सर्वोच्च न्यायालय के दिवंगत न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा द्वारा 1990 के दशक में दिए गए प्रसिद्ध मगर विवादास्पद फैसले 'हिंदुत्व जीने का तरीका' को दोषयुक्त बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि एक संस्थान के रूप में न्यायपालिका को, संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना की हिफाजत करने के प्राथमिक कर्तव्य की अपनी दृष्टि नहीं खोनी चाहिए। मनमोहन ने कहा कि यह काम पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है, क्योंकि राजनीतिक विवादों और चुनावी लड़ाइयों को धार्मिक रंगों, प्रतीकों, मिथों और पूर्वाग्रहों के साथ व्यापक रूप से घालमेल किया जा रहा है।

सिंह दिवंगत कम्युनिस्ट नेता ए.बी. बर्धन स्मृति व्याख्यान दे रहे थे। व्याख्यान का विषय था 'धर्मनिरपेक्षता और संविधान की रक्षा'।

पूर्व प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए न्यायमूर्ति वर्मा के फैसले की आलोचना की कि इसने एक तरह से एक प्रकार की संवैधानिक पवित्रता को नुकसान पहुंचाया, जो देश की राजनीतिक बातचीत में बोम्मई फैसले के जरिए बहाल हुई थी, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि धर्मनिरपेक्षता, संविधान का एक बुनियादी ढांचा है।

मनमोहन ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा के फैसले का गणराज्य में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों एवं प्रथाओं के बारे में राजनीतिक दलों के बीच जारी बहस पर एक निर्णायक असर डाला है।

सिंह ने कहा, "इस फैसले ने हमारी राजनीतिक बातचीत को कुछ असंतुलित कर दिया, और कई लोग मानते हैं कि निस्संदेह इस फैसले को पलटने की जरूरत है।"

--आईएएनएस

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को अगले लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए विपक्ष से एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और किसानों की परेशानी के कारण देशभर में छाई संकट की स्थिति के लिए मोदी सरकार पर हमला बोला।

मनमोहन सिंह ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार वर्ष 2014 के चुनाव से पहले लोगों से किए गए वादों को पूरा करने और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने में बुरी तरह अफल रही है। 

मनमोहन सिंह ने रामलीला मैदान में आयोजित विरोध रैली में कहा, "परिस्थितियों से पता चलता है कि स्थिति अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। किसान, व्यापारी, युवा अपने-अपने क्षेत्र में संकट झेल रहे हैं। सरकार आम लोगों से किए अपने वादों को पूरा करने में बुरी तरह नाकाम रही है।" 

उन्होंने कहा,"केंद्र में पार्टी को बदलने का समय आ गया है और यह जल्द ही होगा।" 

मनमोहन ने विपक्षी पार्टियों से आग्रह करते हुए कहा,"वर्तमान सरकार का विरोध करने वाले दलों को अपने मतभेदों को भूलना चाहिए और देश की एकता और धर्मनिरपेक्षता की पहचान को बनाए रखने के लिए एक साथ आना चाहिए। हमें एकता के सामूहिक लाभ को साबित करने की आवश्यकता है।"

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री राजघाट से शुरू हुए विरोध मार्च में शामिल हुए और रामलीला मैदान पहुंचे। 

यह मार्च भारत बंद का हिस्सा है। 

पूर्व प्रधानमंत्री ने सरकार के विरोध में कांग्रेस का साथ दे रही लगभग 20 राजनीतिक विपक्षी दलों की उपस्थिति को सराहा।

उन्होंने कहा कि अगले साल आम चुनावों से पहले यह एक महत्वपूर्ण क्षण है और हमें इस (एकता) का लाभ उठाना चाहिए और देश में एक आंदोलन शुरू करना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस और वामपंथी दलों द्वारा पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के खिलाफ बुलाया गया था।

विरोध प्रदर्शन जनता दल-सेक्युलर, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, लोकतंत्रिक जनता दल, राष्ट्रीय लोक दल, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों द्वारा समर्थित है।

--आईएएनएस

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और भाजपानीत सरकार पर कृषि संकट, खराब आर्थिक स्थिति और पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते संबंधों का आरोप लगाया। सिंह कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की किताब 'शेड्स ऑफ ट्रथ-ए जर्नी डिरेल्ड' के लांच के मौके पर यह बातें कही। 

उन्होंने कहा, "मोदी सरकार ने देश में मौजूद कृषि संकट का सकारात्मक ढंग से सामना नहीं किया। किसान को अभी तक उनके उत्पाद के लाभकारी मूल्य नहीं दिए गए।"

उन्होंने कहा कि सिब्बल की किताब मोदी सरकार के चार वर्षो के कार्यकाल का समग्र विश्लेषण है।

उन्होंने कहा, "इसमें सरकार द्वारा 2014 लोकसभा चुनाव से पहले किए गए उन असफल वादों के बारे में बताया गया है, जिसे सरकार पूरा करने में विफल रही।"

मोदी के दो करोड़ नौकरियां देने के वादे के बारे में सिंह ने कहा, "गत चार वर्षो में रोजगार दर में कमी आई है।"

उन्होंने कहा, "मोदी सरकार द्वारा बड़ी संख्या में रोजगार सृजन के आंकड़े से लोग संतुष्ट नहीं हैं। औद्योगिक उत्पादन और आयात सुस्त हुआ है। मेक इन इंडिया और स्टैंड अप इंडिया जैसे कार्यक्रम औद्योगिक उप्तादन में अभी तक पर्याप्त प्रभाव नहीं डाल पाए हैं।"

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे उद्योगों को अभी भी इज ऑफ डूइंग बिजनेस से फायदा होना बाकी है और नोटबंदी व जीएसटी से ये उद्योग प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा, "महिला, दलित और अल्पसंख्यक असुरक्षा के माहौल में रह रहे हैं। मोदी सरकार धीरे ही सही, लेकिन उन मूल्यों को समाप्त कर रही है, जिसकी रक्षा किसी भी लोकतांत्रिक पार्टी को करनी चाहिए।"

सिंह ने कहा, "पड़ोसियों के साथ हमारे संबंध बीते चार वर्षो में बहुत खराब हो गए हैं। मोदी सरकार विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से संबंधित समस्याएं सुलझाने में विफल रही है।"

--आईएएनएस

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पुणे पुलिस का दावा है कि भीमा-कोरेगांव मामले में जिन दस मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है उनसे घटना से जुड़ी ‘डिजिटल बातचीत’ और ‘साइबर सबूत’ मिल गए हैं। इनमें से पांच आरोपी यूपीए-2 के शासन में रडार पर थे। दरअसल दिसंबर 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने ऐसे 128 संगठनों की पहचान की जिनके संबंध माओवादियों से थे। इसके अलावा सरकार ने कुछ ऐसे लोगों की भी पहचान की जो माओवादियों से संबंधित संगठनों से जुड़े थे। इसके तहत सरकार ने राज्य सरकार को लिखी चिट्ठी में ऐसे सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। ये जानकारी एक सरकारी अधिकारी के हवाले से है। अधिकारी के मुताबिक भीमा-कोरेगांव दंगों से संबंधित 6 जून और 28 अगस्त के बीच देशभर में छापेमारी के दौरान जिन लोगों को पकड़ा गया उनका नाम यूपीए-2 में जारी लिस्ट में भी था। इनके नाम हैं, वरवर राव, सुधा भारद्वाज, सुरेंद्र गाडलिंग, रोना विल्सन, अरुण फरेरा, वेरनॉन गोंसाल्वेस और महेश राउत।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव की घटना के सिलसिले में गिरफ्तार पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को छह सितंबर को अगली सुनवाई होने तक उनके घरों में ही नजरबंद रखने का आदेश दिया। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने प्रख्यात इतिहासकार रोमिला थापर और चार अन्य लोगों की ओर से मंगलवार को की गई गिरफ्तारी को चुनौती देते दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करते हुए उन्हें नजरबंद रखने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ ने कार्रवाई पर निराशाजनक विचार जाहिर करते हुए कहा, “असहमति ही लोकतंत्र का सुरक्षा वाल्व है। अगर यह नहीं होगा तो प्रेसर कुकर फट जाएगा।” उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा से जुड़े कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी घटना के नौ महीने बाद ह़ुई है। वकील प्रशांत भूषण ने बाद में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। हैदराबाद में वरवर राव, दिल्ली में गौतम नवलखा, हरियाणा में सुधा भारद्वाज और महाराष्ट्र में अरुण फरेरा और वेरनोन गोंजैल्वस को मंगलवार को इस घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को पुणे लाया जाना था लेकिन अब उनको उनके ही घरों में नजरबंद रखा जाएगा।

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 पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिहं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर तीन मूर्ति कॉम्प्लेक्स स्थित नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी के स्वरूप में बदलाव ना करने को कहा है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीएम मोदी को लिखी इस चिट्ठी में मनमोहन सिंह ने लिखा है कि नेहरू सिर्फ कांग्रेस के नहीं बल्कि पूरे देश के नेता थे.

पिछले हफ्ते भेजे इस पत्र में मनमोहन सिंह ने लिखा, ''जवाहर लाल नेहरू सिर्फ कांग्रेस के नहीं बल्कि पूरे देश के नेता थे. इसी भावना के साथ मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं." मनमोहन सिंह ने लिखा कि सरकार एजेंडे के तहत नेहरू म्यूजियम और लाइब्रेरी का स्वरूप और प्रकृति बदलना चाहती है, सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए.

पत्र में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए लिखा कि पूर्व पीएम वाजपेयी के छह साल के कार्यकाल के दौरान एक बार भी दोनों स्थलों में किसी भी बदलाव की कोशिश नहीं हुई. लेकिन इस सरकार का ऐसा ही एजेंडा प्रतीत होता है.

बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह का यह पत्र ऐसे समय में आय है जब खबर है कि सरकार तीन मूर्ति भवन में सभी प्रधानमंत्रियों के लिए म्यूजियम बनाना चाहती है. कांग्रेस आरोप लगा रही है कि सरकार नेहरू की विरासत को खत्म करना चाहती है. दिल्ली का तीन मूर्ति भवन देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का निवास था. जिसे उनके निधन के बाद इसे म्यूजिम बना दिया गया था.

डॉ. सिंह ने अपने खत में लिखा है, ''पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू की विशिष्टता और महानता को उनके राजनीतिक विरोधी भी स्वीकार करते थे. इतिहास और विरासत का सम्मान करते हुए हमें तीन मूर्ति को जैसा है, वैसा ही रहने देना चाहिए.''

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देश की आर्थिक वृद्धि दर का आंकड़ा 2006-07 में 10.08 प्रतिशत रहा जो कि उदारीकरण शुरू होने के बाद का सर्वाधिक वृद्धि आंकड़ा है. यह आंकड़ा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का है. आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है. आजादी के बाद देखा जाए तो सर्वाधिक 10.2 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर 1988-89 में रही. उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे.

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा गठित ‘कमेटी आफ रीयल सेक्टर स्टैटिक्स’ ने पिछली श्रृंखला (2004-05) के आधार पर जीडीपी आंकड़ा तैयार किया. यह रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी की गयी है.

रिपोर्ट में पुरानी श्रृंखला (2004-05) और नई श्रंखला 2011-12 की कीमतों पर आधारित वृद्धि दर की तुलना की गयी है. पुरानी श्रृंखला 2004-05 के तहत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर स्थिर मूल्य पर 2006-07 में 9.57 प्रतिशत रही. उस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे. नई श्रृंखला (2011-12) के तहत यह वृद्धि दर संशोधित होकर 10.08 प्रतिशत रहने की बात कही गयी है.

वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव की अगुवाई में शुरू आर्थिक उदारीकरण की शुरूआत के बाद यह देश की सर्वाधिक वृद्धि दर है. रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘जीडीपी श्रृंखला पर आधारित आंकड़ा अंतत: आ गया है. यह साबित करता है कि यूपीए शासन के दौरान (औसतन 8.1 प्रतिशत) की वृद्धि दर मोदी सरकार के कार्यकाल की औसत वृद्धि दर (7.3 प्रतिशत) से अधिक रही.’’

पार्टी ने कहा, ‘‘यूपीए सरकार के शासन में ही वृद्धि दर दहाई अंक में रही जो आधुनिक भारत के इतिहास में एकमात्र उदाहरण है.’’ रिपोर्ट के अनुसार बाद के वर्षों के लिये भी जीडीपी आंकड़ा संशोधित कर ऊपर गया है. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने इन आंकड़ों के संग्रह, मिलान और प्रसार के लिये प्रणाली और प्रक्रियाओं को मजबूत करने हेतु उपयुक्त उपायों का सुझाव देने के लिये समिति का गठन किया था.

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कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के खिलाफ अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा। कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बिना सबूत के डॉ. सिंह व अन्य पर पाकिस्तान से सांठगांठ कर पिछले साल गुजरात विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाया, इसके लिए वह देश से माफी मांगें। 

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेरा ने प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत एक जून को मिले जवाब का हवाला देते हुए कहा कि मोदी का बयान विभिन्न स्रोतों से मिली अनौपचारिक व औपचारिक सूचनाओं पर आधारित था, किसी आधिकारिक सूचना पर नहीं। 

खेरा ने मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि वह निर्वाचित नेता हैं और संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लिए हुए हैं, फिर भी वह अनाधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर बयान देकर पार्टी को तुच्छ लाभ दिलाने के लिए अपने पद की गरिमा गिरा लेते हैं। 

प्रधानमंत्री से माफी मांगने का आग्रह करते हुए खेरा ने कहा, "आपने मिसाल कायम की है। संवैधानिक पद के संबंध में आधिकारिक क्या है? आपने संविधान की शपथ ली है। आप अनाधिकारिक स्रोतों से सूचना ग्रहण करते हैं और विपक्ष के नेताओं पर सवाल उठाते हैं।"

खेरा ने आरटीआई याचिका का जिक्र करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री द्वारा राजनीतिक अभियान के दौरान भाषण देने के संबंध में जानकारी मांगी गई। जानकारी राजनीतिक मसलों या सरकार से संबंधित नहीं थी। इसलिए प्रधानमंत्री के संबंध में वह विभिन्न अनाधिकारिक या आधिकारिक स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने के लिए अधिकृत हैं।"

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि मोदी से उनके द्वारा मनमोहन सिंह, पूर्व सेना प्रमुख दीपक कूपर और पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर के खिलाफ पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाने का सबूत मांगा। 

उन्होंने कहा, "हम पिछले चार साल से देख रहे हैं कि मोदी हर स्तर के चुनाव में अपना धैर्य खो रहे हैं और अजीब तरह की बात करने लगते हैं। इस तरह का ओछा बयान देश ने कभी किसी प्रधानमंत्री के मुंह से नहीं सुनी।"

खेरा ने कहा, "वह विश्व के सामने भारत की किस तरह की छवि बना रहे हैं? किसी देश के प्रधानमंत्री के एक-एक शब्द का दुनियाभर में विश्लेषण होता है। उनको देश से माफी मांगनी चाहिए। उनका बयान निम्न स्तर का जुमला था। अगर वह माफी नहीं मांगेंगे तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा होगा।"

--आईएएनएस

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दिल्ली सरकार के कामकाज में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाते हुए और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल  ने कहा कि आज लोगों को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह जैसे शिक्षित प्रधानमंत्री की कमी खल रही है. बता दें कि सीएम केजरीवाल हालांकि अब पूर्व प्रधानमंत्री की तारीफ कर रहे हैं मगर पूर्व पीएम मनमोहन 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव और उसके अगले साल लोकसभा चुनाव के दौरान केजरीवाल के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के निशाने पर रहे थे. 

अरविंद केजरीवाल ने गिरते रुपये पर वॉल स्ट्रीट पत्रिका का एक लेख शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘लोगों को डॉ. मनमोहन सिंह जैसे शिक्षित प्रधानमंत्री की कमी खल रही है. पीएम शिक्षित होना चाहिए. लोगों को लग रहा है कि प्रधानमंत्री तो पढ़ा लिखा ही होना चाहिए. ’ बता दें कि पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी धारी हैं, उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाया भी है. वह वित्त मंत्री के रूप में भी अपनी सेवा दे चुके हैं और प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों के सलाहकार भी रह चुके हैं.  

केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्य पूर्व में भी पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यताओं एवं उनकी डिग्री की प्रमाणिकता पर सवाल उठा चुके हैं. मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में जारी जल संकट को लेकर ‘गंदी राजनीति ’ करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा , ‘भाजपा दिल्लीवासियों के पानी के साथ गंदी राजनीति कर रही है. दिल्ली को 22 सालों से यह पानी मिल रहा था. अचानक हरियाणा की भाजपा सरकार ने इस आपूर्ति में भारी कमी कर दी. ऐसा क्यों? कृपया अपनी गंदी राजनीति से लोगों को परेशान ना करें.’   

केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्य पूर्व में भी पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यताओं एवं उनकी डिग्री की प्रमाणिकता पर सवाल उठा चुके हैं. मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजधानी में जारी जल संकट को लेकर ‘गंदी राजनीति ’ करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा , ‘भाजपा दिल्लीवासियों के पानी के साथ गंदी राजनीति कर रही है. दिल्ली को 22 सालों से यह पानी मिल रहा था. अचानक हरियाणा की भाजपा सरकार ने इस आपूर्ति में भारी कमी कर दी. ऐसा क्यों? कृपया अपनी गंदी राजनीति से लोगों को परेशान ना करें.’    

 

बंगारपेट : कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत सुनिश्चित करने के इरादे से प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पहले चुनावी सभा का आगाज बांगरपेट से किया. बागंरपेट में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये चुनाव कौन एमएलए बने कौन न बने, कौन सी पार्टी जीते, कौन न जीते, किसकी सरकार बने, किसकी न बने, यह चुनाव सिर्फ सीमित हेतू के लिए नहीं है. यह चुनाव 5 साल बाद कर्नाटक का भविष्य कैसा होगा, नौजवान का भविष्य कैसा होगा, इसका फैसला करने का चुनाव है. 

उन्होंने कहा कि आज पूरा देश कांग्रेस को , कांग्रेस के कल्चर को, उसके कारनामों को, उसके नेताओं को, उसकी नियत को भलीभांति पहचान गया है. जैसे-जैसे लोगों को कांग्रेस के कारनामों का पता चलता है, वैसे वैसे लोग कांग्रेस की विदाई कर रहे हैं. बैंड-बाजे के साथ कांग्रेस की सभी जगहों से विदाई हो रही है. गोवा, मध्य प्रदेश, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, असम सभी जगहों पर से कांग्रेस को हार की मुंह देखनी पड़ी. अब आप बताइये, कांग्रेस कर्नाटक में क्या होगा.

पीएम ने कहा कि कांग्रेस के वंशवाद और परिवारवाद पर इतनी नाराजगी क्यों है? यह हमारा कर्नाटक प्रदेश, हिंदुस्तान की आन-बान-शान है. यह मामूल प्रदेश नहीं है. यहां के शहरों की सारे दुनिया में चर्चा है. लेकिन पांच साल के अंदर कर्नाटक की इज्जत को मिट्टी में मिला दिया. लोकतंत्र को तबाह कर दिया. 

पीएम ने कहा कि कांग्रेस छह बीमारियों से पीड़ित है, यह जहां जाती है, वहां यह फैला देती है. लोकतंत्र की भावना को, संविधान की मूल भावना को कांग्रेस की ये चीजें नोच रही हैं. ये हैं कांग्रेस कल्चर, सांप्रदायिकता, जातिवाद, क्राइम, भ्रष्टाचार, ठेकेदारी. ये 6 सी (C) कर्नाटक के भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं. 

कांग्रेस को जब सरकार में आने का मौका मिलता है, तो कांग्रेस यह मानकर चलती है कि देश की जनता ने उन्हें करप्शन करने का, बेईमानी, भाईभतीजावाद, सारे बुरे काम करने का ठेका दिया है. यही कांग्रेस की सोच है. अलग-अलग राज्यों में इनके दरबारी बैठे हुए हैं, इनका काम है दिल्ली के नामदारों के सामने वफादारी निभाते हैं. नामदार के वफादार लोगों सत्ता से हटाना पड़ेगा और कर्नाटक की वफादार लोगों को लाना पड़ेगा. 

उन्होंने कहा कि इन्हें नामदारों का विकास करने में इंटरेस्ट है, कामदारों का विकास करने में नहीं. दिल्ली में दस साल मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री थे, मगर रिमोट कंट्रोल 10 जनपथ में मैडम के पास था. चार साल से दिल्ली में आपने मोदी की सरकार बनाई है, भाजपा की सरकार बनाई है, हमारा भी रिमोट कंट्रोल सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी हैं. यही मेरे हाईकमान हैं. यह जो कहेगा, मैं वही करूंगा. हाई कमान कहेगा कि मोदी बैठ जाओ, तो बैठ जाऊंगा, खड़े हो जाओ, तो खड़ा हो जाऊंगा. क्योंकि लोकतंत्र में हाईकमान जनता जनार्दन होती है. 

पीएम ने कहा कि जहां कांग्रेस की सरकार बनती है, वहां बुराइयां फलती-फुलती है. मगर जहां भाजपा को मौका मिलता है, वहां विकास होता है, अच्छाईयों को अवसर बढ़ता है. 

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार का बिगुल थमने में बस एक दिन बाकी है, इससे पहले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जनता को लुभाने की कोई भी कोशिश जाया नहीं जाने दे रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी के लिए पीएम मोदी ताबड़तोड़ रैली कर भाजपा के पक्ष में हवा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, तो वहीं राहुल गांधी भी सत्ता बचाने के लिए जोर आजमाइश लगा रहे है. चुनावी सभा अब अपने अंतिम पड़ाव में है, इसलिए पीएम मोदी की कर्नाटक में आज एक नहीं, बल्कि चार रैलियां हैं, वहीं राहुल गांधी की भी दो रैलियां है. यह अभी पीएम मोदी की आज की पहली रैली है. 

गौरतलब है कि कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है और नतीजे 15 मई को आएंगे. इस चुनाव में कांग्रेस की ओर से जहां मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ही CM कैंडिडेट हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी की ओर से बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं.

उन्नाव और कठुआ गैंगरेप मामलों पर काफी समय तक चुप्पी साधने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निशाना साधा है। मनमोहन सिंह का कहना है कि बोलने की जो सलाह मोदी जी उन्हें दिया करते थे अब मोदी जी को वह सलाह खुद पर आजमानी चाहिए। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी के लिए कहा, “उन्हें अपनी उस सलाह को खुद फॉलो करना चाहिए जो वो मुझे देते थे और अधिक बोलें।” पूर्व प्रंधानमंत्री ने कहा कि वे खुश है कि आखिरकार पिछले शुक्रवार भीम राव अंबेडकर की जयंती पर उन्होंने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि भारत की बेटियों को न्याय जरूर मिलेगा और दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा।

वहीं जब मनमोहन सिंह से यह पूछा गया कि आप बीजेपी के उस व्यवहार को क्या कहेंगे जब वे आप पर तंज कसते हुए आपको मौनमोहन सिंह बुलाते थे। इस पर पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, “इस प्रकार की टिप्पणियों के साथ पूरी जिंदगी रहेंगे लेकिन मुझे लगता है कि पीएम नरेंद्र मोदी को वो सलाह माननी चाहिए जो वो अक्सर मुझे बोलने की सलाह देते थे। मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला कि वे मेरे न बोलने की आलोचना करते थे। मैं यह महसूस करता हूं कि जो सलाह वे मुझे दे रहे थे उसपर उन्हें खुद अमल करना चाहिए।”

इसके बाद मनमोहन सिंह ने कहा, “मुझे लगता है कि जो प्रशासन में होते हैं उन्हें समय पर अपने अनुयायियों की अगुवाई करने के लिए बोलना चाहिए।” आपको बता दें कि साल 2012 दिल्ली गैंगरेप के दौरान जब कांग्रेस की सरकार थी तब बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के चुप रहने को लेकर उनपर काफी तंज कसे थे। इस पर मनमोहन सिंह ने कहा कि दिल्ली गैंगरेप में कांग्रेस पार्टी और उनकी सरकार द्वारा रेप जैसे अपराध को लेकर जो कानून में बदलाव किया जा सकता था और जो कार्रवाई की जा सकती थी वो उन्होंने की थी।

 
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