बिहारशरीफ: बिहार के नालंदा जिले के नगरनौसा थाने में गुरुवार रात जनता दल (युनाइटेड) के महादलित प्रकोष्ठ के प्रखंड अध्यक्ष गणेश रविदास ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा किया। इस बीच, नगरनौसा थाना प्रभारी सहित दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि सैदपुर गांव निवासी और जद (यू) नेता गणेश रविदास को गुरुवार को एक लड़की के अपहरण के मामले में पूछताछ के लिए थाने लाया गया था। रात शौच के बहाने हाजत के पास बने शौचालय में जाकर उन्होंने गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।

शुक्रवार सुबह जब इसकी खबर गांव पहुंची तब लोग आक्रोशित हो गए और पटना-बिहारशरीफ मार्ग को जामकर लोगों ने हंगामा किया। इस दौरान पुलिस बल और ग्रामीणों में झड़प हो गई, जिसके कारण पत्थरबाजी भी हुई और पुलिस ने लोगों पर लाठियां भांजी।

मृतक के परिजनों का आरोप है कि गणेश को थाने में टॉर्चर किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

नालंदा के पुलिस अधीक्षक निलेश कुमार ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। उन्होंने कहा कि तत्काल प्रभाव से नगरनौसा थाना प्रभारी कमलेश कुमार और सहायक अवर निरीक्षक बलिन्द्र राय को निलंबित कर दिया गया है। इस बीच क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।

--आईएएनएस

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रांची: झारखंड में विधानसभा चुनाव की आहट सुनने के बाद करीब सभी राजनीतिक दल अपनी सियासी गोटी बिछाने लगे हैं। बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सरकार चला रहे जनता दल (युनाइटेड) ने भी न केवल सियासत की बिसात पर अपने मोहरे उतारने की घोषणा कर दी है, बल्कि झारखंड में अपनी जमीन मजबूत करने में भी जुट गया है।

जद (यू) ने वैसे तो झारखंड की सभी 81 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है, परंतु सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने कम से कम 30 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी प्रारंभ कर दी है। पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने झारखंड के नेताओं को टास्क देकर चुनावी तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच झारखंड में पार्टी को मजबूत करने की कवायद की जा रही है।

झारखंड के चार नेताओं ने पटना पहुंचकर रविवार को जद (यू) की सदस्यता ग्रहण की थी। इनमें झारखंड प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री और प्रवक्ता प्रेम कटारूका, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता अरुण मंडल, झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) के मनोज यादव और झामुमो के प्रभात कुमार प्रभाकर शामिल हैं।

झारखंड जद (यू) के अध्यक्ष सालखन मुर्मू कहते हैं, "हम नीतीश कुमार के ब्रांड या मॉडल को उतारेंगे। नीतीश कुमार ने पूरे बिहार को पिछले 14 सालों में चमका दिया है। नीतीश कुमार ने गांव-गांव तक पानी, बिजली सड़क पहुंचाकर राजनीति में 'विकास पुरुष' के रूप में अपनी पहचान बनाई है।"

भाजपा से मुकाबला करने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ सभी राज्यों में तालमेल नहीं है। उन्होंने भाजपा के साथ रिश्ते में खटास आने से भी इंकार किया।

बिहार में जद (यू) के नेता प्रवीण सिंह कहते हैं, "जद (यू) राष्ट्रीय स्तर का संगठन है। पार्टी के विस्तार के लिए चुनाव में उतरना ही पड़ेगा। हमलोग अरुणाचल प्रदेश में लड़े और वहां कई सीटों पर विजयी हुए हैं। नागालैंड में हमारे विधायक हैं।"

उन्होंने कहा कि जद (यू) के चुनाव लड़ने के फैसले को किसी और नजरिए से नहीं देखा जा सकता।

जद (यू) के एक नेता कहते हैं कि पार्टी विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए नेताओं की तलाश कर रही है। कई लोगों को पार्टी में शामिल कराया जा रहा है। जद (यू) जमीनी स्तर पर संगठन का हाल जानने और चुनावी मिजाज को भांपने के लिए सर्वे भी करा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी झारखंड में जातीय समीकरण को भी आधार बनाकर सीटों की पहचान में जुटी है। पार्टी उन सीटों पर खास ध्यान दे रही है, जहां पर पूर्व में समता पार्टी का आधार रहा है। कुर्मी जाति बहुल इलाकों पर भी जोर लगाने का निर्देश नेताओं को दिया गया है।

इधर, राजनीतिक समीक्षक जद (यू) के चुनाव लड़ने से झारखंड की सियासत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने की बात करते हैं। राजनीति के जानकार और झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार बलबीर दत्त कहते हैं, "जद (यू) का यहां कोई आधार नहीं है। यहां चुनाव लड़कर वे कुछ अपना प्रचार कर सकते हैं तथा दूसरी पार्टियों के वोट काट सकते हैं।"

उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि अभी चुनाव में पांच महीने की देरी है, उसमें अगर कुछ परिवर्तन हो जाए तो नहीं कहा जा सकता है।

--आईएएनएस

 

 

 

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पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेताओं द्वारा जनता दल (युनाइटेड) को साथ आने के 'ऑफर' दिए जाने को जद (यू) ने सोमवार को नकार दिया। जद (यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार के संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट कर दिया कि राजद अब कुछ भी कर ले, जद(यू) की अब राजद के पास वापसी संभव नहीं है।

मंत्री श्रवण कुमार ने सोमवार को यहां पत्रकारों से कहा, "'ऑफरों' से पार्टी नहीं चलती। हमारे नेता की नीयत और विकास के एजेंडे स्पष्ट हैं।"

उन्होंने जद (यू) की अलग संस्कृति बताते हुए कहा कि राजद और कांग्रेस की संस्कृति अलग है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि "कभी तालमेल हो जाता है, लेकिन हमारी सोच अलग है। यही कारण है कि ऐसे लोगों का साथ बहुत दिन तक नहीं चला।"

मंत्री कुमार ने कहा कि "बिहार में भाजपा और जद (यू) की सरकार ठीक ढंग से चल रही है। बिहार में विकल्प के तौर पर सिर्फ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही हैं और अब राजद हमेशा जीरो पर ही आउट होगी।"

इससे पहले राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने कहा था कि भाजपा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने, राम मंदिर बनाने और सामान आचार संहिता लागू करने के मुद्दे पर नीतीश कुमार क्या करेंगे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को भगवान भाजपा के खिलाफ चेहरा बनने का एक और मौका दे रहे हैं और जब नीतीश कुमार इन मद्दों पर राजग छोड़ेंगे, तो राजद उनके साथ मजबूती के साथ खड़ा होगा।

राजद के एक अन्य उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह भी भाजपा को हराने के लिए सभी छोटे और क्षेत्रीय दलों को एकजुट होने की बात कह चुके हैं।

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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (युनाइटेड) ने गुरुवार को यहां कहा कि वह तीन तलाक के मुद्दे पर राज्यसभा में भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार का समर्थन नहीं करेगी।

जद (यू) के वरिष्ठ नेता और बिहार के मंत्री श्याम रजक ने कहा, "जद (यू) इसके खिलाफ है और हम इसके खिलाफ लगातार खड़े रहेंगे।"

जद (यू) नेता ने कहा कि तीन तलाक एक सामाजिक मुद्दा है और इसे सामाजिक स्तर पर समाज के द्वारा सुलझाया जाना चाहिए। रजक ने कहा कि जद (यू) ने राज्यसभा में तीन तलाक विधेयक के खिलाफ वोट दिया था।

इसके पहले नीतीश कुमार ने सार्वजनिक तौर पर तीन तलाक विधेयक का विरोध किया था।

नीतीश ने सप्ताह के प्रारंभ में अपना रुख दोहराते हुए कहा था कि अनुच्छेद 370 को हटाने, समान नागरिक संहिता लागू करने और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराने के मामले या तो संवाद के जरिए सुलझाए जाएं या अदालत के आदेश के जरिए।

नीतीश ने कहा, "यह हमारा विचार है कि अनुच्छेद 370 समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। इसी तरह समान नागरिक संहिता किसी के ऊपर नहीं थोपी जानी चाहिए और अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा या तो संवाद के जरिए सुलझाया जाए या अदालत के आदेश के जरिए।"

--आईएएनएस

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पटना: बिहार में सत्तारूढ़ और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल जनता दल (युनाइटेड) ने मुंगेर से निर्वाचित सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को संसदीय दल का नेता चुन लिया है।

जद (यू) के प्रधान महासचिव और प्रवक्ता क़े सी़ त्यागी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, "17वीं लोकसभा में जद(यू) संसदीय दल के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ 'ललन सिंह' बनाए गए हैं। इसके साथ ही वाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र से विजयी बैद्यनाथ प्रसाद महतो को जद (यू) संसदीय दल के उप नेता और सुपौल के सांसद दिलेश्वर कामत को लोकसभा में पार्टी संसदीय दल के मुख्य सचेतक का दायित्व सौंपा गया है।"

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले ललन सिंह ने मुंगेर लोकसभा सीट से चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार नीलम देवी को हराकर जीत दर्ज की है। सिंह बिहार में नीतीश मंत्रिमंडल में भी शमिल थे।

--आईएएनएस

 

 

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पटना: बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष नीतीश कुमार सहित जद (यू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता भले ही संबंधों में किसी प्रकार की कटुता से इंकार कर रहे हों, परंतु जद (यू) के बिहार के अलावा अन्य राज्यों में अपने दम पर चुनाव लड़ने और भाजपा के कई मुद्दों पर अलग राय रखने के बाद इन दो दलों के संबंधों में खटास के कयास लगने लगे हैं।

वैसे, नीतीश किसी भी गठबंधन में रहे हों, परंतु उनकी राजनीति अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करने की रही है। नीतीश की पार्टी जद (यू) जब राजद के साथ महागठबंधन भी थी, तब भी नीतीश ने केन्द्र सरकार की नोटबंदी की तारीफ की थी। तब भी महागठबंधन के साथ नीतीश के रिश्ते को लेकर कयास लगाए जाने लगे थे, और आज फिर भाजपा के साथ नीतीश के रिश्तों को लेकर कयासों का दौर गरम है।

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद ने तो बजाप्ता नीतीश को महागठबंधन में आने का न्योता तक दे दिया है।

राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी कहते हैं, "केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जम्मू एवं कश्मीर में धारा-370 और 35-ए हटाने, राम मंदिर बनाने और सामान आचार संहिता लागू करने के मुद्दे पर नीतीश कुमार क्या करेंगे?"

उन्होंने आगे कहा, "नीतीश कुमार को भगवान भाजपा के खिलाफ चेहरा बनने का एक और मौका दे रहा है और जब नीतीश कुमार इन मुद्दों पर राजग छोड़ेंगे, तो राजद उनके साथ मजबूती से खड़ा होगा।"

इसके अलावा बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी कहा है कि अगर सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन में आने की सोचते हैं, तो इससे उनको कोई ऐतराज नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार की पार्टी राजग के साथ जरूर है, परंतु उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से इंकार कर दिया है। यही नहीं, जद (यू) महासचिव के. सी. त्यागी ने भी दो दिन पूर्व स्पष्ट कर दिया है कि जद (यू) चार राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरेगा।

इस घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए इस निर्णय के लिए धन्यवाद भी दिया है।

हालांकि जद (यू) के प्रवक्ता अजय आलोक ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुशफहमी नहीं पालनी चाहिए। उन्होंने कहा, "वह धन्यवाद देती हैं, ठीक है, परंतु जद (यू) राजग में है और आगे भी रहेगा। इसमें किसी को संशय नहीं रहना चाहिए।"

आलोक ने कहा, "धन्यवाद से गलतियां कम नहीं हो जातीं। वहां से बिहारियों को भगाया जा रहा है। लगातार हत्याओं का दौर भी चल रहा है।"

राजद उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी भाजपा को हराने के लिए सभी छोटे और क्षेत्रीय दलों को एकजुट होने को कहा है। उन्होंने नीतीश कुमार के जद (यू) को भी महागठबंधन में आने का न्योता दिया है।

बिहार की राजनीति के जानकार सुरेंद्र किशोर कहते हैं कि इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार जब इससे पहले भी राजग में थे, तब भी अन्य राज्यों में उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा था, और अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में भी भी जद (यू) जम्मू एवं कश्मीर में धारा 370 का विरोध करता रहा है।"

किशोर कहते हैं, "सभी पार्टियों के अपने सिद्धांत हैं। जद (यू) और भाजपा के सिद्धांत भी अलग-अलग हैं। नीतीश अपनी पार्टी के सिद्धांतों में रहकर राजग में हैं।" उन्होंने संभावना जताई, "भाजपा भी यही चाहती होगी कि नीतीश राजग में रहकर धारा 370 का विरोध करें, ताकि जद (यू) के बहाने राजग को भी अल्पसंख्यकों का वोट मिले।"

नीतीश कुमार ने भी सोमवार को राजग में किसी प्रकार की कटुता से इंकार करते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में सांकेतिक रूप से शामिल नहीं होने का निर्णय जद (यू) का है। उन्होंने कहा, "भाजपा के साथ आपसी संबंधों में कोई कटुता नहीं है। जैसे पहले सौहाद्र्र का संबंध था, वैसे आज भी है।"

बहरहाल, नीतीश के जद (यू) को लेकर कयासों का दौर जारी है और राजग में रहकर जद (यू) के भाजपा विरोध पर लोग अब कहने लगे हैं कि "यह रिश्ता क्या कहलाता है"।

--आईएएनएस

 

 

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पटना: जनता दल यूनाइटेड के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की अध्‍यक्षता में रविवार को हुई राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। इसके अनुसार जेडीयू झारखंड सहित चार राज्‍यों में अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ेगा। पार्टी बिहार के बाहर अपना विस्‍तार करेगी। बैठक में नीतीश कुमार ने यह भी साफ कर दिया कि जेडीयू बिहार में राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में है और यहां विधानसभा चुनाव एनडीए में रहकर मजबूती के साथ रहेगा।
बैठक में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति बनाने  का फैसला कर विवादों में आए पार्टी के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष प्रशांत किशोर भी शामिल हुए। कयास लगाए जा रहे थे कि बैठक में प्रशांत किशोर इस विवाद पर अपना पक्ष रखेंगे। लेकिन उन्‍हें बोलने का मौका नहीं मिला। बैठक में राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्‍यों, विभिन्‍न प्रदेशों के अध्‍यक्षों व बिहार के विभिन्‍न जिलाध्‍यक्षों ने शिरकत की।

जेडीयू राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के पहले से यह माना जा रहा था कि पार्टी औपचारिक रूप से झारखंड में विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला कर सकती है। लेकिन मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन अन्य राज्यों (हरियाणा ,दिल्ली और जम्मू कश्मीर) में भी अकेल चुनाव लड़ने का चौंकाने वाला बड़ा फैसला लिया है। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ कि जेडीयू झारखंड, हरियाणा ,दिल्ली और जम्मू कश्मीर में अकेले अपने दम पर विधानसभा का चुनाव मैदान में उतरेगी।
मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में नीतीश कुमार ने कहा कि लोकसभा चुनाव में एनडीए की जबरदस्‍त जीत घटक दलों की एकजुटता का परिणाम है। लेकिन इन परिणामों के साथ ही जेडीयू का देश के दूसरे राज्यों में भी विस्तार करना है।

मिली जानकारी के अनुसार जेडीयू की बैठक में मुख्य रूप से संगठन के मुद्दों पर विचार किया गया। लोकसभा चुनाव के बाद अब पार्टी की नजर अगले साल के बिहार विधानसभा चुनाव पर है। इसे लेकर संगठन के विस्तार और इसकी मजबूती पर जोर दिया गया। पार्टी का हाल ही 50 लाख नए सदस्य बनाने का फैसला इसी की एक कड़ी है। बताया जा रहा है कि बैठक में लोकसभा चुनाव परिणाम व केंद्रीय मंत्रिमंडल में सांकेतिक भागीदारी से इनकार के बाद की स्थिति पर भी चर्चा हुई।

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पटना: बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (युनाइटेड) के महागठबंधन में आने पर कोई ऐतराज नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर जद (यू) महागठबंधन में आने की पहल करता है तो महागठबंधन इस पर विचार करेगा।

राजद की नेता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सोमवार की रात एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद पत्रकारों द्वारा नीतीश के महागठबंधन में शामिल होने के एक प्रश्न के उत्तर में कहा, "अगर नीतीश कुमार महागठबंधन में आने की पहल करते हैं तो महागठबंधन इस पर विचार करेगा।"

उन्होंने कहा कि नीतीश के महागठबंधन में आने पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा दी गई इफ्तार पार्टी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी शामिल हुए थे।

उल्लेखनीय है कि राजद के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने इससे पहले भाजपा को पछाड़ने के लिए सभी दलों को एक साथ आने की अपील की थी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सिंह ने पत्रकारों के एक प्रश्न के उत्तर में बिना नीतीश कुमार का नाम लिए कहा, "नीति यही कहती है कि भाजपा को पछाड़ने के लिए सभी को एक साथ आना चाहिए। इसमें कहीं छंटाऊं और चुनने-बिनने की बात नहीं होनी चाहिए।"

राजद के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बयान कि, 'नीतीश के महागठबंधन में सभी रास्ते बंद' के विषय में याद दिलाने पर सिंह ने अपने अंदाज में कहा, "कहीं कोई लिखकर दिया है। यह समय की बात है।"

उल्लेखनीय है कि राजग में शामिल जद (यू) के केंद्र में सांकेतिक रूप से मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को लेकर नीतीश नाराज बताए जा रहे हैं। इस प्रस्ताव के बाद जद (यू) नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुई।

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पटना: लोकसभा चुनाव में बिहार में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की अभूतपूर्व सफलता पर पार्टी कार्यकर्ता जश्न में डूबे हुए हैं। राजग में शामिल भाजपा और जद (यू) के पटना स्थित कार्यालयों में कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं। वे मिठाइयां बांट रहे हैं और अबीर-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं। इस दौरान जद (यू) कार्यालय में आतिशबाजी की गई।

मतगणना के रुझानों में जैसे-जैसे राजग की सीटों की संख्या बढ़ती गई कार्यकर्ता कार्यालय पहुंचने लगे। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने ढोल की थाप पर जमकर नृत्य किया। कई कार्यकर्ता भगवा रंग में पूरी तरह रंगे हुए थे। बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता भी कार्यालय पहुंचीं और जश्न में हिस्सा लिया।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के कार्यालय पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने उन्हें कंधे पर उठा लिया। राय के साथ भाजपा नेता सुशील मोदी, मंगल पांडेय, नंदकिशोर यादव ने भी जीत के जश्न में हिस्सा लिया। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की खुशी जाहिर की।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राय ने इस शानदार जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को दिया। उन्होंने बिहार के पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों का भी आभार जताया।

जद (यू) कार्यालय में भी कार्यकर्ताओं ने जीत की खुशी मनाई। जद (यू) नेताओं ने ढोल-नगाड़े की थाप पर जमकर भांगड़ा किया और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाई।

राज्य के 40 संसदीय क्षेत्रों में से 38 सीटों पर राजग के प्रत्याशी आगे चल रहे हैं।

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पटना: लोकसभा चुनाव के छठे चरण के मतदान के बाद बिहार की सियासत में 'लेटर-वॉर' शुरू हो गई है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने बुधवार को एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर निशाना साधा।

वहीं, इसके जवाब में नीतीश की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद को पत्र लिखकर पलटवार किया।

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरते हुए पत्र में कहा, "लोकतांत्रिक मूल्यों एवं जनादेश का अनादर कर जनता की नजरों में आप आदर-सम्मान खो चुके हैं। जनता द्वारा जगह-जगह पर निरंतर आपका विरोध यह दर्शाता है कि आप जनता के लिए कितने अप्रिय हो गए हैं लेकिन मेरे लिए आप अब भी अतिप्रिय हैं।"

उन्होंने आगे लिखा, "चाचा जी आप कह रहे थे कि मेरे पिता चाहे कितनी भी कोशिश कर लें जेल से बाहर नहीं आ सकते। आप उन्हें जेल से बाहर नहीं आने देंगे। आपके स्वयं को सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर समझ कर फैसला सुनाने के पीछे कौन सी नई साजिश है ये तो मुझे नहीं पता लेकिन बिहार की क्या विडंबना है ये मुझे पता है।"

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने मुजफ्फरपुर बालिका आवासगृह मामले में नीतीश को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "नीतीश चाचा, ये आपके शासन की सबसे बड़ी विडंबना है कि गरीब लोगों और वंचितों की आवाज उठाने वाले आज जेल में बैठे हैं और आप मुजफ्फरपुर में मासूम बच्चियों के साथ हुए घिनौने कांड में संलिप्त अपने दुलारे और चेहते आरोपी ब्रजेश ठाकुर के साथ केक काट रहे हैं, वो आपकी चुनावी रैलियों का संचालन कर रहा होता है।"

उन्होंने कहा कि बिहार जानता है कि धोखे से मतदाता का वोट हड़पने वाला चोर दरवाजे से आज बिहार की कुर्सी पर बैठा है और मतदाताओं को झूठे सपने दिखाकर उसका जीवन तबाह करने वाला आज देश की कुर्सी पर बैठा है।

तेजस्वी ने दावा करते हुए कहा कि जिस बिजली और सड़क की बात नीतीश कुमार कर रहे हैं वह 2004 से 2014 के बीच संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार में रेलमंत्री रहे राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश बाबू के कारण नसीब हुआ। उन्होंने विकास कार्यो के लिए बिहार को असीमित फंड दिलवाए।

उन्होंने कहा, "बहरहाल, आप ये भी कह रहे थे कि जेल से चिट्ठी लिखने वाले अगर जेल से बाहर आए तो लालटेन वाले दिन लौट आएंगे। आप बहुत घर-घर बल्ब जलाने का दावा करते हैं ना? चाचा जी आज हम बताते हैं आपके इस दावे की हकीकत क्या है।"

उन्होंने कहा कि बिहार में गांवों में घर-घर बिजली पहुंचाने के 'इंफ्रास्ट्रक्चर'का काम पहले ही शुरू हो चुका था।

दूसरी तरफ, जद (यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने तेजस्वी के पत्र का जबाव देते हुए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखा।

नीरज ने पत्र में कहा, "आप (लालू) तो राजकोष के खजाने को लूटने जैसे घृणित कार्य करने के कारण जेल चले गए परंतु आपके चरवाहा स्कूल का प्रभाव आपके पुत्र पर पड़ गया। आपने बेटे को ज्ञान नहीं दिया परंतु आपका बेटा अपने 'ज्ञान का आतंक' फैला रहा है। आपने अपने छोटे बेटे को उच्च शिक्षा नहीं दी और राजनीति में भी अधर में छोड़कर चले गए। आपके बेटे के बयान के कारण जगहंसाई हो रही है।"

उन्होंने कहा, "राजद के शासनकाल में बिहार में सड़क और बिजली की स्थिति क्या थी, सभी को पता है। अब ऐसे बयानों से जगहंसाई हो रही है। अगर ऐसा है तो राजद के शासनकाल में सड़कों और बिजली का आंकड़ा जारी करें।"

विधान पार्षद नीरज ने कहा, "मुजफ्फरपुर मामले में बिहार सरकार ने ही सीबीआई जांच की बात की है। इसके बाद भी अगर आपके बेटे (तेजस्वी) के पास सबूत हैं, तो सर्वोच्च न्यायालय में जाकर उसे सबूत देना चाहिए। वैसे, आपके बेटे तो महिलाओं के अपमान के लिए चर्चित हैं।"

उन्होंने कहा, "विधायक राजबल्लभ यादव नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे हैं, परंतु अभी तक उसे पार्टी से नहीं निकाला गया बल्कि उसके परिवार के सदस्य को आपकी पार्टी ने नवादा से टिकट देकर पुरस्कार दिया।"

उन्होंने आगे लिखा, "आपका बेटा अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के आरोपी को तो पीए बनाकर रखता है और दूसरों को प्रवचन दे रहा है।"

--आईएएनएस

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