नई दिल्ली:  करीब 3,767 करोड़ रुपये के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले की चल रही जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का ध्यान शीर्ष कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर है। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इन नेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके करीबी अहमद पटेल के नाम शामिल हैं।

कांग्रेस के नेता एजेंसी के रडार पर पूर्व भारतीय वायुसेना प्रमुख एस.पी. त्यागी, उनके चचेरे भाई संजीव त्यागी और दिल्ली के वकील गौतम खेतान की गिरफ्तारी के बाद आए हैं। हालांकि त्यागी बंधु और खेतान अभी जमानत पर जेल से बाहर हैं।

इस घोटाले में एजेंसी तत्कालीन रक्षामंत्री रहे प्रणब मुखर्जी की भूमिका को भी देख रही है।

सूत्रों ने कहा कि इस जांच के तहत कांग्रेस की अगुवाई वाले तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के सभी नेताओं को लाया जा सकता है, जिन पर 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टर समझौते को अंतिम रूप देने में जुड़े रहने का आरोप है।

इस मामले में एजेंसी इतालवी अदालत के इतालवी बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के संज्ञान में लिए गए दो नोटों के आधार पर कार्रवाई करेगी।

इससे पहले अदालत ने 2016 में पूर्व फिनमेकेनिका के प्रमुख ब्रूनो स्पैगनोलिनिऔर ग्यूसेप ओरसि को भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए दोषी ठहराया था। ब्रूनो और ग्यूसेप अगस्ता वेस्टलैंड विभाग के प्रमुख थे।

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अगस्‍ता वेस्‍टलैंड वीवीआईपी चॉपर डील मामले में सीबीआई पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिं‍ह से पूछताछ कर सकती है। उनके अलावा मनमोहन के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों से सवाल जवाब किया जा सकता है। सीएनन-न्‍यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय जांच एजेंसी पूर्व प्रधानमंत्री के साथ ही उनके प्रधान सचिव टीकेए नैयर और पूर्व राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन को भी पूछताछ के लिए बुला सकती है। पूछताछ के दायरे में सीबीआर्इ के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्‍हा और पूर्व स्‍पेशल डायरेक्‍टर सलीम अली भी आ सकते हैं। अगस्‍ता वेस्‍टलैंड घोटाला साल 2013 में हुआ था। इस मामले में सीबीआई ने पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्‍यागी को गिरफ्तार किया है। उन पर डील में गलत प्रभाव डालने का आरोप है। अगस्‍ता वेस्‍टलैंड डील 3600 करोड़ रुपये की थी। लेकिन बाद में जब घोटाले की खबर आई तो यह डील रद्द कर दी गई।

त्‍यागी ने शनिवार (10 दिसंबर) को कोर्ट में कहा था कि वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टर की खरीद के दौरान बदलावों की जानकारी तत्‍कालीन पीएमओ को था। हेलीकॉप्‍टर सौदे की प्रकिया सामूहिक निर्णय था। पीएमओ ने ऊंचाई में बदलाव करने को कहा था। सीबीआई अब अगस्‍त 2013 के दस्‍तावेजों के लिए केंद्र के पास जा सकती है। इसके जरिए वह सीनियर अधिकारियों के क्रियाकलाप की जानकारी मिल सके। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के कई पूर्व अधिकारियों ने शायद जानकारी लीक कर दी हो। सीबीआई ने 9 दिसंबर को त्‍यागी, उनके चचेरे भाई संजीव त्‍यागी और वकील गौतम खेतान को गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है इंडियन एक्‍सप्रेस की 13 फरवरी 2013 की रिपोर्ट के अनुसार इटली के जांचकर्ताओं ने सबसे पहले आरोप लगाया था कि त्‍यागी परिवार को अगस्‍ता वेस्‍टलैंड के पक्ष में डील कराने के लिए घूस दी गई थी। इसके लिए टेंडर में अगस्‍ता की मदद करने वाले बदलाव किए गए। गौतम खेतान की पैसों के हेरफेर में मुख्‍य भूमिका सामने आई थी। उन पर आरोप है कि कई कंपनियों के जरिए उन्‍होंने पैसों को ट्रांसफर किया।

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नई दिल्ली:  देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने शुक्रवार को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के 70वें जन्मदिन पर उन्हें बधाई दी और उनके लंबे जीवन की कामना की। मनमोहन, सोनिया के घर पहुंचे और उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं।

उनके अलावा, मोती लाल वोरा, दिग्विजय सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, पी. चिदंबरम, जनार्दन द्विवेदी, कमलनाथ, अंबिका सोनी, ए.के. एंटनी, मुकुल वासनिक सहित पार्टी के कई बड़े नेता सोनिया को जन्मदिन की बधाई देने उनके घर पहुंचे।

वहीं कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया सुबह ट्विटर पर उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए लिखा, "सोनिया गांधी को उनके 70वें जन्मदिन की बधाई। भगवान उन्हें अच्छा स्वास्थ्य दें और हमेशा खुश रखें।"

सोनिया गांधी वर्ष 1998 से ही कांग्रेस की अध्यक्ष हैं। वह पार्टी में सबसे अधिक समय तक सेवारत अध्यक्ष हैं।

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नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने बेहद कड़े आलोचनात्मक स्वर में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का फैसला कर अपने मौलिक कर्तव्यों का उपहास उड़ाया है, और एक अरब से ज़्यादा भारतीयों का विश्वास नष्ट कर दिया है. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ सिंह के ये विचार शुक्रवार को अंग्रेज़ी दैनिक  में प्रकाशित किए गए हैं.

डॉ सिंह द्वारा लिखित संपादकीय आलेख 'विशाल त्रासदी की रचना' में भविष्यवाणी की गई है कि नोटबंदी की वजह से जीडीपी और नौकरियों के सृजन में काफी दूर तक प्रभाव पड़ेगा, और आने वाले महीनों में 'बेवजह' कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. इस फैसले की वजह से ईमानदार हिन्दुस्तानियों को 'भारी नुकसान' होगा, और बेईमान और काला धन जमा करने वाले 'हल्की-सी चोट के बाद' बच निकलेंगे.

24 नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री तथा जाने-माने अर्थशास्त्री डॉ मनमोहन सिंह ने संसद में बोलते हुए नोटबंदी के फैसले को 'संगठित लूट, कानूनी लूट' की संज्ञा दी थी. उनका शुक्रवार को प्रकाशित संपादकीय इन्हीं विचारों को विस्तार से समझाता है.

डॉ सिंह ने लिखा, "बिना सोच-समझे किए गए एक ही फैसले से प्रधानमंत्री ने करोड़ों भारतीयों की आस्था और उस विश्वास को चकनाचूर कर दिया है, जो उन्होंने उनकी और उनके धन की रक्षा करने के लिए भारत सरकार में दर्शाया था..."

पूर्व प्रधानमंत्री के अनुसार, "यह प्रत्यक्ष है कि रातोंरात अचानक लागू की गई नोटबंदी से करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं के विश्वास को ठेस पहुंची है, और इससे गंभीर आर्थिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं... अधिसंख्य भारतीयों की ईमानदारी की कमाई को रातोंरात खत्म कर दिए जाने और अब नए नोटों तक उनकी सीमित पहुंच के घाव मिलकर बहुत गहरे हो गए हैं, और जल्द ही नहीं भर पाएंगे..."

उन्होंने कर चोरी रोकने और आतंकवादियों द्वारा नकली नोटों के इस्तेमाल को खत्म करने की प्रधानमंत्री की मंशा को सम्माननीय बताया और कहा कि उसके लिए खुले दिल से उन्हें समर्थन दिया जाना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी लिखा कि यह गलतफहमी है कि 'सारी नकदी काला धन है, और सारा काला धन नकदी के रूप में ही है...'

डॉ सिंह ने लिखा कि 90 फीसदी से ज़्यादा भारतीय कामगारों को आज भी नकदी में ही वेतन हासिल होता है. डॉ सिंह ने लिखा, "इसे 'काले धन' के रूप में बदनाम करना और करोड़ों गरीब भारतीयों की ज़िन्दगियों को बेतरतीबी में धकेल देना एक विशाल त्रासदी है... ज़्यादातर भारतीय नकदी में कमाते हैं, नकदी में लेनदेन करते हैं, और नकदी में ही बचत भी करते हैं, और सब कुछ जायज़ तरीके से... यह किसी भी संप्रभुतासंपन्न देश की लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार की आधारभूत ज़िम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों कि ज़िन्दगियों और उनके अधिकारों की रक्षा करे..."

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नई दिल्ली:  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि विकास दर बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे और निर्यात को बढ़ावा देने वाले निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि आवश्यक है। सिंह ने यहां पीएचडी चैंबर द्वारा आयोजित 111वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने सार्वजनिक वित्त, वित्तीय स्थिरता और रोजगार सृजन के समेकन के महत्व पर बल दिया।

उन्होंने भूख और कुपोषण के व्यापक प्रसार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक भूख का समाधान नहीं होता, तब तक यह देश के विकास के लिए बड़ी बाधा हो सकती है।

उन्होंने कहा, "भारत अब सात प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से आगे बढ़ रहा है। वहीं विकास की प्रक्रिया की स्थिरता के लिए निवेश की दर में उल्लेखनीय वृद्धि की जरूरत है, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में और साथ ही निर्यात क्षेत्र के पुनरुद्धार की भी आवश्यकता है।"

उन्होंने कहा, "अब केवल विकास दर को आगे बढ़ाने की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए। बल्कि विकास के बहुआयामी पहलू हैं, जिसमें समानता, समावेशन, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय स्थिरता शामिल है।"

उन्होंने कहा, "भारत में खाद्यान्न का सरप्लस स्टॉक है और अभी भी भूख और कुपोषण के शिकार लोगों की संख्या सबसे अधिक हमारे देश में है। यह मुख्य रूप से क्रय शक्ति में कमी और वितरण में न्याय नहीं होने का नतीजा है।"

पूर्व प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया और शिक्षा व्यवस्था को रोजगार उन्मुख बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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नई दिल्ली: राज्यसभा में गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा नोटबंदी के प्रबंधन को 'सबसे बड़ी विफलता' बताया, और उसके बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कड़े शब्दों में पलटवार करते हुए कहा, "यह निराशाजनक है कि हमें उन लोगों से इस बारे में सुनना पड़ रहा है, जिनकी सरकार के दौरान सबसे ज़्यादा काला धन पैदा हुआ, सबसे ज़्यादा भ्रष्टाचार और घोटाले सामने आए..."

अरुण जेटली ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दल गुरुवार सुबह उस समय भौंचक्के रह गए थे, जब उन्हें बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक की गई नोटबंदी के फैसले को लेकर संसद में बोलेंगे.

उन्होंने कहा कि इसी घोषणा के चलते 16 नवंबर को शुरू हुई बहस गुरुवार को आगे बढ़ पाई. अरुण जेटली ने यह भी कहा, वैसे सुधार के लिए उठाए गए इस कदम को लेकर चर्चा करने की विपक्ष की वास्तव में कोई मंशा नहीं है.

अरुण जेटली ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री के बोलने की मांग करते हुए कार्यवाही को बाधित करने वाले विपक्ष के पास गुरुवार को कोई बहाना नहीं बचा था, और वह बहस के लिए "अनिच्छुक थी, और तैयार भी नहीं थी..."

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नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के बाद देश के कई हिस्सों में फैली अफरातफरी पर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा. इस प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ने कहा कि 'नोटबंदी सबसे बड़ा कुप्रबंधन है, जिसे लेकर देश में कोई दो राय नहीं.
राज्यसभा में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के भाषण की खास बातें
  1. इसके उद्देश्यों को लेकर असहमत नहीं हूं, लेकिन इसके बाद बहुत बड़ा कुप्रबंधन देखने को मिला, जिसे लेकर पूरे देश में कोई दो राय नहीं.
  2. मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कहता हूं कि हम इसके अंतिम नतीजों को नहीं जानते.
  3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा 50 दिन रुक जाइये, यह छोटी अवधि है, लेकिन गरीबों और वंचितों के लिए ये 50 दिन काफी विनाशकारी प्रभाव वाले हैं.
  4. लोगों ने बैंकों में अपने पैसे जमा कराए, लेकिन उसे निकाल नहीं सकते... जो हो रहा है उसकी निंदा के लिए इतना ही काफी है.
  5. आम लोगों को हो रही परेशानियां दूर करने के लिए प्रधानमंत्री को इस योजना के क्रियान्वयन के लिए रचनात्मक प्रस्ताव पेश करना चाहिए.
  6. नियमों में हर दिन हो रहा बदलाव प्रधानमंत्री कार्यालय और भारतीय रिजर्व बैंक की खराब छवि दर्शाता है.
  7. मुझे बहुत खेद है कि भारतीय रिजर्व बैंक की इस तरह से आलोचना हो रही है, लेकिन यह जायज़ है.
  8. इस योजना को जिस तरह से लागू किया गया, वह प्रबंधन के स्तर पर बहुत बड़ी विफलता है.
  9. यह संगठित लूट और वैध लूट का मामला है.
  10. मुझे पूरी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री पीड़ितों को राहत देने के लिए व्यावहारिक कदम निकालेंगे.
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नई दिल्‍ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रमुख विपक्ष तक पहुंच बनाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को शुक्रवार शाम चाय पर आमंत्रित किया है। इस दौरान जीएसटी जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आज कांग्रेस के नेताओं को अपने रेस कोर्स रोड स्थित आवास पर शाम 7 बजे आमंत्रित किया है। सरकार की कोशिश है कि बेहद अहम जीएसटी बिल को राज्‍यसभा में पारित कराने के साथ साथ संसद में जारी गतिरोध को टाल सके। उधर, इस न्‍यौते के बाद कांग्रेस में मंथन का दौर चला। कांग्रेस के पांच बड़े नेताओं ने आज सुबह इस न्‍यौते पर विचार के लिए बैठक की। बैठक में सोनिया, मनमोहन, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और गुलाम नबी आजाद शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, इसमें कोई निर्णय नहीं हो पाया है।

चाय के इस कार्यक्रम को इस लिहाज से अहम माना जा रहा है क्योंकि सरकार और कांग्रेस के बीच तनातनी होने के कारण वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक जैसे महत्वपूर्ण कानून पारित नहीं हो पा रहे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा था कि प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष कर के कानून को पारित करवाने के लिए किसी से भी बात करने के लिए तैयार हैं।

योजना के मुताबिक आगामी एक अप्रैल से अप्रत्यक्ष कर की नई प्रणाली को लागू करने के लिए जरूरी होगा कि जीएसटी विधेयक शीतकालीन सत्र में पारित हो जाए। जेटली ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर ‘लगभग सभी कांग्रेसी नेताओं से’ बात की है।

उन्होंने कहा था कि हमें प्रधानमंत्री स्तर पर भी कोई हिचकिचाहट नहीं है। हमें पहले भी कभी हिचकिचाहट नहीं थी और अब भी नहीं है। वह हर किसी से बात करने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस ने संसद के पिछले सत्र में जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को पारित होने से रोक दिया था। उसकी यह मांग थी कि राजस्व-निरपेक्ष दर के 18 प्रतिशत से ज्यादा न होने की बात का जिक्र इसमें किया जाए। कांग्रेस वस्तुओं की आपूर्ति पर जीएसटी दर से उपर एक प्रतिशत तक का अतिरिक्त कर लगाने का अधिकार राज्यों को दिए जाने के भी खिलाफ है।

संसद के शीतकालीन सत्र के शुरूआत के साथ ही राजनीतिक रस्साकशी भी शुरू हो गई है। एक तरफ जहां विपक्ष तमाम मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार किसी तरह जीएसटी समेत कई बिलों को पास कराना चाहती है। इसी क्रम में पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चाय पर चर्चा के लिए बुलाया है। गौर हो कि संसद का पिछला सत्र विपक्ष ने चलने ही नहीं दिया था। ललित मोदी, वसुंधर राजे आदि के मुद्दे पर सरकार को घेर लिया गया था और कार्यवाही चल ही नहीं पाई थी। इस सत्र में भी कई मुद्दों पर गतिरोध के आसार हैं। सरकार की सबसे बड़ी चुनौती जीएसटी बिल को पास कराना है। ऐसे में सरकार की तरफ से अब पूरी कोशिश की जा रही है कि विपक्ष इस मुद्दे पर तैयार हो जाए।

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नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर और देश के पहले गृह मंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने इंदिरा को शक्तिस्थल जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

राहुल ने ट्वीट किया, "हम आज (शनिवार) इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि देते हैं। वह साहसी और करुणामयी थीं। उन्होंने गरीबों के हितों की रक्षा की और देश के लिए जान दे दी।"

राहुल ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, "मैं सरदार बल्लभभाई पटेल को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देता हूं। वह हमारे देश के संस्थापकों में से एक, देशभक्त और महान कांग्रेसी थे।"

राहुल ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, "उन्होंने देश को एकजुट करने में अभूतपूर्व योगदान दिया और कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ उनके सिद्धांत हमेशा हमारा मार्गदर्शन करेंगे।"

कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि सरदार पटेल सही मायनों में देश के 'लौह पुरुष' थे। वह एक ऐसे सशक्त भारत में यकीन करते थे, जहां सभी भारतीय समान हों। 

कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर खाते पर लिखा, "हम इंदिरा गांधी और सरकार बल्ल्भभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।"

पंजाब में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए अमृतसर के हरमंदिर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर में सेना भेजने के फैसले के कुछ महीने बाद इंदिरा गांधी के अंगरक्षकों ने 31 अक्टूबर, 1984 को उनकी हत्या कर दी थी। 

वह सर्वाधिक समय (जनवरी 1966-मार्च 1977) तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। उन्होंने 14 जनवरी, 1980 को एक बार फिर प्रधानमंत्री पद संभाला और इस पद पर अंतिम दम तक रहीं। 

भारत के 'लौह पुरुष' कहे जाने वाले सरदार पटेल एक राजनेता और सामाजिक नेता थे। उनका जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नाडियाड शहर में हुआ था और 15 दिसंबर, 1950 को उनका निधन हो गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। 

 

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नई दिल्ली: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की उस याचिका को एक अदालत ने यहां शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन के एक मामले में सम्मन करने की मांग की गई थी। कोयला ब्लॉक आवंटन का यह मामला जिंदल ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के स्वामित्व वाली कंपनियों की कथित संलिप्तता से संबंधित है। विशेष न्यायाधीश भरत पाराशर ने कोड़ा की वह याचिका को खारिज कर दी, जिसमें झारखंड के अमरकोंडा मुरगादांगल कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में मनमोहन सिंह और अन्य को सम्मन करने की मांग की गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस। 

 

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