शिवपुरी: मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों को धमकाया और चेतावनी दी कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फिर भाजपा की सरकार बनने के एक माह बाद राज्य की सरकार बदल जाएगी, तब अफसरों को उनकी औकात बताई जाएगी।"

नेता प्रतिपक्ष गुना से भाजपा के उम्मीदवार के.पी. यादव का नामांकन भराने आए थे। नेता प्रतिपक्ष भार्गव का वाहन जिलाधिकारी परिसर से 100 मीटर पहले ही रोक दिया गया, जिससे वह नाराज हो गए। नामांकन के बाद की जनसभा में भार्गव ने कहा, "केंद्र में मोदी सरकार के फिर सत्ता में आते ही एक महीने बाद मध्य प्रदेश में सरकार बदल जाएगी और हमारी सरकार आते ही इन अधिकारियों को इनकी औकात बता दी जाएगी।"

भार्गव ने पार्टी नेताओं से कहा, "ऐसे अधिकारियों के नाम नोट कर लें और चुन-चुन कर इन अधिकारियों को निपटाएंगे। ऐसे अवसरवादी अधिकारियों को छोड़ेंगे नहीं।"

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि शिवपुरी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनकी गाड़ियों को आचार संहिता का बहाना बनाकर जानबूझकर रोका, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया की गाड़ियों को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने तक आने दिया था।

भार्गव ने कहा कि सत्तापक्ष के इशारे पर अधिकारियों ने जानबूझकर उनकी गाड़ियों को रोका।

जनसभा के मंच से उतरने के बाद पत्रकारों से बातचीत में भार्गव ने कहा कि अधिकारियों के इस दोहरे बर्ताव को आयोग संज्ञान में लें और ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करे जो नियम विरुद्ध काम कर रहे हैं। भाजपा भी इस मामले में आयोग से शिकायत करेगी।

--आईएएनएस

 

 

बैतूल: लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए हर व्यक्ति अपने तरह से योगदान देने को आतुर है। मतदान प्रतिशत बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, और इसी क्रम में मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक परिवार ने छह मई को होने वाली शादी को सिर्फ इसलिए आगे बढ़ा दिया, क्योंकि उसी दिन उनके संसदीय क्षेत्र में मतदान होना है। 

घोड़ाडोंगरी विकासखंड का छोटा-सा गांव है भुड़की। यहां के सेना में जवान सतीश उइके की छह मई को मर्दवानी गांव की शलिला के साथ शादी होने वाली है। इसके लिए बीते डेढ़ माह से कार्ड भी बांटे जा रहे हैं। सतीश इन दिनों जम्मू एवं कश्मीर में तैनात हैं।

सतीश के पिता प्रेम उइके का कहना है, "शादी की तैयारियां डेढ़ माह से चल रही हैं। चुनाव की तारीख का ऐलान होने के बाद उनके परिवार ने आपस में विचार-विमर्श किया कि छह मई को मतदान है और उसी दिन शादी है। शादी की भागदौड़ में कई लोग मतदान से वंचित रह जाएंगे। लिहाजा सभी ने तय किया कि शादी छह मई से बढ़ाकर सात मई कर दी जाए। इस बात पर वधु पक्ष के लोग भी तैयार हो गए।"

जिलाधिकारी तरुण पिथोड़े ने इस फैसले पर कहा, "सेना के इस जवान और उनके परिवार के निर्णय एवं जज्बे को सलाम करते हैं। मतदान को लेकर लिया गया निर्णय समाज के लिए एक बड़ा उदाहरण है। हम सभी को मतदान का महत्व समझकर इसे महती जिम्मेदारी मानकर करना चाहिए।"

वहीं गांव के प्रवीण नामदेव, अतुल नामदेव, भानू नामदेव का कहना है, "चुनाव आयोग मतदान के लिए लाखों रुपये खर्च कर जनजागरूकता अभियान चला रहा है। ऐसे में हमारे ग्राम के युवा साथी एवं उनके परिवार द्वारा मतदान के लिए शादी की तारीख बदली गई है, यह एक सुखद संदेश है। हम सभी को सारे काम छोड़कर मतदान को महत्व देना चाहिए।"

--आईएएनएस

 

 

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भोपाल: मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार रात हुई तेज बारिश के बीच ओले पड़ने और बिजली गिरने की घटनाओं में मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार ने आर्थिक सहायता मंजूर की है।

सरकार की तरफ से बुधवार देर रात जारी बयान के अनुसार, प्रदेश में मंगलवार को आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में 21 लोगों की मौत हो गई है। मृतकों के परिवारों के लिए राज्य शासन ने आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। इनमें से 19 मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता भुगतान की कार्यवाही पूरी कर ली गई है। दो लोगों के परिजनों के बैंक खातों के अभाव में भुगतान के लिए आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।

ज्ञात हो कि मंगलवार देर शाम राज्य के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाओं के बीच बारिश हुई थी और ओले गिरे थे। आकाशीय बिजली भी गिरी थी। इस मौसमी आपदा में राज्य में कुल 21 लोगों की मौत हुई है। मृतकों में धार में चार, इंदौर व शाजापुर में तीन-तीन, रतलाम, सीहोर व खरगोन में दो-दो और अलिराजपुर, राजगढ़, सिवनी, छिंदवाड़ा और बड़वानी में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है।

इसके अलावा श्योपुर जिले में एक व्यक्ति की बिजली का करंट लगने से मौत हुई है।

तेज बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलों और मंडियों तक पहुंची उपज को भारी नुकसान हुआ है।

बयान के अनुसार, आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने के प्रभावितों को राजस्व विभाग के आरबीसी छह-चार प्रावधान के तहत सहायता राशि मुहैया कराई जाती है, जबकि बिजली का करंट लगने से होने वाली मौतों पर जिला प्रशासन के माध्यम से सहायता राशि देने का प्रावधान है।

--आईएएनएस

 

 

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भोपाल: मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार की रात को हुई तेज बारिश के बीच ओले पड़ने और बिजली गिरने से मरने वालों की संख्या 21 हो गई है। इन मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता मंजूर की गई है।

आधिकारिक तौर पर जारी किए गए ब्यौरे के अनुसार, प्रदेश में मंगलवार को आए आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली गिरने से मरने वालों की संख्या 21 हो गई है। मृतकों के परिवारों को राज्य शासन द्वारा आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। इनमें से 19 मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता भुगतान की कार्यवाही पूरी कर ली गई है। खरगौन जिले के एक मृतक के परिवार का बैंक खाता नहीं होने के कारण भुगतान में विलंब हो गया।

ज्ञात हो कि, मंगलवार की देर शाम को राज्य के विभिन्न हिस्सों में तेज हवाओं के बीच बारिश हुई थी और ओले गिरे थे। इसमें राज्य के 21 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में से धार के चार, इंदौर व शाजापुर के तीन-तीन, रतलाम, सीहोर व खरगोन के दो-दो और अलिराजपुर, श्योपुर, छिंदवाड़ा व बड़वानी का एक-एक व्यक्ति शामिल है। वहीं, तेज बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसल और मंडियों तक पहुंची उपज को भी भारी नुकसान हुआ है।

--आईएएनएस

भोपाल: मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार रात हुई तेज बारिश के बीच ओले पड़ने और बिजली गिरने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, और बड़ी मात्रा में फसलें बर्बाद हुई हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जन-धन की हानि पर दुख व्यक्त किया है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, मंगलवार रात मौसम में आए बदलाव के कारण राज्य में तेज बारिश के बीच ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सामने आई हैं।

बयान के अनुसार, राजधानी भोपाल के अलावा इंदौर, धार, शाजापुर, सीहोर, उज्जैन, खरगोन, बड़वानी, राजगढ़ आदि स्थानों पर बारिश हुई है। इससे बड़ा नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि और बिजली गिरने से जनहानि व धनहानि हुई है। इस आपदा में इंदौर, धार, शाजापुर जिले में तीन-तीन, रतलाम में दो और छिंदवाड़ा, राजगढ़, सीहोर व अलिराजपुर में में एक-एक व्यक्ति की मौत यानी कुल 15 लोगों की मौत हुई है।

बयान के अनुसार, मंगलवार रात तेज बारिश के बीच बिजली गिरने से इंदौर के हातोद थाना क्षेत्र में एक परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई। इसी तरह की एक अन्य घटना डासरी गांव के एक परिवार के साथ घटी। परिवार के चार सदस्य मोटर साइकिल से मंगलवार शाम किसी रिश्तेदार के घर से गांव लौट रहे थे, तभी तेज बारिश की वजह से वे एक पेड़ के नीचे रुक गए। इसी दौरान बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई, वहीं चौथा व्यक्ति सुरक्षित है।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य में आई आपदा पर ट्वीट किया, "आकाशीय बिजली गिरने से इंदौर, धार जिले में व प्रदेश के अन्य स्थानों पर जनहानि की बेहद दुखदायी घटनाएं सामने आईं। पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी शोक संवेदनाएं। मैं और मेरी सरकार दुख की इस घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं।"

राज्य में इन दिनों गेहूं की कटाई और मंडियों में खरीदी का काम चल रहा है। बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में रखी फसल और मंडी में स्टोर की गई उपज को भी भारी हानि पहुंचने की खबर सामने आई है।

--आईएएनएस

भोपाल: मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पिछले एक पखवाड़े से हो रही अघोषित कटौती ने राज्य सरकार की नींद उड़ा दी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विद्युत कटौती को लेकर आ रही शिकायतों पर एक माह की रिपोर्ट मंगाई है।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में बढ़ती गर्मी के बीच बीते एक पखवाड़े से बिजली की अघोषित कटौती जारी है। कई बार तो घंटों बिजली गुल रहती है। चुनाव का मौसम होने के कारण बिजली कटौती को लेकर लोगों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपनी शिकायतें भी दर्ज करानी शुरू कर दी हैं। ये शिकायतें सरकार तक भी पहुंची हैं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विद्युत कटौती की मिल रही शिकायतों पर ऊर्जा मंत्री, प्रमुख सचिव (ऊर्जा) को निर्देश दिया है कि वह प्रदेश में विद्युत उपलब्धता, वितरण और कटौती के बारे में पूरे प्रदेश की पिछले एक माह की रिपोर्ट तत्काल दें, और अगर कटौती हुई है तो उसके कारण भी बताएं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बिजली कंपनियों से इस बात का भी जवाब मांगा है कि "जब बिजली सरप्लस में उपलब्ध है तब कटौती की शिकायतें क्यों आ रही हैं। इस बात का भी पता लगाया जाए कि चुनाव के समय ही कटौती की शिकायतें क्यों आ रही हैं? क्या इसके पीछे कुछ साजिश-षड्यंत्र तो नहीं है? इसकी भी जानकारी ली जाए।"

कमलनाथ ने माना कि कुछ स्थानों पर आंधी-बारिश से वितरण में व्यवधान की बात सामने आई है, जिसे तत्काल दुरुस्त भी कर लिया गया, लेकिन जहां से बिना कारण अघोषित बिजली कटौती की शिकायतें आ रही हैं, वह गम्भीर मसला है।

मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों, विधायकों से कहा है कि वे "अपने-अपने क्षेत्रों में बिजली वितरण पर सतत निगरानी रखें। किसी भी तरह की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल बिजली कंपनियों के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क कर वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाएं।"

--आईएएनएस

भोपाल: जल-प्रेमियों ने यहां मंगलवार को 'भारत की जनता का चुनाव घोषणापत्र' जारी कर लोगों से अपील की कि वे उन्हीं उम्मीदवारों व दलों के पक्ष में मतदान करें, जो जल संरक्षण के हिमायती हों। उन्होंने कहा कि देश का एक बड़ा हिस्सा जल संकट की जद में है, एक तरफ खेती चौपट हो चली है तो दूसरी ओर पलायन बढ़ गया है। राजनीतिक दलों को भी इन समस्याओं से वाकिफ कराया जाए।

राजधानी के गांधी भवन में जल-जन जोड़ो अभियान के कार्यक्रम में 'भारत की जनता का चुनाव घोषणा पत्र, राजनीतिक दलों की प्रतिबद्धताएं एवं वर्तमान संदर्भ, लोकसभा चुनाव 2019' जलपुरुष के रूप में पहचाने जाने वाले राजेंद्र सिंह, जल-जन जोड़ो के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता मनीष राजपूत व अन्य लोगों ने जारी किया।

इस घोषणापत्र में बताया गया है कि देश के 16 राज्यों के 362 जिले जल संकट से जूझ रहे हैं। इतना ही नहीं, देश की 90 फीसदी नदियां सूख गई हैं और उनमें सिर्फ पानी होता है तो वह बरसात के समय होता है। गंगा जैसी पवित्र नदी भी पहले से अधिक प्रदूषित हो चुकी है। यही हाल देश की अन्य नदियों का भी है।

कहा गया है कि राजनीतिक दलों से जुड़े लोग चुनाव में वोट हासिल करने के लिए ऐसे मुद्दों को हवा देते हैं, जिनका आम जनता की जिंदगी से कोई सरोकार नहीं होता। राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में पानी, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे वास्तविक मुद्दों को जगह नहीं दी गई है।

घोषणापत्र में कहा गया है कि पिछले लोकसभा चुनाव के समय गंगा की अविरलता, निर्मलता के लिए खूब वादे किए गए थे। उन वादों को जनता का अभूतपूर्व जनसमर्थन मिला। मगर सत्ता में आने के बाद सत्ताधारी सारे वादे भूल गए। यही कारण है कि गंगा की हालत और बुरी हो गई है।

इस मौके पर राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस घोषणापत्र को देश के विभिन्न हिस्सों में आमजन तक पहुंचाया जा रहा है। भोपाल से पहले देश की 12 राजधानियों में यह घोषणापत्र जारी किया जा चुका है। इस घोषणापत्र को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। इस काम में जल बिरादरी सहित अन्य संगठनों के लोग लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि इस घोषणापत्र के जरिए आम मतदाताओं से अपील की जा रही है कि वे मतदान करते वक्त सभी उम्मीदवारों का आकलन करें, उसके कामकाज की समीक्षा करें और इसका ख्याल रखें कि प्राकृतिक संसाधनों के प्रति किस उम्मीदवार का नजरिया क्या है और इसी के आधार पर मतदान करें।

--आईएएनएस

 

 

भोपाल: मध्य प्रदेश के ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर दर्ज की गई प्राथमिकी और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों के बाद भी मामले में कथित तौर पर शामिल कई लोगों के अब भी बचे होने पर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राज्य सरकार पर सुस्ती बरतने का मंगलवार को आरोप लगाया है।

माकपा एक बयान में कहा है, "पूर्व मंत्री कुसुम महदेले भी मानती हैं कि ई-टेंडरिंग में हस्ताक्षर तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ही किए थे। इससे साफ जाहिर है कि इस घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की संलिप्तता है। मगर अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। राज्य सरकार की यह कार्रवाई उसकी सुस्ती को जाहिर करती है।"

उल्लेखनीय है कि इस मामले में 10 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उसी दिन तत्कालीन मंत्री महदेले ने पन्ना में शाम को कहा था कि ई-टेंडरिंग की फाइल पर तो हस्ताक्षर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ही किए थे।

कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, पूर्व सांसद सुभाषिनी अली और राज्य सचिव जसविदर सिह ने 15 साल में हुए करोड़ों रुपये के घोटालों की जांच के लिए जन-आयोग के गठन की मांग की थी। जिन चार-पांच घोटालों को तत्काल हाथ में लेने की बात कही गई थी, उनमें व्यापमं जांच पुन: खोलने के अलावा ई-टेंडर घोटाला भी शामिल था।

माकपा की मध्यप्रदेश इकाई ने कहा, "शिवराज सरकार के घोटालों पर कांग्रेस सरकार की सुस्ती कहीं न कहीं सवालों को जन्म देती है। इस सरकार को जनादेश का पालन कर सारे मामलों की जांच और गिरफ्तारियां साथ-साथ करनी चाहिए। 15 वर्षो के घोटालों में शामिल लोगों पर सरकार को कार्रवाई कर यह संदेश देना चाहिए कि वह भ्रष्टों के प्रति कृपालु नहीं है।"

ज्ञात हो कि अभी हाल ही में आर्थिक अन्वेषण शाखा ने ई-टेंडरिंग मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

--आईएएनएस

 

 

बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे पूर्व विधायक किशोर समरीते ने महंगे होते चुनाव और अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से आर्थिक मदद करने अथवा अपना गुर्दा बेचने देने की अनुमति मांगी है।

समरीते ने बालाघाट के जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर कहा है, "लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के लिए अधिकतम व्यय सीमा 75 लाख रुपये है, मगर मेरे पास चुनाव लड़ने के लिए इतनी धनराशि नहीं है। वहीं, दूसरे उम्मीदवारों की संपत्ति हजारों करोड़ के आसपास है। इसके साथ ही चुनाव प्रचार की अवधि में महज 15 दिन शेष हैं, इस अवधि में जन सहयोग से राशि जुटाना संभव नहीं है।"

समरीते ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि आयोग 75 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराए अथवा बैंक से उक्त राशि बतौर कर्ज दिलाने में मदद करें। यह दोनों ही संभव नहीं हो तो उसे अपने दो में से एक गुर्दा बेचने की अनुमति दें।

पूर्व में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके समरीते का कहना है कि वे 10 वर्ष बाद निर्वाचन प्रक्रिया में सम्मिलित हो रहे हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है, लिहाजा चुनाव आयोग उनकी मदद करे अथवा गुर्दा बेचने की अनुमति प्रदान करें।

समरीते ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "चुनाव प्रक्रिया महंगी होती जा रही है, इस स्थिति में कमजोर वर्ग के व्यक्ति के लिए तो चुनाव लड़ना बड़ा मुश्किल काम हो चला है। लिहाजा चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे आम आदमी के लिए चुनाव लड़ना आसान हो।"

गुर्दा बेचने के सवाल पर समरीते का कहना है कि आज चुनाव लड़ने के लिए उनके पास रुपये नहीं है, कोई मदद करने की स्थिति में भी नहीं है। इस समय उनके पास एक ही विकल्प है और वह है अपना गुर्दा बेचकर आर्थिक इंतजाम करना।

--आईएएनएस

 

 

भोपाल: मध्य प्रदेश की पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार के दौरान हुए ई-टेंडरिंग घोटाले में आर्थिक अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने रविवार को राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के नोडल अधिकारी नंदकुमार को गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले सॉफ्टवेयर कंपनी ओस्मो के तीन अधिकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

ईओडब्ल्यू के सूत्रों ने बताया, "ई-टेंडरिंग में हुई छेड़छाड़ के मामले की जांच जारी है। सॉफ्टवेयर कंपनी के तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और वे पुलिस रिमांड पर हैं। उनसे पूछताछ का दौर जारी है। परिणामस्वरूप इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के नोडल अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है।" नंदकुमार की गिफ्तारी काफी अहम मानी जा रही है।

ज्ञात हो कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुए ई-टेंडरिंग घोटाले में कंप्यूटर इमर्जेसी रेस्पॉन्स टीम (सीईआरटी) की रपट से गड़बड़ी की बात सामने आई थी। इसके बाद बुधवार को ईओडब्ल्यू ने प्राथमिकी दर्ज की। गुरुवार को ईओडब्ल्यू के दल ने मानसरोवर स्थित ओस्मो फाउंडेशन के दफ्तर पर दबिश दी और तीन अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया था।

मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएईडीसी) के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के संचालन का काम सॉफ्टवेयर कंपनियों के पास था। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में ई-टेंडरिंग घोटाले ने तूल पकड़ा था। तब यह बात सामने आई थी कि सॉफ्टवेयर कंपनियों के सहारे टेंडर हासिल करने वाली निर्माण कंपनियों ने मनमाफिक दरें भरकर अनधिकृत तरीके से दोबारा निविदा जमा कर दी। इससे टेंडर चाहने वाली कंपनी को लाभ मिल गया। ईओडब्ल्यू ने सीईआरटी की रपट के आधार पर मामला दर्ज किया।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, 3,000 करोड़ रुपये के ई-टेंडरिंग घोटाले में साक्ष्य और तकनीकी जांच में पाया गया है कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ कर जल निगम के तीन, लोक निर्माण विभाग के दो, जल संसाधन विभाग के दो, मप्र सड़क विकास निगम के एक और लोक निर्माण की पीआईयू के एक टेंडर कुल मिलाकर नौ टेंडर में सॉफ्टवेयर के जरिए छेड़छाड़ की गई। इसके जरिए सात कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया है। इन कंपनियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

--आईएएनएस

 

 

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