नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से पहले गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की। सीतारमण पांच जुलाई को लोकसभा में अपना पहला बजट पेश करेंगी। आर्थिक सुधार के वास्तुकार के रूप में प्रसिद्ध सिंह वित्तमंत्री भी रह चुके हैं। वह 1991 से लेकर 1996 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव की सरकार में वित्तमंत्री थे।

इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। इसे शिष्टाचार मुलाकात के रूप में देखा जा रहा है।

मुलाकात के दौरान उनकी क्या बातचीत हुई इसकी जानकारी नहीं मिली, लेकिन नई सरकार के पहले आम बजट के पूर्व यह मुलाकात हुई है, इसलिए माना जा रहा है कि बातचीत अर्थव्यवस्था को लेकर हुई होगी।

सूत्रों ने बताया कि हालांकि यह शिष्टाचार मुलाकात थी, लेकिन वित्तमंत्री ने अर्थव्यवस्था को वापस विकास के पथ पर लाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को लेकर विचार-विमर्श किया होगा।

सिंह 1982 से लेकर 1985 तक भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रह चुके हैं। इसके बाद वह 1985 से लेकर 1987 तक योजना आयोग (अब नीति आयोग) के उपाध्यक्ष रहे हैं।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को नीति आयोग की गवनिर्ंग काउंसिल की बैठक में उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा के लिए शनिवार को कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। 

पार्टी कार्यालय में आयोजित इस बैठक में मध्य प्रदेश (कमलनाथ), राजस्थान (अशोक गहलोत), पुडुचेरी (वी. नारायणसामी) और कर्नाटक (एच. डी. कुमारस्वामी) के मुख्यमंत्री ने भाग लिया।

एक कांग्रेस नेता ने कहा, "उन्होंने आज की बैठक में कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा शासित राज्यों के उठाए जाने वाले प्रस्तावित एजेंडे और मुद्दों पर चर्चा की।"

नीति अयोग बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस की न्याय योजना भारत में न्यूनतम आय गारंटी गरीबी खत्म करने और नरेंद्र मोदी सरकार के तहत 'बंद हो गए' आर्थिक इंजन को फिर से शुरू करने के युग की शुरुआत करेगी।

सिंह ने एक बयान में कहा कि न्याय को लागू करने के बाद हर साल प्रत्येक परिवार को 72,000 रुपये दिए जाएंगे, जिसका लाभ देश की सबसे गरीब 20 फीसदी आबादी को मिलेगा और इसे लागू करने के लिए मध्य वर्ग पर कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजकोषीय अनुशासन के लिए प्रतिबद्ध है और न्याय की लागत अपने चरम पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 1.2 से 1.5 फीसदी होगा।

सिंह ने कहा, "हमारी करीब 3,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में इस योजना को लागू करने की राजकोषीय क्षमता है और न्याय के वित्त पोषण के लिए मध्य वर्ग पर किसी प्रकार के नए कर को लगाने की आवश्यकता नहीं है। न्याय को जो आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा, उससे राजकोषीय अनुशासन में और मदद मिलेगी। इसे विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद परिकल्पित किया गया है।"

उन्होंने कहा कि न्याय एक शक्तिशाली विचार है जिसके दो उद्देश्य हैं।

उन्होंने कहा, "25 मार्च 2019 को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने न्याय - न्यूनतम आय योजना का अनावरण किया था, ताकि गरीबी के आखिरी अवशेष को भी हटाया जा सके और हमारे देश की रुकी पड़ी अर्थव्यवस्था में जान फूंकी जा सके।"

सिंह ने कहा कि न्याय को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है और देश में इस पर व्यापक चर्चा हो रही है।

उन्होंने कहा, "1947 में जब आजादी मिली थी, तो करीब 70 फीसदी भारतीय गरीब थे। पिछले सात दशकों में सरकारों की नीतियों के कारण गरीबी 70 फीसदी से घटकर अब 20 फीसदी रह गई है। अब वक्त आ गया है कि हम गरीबी के बचे खुचे अवशेष को भी खत्म करने का प्रण करें।"

सिंह ने कहा कि न्याय से हरेक भारतीय परिवार को बुनियादी सम्मान मिलेगा।

उन्होंने कहा, "प्रत्यक्ष आय समर्थन से न्याय हमारे गरीबों को आर्थिक स्वतंत्रता और पसंद से सशक्त बनाएगा। न्याय के साथ भारत न्यूनतम आय गारंटी के एक नए युग में प्रवेश करेगा।"

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र मंगलवार को जारी किया। इस मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि घोषणापत्र 'प्रगतिशील अर्थव्यवस्था' पर केंद्रित है व बताता है कि दीर्घकालीन गरीबी से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है।

उन्होंने यहां मीडिया से कहा, "घोषणा पत्र का उद्देश्य प्रगतिशील अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना पर ध्यान केंद्रित करना है। सभी चाहते हैं कि भारत एक समृद्ध देश बने, एक ऐसा देश जहां समृद्धि व उत्पादकता साथ-साथ बढ़ें।"

मनमोहन सिंह ने कहा कि कांग्रेस का मकसद एक मजबूत, उद्देश्यपूर्ण व आधुनिक बाजार अर्थव्यवस्था बनाना है।

उन्होंने कहा, "यह घोषणा पत्र बताता है .. कि कैसे दीर्घकालीन गरीबी से छुटकारा पाया जाए और लाखों लोगों की उन्नति हो।"

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) ने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) से पहले बड़ा बयान दिया है. शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) ने कहा कि आतंक के खिलाफ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) का रुख नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) जितना कड़ा नहीं था. हालांकि शीला दीक्षित ने अपने बयान से थोड़े ही समय बाद सफाई दी है. उन्होंने ट्वीट किया, 'मैंने देखा है कि कुछ मीडिया संस्थान एक इंटरव्यू के दौरान दिए गए मेरी टिप्पणियों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं. मैंने कहा है. ऐसा कुछ लोगों को लग सकता है कि मोदी आतंकवाद के खिलाफ सख्त हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह केवल चुनावी हथकंडा से ज्यादा कुछ और नहीं है.' उन्होंने कहा, 'मैंने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा एक चिंता का विषय है और इंदिरा जी कड़े रुख वाली नेता रहीं.'

बता दें कि एक इंटरव्यू में शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) ने कहा था कि आतंक के खिलाफ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) का रुख नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) जितना कड़ा नहीं था. दिल्ली कांग्रेस प्रमुख शीला दीक्षित ने कहा था कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों (Mumbai Terror Attack) के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 'प्रतिक्रिया', पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की तरह 'मजबूत और दृढ़ नहीं' थी. हालांकि इसके साथ ही शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) ने यह भी कहा है कि नरेंद्र मोदी के ज्यादातर काम राजनीति से प्रेरित होने के साथ ही राजनीतिक लाभ उठाने के लिए होते हैं.

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चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कयासों पर विराम लगाते हुए मंगलवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। अमरिंदर ने यहां मीडिया से कहा कि मनमोहन सिंह कभी उम्मीदवारी नहीं चाह रहे थे, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं।

ऐसे कयास थे कि कि पूर्व प्रधानमंत्री अमृतसर से कांग्रेस उम्मीदवार होंगे।

मुख्यमंत्री ने मनमोहन सिंह के साथ शनिवार को दिल्ली में हुई अपनी मुलाकात को एक सद्भावना मुलाकात बताया।

अमरिंदर ने कहा, "हम उनकी सेहत का हाल जानने गए थे। हमने पूर्व प्रधानमंत्री को पंजाब में कांग्रेस की योजना के बारे में जानकारी दी।"

राज्य की 13 लोकसभा सीटों के चुनाव के लिए मतदान अंतिम चरण में 19 मई को होगा।

--आईएएनएस

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पणजी: गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उन दावों को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा है कि 'पर्रिकर ने उनसे (राहुल से) यह कहा था कि उनका नए राफेल सौदे से कुछ लेना-देना नहीं है।' इसके साथ ही पर्रिकर ने कहा कि कांग्रेस नेता को 'एक अस्वस्थ व्यक्ति से अपनी मुलाकात का इस्तेमाल राजनीतिक मौकापरस्ती' के लिए नहीं करना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में पर्रिकर ने कहा, "मैं काफी दुख महसूस कर रहा हूं कि आपने इस मुलाकात का प्रयोग अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया। मेरे साथ बिताए गए पांच मिनट में, आपने न तो राफेल पर कुछ कहा और न ही हमने इसके संबंध में कोई चर्चा की।"

पर्रिकर ने कहा कि 'हमारी मुलाकात के बारे में मीडिया रपटों के बारे में सुनकर मुझे दुख हुआ।'

उन्होंने कहा, "मीडिया में यह रपट है कि मैंने आपसे कहा है कि राफेल की खरीद प्रक्रिया में मैं कहीं नहीं था और न ही तब मुझे इसकी कोई सूचना थी। आपके साथ मुलाकात के दौरान राफेल के बारे में किसी तरह की कोई चर्चा ही नहीं हुई थी।"

पर्रिकर ने यह पत्र तब लिखा है, जब राहुल ने उनसे मुलाकात के बाद सार्वजनिक रूप से यह कहा कि 'पर्रिकर ने उनसे कहा कि नए राफेल सौदे से उनका कुछ लेना-देना नहीं है।'

पर्रिकर ने कहा, "कल (मंगलवार को) बिना किसी पूर्व जानकारी के आपने मुझसे मुलाकात की और मेरे स्वास्थ्य के बारे में पूछा..आपने एक शिष्टाचार भेंट की और उसके बाद राजनीतिक स्वार्थ में आपके इतना नीचे गिर जाने से मेरे दिमाग में आपकी मुलाकात की ईमानदारी और उद्देश्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।"

यह बताते हुए कि अंतर सरकारी समझौता (आईजीए) और राफेल की खरीद, रक्षा खरीद प्रक्रिया के तहत हुई है, पर्रिकर ने कहा, "गहरे दुख के साथ, मैं इस उम्मीद के साथ आपको लिख रहा हूं कि आप सच्चाई उजागर करेंगे।"

--आईएएनएस

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खिल्ली उड़ाते हुए मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें प्रेस से बात करने में कभी डर नहीं लगा। उन्होंने यह बात इसलिए कही कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अबतक के कार्यकाल में कभी संवाददाता सम्मेलन आयोजित नहीं किया है।

उल्लेखनीय है कि मनमोहन सिंह विदेश भी जाते थे तो विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जाते और आते थे। अखबारों में खबर के साथ छपता था--'प्रधानमंत्री के विशेष विमान से'। मई, 2014 के बाद से यह परंपरा बिल्कुल बंद है। 

मनमोहन ने अपनी किताब 'चेंजिंग इंडिया' के विमोचन के मौके पर यह भी कहा कि भारत एक प्रमुख आर्थिक वैश्विक शक्ति बनने वाला है।

पांच खंडों में प्रकाशित इस पुस्तक, चेंजिंग इंडिया, में कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में उनके 10 वर्षो के कार्यकाल, तथा एक अर्थशास्त्री के रूप में उनके जीवन के विवरण शामिल हैं।

मनमोहन ने कहा, "मैं कोई ऐसा प्रधानमंत्री नहीं था, जिसे प्रेस से बात करने में डर लगता हो। मैं नियमित तौर पर प्रेस से मिलता था, और जब भी मैं विदेश दौरे पर जाता था, लौटने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन जरूरी बुलाता था।"

उन्होंने कहा, "उन तमाम संवाददाता सम्मेलनों को इस पुस्तक में वर्णित किया गया है।"

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा, "लोग कहते हैं कि मैं एक मौन प्रधानमंत्री था, लेकिन यह किताब उन्हें इसका जवाब देगी। मैं प्रधानमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करना चाहता, लेकिन जो चीजें हुई हैं, वे पांच खंडों की इस पुस्तक में मौजूद हैं।"

मनमोहन का बयान ऐसे समय में आया है, जब इसके पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री के अबतक के कार्यकाल के दौरान एक भी संवाददाता सम्मेलन आयोजित न करने के लिए मोदी का मजाक उड़ाया है।

मनमोहन ने देश के भविष्य के बारे में कहा कि तमाम गड़बड़ियों के बावजूद भारत एक प्रमुख वैश्विक ताकत बनने वाला है।

सिंह ने विक्टर ह्यूगो का उद्धरण देते हुए कहा, "एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उदय एक ऐसा विचार है, जिसका समय आ गया है और धरती पर कोई भी ताकत इस विचार को रोक नहीं सकती।"

मनमोहन ने 1991 में तत्कालीन वित्तमंत्री के रूप में अपने बजट भाषण के दौरान भी विक्टर ह्यूगो का उद्धरण पेश किया था।

--आईएएनएस

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 पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बुधवार को नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी और जीएसटी के निर्णय को आर्थिक अराजकता पैदा करने वाला फैसला करार दिया। डॉ. सिंह ने बुधवार को यहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "नोटबंदी और जीसएटी के नासमझ और बेतुके फैसलों तथा 'सरकार प्रायोजित कर आतंकवाद' ने संगठित व असंगठित क्षेत्रों पर कड़ा प्रहार किया है। छोटे, मझोले और लघु उद्योग नोटबंदी और जीएसटी की दोहरी मार से बंद होने की कगार पर हैं।"

मनमोहन ने आगे कहा, "मोदी सरकार नोटबंदी को सही साबित करने के लिए हर रोज एक झूठी कहानी गढ़ने में व्यस्त है। लेकिन सच्चाई और वास्तविकता यह है कि नोटबंदी मोदी सरकार द्वारा लागू की गई एक भयावह और ऐतिहासिक भूल साबित हुई है। नोटबंदी का कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ, न तो तीन लाख करोड़ रुपये का कालाधन पकड़ा गया, जिसका दावा मोदी सरकार ने 10 नवंबर, 2016 को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष किया था। साथ ही नकली नोट पर लगाम नहीं लगी। आतंकवाद और नक्सलवाद को रोकने के दावे खोखले साबित हुए हैं।"

पूर्व प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "नोटबंदी छोटे, मझोले और लघु उद्योग, व्यवसाय, किसानों और गृहणियों की जीवन भर की बचत पर एक सोचा-समझा हमला था। अनेकों खुलासों ने यह साफ कर दिया है कि नोटबंदी किस प्रकार रातों-रात कालेधन को सफेद करने की संदेहपूर्ण योजना थी। इसने बैंकों की लाइनों में खड़े 120 साधारण लोगों की जान ले ली। इसके साथ ही मोदी सरकार की सरपरस्ती में पुराने नोटों को नए नोटों में बदलने का एक समानांतर धंधा चलता रहा।"

मनमोहन ने कहा, "भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्त मंत्रालय बीच काफी नाजुक रिश्ते होते हैं, और दोनों को मिलकर काम करना होता है। दोनों की अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं, लिहाजा दोनों की पहचान के साथ दोनों के बीच सद्भावना बने रहना भी आवश्यक है।"

डॉ. सिंह से पूछा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक क्षेत्र में नोटबंदी और जीएसटी के दो बड़े फैसले लिए हैं और वह हर सभा में कांग्रेस सरकार और आपके निर्णयों को चुनौती देते हैं। इस पर उन्होंने कहा, "वह मोदी जी की चुनौती का संवाददाता सम्मेलन में जवाब नहीं देंगे, इस देश की जनता वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजों के जरिए उन्हें जवाब देगी।"

उन्होंने कहा, "मोदी ने वर्ष 2014 के चुनाव में युवाओं को हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का जो वादा किया था, वह झूठा साबित हुआ।"

कांग्रेस के कम होते जनाधार को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. सिंह ने कहा, "कांग्रेस यह महसूस कर रही है और समस्याओं का सामना भी कर रही है, क्योंकि वर्ष 2014 के चुनाव के समय यह भ्रम फैलाया गया कि संप्रग सरकार के काल में कथित तौर पर भ्रष्टाचार हुआ। वहीं मोदी ने वर्ष 2014 चुनाव में बड़े-बड़े वादे किए थे, जो अब खोखले साबित हो रहे हैं। दूसरी तरफ मोदी सरकार ने उन्हीं योजनाओं को आगे बढ़ाया, जिन्हें संप्रग सरकार ने शुरू की थी। बस उनमें उन्होंने कुछ लीपा-पोती जरूर की।

-- आईएएनएस 

 

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नोटबंदी को एक 'अशुभ' और 'बिना सोचे समझे' उठाया गया कदम करार देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि इस फैसले के जख्म व निशान वक्त के साथ और दिखाई दे रहे हैं और इसके गंभीर प्रभाव अभी भी सामने आ रहे हैं। नोटबंदी के फैसले के दो साल पूरे होने पर उन्होंने सरकार से आगे किसी प्रकार के ऐसे अपरंपरागत, अल्पकालिक आर्थिक उपायों को स्वीकृति नहीं देने को भी कहा जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में और अधिक अनिश्चितता का कारण बन सके।

मनमोहन ने कहा कि आठ नवंबर यह याद करने का दिन है कि 'कैसे एक आर्थिक विपदा ने लंबे समय के लिए राष्ट्र को प्रभावित किया।' उन्होंने सरकार से आर्थिक नीतियों में विश्वसनीयता व पारदर्शिता बहाल करने का आग्रह किया।

मनमोहन ने एक बयान में कहा, "मोदी सरकार द्वारा 2016 में बिना सोच-समझकर उठाए गए अशुभ कदम, नोटबंदी के आज दो साल पूरे हो गए हैं। इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज में जो विध्वंस हुआ, उसके सबूत आज सभी के सामने हैं।"

उन्होंने कहा, "अक्सर कहा जाता है कि समय सबकुछ ठीक कर देता है। लेकिन दुर्भाग्यवश नोटबंदी के मामले में इसके जख्म और निशान वक्त से साथ और हरे होते जा रहे हैं।"

मनमोहन ने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़, मझोले और छोटे कारोबार अभी भी नोटबंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं।"

उन्होंने कहा, "नोटबंदी ने हर व्यक्ति पर प्रभाव डाला। इसमें हर उम्र, लिंग, धर्म, समुदाय और क्षेत्र के लोग शामिल थे।"

उन्होंने कहा, "मैं सरकार से आर्थिक नीतियों में निश्चितता बहाल करने का आग्रह करता हूं। आज यह याद करने का दिन है कि कैसे एक आर्थिक विपदा ने लंबे समय के लिए राष्ट्र को प्रभावित किया और यह समझने की जरूरत है कि आर्थिक नीतियों को परिपक्वता व सोच-विचार के साथ संभाला जाना चाहिए।"

उन्होंने यह भी कहा कि दो साल बाद भी अर्थव्यवस्था नोटबंदी के झटके से उबर नहीं सकी है। उन्होंने कहा कि इस कदम ने रोजगार पर सीधा प्रभाव डाला क्योंकि अर्थव्यवस्था पहले से ही युवाओं के लिए नए रोजगार उपलब्ध कराने में संघर्ष कर रही थी।

मनमोहन ने कहा, "हमें अभी भी नोटबंदी के पूर्ण प्रभाव को समझना और उसका अनुभव करना है। रुपये के घटते मूल्य व बढ़ती तेल कीमतों के साथ व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए विपरीत परिस्थितियां पैदा हो रहीं हैं।"

उन्होंने कहा, "इसलिए सावधानी बरतते हुए आगे कोई भी अपरंपरागत और अल्पकालिक उपाय नहीं किया जाना चाहिए, जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में और अधिक अनिश्चितता का कारण बन सकते हैं।"

--आईएएनएस

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