भी अगर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मायावती पर हमला करें, तो मैं उन्हें बचाऊंगी।" उमा ने कहा कि समाजवादी पार्टी के लोग उन पर हमला जरूर करेंगे, चाहे चुनाव के पहले करें या फिर चुनाव के बाद।

उन्होंने कहा, "जब गेस्ट हाउस में मायावती जी पर हमला हुआ था, तब ब्रह्मदत्त द्विवेदी जी थे। अब वह नहीं हैं, तो मैं हूं। जैसे ही उनको संकट आए तो मेरा मोबाइल नंबर रखें और तुरंत मुझे फोन करें। उन पर संकट आना जरूर है।"

उमा भारती ने मायावती को वर्ष 1995 की वह घटना याद दिलाई है, जब समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और विधायकों ने लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस पर हमला बोल दिया था। बसपा विधायकों के साथ मारपीट की गई थी और मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। उनका दरवाजा तोड़ने की कोशिश भी की गई थी।

--आईएएनएस

 

 केंद्रीय मंत्री उमा भारती अगले डेढ़ साल सिर्फ गंगा की अविरलता-निर्मलता और राम मंदिर के लिए काम करेंगी, इसलिए अगला यानी वर्ष 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी। यहां मंगलवार को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उमा भारती ने कहा, "अगले डेढ़ साल मैं गंगा और राम मंदिर के लिए काम करने के अलावा कुछ भी नहीं करूंगी।"

उन्होंने कहा, "वर्ष 2016 में भी वह अपने अभियान को आगे बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन उस समय पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि आप इस्तीफा मत देना, पार्टी फैसला करेगी। इसलिए चाहती हूं कि पार्टी ही इस संदर्भ में फैसला करे, मगर अब डेढ़ साल तक गंगा और राम के अलावा कुछ नहीं करूंगी।"

उमा भारती वर्तमान में उत्तर प्रदेश के झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। इससे पहले मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। इस समय केंद्रीय मंत्री हैं। उमा भारती ने चुनाव न लड़ने का निर्णय लिया है। इससे पहले मध्यप्रदेश के विदिशा संसदीय क्षेत्र से सांसद और केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। इन निर्णयों से अब पार्टी के अंदरखाने कई सवाल उठ रहे हैं।

उमा भारती ने दावा किया कि मध्यप्रदेश में चौथी बार शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनेगी। ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पहले ही सभी राजनीतिक दलों को छेड़छाड़ कर बताने की चुनौती दे चुका है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश और देश में घूमते समय उनके सामने एक बात आई है कि प्रदेश को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जरूरत है, इसलिए दोनों को दो-तीन बार और अपने पद पर रहना चाहिए।

--आईएएनएस

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 केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने रविवार को कहा कि झारखंड में स्वच्छता अभियान की वर्तमान दर के साथ राज्य 15 नवंबर तक खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो जाएगा। वह झारखंड के राजमहल में आयोजित 'गंगा ग्राम स्वच्छता सम्मेलन' में बोल रही थीं।

सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, " 'गंगा ग्राम' गंगा नदी के किनारों पर बसे गांवों को आदर्श गांवों में बदलने की एक अवधारणा है, जिसके अंतर्गत गांव को खुले में शौच से मुक्त करने के साथ साथ ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, भूजल संरक्षण, आधुनिक श्मशान, वृक्षारोपण, जैविक व औषधीय गुणों से युक्त पौधों को लगाने और कृषि जैसे मुख्य घटकों पर जोर दिया जाता है।"

इस संबंध में उमा भारती ने गंगा नदी के किनारों पर बसे गांवों को आदर्श गंगा ग्राम बनाने के लिए सार्वजनिक भागीदारी को एक महत्वपूर्ण कुंजी करार दिया।

उन्होंने कहा, "ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियों में भागीदारी करें, कहीं भी कूड़ा न फेंकें, जल स्रोतों को गंदा न करें और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन की देखभाल करें।"

पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरण अय्यर ने स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के सामाजिक और वित्तीय लाभ पर प्रकाश डाला और कहा कि पिछले चार वर्षों में ग्रामीण भारत में स्वच्छता कवरेज 39 प्रतिशत से बढ़कर 95 प्रतिशत हो गया है। 

यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ जैसे संगठनों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ओडीएफ गांवों में एक परिवार अपने चिकित्सा व्ययों से औसत 50,000 रुपये की सालाना बचत करता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन अक्टूबर 2019 तक लगभग तीन लाख लोगों के जीवन को बचाएगा।

उमा भारती ने राजमहल में मसकालिया श्मशान व घाट और नगरपालिका अपशिष्ट जल परियोजना की नींव भी रखी।

--आईएएनएस

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मध्‍य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के निजी सुरक्षा अधिकारी ने भोपाल में आत्महत्या कर ली है। ये हादसा बुधवार को देर रात हुआ। आत्महत्या का कारण पत्नी से विवाद बताया जा रहा है। इस संबंध में मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय के एसपी धर्मवीर यादव ने मीडिया को जानकारी दी। एसपी ने बताया कि मरने वाले सुरक्षा अधिकारी का नाम राममोहन दौनेरिया है।

एसपी के मुताबिक, बुधवार की रात करीब 12 बजे कमला नगर थाने में फोन आया था। फोन डायल 100 को किया गया था। ये फोन राममोहन की पत्नी ने किया था। उन्होंने फोन पर घरेलू हिंसा की शिकायत की। उनका आरोप था कि पति शराब पी​कर उन्हें पीट रहा है। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी पति राममोहन और उनकी पत्नी को साथ लेकर थाने आने लगी।

इसी बीच अचानक कोपल स्कूल के पास राममोहन ने कमर में छिपाकर लगाई गई अपनी सर्विस पिस्टल से खुद को गोली मार ली। इलाज के लिए राममोहन को तुरंत नजदीक स्थित हजेला अस्पताल ले जाया गया। जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। राममोहन वर्तमान में एसबी शाखा में तैनात थे। उनकी तैनाती पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के निजी सुरक्षा अधिकारी के तौर पर की गई थी। राममोहन सिर्फ 34 वर्ष के थे।

पुलिस ने बताया, राममोहन मूलत: भिंड जिले के बराई गांव के निवासी थे। उनकी शादी साल 2013 में अर्चना से हुई थी। उन दोनों का एक बेटा भी है। बीती रात राममोहन दौनेरिया शराब के नशे में थे। इस दौरान पति-पत्नी के बीच कहासुनी और मारपीट की बात सामने आ रही है। प्राथमिक जांच में आत्महत्या का कारण भी यही पाया गया है। गुरुवार को शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। पीएम रिपोर्ट अभी नहीं आई है। पुलिस ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की बात कही है।

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केंद्रीय मंत्री उमा भारती यहां लगभग एक दशक बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ किसी सरकारी कार्यक्रम में शनिवार को मंच साझा कर रही हैं, और इसी दौरान उनके द्वारा एक अधिकारी के पक्ष में लिखा गया पत्र लीक हो जाने से वह काफी नाराज हो उठी हैं। उन्होंने एक के बाद एक छह ट्वीट कर इस घटना पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। 

केंद्रीय पेयजल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती यहां राज्यस्तरीय स्वच्छता सम्मेलन में हिस्सा ले रही हैं। स्थानीय मीडिया में आज ही एक समाचार छपा है। यह समाचार उमा भारती द्वारा अपने पूर्व अतिरिक्त निजी सचिव (डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी) विनय निगम के संदर्भ में मुख्यमंत्री चौहान को 22 मार्च, 2018 लिए गए एक पत्र पर आधारित है। निगम का नाम आईएएस की पदोन्नति सूची में न भेजे जाने पर इस पत्र के जरिए उमा ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।

उमा भारती द्वारा लिखे गए पत्र की प्रति आईएएनएस के पास उपलब्ध है, जिसे उन्होंने गंगोत्री से 22 मार्च, 2018 को लिखा था। 

पत्र में कहा गया है, "वर्ष 1999 में भोपाल से लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद से ही विनय निगम मेरे साथ काम कर रहे हैं। भाजपा के अनुरोध और हमारी विचारधारा का होने और स्वच्छ छवि का युवा अधिकारी होने के कारण उन्हें अपना अतिरिक्त पीएस बनाया था। उसके बाद राज्य की राजनीति में आए बदलाव के चलते वर्ष 2005 में मुझे पार्टी से निकाल दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से निगम मेरे ओएसडी बने रहे।"

भारती ने अपने पत्र में लिखा है, "2005 के बाद उनके (निगम) खिलाफ झूठी मनगढ़ंत शिकायत लोकायुक्त के पास भेजने की तैयारी की गई। इसकी जब भनक लगी तब आपके (शिवराज) निजी सचिव इकबाल सिंह को बुलाया, उनसे चर्चा हुई, उसके बाद भी मामला लोकायुक्त को भेजा गया। तब मुझे गहरा आघात लगा था। दोबारा मंत्री बनने के बाद निगम फिर मेरे साथ काम करते रहे। आपसे (शिवराज) हुई चर्चा के बाद उन्हें राज्य सेवा में वापस भेजा, ताकि उन्हें सही समय पर आईएएस अवार्ड हो जाए और अड़चन न आए। उसके बाद जो डीपीसी हुई, उसमें निगम का नाम नहीं भेजा गया, जिसका मुझे अचंभा हुआ।"

इस पत्र के स्थानीय मीडिया में लीक हो जाने को उमा ने अपने खिलाफ साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा है कि यह सब उनके कार्यक्रम को खराब करने के लिए किया गया है। उमा ने इस मुद्दे पर एक बाद एक छह ट्वीट किए हैं।

उमा ने एक ट्वीट में कहा, "हमारे प्रधानमंत्री तथा केंद्र सरकार के इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम को खराब करने की कुचेष्टा के तहत मार्च के अंतिम सप्ताह में उत्तराखंड से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को लिखे गए मेरे एक पत्र को एक समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया है और एक टीवी चैनल में दिखाया जा रहा है।"

वह आगे लिखती हैं, "कमाल यह है कि पत्र लिखने का दिन और महीना खबर से गायब कर दिया गया है, और पत्र के अलग-अलग वाक्यों को जोड़कर एक समाचार बना दिया गया है। इससे पत्र के असली तथ्य ही गायब हो गए हैं और इस तथ्य पर तो अदालत ने भी अपनी राय दे दी है। इसलिए पत्र तथा उसका प्रसंग आज के संदर्भ में अपना अस्तित्व खो चुके हैं। किंतु, महत्वपूर्ण बात यह है कि आज का दिन इसके लिए क्यों चुना गया? यह हमारे केंद्र सरकार की छवि को खराब करने का प्रयास है तथा हमारे प्रधानमंत्री की महत्वपूर्ण उपलब्धि से ध्यान हटाने का प्रयास है।"

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, "कार्यक्रम की गरिमा एवं महत्व को कम करने के लिए किसी दूसरे संदर्भहीन हो गए विषय को उठाने के इस अनैतिक प्रयास की मैं निंदा करती हूं। मेरी मीडिया के सभी वगोर्ं से अपील है कि आज इस घोर अनैतिक चेष्टा की अनदेखी कीजिए। मैं कल भोपाल में हूं, इस विषय पर कल बात करूंगी।"

उमा ने जो पत्र लिखा था, उसमें मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारी एस. के. मिश्रा से हुई बातचीत का भी जिक्र है। इस पत्र के सामने आने के बाद सियासी गलियारे में चर्चा का दौर जारी है।

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केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की अत्यंत मुखर नेता के तौर पहचानी जाने वाली झांसी की सांसद साध्वी उमा भारती ने अब चुनाव न लड़ने का फैसला कर लिया है। उन्होंने यह बात रविवार को संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कही। क्षेत्रीय सांसद उमा भारती ने संवाददाताओं से अपनी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा, ‘‘अब मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, मगर पार्टी के लिए काम करती रहूंगी।’’ उन्होंने कहा कि वह दो बार सांसद रही हैं और पार्टी के लिए काफी काम किया है, उसी के चलते इतनी कम उम्र में उनका शरीर जवाब देने लगा है। कमर और घुटनों में दर्द के चलते चलने-फिरने में परेशानी होती है। पार्टी के लिए प्रचार करती रहेंगी।

राम मंदिर के सवाल पर उन्होंने कहा कि न्यायालय अपना फैसला सुना चुका है, लिहाजा आपसी सहमति से राम मंदिर का निर्माण हो जाना चाहिए। यहां बताना लाजिमी होगा कि उमा भारती खजुराहो, भोपाल के बाद झांसी से सांसद हैं। वे बड़ा मलेहरा और चरखारी से विधायक रह चुकी हैं। वे बुंदेलखंड की बड़ी प्रभावशाली नेता और पूरे देश में हिंदूवादी नेता के तौर पर अपनी पहचान रखती हैं।

 

उल्लेखनीय है कि उमा भारती को उच्च रक्तचाप की समस्या के कारण कुछ दिनों पहले अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान में भर्ती किया गया था। अस्पताल के अधिकारियों ने यह जानकारी दी थी कि भारती को अस्पताल के न्यू प्राइवेट वार्ड में दाखिल किया गया था। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया था “उमा भारती को उच्च रक्तचाप की समस्या के कारण भर्ती किया गया।” भारती इससे पहले साल 2016 और 2017 में सीने में दर्द और उच्च रक्तचाप की समस्या के कारण एम्स में भर्ती हुई थीं।

बता दें कि उमा भारती ने मध्य प्रदेश के छतरपुर में मोटे के महावीर मंदिर परिसर में कुछ दिनों पहले अपने संन्यास के 25 वर्ष पूरे होने पर दिल के कई राज खोले और कहा था कि आज की राजनीति में साजिश और चापलूसी का मेल है, जो उन्हें नहीं आती। महंत नृत्यगोपाल दास की मौजूदगी में उमा भारती ने कहा था कि उनके जीवन में नृत्यगोपाल दास की अहम भूमिका है। प्रवचन करने से लेकर संन्यास लेने तक महाराज का आशीर्वाद रहा है। उनके आशीर्वाद से ही वे आज उस मुकाम पर हैं, जिस पर पहुंचाना आसान नहीं है।

 

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आमतौर पर देखा जाता है कि राजनीति में अधिकतर राजनेता चाहते हैं कि समर्थक उनका सम्मान करें। उनके लिए जय-जयकारे के नारे लगाएं, सेल्फी लें, चरण स्पर्श करें। हालांकि केंद्रीय मंत्री उमा भारती के दफ्तर में जो नोटिस लगाए गए हैं वो आपको चौंका सकते हैं! दिल्ली के अकबर रोड पर स्थित भारती के निवास से जुड़े उनके दफ्तर में आधा दर्जन नोटिस लगाए गए हैं। इनमें एक नोटिस में विजिटर्स के स्वागत के साथ सख्त हिदायत दी गई है कि वह केंद्रीय मंत्री के लिए मिठाई ना लाएं। एक अन्य नोटिस में लिखा गया है कि मेहरबानी करके मंत्रियों के चरण स्पर्श ना करें। एक नोटिस में लिखा गया है कि शांति बनाए रखें शोर ना मचाएं। एक नोटिस में बताया गया है कि लोग मंत्री के साथ सेल्फी या फोटो ना खिंचवाएं।

बता दें कि मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं उमा भारती ने पिछले दिनों केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपना कद घटने पर सख्त नाराजगी जताई थी। उन्होंने अपने साथियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि आज की राजनीति चापलूसी और साजिश की हो गई है। उन्हें ना चापलूसी आती है और ना ही साजिश। इसलिए वह खुद साजिश की शिकार हो गईं। उज्जैन के एक कार्यक्रम में पहुंचीं भारती ने आगे कहा कि वह वर्तमान दौर की राजनीति में ‘मोगली’ हैं।

इस दौरान मंच संचालक ने जब साध्वी उमा भारती का परिचय प्रखर वक्ता के रूप में दिया, तो उमा ने मोगली का किस्सा सुना डाला। उन्होंने कहा, ‘मोगली नाम का बच्चा जंगल में पैदा हुआ था, जिसे भेड़िए उठा ले गए, बाद में वह मिल गया। मैं सोचती हूं कि अगर मोगली राजनीति में आ जाए तो वह क्या-क्या करेगा, वही कुछ मैं भी करती हूं।’

 

उमा भारती ने आगे कहा, ‘किसी के बारे में ऐसी चर्चा हो जाती है कि वह ऐसा है और यह बात आगे चलती रहती है, इसी तरह मेरे साथ हुआ। कहीं प्रवचन दिए तो लोगों ने प्रखर वक्ता कह दिया और आज भी वह कहा जा रहा है। वास्तव में मैं प्रखर वक्ता हूं नहीं।’

 

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