नई दिल्ली: शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) ने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) से पहले बड़ा बयान दिया है. शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) ने कहा कि आतंक के खिलाफ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) का रुख नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) जितना कड़ा नहीं था. हालांकि शीला दीक्षित ने अपने बयान से थोड़े ही समय बाद सफाई दी है. उन्होंने ट्वीट किया, 'मैंने देखा है कि कुछ मीडिया संस्थान एक इंटरव्यू के दौरान दिए गए मेरी टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं. मैंने कहा है. ऐसा कुछ लोगों को लग सकता है कि मोदी आतंकवाद के खिलाफ सख्त हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह केवल चुनावी हथकंडा से ज्यादा कुछ और नहीं है.' उन्होंने कहा, 'मैंने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा एक चिंता का विषय है और इंदिरा जी कड़े रुख वाली नेता रहीं.'

बता दें कि एक इंटरव्यू में शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) ने कहा था कि आतंक के खिलाफ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) का रुख नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) जितना कड़ा नहीं था. दिल्ली कांग्रेस प्रमुख शीला दीक्षित ने कहा था कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों (Mumbai Terror Attack) के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 'प्रतिक्रिया', पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की तरह 'मजबूत और दृढ़ नहीं' थी. हालांकि इसके साथ ही शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) ने यह भी कहा है कि नरेंद्र मोदी के ज्यादातर काम राजनीति से प्रेरित होने के साथ ही राजनीतिक लाभ उठाने के लिए होते हैं.

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चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कयासों पर विराम लगाते हुए मंगलवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। अमरिंदर ने यहां मीडिया से कहा कि मनमोहन सिंह कभी उम्मीदवारी नहीं चाह रहे थे, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं।

ऐसे कयास थे कि कि पूर्व प्रधानमंत्री अमृतसर से कांग्रेस उम्मीदवार होंगे।

मुख्यमंत्री ने मनमोहन सिंह के साथ शनिवार को दिल्ली में हुई अपनी मुलाकात को एक सद्भावना मुलाकात बताया।

अमरिंदर ने कहा, "हम उनकी सेहत का हाल जानने गए थे। हमने पूर्व प्रधानमंत्री को पंजाब में कांग्रेस की योजना के बारे में जानकारी दी।"

राज्य की 13 लोकसभा सीटों के चुनाव के लिए मतदान अंतिम चरण में 19 मई को होगा।

--आईएएनएस

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पणजी: गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उन दावों को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा है कि 'पर्रिकर ने उनसे (राहुल से) यह कहा था कि उनका नए राफेल सौदे से कुछ लेना-देना नहीं है।' इसके साथ ही पर्रिकर ने कहा कि कांग्रेस नेता को 'एक अस्वस्थ व्यक्ति से अपनी मुलाकात का इस्तेमाल राजनीतिक मौकापरस्ती' के लिए नहीं करना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में पर्रिकर ने कहा, "मैं काफी दुख महसूस कर रहा हूं कि आपने इस मुलाकात का प्रयोग अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया। मेरे साथ बिताए गए पांच मिनट में, आपने न तो राफेल पर कुछ कहा और न ही हमने इसके संबंध में कोई चर्चा की।"

पर्रिकर ने कहा कि 'हमारी मुलाकात के बारे में मीडिया रपटों के बारे में सुनकर मुझे दुख हुआ।'

उन्होंने कहा, "मीडिया में यह रपट है कि मैंने आपसे कहा है कि राफेल की खरीद प्रक्रिया में मैं कहीं नहीं था और न ही तब मुझे इसकी कोई सूचना थी। आपके साथ मुलाकात के दौरान राफेल के बारे में किसी तरह की कोई चर्चा ही नहीं हुई थी।"

पर्रिकर ने यह पत्र तब लिखा है, जब राहुल ने उनसे मुलाकात के बाद सार्वजनिक रूप से यह कहा कि 'पर्रिकर ने उनसे कहा कि नए राफेल सौदे से उनका कुछ लेना-देना नहीं है।'

पर्रिकर ने कहा, "कल (मंगलवार को) बिना किसी पूर्व जानकारी के आपने मुझसे मुलाकात की और मेरे स्वास्थ्य के बारे में पूछा..आपने एक शिष्टाचार भेंट की और उसके बाद राजनीतिक स्वार्थ में आपके इतना नीचे गिर जाने से मेरे दिमाग में आपकी मुलाकात की ईमानदारी और उद्देश्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।"

यह बताते हुए कि अंतर सरकारी समझौता (आईजीए) और राफेल की खरीद, रक्षा खरीद प्रक्रिया के तहत हुई है, पर्रिकर ने कहा, "गहरे दुख के साथ, मैं इस उम्मीद के साथ आपको लिख रहा हूं कि आप सच्चाई उजागर करेंगे।"

--आईएएनएस

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खिल्ली उड़ाते हुए मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें प्रेस से बात करने में कभी डर नहीं लगा। उन्होंने यह बात इसलिए कही कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अबतक के कार्यकाल में कभी संवाददाता सम्मेलन आयोजित नहीं किया है।

उल्लेखनीय है कि मनमोहन सिंह विदेश भी जाते थे तो विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जाते और आते थे। अखबारों में खबर के साथ छपता था--'प्रधानमंत्री के विशेष विमान से'। मई, 2014 के बाद से यह परंपरा बिल्कुल बंद है। 

मनमोहन ने अपनी किताब 'चेंजिंग इंडिया' के विमोचन के मौके पर यह भी कहा कि भारत एक प्रमुख आर्थिक वैश्विक शक्ति बनने वाला है।

पांच खंडों में प्रकाशित इस पुस्तक, चेंजिंग इंडिया, में कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में उनके 10 वर्षो के कार्यकाल, तथा एक अर्थशास्त्री के रूप में उनके जीवन के विवरण शामिल हैं।

मनमोहन ने कहा, "मैं कोई ऐसा प्रधानमंत्री नहीं था, जिसे प्रेस से बात करने में डर लगता हो। मैं नियमित तौर पर प्रेस से मिलता था, और जब भी मैं विदेश दौरे पर जाता था, लौटने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन जरूरी बुलाता था।"

उन्होंने कहा, "उन तमाम संवाददाता सम्मेलनों को इस पुस्तक में वर्णित किया गया है।"

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा, "लोग कहते हैं कि मैं एक मौन प्रधानमंत्री था, लेकिन यह किताब उन्हें इसका जवाब देगी। मैं प्रधानमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करना चाहता, लेकिन जो चीजें हुई हैं, वे पांच खंडों की इस पुस्तक में मौजूद हैं।"

मनमोहन का बयान ऐसे समय में आया है, जब इसके पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री के अबतक के कार्यकाल के दौरान एक भी संवाददाता सम्मेलन आयोजित न करने के लिए मोदी का मजाक उड़ाया है।

मनमोहन ने देश के भविष्य के बारे में कहा कि तमाम गड़बड़ियों के बावजूद भारत एक प्रमुख वैश्विक ताकत बनने वाला है।

सिंह ने विक्टर ह्यूगो का उद्धरण देते हुए कहा, "एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उदय एक ऐसा विचार है, जिसका समय आ गया है और धरती पर कोई भी ताकत इस विचार को रोक नहीं सकती।"

मनमोहन ने 1991 में तत्कालीन वित्तमंत्री के रूप में अपने बजट भाषण के दौरान भी विक्टर ह्यूगो का उद्धरण पेश किया था।

--आईएएनएस

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 पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी और जीएसटी के निर्णय को आर्थिक अराजकता पैदा करने वाला फैसला करार दिया। डॉ. सिंह ने बुधवार को यहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "नोटबंदी और जीसएटी के नासमझ और बेतुके फैसलों तथा 'सरकार प्रायोजित कर आतंकवाद' ने संगठित व असंगठित क्षेत्रों पर कड़ा प्रहार किया है। छोटे, मझोले और लघु उद्योग नोटबंदी और जीएसटी की दोहरी मार से बंद होने की कगार पर हैं।"

मनमोहन ने आगे कहा, "मोदी सरकार नोटबंदी को सही साबित करने के लिए हर रोज एक झूठी कहानी गढ़ने में व्यस्त है। लेकिन सच्चाई और वास्तविकता यह है कि नोटबंदी मोदी सरकार द्वारा लागू की गई एक भयावह और ऐतिहासिक भूल साबित हुई है। नोटबंदी का कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ, न तो तीन लाख करोड़ रुपये का कालाधन पकड़ा गया, जिसका दावा मोदी सरकार ने 10 नवंबर, 2016 को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष किया था। साथ ही नकली नोट पर लगाम नहीं लगी। आतंकवाद और नक्सलवाद को रोकने के दावे खोखले साबित हुए हैं।"

पूर्व प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "नोटबंदी छोटे, मझोले और लघु उद्योग, व्यवसाय, किसानों और गृहणियों की जीवन भर की बचत पर एक सोचा-समझा हमला था। अनेकों खुलासों ने यह साफ कर दिया है कि नोटबंदी किस प्रकार रातों-रात कालेधन को सफेद करने की संदेहपूर्ण योजना थी। इसने बैंकों की लाइनों में खड़े 120 साधारण लोगों की जान ले ली। इसके साथ ही मोदी सरकार की सरपरस्ती में पुराने नोटों को नए नोटों में बदलने का एक समानांतर धंधा चलता रहा।"

मनमोहन ने कहा, "भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्त मंत्रालय बीच काफी नाजुक रिश्ते होते हैं, और दोनों को मिलकर काम करना होता है। दोनों की अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं, लिहाजा दोनों की पहचान के साथ दोनों के बीच सद्भावना बने रहना भी आवश्यक है।"

डॉ. सिंह से पूछा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक क्षेत्र में नोटबंदी और जीएसटी के दो बड़े फैसले लिए हैं और वह हर सभा में कांग्रेस सरकार और आपके निर्णयों को चुनौती देते हैं। इस पर उन्होंने कहा, "वह मोदी जी की चुनौती का संवाददाता सम्मेलन में जवाब नहीं देंगे, इस देश की जनता वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजों के जरिए उन्हें जवाब देगी।"

उन्होंने कहा, "मोदी ने वर्ष 2014 के चुनाव में युवाओं को हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का जो वादा किया था, वह झूठा साबित हुआ।"

कांग्रेस के कम होते जनाधार को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. सिंह ने कहा, "कांग्रेस यह महसूस कर रही है और समस्याओं का सामना भी कर रही है, क्योंकि वर्ष 2014 के चुनाव के समय यह भ्रम फैलाया गया कि संप्रग सरकार के काल में कथित तौर पर भ्रष्टाचार हुआ। वहीं मोदी ने वर्ष 2014 चुनाव में बड़े-बड़े वादे किए थे, जो अब खोखले साबित हो रहे हैं। दूसरी तरफ मोदी सरकार ने उन्हीं योजनाओं को आगे बढ़ाया, जिन्हें संप्रग सरकार ने शुरू की थी। बस उनमें उन्होंने कुछ लीपा-पोती जरूर की।

-- आईएएनएस 

 

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नोटबंदी को एक 'अशुभ' और 'बिना सोचे समझे' उठाया गया कदम करार देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि इस फैसले के जख्म व निशान वक्त के साथ और दिखाई दे रहे हैं और इसके गंभीर प्रभाव अभी भी सामने आ रहे हैं। नोटबंदी के फैसले के दो साल पूरे होने पर उन्होंने सरकार से आगे किसी प्रकार के ऐसे अपरंपरागत, अल्पकालिक आर्थिक उपायों को स्वीकृति नहीं देने को भी कहा जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में और अधिक अनिश्चितता का कारण बन सके।

मनमोहन ने कहा कि आठ नवंबर यह याद करने का दिन है कि 'कैसे एक आर्थिक विपदा ने लंबे समय के लिए राष्ट्र को प्रभावित किया।' उन्होंने सरकार से आर्थिक नीतियों में विश्वसनीयता व पारदर्शिता बहाल करने का आग्रह किया।

मनमोहन ने एक बयान में कहा, "मोदी सरकार द्वारा 2016 में बिना सोच-समझकर उठाए गए अशुभ कदम, नोटबंदी के आज दो साल पूरे हो गए हैं। इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज में जो विध्वंस हुआ, उसके सबूत आज सभी के सामने हैं।"

उन्होंने कहा, "अक्सर कहा जाता है कि समय सबकुछ ठीक कर देता है। लेकिन दुर्भाग्यवश नोटबंदी के मामले में इसके जख्म और निशान वक्त से साथ और हरे होते जा रहे हैं।"

मनमोहन ने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़, मझोले और छोटे कारोबार अभी भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं।"

उन्होंने कहा, "नोटबंदी ने हर व्यक्ति पर प्रभाव डाला। इसमें हर उम्र, लिंग, धर्म, समुदाय और क्षेत्र के लोग शामिल थे।"

उन्होंने कहा, "मैं सरकार से आर्थिक नीतियों में निश्चितता बहाल करने का आग्रह करता हूं। आज यह याद करने का दिन है कि कैसे एक आर्थिक विपदा ने लंबे समय के लिए राष्ट्र को प्रभावित किया और यह समझने की जरूरत है कि आर्थिक नीतियों को परिपक्वता व सोच-विचार के साथ संभाला जाना चाहिए।"

उन्होंने यह भी कहा कि दो साल बाद भी अर्थव्यवस्था नोटबंदी के झटके से उबर नहीं सकी है। उन्होंने कहा कि इस कदम ने रोजगार पर सीधा प्रभाव डाला क्योंकि अर्थव्यवस्था पहले से ही युवाओं के लिए नए रोजगार उपलब्ध कराने में संघर्ष कर रही थी।

मनमोहन ने कहा, "हमें अभी भी नोटबंदी के पूर्ण प्रभाव को समझना और उसका अनुभव करना है। रुपये के घटते मूल्य व बढ़ती तेल कीमतों के साथ व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए विपरीत परिस्थितियां पैदा हो रहीं हैं।"

उन्होंने कहा, "इसलिए सावधानी बरतते हुए आगे कोई भी अपरंपरागत और अल्पकालिक उपाय नहीं किया जाना चाहिए, जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में और अधिक अनिश्चितता का कारण बन सकते हैं।"

--आईएएनएस

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पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने परवर्ती और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मतदाताओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल करार दिया। उन्होंने मोदी पर केंद्रीय जांच ब्यूरो और विश्वविद्यालयों जैसे राष्ट्रीय संस्थानों का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। वह कांग्रेस नेता शशि थरूर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखी गई किताब 'पैराडॉक्सिकल प्राइम मिनिस्टर : नरेंद्र मोदी एंड हिज इंडिया' के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। 

सिंह ने कहा कि मोदी की सरकार भारत की परिकल्पना को खतरा है और उनकी बातों और वादों से मतदाताओं का भरोसा उठ गया है। 

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, "उनकी (मोदी) अगुवाई वाली सरकार व्यापक सांप्रदायिक हिंसा, मॉब लिंचिंग और गौ-रक्षण के आगे ज्यादातर चुप ही रहती है। हमारे विश्वविद्यालयों और सीबीआई जैसे राष्ट्रीय संस्थानों का माहौल दूषित हो गया है।"

उन्होंने कहा, "आर्थिक मोर्चे पर कथित तौर पर विदेशों में पड़ा अरबों रुपये का काला धन वापस लाने के वादे जो किए गए थे, उस दिशा में कुछ नहीं हुआ। वहीं, जल्दबाजी में विमुद्रीकरण कर दिया गया। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) अर्थव्यवस्था के लिए आपदा साबित हो रही है।"

मनमोहन ने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गईं, क्योंकि मोदी सरकार ने तेल की कीमतें कम होने का लाभ भारत की जनता को देने के बजाय पेट्रोल और डीजल पर अत्यधिक उत्पाद कर लगा दिया।"

सिंह ने कहा कि मोदी सरकार की उपलब्धि खोखले वादे के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। उन्होंने मौजूदा सरकार को अक्खड़ फैसले लेने वाली सरकार करार दिया।

--आईएएनएस

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 सर्वोच्च न्यायालय के दिवंगत न्यायाधीश, न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा द्वारा 1990 के दशक में दिए गए प्रसिद्ध मगर विवादास्पद फैसले 'हिंदुत्व जीने का तरीका' को दोषयुक्त बताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि एक संस्थान के रूप में न्यायपालिका को, संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना की हिफाजत करने के प्राथमिक कर्तव्य की अपनी दृष्टि नहीं खोनी चाहिए। मनमोहन ने कहा कि यह काम पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है, क्योंकि राजनीतिक विवादों और चुनावी लड़ाइयों को धार्मिक रंगों, प्रतीकों, मिथों और पूर्वाग्रहों के साथ व्यापक रूप से घालमेल किया जा रहा है।

सिंह दिवंगत कम्युनिस्ट नेता ए.बी. बर्धन स्मृति व्याख्यान दे रहे थे। व्याख्यान का विषय था 'धर्मनिरपेक्षता और संविधान की रक्षा'।

पूर्व प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए न्यायमूर्ति वर्मा के फैसले की आलोचना की कि इसने एक तरह से एक प्रकार की संवैधानिक पवित्रता को नुकसान पहुंचाया, जो देश की राजनीतिक बातचीत में बोम्मई फैसले के जरिए बहाल हुई थी, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि धर्मनिरपेक्षता, संविधान का एक बुनियादी ढांचा है।

मनमोहन ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा के फैसले का गणराज्य में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों एवं प्रथाओं के बारे में राजनीतिक दलों के बीच जारी बहस पर एक निर्णायक असर डाला है।

सिंह ने कहा, "इस फैसले ने हमारी राजनीतिक बातचीत को कुछ असंतुलित कर दिया, और कई लोग मानते हैं कि निस्संदेह इस फैसले को पलटने की जरूरत है।"

--आईएएनएस

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को अगले लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए विपक्ष से एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और किसानों की परेशानी के कारण देशभर में छाई संकट की स्थिति के लिए मोदी सरकार पर हमला बोला।

मनमोहन सिंह ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार वर्ष 2014 के चुनाव से पहले लोगों से किए गए वादों को पूरा करने और ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने में बुरी तरह अफल रही है। 

मनमोहन सिंह ने रामलीला मैदान में आयोजित विरोध रैली में कहा, "परिस्थितियों से पता चलता है कि स्थिति अब नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। किसान, व्यापारी, युवा अपने-अपने क्षेत्र में संकट झेल रहे हैं। सरकार आम लोगों से किए अपने वादों को पूरा करने में बुरी तरह नाकाम रही है।" 

उन्होंने कहा,"केंद्र में पार्टी को बदलने का समय आ गया है और यह जल्द ही होगा।" 

मनमोहन ने विपक्षी पार्टियों से आग्रह करते हुए कहा,"वर्तमान सरकार का विरोध करने वाले दलों को अपने मतभेदों को भूलना चाहिए और देश की एकता और धर्मनिरपेक्षता की पहचान को बनाए रखने के लिए एक साथ आना चाहिए। हमें एकता के सामूहिक लाभ को साबित करने की आवश्यकता है।"

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ पूर्व प्रधानमंत्री राजघाट से शुरू हुए विरोध मार्च में शामिल हुए और रामलीला मैदान पहुंचे। 

यह मार्च भारत बंद का हिस्सा है। 

पूर्व प्रधानमंत्री ने सरकार के विरोध में कांग्रेस का साथ दे रही लगभग 20 राजनीतिक विपक्षी दलों की उपस्थिति को सराहा।

उन्होंने कहा कि अगले साल आम चुनावों से पहले यह एक महत्वपूर्ण क्षण है और हमें इस (एकता) का लाभ उठाना चाहिए और देश में एक आंदोलन शुरू करना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस और वामपंथी दलों द्वारा पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के खिलाफ बुलाया गया था।

विरोध प्रदर्शन जनता दल-सेक्युलर, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, लोकतंत्रिक जनता दल, राष्ट्रीय लोक दल, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों द्वारा समर्थित है।

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और भाजपानीत सरकार पर कृषि संकट, खराब आर्थिक स्थिति और पड़ोसी देशों के साथ बिगड़ते संबंधों का आरोप लगाया। सिंह कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की किताब 'शेड्स ऑफ ट्रथ-ए जर्नी डिरेल्ड' के लांच के मौके पर यह बातें कही। 

उन्होंने कहा, "मोदी सरकार ने देश में मौजूद कृषि संकट का सकारात्मक ढंग से सामना नहीं किया। किसान को अभी तक उनके उत्पाद के लाभकारी मूल्य नहीं दिए गए।"

उन्होंने कहा कि सिब्बल की किताब मोदी सरकार के चार वर्षो के कार्यकाल का समग्र विश्लेषण है।

उन्होंने कहा, "इसमें सरकार द्वारा 2014 लोकसभा चुनाव से पहले किए गए उन असफल वादों के बारे में बताया गया है, जिसे सरकार पूरा करने में विफल रही।"

मोदी के दो करोड़ नौकरियां देने के वादे के बारे में सिंह ने कहा, "गत चार वर्षो में रोजगार दर में कमी आई है।"

उन्होंने कहा, "मोदी सरकार द्वारा बड़ी संख्या में रोजगार सृजन के आंकड़े से लोग संतुष्ट नहीं हैं। औद्योगिक उत्पादन और आयात सुस्त हुआ है। मेक इन इंडिया और स्टैंड अप इंडिया जैसे कार्यक्रम औद्योगिक उप्तादन में अभी तक पर्याप्त प्रभाव नहीं डाल पाए हैं।"

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे उद्योगों को अभी भी इज ऑफ डूइंग बिजनेस से फायदा होना बाकी है और नोटबंदी व जीएसटी से ये उद्योग प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा, "महिला, दलित और अल्पसंख्यक असुरक्षा के माहौल में रह रहे हैं। मोदी सरकार धीरे ही सही, लेकिन उन मूल्यों को समाप्त कर रही है, जिसकी रक्षा किसी भी लोकतांत्रिक पार्टी को करनी चाहिए।"

सिंह ने कहा, "पड़ोसियों के साथ हमारे संबंध बीते चार वर्षो में बहुत खराब हो गए हैं। मोदी सरकार विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से संबंधित समस्याएं सुलझाने में विफल रही है।"

--आईएएनएस

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