नई दिल्ली: राजस्थान के बाड़मेर में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने पाकिस्तान पर तंज कसा था. पीएम मोदी ने कहा था कि पहले आए दिन पाकिस्तान की तरफ से कहा जाता था, 'हमारे पास न्यूक्लियर बटन (Nuke Button) है...हमारे पास न्यूक्लियर बटन है. इस पर पीएम ने कहा कि उनके पास न्यूक्लियर बटन हैं तो फिर हमारे पास क्या है भाई? क्या हमने इसे दिवाली के लिए रखा है? पीएम मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा, 'भारत ने पाकिस्तान की धमकी से डरने की नीति को छोड़ दिया. पीएम मोदी के इस बयान पर जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने एक बार फिर पाकिस्तान राग अलापा. महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया, 'अगर भारत के पास न्यूक्लियर बम दिवाली के नहीं है तो पाकिस्तान ने क्या इसे ईद के लिए रखा है? पीएम मोदी को इस तरह की निम्नस्तर की राजनीति से दूर रहना चाहिए.' बता दें कि महबूबा मुफ्ती इससे पहले भी कई बार अलग-अलग मामलों को लेकर पाकिस्तान के पक्ष में बोलती रही हैं.

 

श्रीनगर: जम्मू एवं कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वोट हासिल करने के लिए सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।

अनंतनाग जिले में एक चुनावी सभा से इतर मीडिया से बातचीत में महबूबा ने कहा, "वह वोट हासिल करने के लिए सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने देखा कि वे पहले चरण के चुनाव में हार रहे हैं और वे अब हर जगह असुरक्षा फैला रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "उन्होंने जो स्थिति पैदा की है उससे लगता है कि वे वोट हासिल करने के लिए पाकिस्तान पर बालाकोट जैसा एक और हमला करा सकते हैं।"

चुनावी सभा में उन्होंने 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले की जांच की भी मांग की। हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे।

--आईएएनएस

 

 

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श्रीनगर: जम्मू एवं कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के काफिले पर सोमवार को अनंतनाग जिले में पत्थरबाजों ने हमला कर दिया।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि पीडीपी नेता खिरम गांव में दरगाह पर प्रार्थना करने के बाद लौट रही थीं। इसी बीच, अनंतनाग जिले के बिजबेहारा कस्बे की ओर जा रहे उनके काफिले पर कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया।

सूत्रों ने कहा कि इस घटना में एक वाहन क्षतिग्रस्त हो गया लेकिन सुरक्षा बलों ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर ली ताकि पीडीपी अध्यक्ष की काफिले वहां से सुरक्षित निकल पाए।

--आईएएनएस

 

 

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अनंतनाग: राज्य में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) संग गठबंधन से अलग होने के करीब एक वर्ष बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की लोकप्रियता की अपने परिवार के पारंपरिक गढ़ अनंतनाग में लोकसभा चुनाव के दौरान परीक्षा होगी। यहां तीन चरणों 23, 29 अप्रैल और छह मई को मतदान होंगे।

2014 में इस सीट से जीत दर्ज करा चुकीं महबूबा को इस बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी.ए. मीर और नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवार व जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश हसनैन मसूदी से चुनौती मिलेगी।

विश्लेषकों का मानना है कि पीडीपी की अध्यक्ष ने यहां से चुनाव लड़के बहुत बड़ा जोखिम लिया है, क्योंकि यहां उनके खिलाफ भाजपा के साथ गठबंधन करने की वजह से लोगों में बहुत गुस्सा है।

मजेदार बात यह कि यहां से उत्तर प्रदेश के शम्स ख्वाजा भी चुनाव लड़ रहे हैं, जो जम्मू एवं कश्मीर का गैर-प्रादेशिक विषय है, यानी इनके पास संविधान की धारा 370 के अंतर्गत जम्मू एवं कश्मीर का स्थायी निवास प्रमाणपत्र नहीं है। ऐसा करने वाले संभवत: वह पहले प्रत्याशी हैं।

यहां चुनावी मैदान में मौजूद 18 प्रत्याशियों में सोफी यूसुफ भाजपा की के उम्मीदवार हैं।

इसके अलावा ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक लोकसभा सीट के लिए मतदान तीन चरणों में होंगे। ऐसा दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने की वजह से किया जा रहा है।

अनंतनाग लोकसभा सीट पारंपरिक रूप से पीडीपी का मजबूत गढ़ रहा है और महबूबा की इस सीट से जीत या हार का राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव पर काफी असर पड़ेगा। राज्य में अभी राष्ट्रपति शासन लागू है।

संसदीय क्षेत्र में विधानसभा की 16 सीटें हैं, जिसमें अनंतनाग, बिजबेहरा, कोकरनाग, शानगुस, देवसर, होमेशालीबाग, नूराबाद, कुलगाम, दूरू, शोपियां, वाची, राजपोरा, पुलवामा, त्राल, पहलगाम और पंपोर शामिल हैं।

2014 में हुए चुनाव में, पीडीपी ने यहां की 11 सीटों, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने 2-2 सीटों और माकपा ने एक सीट पर कब्जा जमाया था।

तीनों पार्टियों पीडीपी, एनसी और कांग्रेस का चुनावी प्रचार मुख्यत: अनुच्छेद 370 और 35ए के आसपास केंद्रित है। ये अनुच्छेद जम्मू एवं कश्मीर को विशेष दर्जा मुहैया कराते हैं।

भाजपा ने अपने घोषणा-पत्र में इसे खत्म करने का वादा किया है।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कश्मीरी नेताओं महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला को लोकसभा चुनाव में भाग लेने से रोकने वाली जनहित याचिका(पीआईएल) खारिज कर दी। 

न्यायमूर्ति रविंद्र भट्ट की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ता और वकील संजीव कुमार से चुनाव आयोग के पास जाने के लिए कहा, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।

अदालत शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुनाव आयोग को नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी(पीडीपी) पर आम चुनाव में भाग लेने से रोकने के लिए आदेश देने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि "इन पार्टियों के नेताओं की निष्ठा कहीं और है, भारत के संविधान में नहीं है।"

याचिका में इन नेताओं पर राजद्रोह समेत विभिन्न आरोपों में मामले तय करने की भी मांग की गई थी।

अपनी याचिका में, याचिकाकर्ता ने कहा कि इन नेताओं को चुनाव लड़ने की इजाजत देना लोकतंत्र के लिए मजाक होगा, क्योंकि ये नेता खुले आम धर्म के आधार पर भारत माता के बंटवारे की बात करते हैं और जम्मू एवं कश्मीर और भारत दोनों के लिए अलग-अलग प्रधानमंत्री की मांग करते हैं।

--आईएएनएस

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जम्मू: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जम्मू एवं कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को लोगों को कानून तोड़ने के लिए उकसाने के आरोप में गुरुवार को गिरफ्तार करने की मांग की।

भाजपा प्रवक्ता सुनील सेठी ने यहां पत्रकारों से कहा, "महबूबा मुफ्ती के खिलाफ लोगों को बुधवार और रविवार को (श्रीनगर-जम्मू) राजमार्ग पर वाहनों पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करने के लिए उकसाने वाला बयान देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए थी।"

प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में राजनीति अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

उन्होंने कहा, "राजनेता अब लोगों को कानून तोड़ने के लिए कहकर वोट पाने की कोशिश कर रहे हैं। केवल सुरक्षा बलों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाने की अनुमति देने का आदेश एक सोच विचार कर लिया गया निर्णय है जो पुलवामा आतंकवादी हमले जैसी स्थितियों से बचने के लिए लिया गया है।"

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि लोकसभा चुनाव में कश्मीरी नेता महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला की भागीदारी पर प्रतिबंध की मांग करने वाली याचिका पर शुक्रवार (12 अप्रैल) को सुनवाई होगी। 

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भमभानी की पीठ ने कहा कि शुक्रवार को मामले पर सुनवाई अन्य पीठ द्वारा की जाएगी।

अदालत 2019 आम चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की भागीदारी को प्रतिबंधित करने के लिए निर्वाचन आयोग को निर्देश देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया कि 'इन दलों के नेताओं की वफादारी भारतीय संविधान में नहीं बल्कि कहीं और निहित है।'

वकील संजीव कुमार द्वारा दाखिल याचिका में इन नेताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के राजद्रोह सहित विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश देने की भी मांग की गई।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि 'इन नेताओं को चुनाव लड़ने की इजाजत देना लोकतंत्र का मजाक होगा क्योंकि यह लोग धर्म के आधार पर 'भारत मां' को विभाजित करने और दो प्रधानमंत्री की मांग कर खुले तौर पर राजद्रोह कर रहे हैं। यह नेता एक प्रधानमंत्री जम्मू एवं कश्मीर के लिए और दूसरा शेष भारत के लिए मांग रहे हैं।'

याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर का बयान अस्वीकार्य है। बयान में दोनों नेताओं ने कश्मीर के लिए वजीर-ए-आजम और सदर-ए-रियासत पद को फिर से बहाल करने की मांग की थी।

याचिका में कहा गया, "महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के देशद्रोही, सांप्रदायिक बयान भारतीय संविधान के खिलाफ हैं और इसलिए अदालत/चुनाव आयोग को उनके लोकसभा में प्रवेश पर हर शर्त पर प्रतिबंध लगाना चाहिए क्योंकि उनकी वफादारी भारतीय संविधान में नहीं बल्कि कहीं और निहित है।"

--आईएएनएस

 

 

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श्रीनगर: जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को आतंक वित्तपोषण मामले में मीरवाइज उमर फारूक को राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) द्वारा समन भेजे जाने के लिए पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती को जिम्मेदार ठहराया।

कुपवाड़ा जिले में पार्टी की एक रैली से इतर मीडिया से उन्होंने कहा, "एनआईए ने 2017 में मीरवाइज के खिलाफ तब एफआईआर दाखिल किया था, जब महबूबा मुफ्ती राज्य की मुख्यमंत्री थीं। इसलिए वह मीरवाइज उमर फारूक को एनआईए द्वारा भेजे जाने वाले नोटिस के लिए अकेले जिम्मेदार हैं।"

एनआईए ने शुक्रवार को एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए मीरवाइज को तीसरा नोटिस भेजा था। इससे पहले दो नोटिस के जवाब में मीरवाइज ने एजेंसी के समक्ष दिल्ली में पेश होने में असमर्थता जताई थी।

--आईएएनएस

 

 

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श्रीनगर: पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को कहा कि यदि उन्हें सत्ता मिली तो वह जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) और स्थानीय जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से प्रतिबंध हटा देंगी।

उत्तर कश्मीर के बारामुला में पीडीपी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए महबूबा ने कहा कि जेकेएलएफ और जेईआई जैसे संगठनों को प्रतिबंधित करने के दूरगामी परिणाम होंगे और इस तरह के कदमों से लोगों में अलगाववाद और निराशा की भावना बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, "किसी लोकतंत्र में विचारों को पनपने देना चाहिए, उन्हें रोकना नहीं चाहिए। इस तरह के अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक और अस्वाभाविक कदमों के जरिए सरकार अपने मतदाताओं को दिखाना चाहती है कि मुस्लिमों और जम्मू एवं कश्मीर के खिलाफ वह कितना सख्त है।"

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "यदि हमारी पार्टी को सत्ता मिली तो हम भाजपा के गलत कामों को खत्म करने के प्रयास करेंगे और जेईआई और जेकेएलएफ पर लगाए गए प्रतिबंध हटाएंगे।"

--आईएएनएस

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श्रीनगर: पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को कहा कि वह दक्षिण कश्मीर की अनंतनाग सीट से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। श्रीनगर के गुपकर रोड स्थित अपने उच्च सुरक्षा वाले आवास में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए महमबूबा नेकहा कि वह अनंतनाग सीट से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी।

उन्होंने घोषणा की कि पीडीपी नेता आगा मोहसिन श्रीनगर लोकसभा सीट से पीडीपी उम्मीदवार होंगे।

पार्टी कश्मीर की बारामूला सीट से अब्दुल कयूम वानी को पहले ही उम्मीदवार घोषित कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि पीडीपी जम्मू संभाग की लोकसभा सीटों से उम्मीदवार नहीं खड़े करेगी।

उन्होंने कहा कि यह निर्णय जम्मू और ऊधमपुर लोकसभा सीटों पर धर्मनिरपेक्ष मतों को बंटने से रोकने के लिए लिया गया है।

--आईएएनएस

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