नई दिल्ली: कैशबैकधोखाधड़ी की घटनाओं से परेशान ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पेटीएम मॉल ने तकनीक-केंद्रित धोखाधड़ी रोकथाम प्रणाली के निर्माण लिए वैश्विक पेशेवर सेवा कंपनी ईवाई के साथ साझेदारी की घोषणा की है।

कंपनी ने सोमवार को अपने बयान में कहा, "यह कदम सांठगांठ की पहचान करने और इसे रोकने के मद्देनजर लगातार जांच करने व वैश्विक कार्यप्रणाली की प्रवीणता को लागू करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि कंपनी को अपने कार्य का प्रसार अलग-अलग क्षेत्रों में करना है और मर्चेट ऑन-बॉर्डिग और मार्केटिंग के लिए प्रक्रिया को मजबूत करना है।"

टाइम्स ऑफ इंडिया में सूत्रों के हवाले से रविवार को दावा किया गया था कि पेटीएम मॉल के कुछ कर्मचारियों की थर्ड-पार्टी वेंडरों से सांठगांठ है, जिससे वह फर्जी आर्डर पैदा करते हैं और इस सहायता के बदले घूस पाते हैं।

अलीबाबा समर्थित पेटीएम मॉल ने हालांकि अपने बयान में सीधे इस रिपोर्ट के बारे में नहीं कहा है।

पेटीएम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीनिवास मोथे ने कहा, "हमारी ईवाई के साथ साझेदारी से विश्व के श्रेष्ठ कार्यप्रणाली के साथ मानदंड स्थापित करने में मदद मिलेगा, क्योंकि हम अपने कार्य को जांचने के लिए 'तकनीक केंद्रित धोखाधड़ी रोकथाम प्रणाली' का निर्माण कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "हमारी टीम लगातार ईवाई के साथ हमारे ज्ञान और सूचना को साझा करेगी। हम एक विश्वसनीय वाणिज्य मंच बनाने और जरूरत के अनुसार कड़े कदम को उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

कंपनी ने कहा कि वह फर्जी कारोबारियों को हटाना और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाने के लिए प्रयासरत है।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: फेसबुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मार्क जुकरबर्ग ने 24 अप्रैल को यह घोषणा की थी कि कंपनी भारत में व्हाट्सएप पे को लांच करने के लिए प्रयासरत है, तब देश में डिजिटल पेमेंट्स कंपनियों को यह स्पष्ट संदेश मिल गया था कि उन्हें अपनी जमीन संभालने की जरूरत है।

साल 2023 में लगभग 1000 अरब डॉलर के अनुमानित व्यापार वाले देश के डिजिटल पेमेंट उद्योग में इस साल क्रांतिकारी बदलाव आएगा जब वैश्विक कंपनियां भारत में मौजूदा कंपनियों को चुनौती देंगी। भारत में इस उद्योग में फिलहाल अलीबाबा के सहयोग वाली पेटीएम का राज है।

एमेजन ने हाल ही में पियर-टू-पियर (पीटूपी) ट्रांजेक्शन बाजार में अपने एंड्रोएड ग्राहकों के लिए एमेजन पे यूपीआई लांच किया है।

गूगल पे ने भी 4.5 करोड़ यूजर्स के साथ अपनी उपस्थिति मजबूती से पेश की है। गूगल पे पर मार्च में 81 अरब डॉलर का लेन-देन दर्ज किया गया।

एप्पल पे भी आएगा और भारत में आईफोन की कीमतें कम करने के साथ 39 करोड़ वैश्विक पेड उपभोक्ताओं वाली यह सेवा 10 अरब उपभोक्ताओं के लक्ष्य के मार्ग पर है।

व्हाट्सएप पे हालांकि वास्तविक क्रांतिकारी साबित होने वाला है, इसके पीछे एक सामान्य कारण है कि इसके पास भारतीय डिजिटल पेमेंट्स मार्केट में शीर्ष पर आने की क्षमता है।

व्हाट्सएप के भारत में वर्तमान में 30 करोड़ यूजर्स हैं (फेसबुक पर भारत में 30 करोड़ अन्य यूजर्स) और इसके पीटूपी यूपीआई आधारित भुगतान सेवा शुरू करते ही यह 23 करोड़ यूजर्स वाले पेटीएम से आगे निकल जाएगा।

सीएमआर के इंडस्ट्री इंटेलीजेंस ग्रुप (आईआईजी) के प्रमुख प्रभु राम ने आईएएनएस से कहा, "भारतीयों को व्हाट्सएप से प्यार है और वे इसके माध्यम से होने वाले लेन-देन की सेवा को भी पसंद करेंगे। मैं अंदाजा लगा रहा हूं कि उद्यमी और छोटे तथा मध्यम उद्योग व्हाट्सएप पे अपनाएंगे और इसका उपयोग करेंगे।"

राम ने कहा, "इससे उनकी साख बढ़ेगी। बदले में, इस चलन से उन्हें बैंक जैसे आम संसाधनों से ऋण लेने में आसानी होगी।"

पेटीएम के संस्थापक और सीईओ विजय शेखर शर्मा यह जानते हैं कि भविष्य में उनका सामना भयंकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा से होगा।

शर्मा ने पिछले साल ट्विटर के माध्यम से व्हाट्सएप की मूल कंपनी फेसबुक पर हमला शुरू किया था।

शर्मा ने ट्वीट किया था, "मूल फीचर्स को निशुल्क देकर भारत के खुले इंटरनेट बाजार को जीतने में असफल रहने के बाद फेसबुक दोबारा लड़ाई में है।"

व्हाट्सएप के अनुसार, लगभग 10 लाख लोगों ने रुपयों के लेन-देन के लिए व्हाट्सएप पे का परीक्षण किया है।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: महज दो साल पहले ही पेटीएम के संस्थापक व सीईओ विजय शेखर शर्मा ने भारत में पैर पसार रहे ई-कॉमर्स के क्षेत्र में अपनी पारी की शुरुआत की थी।

वह चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के मॉडल से प्रेरित थे, हालांकि इस क्षेत्र में अमेजन और फ्लिपकार्ट (अब वालमार्ट के स्वामित्व में) का पहले से ही दबदबा बना हुआ था।

शर्मा के मन में इस बात का थोड़ा मलाल जरूर रहा कि उनको हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने का मौका नहीं मिला। उन्होंने ई-कॉमर्स कारोबार को पेटीएम मॉल के नाम से एक अलग अस्तित्व प्रदान किया।

वह इस बात से आश्वस्त थे कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वालों की बढ़ती आबादी का उनको फायदा मिलेगा। नई कंपनी की शुरुआत मूल कंपनी पेटीएम-वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड की ही हिस्सेदारी से हुई और कंपनी ने सैफ पार्टनर्स व जैक मा की कंपनी अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड से 20 करोड़ डॉलर की रकम जुटाई।

पेटीएम मॉल ने अलीबाबा, सॉफ्टबैंक और सैफ पार्टनर्स से 65 करोड़ डॉलर की रकम जुटाई।

ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन बाजार की पुरोधा कंपनी अलीबाबा को जल्द ही मालूम हो गया कि ग्राहकों को लुभाने के लिए कैशबैक एक अल्पकालीन रणनीति है और इससे शर्मा को पेटीएम मॉल को भारत के उभरते ई-कॉमर्स बाजार में तीसरी बड़ी ताकत बनने में मदद नहीं मिलने वाली है। भारत का ई-कॉमर्स बाजार जो 2017 में 24 अरब डॉलर का था वह 2021 में 84 अरब डॉलर का बनने वाला है।

वित्त वर्ष 2018 में पेटीएम मॉल का घाटा बढ़ गया और कंपनी को करीब 1,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

फोरेस्टर रिसर्च के अनुसार, पेटीएम की बाजार हिस्सेदारी 2018 में पिछले साल से घटकर करीब आधी रह गई। मतलब 2017 में जहां कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 5.6 फीसदी थी वह 2018 में घटकर तीन फीसदी रह गई।

हालांकि शर्मा फिर भी आशावादी हैं और भारी स्पर्धा के बावजूद पेटीएम मॉल चलाना चाहते हैं जबकि विश्लेषक इसे आखिरी दौर में देख रहे हैं और उनका मानना है कि शर्मा को अब डिजिटल भुगतान बाजार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिस पर अलीबाबा का हमेशा जोर रहा है।

इस संबंध में पेटीएम से संपर्क करने की कई बार कोशिश की गई। ईमेल और फोन के अलावा वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड के नोएडा सेक्टर-5 स्थित दफ्तर का व्यक्तिगत तौर पर दौरा करने के बाद भी कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

साइबर मीडिया रिसर्च के प्रमुख व सीनियर वाइस प्रेसिडेंट थॉमस जॉर्ज के अनुसार, पेटीएम के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं।

जॉर्ज ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "बाजार हिस्सेदारी के मामले में ई-कॉमर्स क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों के मुकाबले पेटीएम काफी पीछे है। इस क्षेत्र की शीर्ष कंपनियों की हिस्सेदारी जहां 30 फीसदी से ऊपर है वहां पेटीएम की हिस्सेदारी एकल अंक में है। साथ ही, बाजार की अग्रणी कंपनियों के सेवा मानक भी काफी प्रशंसनीय हैं।"

वहीं, पेटीएम वस्तुओं का स्टॉक करने व डिलीवरी करने में निवेश नहीं कर रही है।

जॉर्ज ने कहा, "पेटीएम मॉल का मुख्य काम पेमेंट वालेट कस्टमर बेस है, जिसमें अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है।"

पेटीएम पेमेंट बैंक का नजरिया भी जांच के घेरे में है।

--आईएएनएस

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दिल्ली: डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम ने गुरुवार को सीआरपीएफ वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष मनु भटनागर को 47 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। यह पैसा सीआरपीएफ ब्रेवहार्ट्स के लिए प्राप्त योगदानों से एकत्रित किया गया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि 14 फरवरी को सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले के बाद पेटीएम ने धन एकत्रित करने की यह मुहिम शुरू की। 15 फरवरी से लेकर 10 मार्च तक 20 लाख से ज्यादा पेटीएम प्रयोक्ता आगे आए और उन्होंने रक्षा बलों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए योगदान किया।

धन एकत्रित करने के लिए पेटीएम ने सीआरपीएफ वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन के साथ सहयोग किया और अपने उपभोक्ताओं को सुविधा दी कि वे पेटीएम मोबाइल एप और वेबसाइट के जरिए योगदान दें जिसे सीडब्ल्यूए के धनकोष में जमा कराया जा सके। 80जी के तहत कर लाभ लेने के लिए पेटीएम उपभोक्ताओं को सिर्फ अपना नाम और पैन कार्ड नंबर दर्ज करना था। एप के जरिए किया गया सारा दान ट्रांजैक्शन फीस से मुक्त था।

पेटीएम के सीओओ किरन वासीरेड्डी ने कहा, "इस हमले में शहीद हुए जवानों और उनके परिवारों के साथ हमारी प्रार्थनाएं हैं।"

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: पेटीएम का एंड्रायड एप अब 11 भाषाओं को सपोर्ट करता है, जिसमें प्रमुख भारतीय भाषाएं और अंग्रेजी शामिल है। ब्रांड का स्वामित्व रखने वाली कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लि. ने बुधवार को यह घोषणा की। कंपनी ने एक बयान में कहा कि इस कदम के साथ ही पेटीएम ने अपनी भाषाई पहुंच का विस्तार किया है और भारत की पहली ऐसी डिजिटल पेमेंट कंपनी बन गई है जो अपने एप पर सबसे ज्यादा भाषाओं का विकल्प दे रही है।

कंपनी का कहना है कि अपने पांच वर्षों के परिचालन में पेटीएम करीब 88 प्रतिशत भारतीय गांवों तक पहुंच चुकी है और इसके 60 प्रतिशत से ज्यादा उपभोक्ता छोटे और मझोले शहरों से हैं। 11 भाषाओं के इस नए जुड़ाव से, पसंदीदा डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर पेटीएम की स्थिति और ज्यादा पुख्ता होगी।

कंपनी ने बताया कि पेटीएम के 35 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ता अपनी प्रादेशिक भाषा में एप को इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। पेटीएम पर अंग्रेजी के बाद हिंदी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है, इसके बाद गुजराती, तेलुगू, मराठी, बांग्ला, तमिल व कन्नड़ भाषाओं का नंबर आता है।

पेटीएम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक एबॉट ने कहा, "आज करोड़ों भारतीय अपनी रोजाना की जरूरतों के लिए पेटीएम का उपयोग कर रहे हैं और इसे अपनाने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हम लोगों को पहले से ज्यादा भाषाई विकल्प दे रहे हैं और ग्राहकों के लिए सुविधा में बढ़ोतरी कर रहे हैं। अपने एप पर सभी भारतीय भाषाओं को उपलब्ध कराने के लिए हमने कड़ी मेहनत की है, हमने हर चीज को शब्दश: अनुवादित नहीं किया है बल्कि सही संदर्भ को प्रस्तुत किया है जिसकी उपभोक्ताओं ने बहुत सराहना की है।"

--आईएएनएस

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ऑनलाइन प्लेटफार्म पेटीएम मनी ने बुधवार को घोषणा की कि निवेशक अब पेटीएम मनी एप के जरिए अपने सभी म्यूचुअल फंड निवेशों के प्रदर्शन पर निगाह रख सकते हैं, और यह सुविधा निशुल्क प्रदान की जा रही है। निवेशकों को अपनी कंसॉलिडेटिड अकाउंट स्टेटमेंट (जो कार्वी फिनटैक से हासिल होगी) को पेटीएम मनी पर अपलोड करके कुछ ही मिनटों में पेटीएम मनी ऐप के जरिए अपने निवेश पोर्टफोलियो का प्रदर्शन देख पाएंगे। कंपनी ने एक बयान में कहा कि भारतीय म्यूचुअल फंड निवेशक एएमसीए बैंक, सलाहकार और वितरक के जरिए निवेश करते आ रहे हैं लेकिन उन्हें यह सुविधा नहीं मिल पाती की वे एक ही जगह पर अपने निवेश का प्रदर्शन देख पाएं। इस चुनौती का समाधान अब पेटीएम मनी लेकर आया है जिसके जरिए अब 1.80 करोड़ से अधिक मौजूदा म्यूचुअल फंड निवेशक रोजाना एक ही जगह पर अपने निवेश पोर्टफोलियो के प्रदर्शन की निगरानी कर सकेंगे चाहे उन्होंने किसी भी माध्यम से निवेश किया हो।

पेटीएम मनी के पूर्ण कालिक निदेशक प्रवीण जाधव ने कहा, "हमें पेटीएम मनी प्रयोक्ताओं से बहुत से आग्रह और फीडबैक प्राप्त हुए की उनके बाहरी निवेश को हमारे प्लैटफार्म पर लाया जाए। इससे निवेशक एक ही जगह पर अपने सभी निवेशों पर निगाह रख सकेंगे और इससे उन्हें निवेश संबंधी फैसले लेने में भी मदद मिलेगी। अपनी इन्वैस्टर फस्र्ट फिलोसॉफी के मुताबिक यह सुविधा पेश करने की हमें बेहद खुशी है।"

कंपनी ने कहा कि पेटीएम मनी तेजी से अपने उत्पाद और प्रौद्योगिकी में नयापन ला रहा है ताकि म्यूचुअल फंड निवेश का अनुभव बेहतर और आसान बने। कंपनी ने 34 असैट मैनेजमेंट कंपनियों के साथ गठबंधन करके म्यूचुअल फंड उद्योग के 94 प्रतिशत से अधिक एयूएम को कवर कर लिया है।

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अलीबाबा और सॉफ्टबैंक द्वारा समर्थित पेटीएम ने शुक्रवार को कहा कि उसके प्लेटफार्म पर यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेन-देन में पिछले छह महीनों में 600 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। पेटीएम ब्रांड का स्वामित्व रखनेवाली कंपनी वन97 कम्यूनिकेशंस लि. ने कहा कि अक्टूबर में उसके प्लेटफार्म पर 17.9 करोड़ यूपीआई लेन-देन दर्ज किए गए।

पेटीएम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक एबोट ने कहा, "पेटीएम भीम यूपीआई का व्यापक रूप से इस्तेमाल बढ़ना उत्साहजनक है। इसका इस्तेमाल विभिन्न सेवाओं के लिए किया जाता है, जिसमें मोबाइल रिचार्ज, बिजली और पानी बिल का भुगतान, मेट्रो रिचार्ज और ऑफ लाइन स्टोर्स पर इस्तेमाल शामिल है।"

पेटीएम ने सितंबर में 13.7 करोड़ यूपीआई लेन-देन दर्ज किया था, यूपीआई लेन-देन में पेटीएम अग्रणी है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी 33 फीसदी है। 

कंपनी ने कहा कि उसके प्लेटफार्म पर किए जाने वाले आधे से ज्यादा लेनदेन पेटीएम यूपीआई के माध्यम से किए जाते हैं।

वहीं, ऑफलाइन दुकानों में किए जानेवाले यूपीआई लेन-देन में पेटीएम की बाजार हिस्सेदारी 80 फीसदी से अधिक है।

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डिजिटल पेमेंट की सुविधा मुहैया कराने वाली अग्रणी कंपनी, पेटीएम ने केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एक सप्ताह के अंदर अपने 12 लाख उपभोक्ताओं से 30 करोड़ रुपये इकट्ठा किए। कंपनी ने बुधवार को यह जानकारी दी। पेटीएम के प्रमोटर वन97 कम्यूनिकेशन ने यहां एक बयान में कहा, "हमने मंगलवार तक पूरे देश से 30 करोड़ रुपये प्राप्त किए, एक सप्ताह पहले 15 अगस्त को इसके लिए लोगों से योगदान देने की अपील की गई थी।"

राहत कोष के लिए दी गई सहायता पूरी तरह कर मुक्त है। लोग 'केरल मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष' में इसके एप या वेबसाइट के जरिए सहयोग कर सकते हैं।

राहत कोष के लिए योगदान पेटीएम एप या वेबसाइट के जरिए किया जा सकता है।

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भारतीय स्वामित्व वाली, नियंत्रित और घरेलू कंपनी होने का दावा करते हुए प्रमुख भुगतान कंपनी पेटीएम ने गुरुवार को कहा कि वह अपने उपभोक्ताओं की जानकारी किसी संस्था या इकाई को नहीं देती है और ना ही किसी विदेशी इकाई को इसका उपयोग करने की अनुमति देती है। चीनी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा द्वारा पेटीएम की बड़ी हिस्सेदारी लेने के बाद पेटीएम बुधवार को राज्यसभा में मनोनीत सांसद नरेंद्र जाधव द्वारा जताई गई राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे की आशंका जताने पर जवाब दे रही थी। पेटीएम ने कहा कि उसने इसके जवाब में एक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है।

कंपनी ने कहा, "उपभोक्ताओं की जानकारी से संबंधित अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए आज पेटीएम की स्वामित्व वाली कंपनी वन97 कम्यूनिकेशन लिमिटेड ने गुरुवार जोर दिया कि कंपनी अपने किसी भी उपभोक्ता की जानकारी कभी किसी तीसरी एजेंसियों, हितधारकों, निवेशकों या किसी विदेशी कंपनी को नहीं देती है।

कंपनी के अनुसार, "पेटीएम अपने उपभोक्ताओं की जानकारी सुरक्षित रखने के लिए एक कदम आगे चलते हुए उनकी सारी जानकारी भारत में स्थित सर्वरों में संरक्षित करती है। कंपनी उपभोक्ता की निजता और सुरक्षा का सम्मान करती है।"

पेटीएम ने कहा कि वह भारतीय स्वामित्व वाली, भारत में नियंत्रित और घरेलू कंपनी है। कंपनी के अनुसार वह उसके किसी निवेशक या किसी विदेशी इकाई को उपभोक्ताओं की जानकारी नहीं देती है।

बयान के अनुसार, "हमारे उपभोक्ताओं की पूरी जानकारी का उपयोग और संरक्षण भारत में ही होता है और इसकी कोई जानकारी किसी विदेशी इकाई को नहीं दी जाती है। उपभोक्ताओं की निजी जानकारी की संप्रभुता के मामले में यह पूर्ण रूप से भारतीय स्वामित्व वाली और भारतीय उपभोक्ताओं वाली कंपनी है।"

--आईएएनएस

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भारतीय ई-कॉर्मस पेमेंट सिस्टम और डिजिटल वॉलेट कंपनी पेटीएम की कैशबैक स्कीम में करोड़ों रुपए के वारे-न्यारे हुए। बुधवार (18 जुलाई) को इससे जुड़ा खुलासा हुआ उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने किया। एसटीएफ ने इस संबंध में चार लोगों की गिरफ्तारियां भी की हैं। आरोपियों में पेटीएम कंपनी के कर्मचारी भी शामिल हैं।

दिखाए फर्जी ट्रांजैक्शंसः आरोप है कि ये चारों लोग डिजिटल रूप से करोड़ों रुपए के फर्जी लेन-देन दिखाकर उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले 10 फीसदी कैशबैक में बड़े स्तर पर घोटाला कर रहे थे। यूपी एसटीएफ ने इस मामले को लेकर जारी की गई विज्ञप्ति में कहा कि लखनऊ के महानगर और विकासनगर स्थित वैल्यू प्लस स्टोर के शोरूम में धांधली की जा रही थी। जानकारी पर कार्रवाई के रूप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इन धाराओं में मामला दर्जः आरोपियों की पहचान विनोद कुमार, विक्की अस्थाना, मोहम्मद फिरोज और अखिलेश कुमार के रूप में की गई है। इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 471 व सूचना प्रौद्योगिकी की धारा 66सी और 66डी के अंतर्गत साइबर अपराध थाना लखनऊ में मामला दर्ज कराया गया है।

पहले भी हुई थी धांधलीः साल 2016 में भी पेटीएम में धोखाधड़ी से जुड़ा मामला सामने आया था, तब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पास उसकी शिकायत हुई थी। कंपनी का कहना था कि बीते दिनों तकरीबन 26 मामले सामने आए, जिनमें कंपनी के दस्तावेजों संग छेड़खानी की गई थी। वरिष्ठ अधिकारियों ने उस मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की थी। जांच रिपोर्ट उसके कुछ दिन बाद सीबीआई के हवाले की गई थी, जिस पर पड़ताल की गई।

Published in लखनऊ
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