हैदराबाद: तेलंगाना में कांग्रेस की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा प्रकरण में पार्टी के एक अन्य विधायक ने सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल होने का निर्णय किया है। खम्माम जिले की पालेरू विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले के. उपेंद्र रेड्डी ने टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव से मुलाकात की और सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल होने की अपनी इच्छा से अवगत कराया।

उपेंद्र रेड्डी एक या दो दिनों में इस संबंध में घोषणा कर सकते हैं।

इससे एक दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी ने टीआरएस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से मुलाकात की थी।

ऐसा माना जा रहा है कि राज्य के विधायक सबिता ने अपने बेटे कार्तिक रेड्डी के साथ टीआरएस में शामिल होने का मन बना लिया है।

इस माह चार कांग्रेस विधायक टीआरएस में शमिल हो चुके हैं। अगर सबिता और उपेंद्र रेड्डी भी टीआरएस में शामिल हो जाते हैं तो 119 सदस्यीय विधानसभा में विपक्षी पार्टी की संख्या घटकर 13 रह जाएगी।

--आईएएनएस

 

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नई दिल्ली: तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), आंध्र प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस और ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) की 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजों के ऐलान के बाद केंद्र सरकार के गठन में खास भूमिका हो सकती है। यह नतीजा सीवोटर-आईएएनएस के एक सर्वेक्षण में उभरकर सामने आया है। इसके मुताबिक चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 264 सीटें मिल सकती हैं, जो कि केंद्र में सरकार बनाने के लिए बहुमत से आठ सीट कम है। दूसरी तरफ कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) को केवल 141 सीटें ही मिलने का अनुमान है।

सर्वेक्षण के मुताबिक, आंध्र में सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी को 14 सीटें मिलने का अनुमान है। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को 34 सीटों पर जीत मिल सकती है।

सीवोटर-आईएएनएस के सर्वेक्षण के मुताबिक, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, टीआरएस और बीजद को कुल मिलाकर 36 सीटें मिल सकती हैं। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को आंध्र में 11 संसदीय सीट पर जीत मिल सकती है। बीजद को ओडिशा में नौ सीटें मिल सकती हैं। तेलंगाना में टीआरएस की आंधी चल सकती है और वह राज्य की कुल 17 लोकसभा सीटों में से 16 पर जीत हासिल कर सकती है।

इन तीनों दलों ने भाजपानीत और कांग्रेसनीत, दोनों गठबंधनों से समान दूरी बनाकर रखी हुई है। ऐसे में इनकी केंद्र सरकार के गठन में बेहद खास भूमिका हो सकती है।

इनमें से किसी एक का भी समर्थन राजग को बहुमत दिलाने के लिए पर्याप्त होगा, अगर सर्वेक्षण जैसी ही स्थिति रही तो। गैर भाजपा-गैर कांग्रेस दलों के अनौपचारिक तीसरे मोर्चे की भूमिका कुल मिलाकर खासा महत्वपूर्ण हो सकती है।

जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक, राजग में शामिल जनता दल (युनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को बिहार में 20 सीटें मिल सकती हैं, जबकि महाराष्ट्र में शिवसेना को 14 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत मिल सकती है।

--आईएएनएस

 

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हैदराबाद: तेलंगाना में विपक्षी कांग्रेस को एक और झटका लगा है, जब पार्टी विधायक बी. हरिप्रिया ने घोषणा की कि वह सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति टीआरएस में शामिल होंगी। इस महीने टीआरएस में शामिल होने वाली वह कांग्रेस की चौथी विधायक हैं।

हरिप्रिया भद्राद्रि कोठागुडम जिले की येल्लांडु सीट से विधायक हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास के लिए टीआरएस में शामिल होने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह विधानसभा से इस्तीफा देंगी और टीआरएस के टिकट पर फिर से चुनाव लड़ेंगी।

इसके पहले रेगा कांता राव और अत्राम सक्कू दो मार्च को टीआरएस में शामिल हो गए थे। दोनों विधायक जनजातीय समुदाय से हैं।

हरिप्रिया के पार्टी छोड़ने के बाद 119 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस विधायकों की संख्या 15 रह जाएगी।

हरिप्रिया का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता सबिता इंदिरा रेड्डी ने रविवार को टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव से मुलाकात की।

यह मुलाकात मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के आवास पर हुई।

अविभाजित आंध्र प्रदेश में वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की कैबिनेट में गृहमंत्री का पदभार संभाल चुकीं सबिता रेड्डी ने शर्त रखी है कि या तो उन्हें या उनके बेटे पी. कार्तिक रेड्डी को चेवेल्ला लोकसभा सीट से उतारा जाए।

मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव उनकी मांग पर अंतिम फैसला लेंगे।

--आईएएनएस

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हैदराबाद: तेलंगाना में कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि पार्टी की वरिष्ठ नेता और विधायक सबिता इंद्र रेड्डी सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल हो सकती हैं। हैदराबाद के समीप रंगा रेड्डी जिले की प्रमुख नेता सबिता और टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव के बीच रविवार को एक बैठक हुई। यह बैठक मजलिस-ए -इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के आवास पर हुई।

अविभाजित आंध्र प्रदेश में वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की कैबिनेट में गृहमंत्री का पदभार संभाल चुकीं सबिता रेड्डी ने शर्त रखी है कि या तो उन्हें या उनके बेटे पी. कार्तिक रेड्डी को चेवेल्ला लोकसभा सीट से उतारा जाए।

मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव उनकी मांग पर अंतिम फैसला लेंगे।

रेड्डी सात दिसंबर को हुए विधानसभा चुनाव में महेश्वरम विधानसभा सीट से निर्वाचित हुई थीं। हालांकि उनके बेटे ने राजेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र से टिकट नहीं मिलने के बाद चुनाव की पूर्व संध्या पर कांग्रेस छोड़ दी थी। कांग्रेस ने यह सीट अपनी सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) को दे दी थी।

पिछले सप्ताह कांग्रेस को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब उसके तीन विधायक टीआरएस में शामिल हो गए। विपक्षी पार्टी के सदस्यों की संख्या 119 सदस्यीय विधानसभा में अब 16 रह गई है।

--आईएएनएस

 

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हैदराबाद: दिसंबर 2018 विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत को पीछे छोड़ते हुए तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार में तेजी लाकर अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे है।

मुख्य राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव बीते चार दिनों में संसदीय क्षेत्रों में सिलसिलेवार तैयारी बैठकों को संबोधित कर एक कदम आगे बढ़ा चुके हैं।

केटीआर नाम से प्रसिद्ध राव ने सात निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं की बैठकों को संबोधित किया। प्रत्येक क्षेत्र में उन्होंने 15 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और पार्टी नेताओं के साथ चुनावी रणनीति पर चर्चा के लिए कुछ जगह पर रात में रुके भी।

अपने पिता और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव द्वारा जिम्मेदारियां दिए जाने पर केटीआर 17 में से 16 लोकसभा सीटों के अपने लक्ष्य को हासिल करने को लेकर निश्चित नजर आ रहे हैं। टीआरएस ने हैदराबाद सीट अपने सहयोगी मजलिस-ए -इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) को दी है।

प्रत्येक बैठक में केटीआर कह रहे हैं कि तेलंगाना और टीआरएस के लिए 16 सीटों का क्या मतलब होगा। उन्होंने अनुमान लगाया कि राजग और कांग्रेस दोनों ही केंद्र में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होंगी, इसलिए उन्होंने लोगों से सभी टीआरएस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि पार्टी केंद्र में अगली सरकार के गठन में अहम भूमिका मिभा सके।

केटीआर आश्वस्त हैं कि चंद्रशेखर राव तय करेंगे कि अगला प्रधानमंत्री कौन होगा, क्योंकि वह टीआरएस व अन्य क्षेत्रीय दलों वाले संघीय मोर्चे के नेता हैं। वह वादा कर रहे हैं कि मोर्चा राष्ट्रीय राजनीति में गुणात्मक परिवर्तन लाएगा, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने वादे पूरे करने में विफल रही हैं।

अपनी कल्याणकारी और विकास परियोजनाओं के साथ पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभरे तेलंगाना का जिक्र करते हुए केटीआर ने उम्मीद जताई कि समान योजनाएं देश भर में लागू की जाएंगी।

केटीआर लोगों को बता रहे हैं कि अगर टीआरएस दिल्ली में शासन करने की स्थिति में हुई तो राज्य के लिए वह कैसे फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने कहा, "राज्य को जरूरी फंड और परियोजनाएं मिलेंगी।"

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अभी तक एक-एक जनसभा को संबोधित किया है।

विधानसभा चुनाव में भाजपा को मात्र एक सीट मिली थी, जबकि कांग्रेस ने 18 सीटों पर कब्जा जमाया था। हालांकि पिछले सप्ताह उसके तीन विधायक सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए हैं।

दोनों राष्ट्रीय दल हालांकि उम्मीद कर रहे हैं कि लोकसभा के नतीजे अलग होंगे, क्योंकि यह चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ा जाएगा।

--आईएएनएस

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हैदराबाद: तेलंगाना में तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) को झटका देते हुए तेदेपा के एक विधायक ने रविवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) में शामिल होने का फैसला किया है। तेलंगाना में तेदेपा के दो विधायक है।

सानद्रा वेंकट वीरैया ने कहा कि वह टीआरएस सरकार द्वारा किए गए विकास व कल्याण कार्यक्रमों से प्रभावित हैं और इसलिए सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है।

वीरैया, खम्मम जिले के सथुपल्ली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

वीरैया ने कहा कि यह फैसला उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की मर्जी व जिले के विकास के हित में लिया।

राज्य विभानसभा के 7 दिसंबर को हुए चुनावों में सथुपल्ली से लगातार तीसरी बार विजयी रहे वीरैया ने मुख्यमंत्री व टीआरएस अध्यक्ष के.चंद्रशेखर राव से शनिवार को मुलाकात की।

तेदेपा ने राज्य विधानसभा की 119 सीटों में सिर्फ दो सीटें जीती थीं। यह दोनों सीटें खम्मम जिले में है।

कांग्रेस के दो विधायकों के पार्टी छोड़ने व टीआरएस में शामिल होने के फैसले के एक दिन बाद वीरैया का निर्णय सामने आया है।

कांग्रेस के दोनों जनजतीय विधायकों रेगा कांता राव व अथराम सक्कू ने घोषणा की कि यदि जरूरी हुआ तो विधानसभा से इस्तीफा देंगे और अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों से फिर चुनाव में उतरेंगे।

--आईएएनएस

हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने 14 फरवरी को पुलवामा हमले में शहीद हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 जवानों के परिजनों को शुक्रवार को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया। उन्होंने पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) आतंकवादी संगठन द्वारा किए गए आतंकी हमले की निंदा करने के लिए राज्य विधानसभा में एक प्रस्ताव को पेश करते हुए यह घोषणा की।

सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को पारित कर दिया। इस दौरान सदन ने दो मिनट का मौन भी रखा।

बजट सत्र के लिए सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पेश किया और हमले को 'अमानवीय' और 'बर्बर' करार दिया।

उन्होंने कहा, "यह राष्ट्र पर हमला था।" और फिर शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

नेता प्रतिपक्ष मल्लू भट्टी विक्रमारका ने कहा कि पीड़ितों के परिवारों के साथ पूरा देश एकजुट है।

मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के विधायक अहमद बालाला और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राजा सिंह ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया और हमले की निंदा की।

--आईएएनएस

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हैदराबाद: तेलंगाना में ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) चुनाव में मिली करारी हार के बाद तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) को मंगलवार को एक और झटका लगा। पार्टी के एक और विधायक ने उसका साथ छोड़कर सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) का दामन थाम लिया है।

ग्रेटर हैदराबाद में कुथबुलपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले के.पी. विवेकानंद ने मुख्यमंत्री व टीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव से मुलाकात की और टीआरएस में शामिल हो गए।

विधायक विवेकानंद ने कहा कि उन्होंने टीआरएस में जाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उन्हें लगता है कि केवल यही पार्टी राज्य का विकास कर सकती है।

पिछले सप्ताह हुए जीएचएमसी चुनाव में 150 सदस्यीय जीएचएमसी में तेदेपा को केवल एक सीटी मिली थी, जबकि इसकी गठबंधन साझेदार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चार सीटें मिली थीं।

तेदेपा को यह झटका उस समय लगा है, जब वह 13 फरवरी को होने जा रहे नारायणखेड़ निर्वाचन क्षेत्र से राज्य विधानसभा उपचुनाव की तैयारी कर रही है। 

पिछले डेढ़ साल में कांग्रेस और तेदेपा के 12 से ज्यादा विधायक टीआरएस में शामिल हो चुके हैं।

इसी बीच, जीएचएमसी में एकमात्र तेदेपा पार्षद श्रीनिवास राव मंगलवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले हैं। उनके भी टीआरएस में शामिल होने की संभावना है।

पिछले सप्ताह हुए जीएचएमसी चुनाव में सत्तारूढ़ टीआरएस ने 99 सीटें जीती थीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। 

 

हैदराबाद: सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने वारंगल लोकसभा सीट पर अपना कब्जा मंगलवार को बरकरार रखा। पार्टी ने इस सीट पर रिकॉर्ड 4.59 लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। एक तरफा मुकाबले में टीआरएस के पासुनुरी दयाकर को कुल 6,15,403 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के सार्वे सत्यनारायण को 1,56,315 मत मिले। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पी.देवैया को 1,30,178 मत मिले।

टीआरएस उम्मीदवार मंगलवार सुबह उपचुनाव की शुरू हुई मतगणना के शुरुआती चरणों में ही बढ़त बनाए हुए थे। सभी 22 दौर की गिनती के बाद अंतर 4.59 लाख से ऊपर पहुंच गया।

राज्य भर में टीआरएस खेमे में जश्न मनाया जा रहा है। पार्टी के मुख्यालय, तेलांगाना भवन में सभी कार्यकर्ता पटाखे फोड़ रहे हैं और जश्न मना रहे हैं।

मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव के बेटे के.टी. रामाराव ने ट्वीट किया, "वारंगल को बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने हमें अधिक और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित किया।"

मुख्यमंत्री की बेटी व सांसद के.कविता ने कहा कि इस विशाल जीत के साथ उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

चुनाव में कुल 23 उम्मीदवार मैदान में थे। कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एस. सत्यनारायण को चुनाव मैदान में उतारा था।

शनिवार को हुए उपचुनाव में 15 लाख में से करीब 69 फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया। श्रीहरि को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद यह सीट खाली थी, जिसके कारण यहां उपचुनाव जरूरी हो गया था।

साल 2014 के चुनाव में श्रीहरि ने 3,92,513 लाख मतों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव को दोबारा तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) का फिर से निर्विरोध अध्यक्ष चुन लिया गया। यहां शुक्रवार को टीआरएस के सम्मेलन में हजारों पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में एकमत से उनके चुनाव की घोषणा की गई।

गृहमंत्री और निर्वाचन अधिकारी एन.नरसिम्हा रेड्डी ने ऐलान किया कि पद के लिए सिर्फ एक नामांकन प्राप्त हुआ था।

टीआरएस नेताओं ने कीसीआर की तरफ से छह नामांकन पत्र भरे थे।

केसीआर (61) को लगातार आठवीं बार पार्टी प्रमुख बनाया गया है। पिछले साल जून में अलग तेलंगाना राज्य बनने के बाद वह पहली बार अध्यक्ष बने हैं।

केसीआर ने 27 अप्रैल, 2001 को तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के उद्देश्य के साथ टीआरएस की स्थापना की थी। वह पार्टी की स्थापना से ही इसका नेतृत्व कर रहे हैं।

उन्होंने 2009 में अनिश्चितकालीन उपवास के साथ इस अभियान में मुख्य भूमिका निभाई और उस समय संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को तेलंगाना को पृथक राज्य बनाने की मांग स्वीकार करने पर मजबूर किया था।

हालांकि, तेलंगाना को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया 2013 में ही शुरू हो गई थी, लेकिन पिछले साल आंध्र प्रदेश का औपचारिक रूप से विभाजन किया गया। इस तरह देश के 29वें राज्य के रूप में तेलंगाना अस्तित्व में आया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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