नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व विधायक तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई के पूर्व अध्यक्ष मांगे लाल गर्ग के निधन पर शोक जताया है। गर्ग गंभीर रूप से बीमार थे और पश्चिम विहार स्थित बालाजी एक्शन हॉस्पिटल में भर्ती थे।

उनके एक पारिवारिक सदस्य ने बताया कि उन्होंने रविवार सुबह अस्पताल में अंतिम सांस ली।

प्रधानमंत्री मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, "श्री मांगे लाल जैसे नेता किसी भी दल के लिए संपत्ति होते हैं। वे जमीनी स्तर पर निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं और विभिन्न प्रकार से सेवा करते हुए विभिन्न लोगों का जीवन प्रभावित करते हैं। गर्ग जी द्वारा किए गए अच्छे काम वर्षो तक याद किए जाएंगे।"

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, "श्री मांगे राम जी का दिल्ली से गहरा संबंध था और जिस तरह से वे इस शहर के लोगों की निस्वार्थ सेवा करते थे, वह उनके व्यवहार से दिखता था। दिल्ली में भाजपा को मजबूत बनाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका निधन दुखद है। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ हैं। ओम शांति।"

गर्ग 2003 में वजीरपुर विधानसभा से निर्वाचित हुए थे। वे 2008 में कांग्रेस के हरि शंकर गुप्ता से इसी सीट पर हार गए थे।

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और लोकसभा सांसद हंस राज हंस ने भी गर्ग के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

गर्ग का पार्थिव शरीर दिल्ली में 14 पंडित पंत मार्ग स्थित भाजपा कार्यालय में रखा गया है।

--आईएएनएस

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जम्मू: अमरनाथ यात्रा के लिए रविवार को जम्मू से 4,158 श्रद्धालुओं का एक और जत्था रवाना हुआ। इस साल एक जुलाई से यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 20 दिनों में 2.6 लाख से अधिक श्रद्धालु समुद्र तल से 3,888 मीटर ऊपर स्थित बाबा बफार्नी के दर्शन कर चुके हैं। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि एक जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 20 दिनों में 2,59,889 श्रद्धालुओं ने पवित्र शिवलिंग के दर्शन कर लिए हैं।

पुलिस ने कहा कि भगवती नगर यात्री निवास से 4,158 यात्रियों का एक जत्था शनिवार को सुरक्षा सहित दो काफिलों में रवाना हुआ।

एक पुलिस अधिकारी ने आगे बताया, "इनमें से 2,139 यात्री बालटाल आधार शिविर जा रहे हैं जबकि 2,019 यात्री पहलगाम आधार शिविर जा रहे हैं।"

श्रद्धालुओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बर्फ की विशाल संरचना बनती है जो भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों की प्रतीक है।

तीर्थयात्री पवित्र गुफा तक जाने के लिए या तो अपेक्षाकृत छोटे 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से जाते हैं या 45 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से जाते हैं। बालटाल मार्ग से लौटने वाले श्रद्धालु दर्शन करने वाले दिन ही आधार शिविर लौट आते हैं।

दोनों आधार शिविरों पर हालांकि तीर्थ यात्रियों के लिए हैलीकॉप्टर की भी सेवाएं हैं।

स्थानीय मुस्लिमों ने भी हिंदू तीर्थयात्रियों की सुविधा और आसानी से यात्रा सुनिश्चित कराने के लिए बढ़-चढ़कर सहायता की है।

एसएएसबी के अधिकारियों के अनुसार, यात्रा के दौरान 24 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है, जिनमें से 22 तीर्थयात्रियों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है, वहीं दो लोगों की मौत दुर्घटनाओं में हुई है।

पवित्र गुफा की खोज सन 1850 में एक मुस्लिम चरवाहे बूटा मलिक ने की थी।

किवदंतियों के अनुसार, एक सूफी संत ने चरवाहे को कोयले से भरा एक बोरा दिया था, जो बाद में सोने से भरे बोरे में बदल गया था।

लगभग 150 सालों से चरवाहे के वंशजों को पवित्र गुफा पर आने वाले चढ़ावे का कुछ भाग दिया जाता है।

इस साल 45 दिवसीय अमरनाथ यात्रा का समापन 15 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: क्रिप्टोकरेंसी के कारोबार पर प्रतिबंध के संबंध में सरकार ने खुलासा किया है कि देश में इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकिंग प्रतिबंध लगाया गया है।

राज्यसभा में इस संबंध में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने इसी सप्ताह इस पर स्पष्टीकरण दिया।

उच्च सदन में सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार ने देश में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिस पर ठाकुर ने कहा नहीं।

वित्त राज्यमंत्री ने कहा, "वर्तमान में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मसलों से निपटने के लिए अगल से कोई कानून नहीं है। इस प्रकार आरबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर प्राधिकरण जैसे सभी संबद्ध विभाग और काननू का अनुपालन करवाने वाली एजेंसियां मौजूदा कानून के अनुसार कार्रवाई करती हैं।"

आरबीआई ने पूर्व में एक सर्कुलर जारी करते हुए विनियमित कंपनियों के क्रिप्टोकरेंसी कारोबार को सेवा प्रदान करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। बिटकाइन डॉट कॉम ने शुक्रवार को बताया कि यह प्रतिबंध पिछले साल छह जुलाई से प्रभावी है।

हालांकि क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने के एक मसौदा विधेयक पर काम चल रहा है, जिसकी अगुवाई आर्थिक कार्य सचिव सुभाष चंद्र गर्ग कर रहे हैं।

क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक 2019 के मसौदे के अनुसार, बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी रखने, बेचने और इसमें कारोबार करने पर आपको 10 साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: खाड़ी में उत्पन्न हुए ताजा तनाव के बीच होरमज की खाड़ी में ईरान द्वारा जब्त किए गए ब्रिटिश झंडे वाले तेल टैंकर के 23 क्रू सदस्यों में जहाज के कप्तान के साथ 18 भारतीय भी शामिल हैं। भारत ने शनिवार को कहा कि वह भारतीय नाविकों को छुड़ाने के लिए तेहरान के संपर्क में है। ईरान ने ब्रिटिश झंडे वाले जहाज-स्टेना इम्पेरो को शुक्रवार को जब्त किया है, जिसमें क्रू के तौर पर भारतीय, रूसी, लातवियाई और फिलिपिनो देशों नागरिक कार्यरत हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि घटना के आगे के विवरणों को जानने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हमारा मिशन भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई और देश-प्रत्यावर्तन है, जिसको सुरक्षित करने के लिए ईरान सरकार के संपर्क में है।"

समाचार एजेंसी आईआरएनए ने होरमज प्रांत के पोत व समुद्री मामलों के महानिदेशक अल्लाहमोराद अफीफीपोर के बयान का हवाला देते हुए कहा, "स्टेना इम्पेरो के क्रू सदस्यों में 18 भारतीय, पांच रूसी, लातवियाई और फिलिपिनो देशों नागरिक शामिल हैं। कप्तान भारतीय है, लेकिन टैंकर पर ब्रिटेन का झंडा लगा है।"

पोत की मालिक व शिपिंग कंपनी स्टेना बल्क ने एक बयान में कहा कि टैंकर को "होरमज की खाड़ी को पार करने के दौरान जब जहाज अंतर्राष्ट्रीय जल में था, तभी अज्ञात छोटे से नावों और एक हेलीकॉप्टर द्वारा उससे संपर्क किया गया था।"

उन्होंने आगे कहा, "पोत अब ईरान के उत्तर की ओर बढ़ रहा है, जिसकी वजह से हम संपर्क साधने में असमर्थ हैं।"

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड सेना ने अपनी वेबसाइट पर बयान जारी कर कहा है कि जहाज को 'अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानूनों और विनियमों का पालन न करने' पर जब्त कर लिया गया और उसे एक अज्ञात ईरानी बंदरगाह में ले जाया जा रहा है।

स्टेना बल्क ने कहा, "उनमें से किसी को भी चोट नहीं आई है और उनकी सुरक्षा मालिकों और प्रबंधकों दोनों के लिए चिंता का विषय है।"

बाद में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक लाइबेरियन-ध्वज वाले टैंकर मेसदार को भी जब्त कर लिया। टैंकर के मालिक ने बाद में कहा कि जहाज को जाने देने से पहले उस पर थोड़ी देर के लिए सशस्त्र गार्ड सवार हुए थे।

ब्रिटिश विदेश सचिव जेरेमी हंट ने तेल टैंकर की जब्ती को 'अस्वीकार्य' बताया है।

उन्होंने कहा, "यह आवश्यक है कि नेविगेशन की स्वतंत्रता बनी रहे और सभी जहाज सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।"

स्थिति के जल्द सामान्य नहीं होने पर 'गंभीर परिणाम' की चेतावनी देते हुए हंट ने स्काई न्यूज को बताया, "हम सैन्य विकल्पों पर विचार नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम स्थिति को हल करने के लिए एक कूटनीतिक तरीकों पर विचार कर रहे हैं, लेकिन बिल्कुल स्पष्ट हैं कि इसे हल किया जाना ही चाहिए।"

वहीं, ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, "ईरान अपने रंग दिखा रहा है।" ट्रंप ने आगे कहा, "ईरान अब बड़ी मुसीबत में फंस चुका है। उनकी अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है। हमारे लिए इसे सही करना उतना ही आसान है, जितना बिगाड़ना।"

--आईएएनएस

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आइजोल: मिजोरम में कांग्रेस को छोड़कर सभी स्थानीय पार्टियां बांग्लादेश और म्यांमार की सीमा से सटे ईसाई बहुल राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की मांग कर रही हैं। पिछले साल नवंबर में विधानसभा चुनावों के लिए सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि वह असम की तरह राज्य में भी एनआरसी लागू करेगी।

एमएनएफ नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट एलायंस का सदस्य है। एलायंस गैर-कांग्रेसी दलों का भाजपा समर्थित समूह है।

एमएनएफ की शपथ तब आई जब मिजोरम में कई गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा अवैध आव्रजकों को राज्य से निकालने के लिए असम की तरह यहां भी एनआरसी लागू करने की मांग की थी। असम ने पिछले साल जुलाई में एनआरसी का अंतिम मसौदा दाखिल किया था।

मिजोरम मेंटीनेंस ऑफ हाउसहोल्ड रजिस्टर्स बिल, 2019 पेश करते हुए मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा ने कहा कि मिजोरम की कमजोर सीमाओं से आने वाले विदेशियों की आमद के कारण विधेयक की जरूरत है।

मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर वाले विधेयक में लिखा है, "कई मामलों में विकास और लोकहित की योजनाओं के लाभ बड़ी संख्या में ऐसे विदेशियों द्वारा लेते हुए पाया गया है।"

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को संसद में एनआरसी के मुद्दे पर बोलते हुए इसे पूरे देश में लागू करने का समर्थन किया था।

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को बड़ा फेर-बदल करते हुए मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया। उन्होंने इसके अलावा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, बिहार और नागालैंड में भी नए राज्यपाल नियुक्त किए। राष्ट्रपति भवन ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा, "भारत के राष्ट्रपति ने निम्न नियुक्तियां करते हुए खुशी जाहिर की है। मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का स्थानांतरण कर उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया है।"

आनंदीबेन पटेल के स्थान पर लाल जी टंडन को लाया गया है, जो बिहार के राज्यपाल थे।

बिहार के राज्यपाल के तौर पर लाल जी टंडन के स्थान पर फागु चौहान को नियुक्त किया गया है।

इनके अलावा राष्ट्रपति ने जगदीप धनकर को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल तथा रमेश बैस को त्रिपुरा का राज्यपाल नियुक्त किया है।

सरकार के प्रतिनिधि और नागा शांति वार्ता के वार्ताकार आर.एन. रवि को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम रूप जहां प्रगति पर है, वहीं गृह मंत्रालय अवैध आव्रजकों को देश से निर्वासित करने के लिए इसे देशभर में लागू करने के लिए काम कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा 30 मई को विदेशी (अधिकरण) आदेश, 1964 में संशोधन जारी किए जाने से एनआरसी को और व्यापक करने का मार्ग खुल रहा है।

संशोधित आदेश राज्य सरकारों तथा यहां तक कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिला अधिकारियों को भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान करने के लिए न्यायाधिकरण गठित करने की शक्ति प्रदान करता है।

अब तक ऐसा न्यायाधिकरण गठित करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास था। ये न्यायाधिकरण असम में अर्धन्यायिक निकाय हैं।

सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में एनआरसी प्रक्रिया देश में सबसे ज्यादा बारीकी से देखी जाने वाली प्रक्रियाओं में से है क्योंकि इसकी अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद लाखों लोग देश के नागरिक नहीं रहेंगे।

एनआरसी को सिर्फ असम नहीं बल्कि राष्ट्रव्यापी करने पर जोर देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार सुनिश्चित करेगी कि भारत में रह रहे सभी अवैध शरणार्थी अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार निर्वासित कर दिए जाएं।

शाह ने सदन में कहा, "सरकार देश के हर हिस्से से अवैध आव्रजकों को निर्वासित करेगी।"

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जम्मू: अमरनाथ यात्रा के लिए शुक्रवार को जम्मू से 4,094 श्रद्धालुओं का एक और जत्था रवाना हुआ। इस साल एक जुलाई से यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 19 दिनों में 2.38 लाख से अधिक श्रद्धालु समुद्र तल से 3,888 मीटर ऊपर स्थित बाबा बफार्नी के दर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि एक जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 19 दिनों में 2,38,974 श्रद्धालुओं ने पवित्र शिवलिंग के दर्शन कर लिए हैं।

पुलिस ने कहा कि भगवती नगर यात्री निवास से 4,094 यात्रियों का एक जत्था शनिवार को दो सुरक्षा काफिलों में रवाना हुआ।

एक पुलिस अधिकारी ने आगे बताया, "इनमें से 1,686 यात्री बालटाल आधार शिविर जा रहे हैं जबकि 2,408 यात्री पहलगाम आधार शिविर जा रहे हैं।"

श्रद्धालुओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बर्फ की विशाल संरचना बनती है जो भगवान शिव की पौराणिक शक्तियों की प्रतीक है।

तीर्थयात्री पवित्र गुफा तक जाने के लिए या तो अपेक्षाकृत छोटे 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से जाते हैं या 45 किलोमीटर लंबे पहलगाम मार्ग से जाते हैं। बालटाल मार्ग से लौटने वाले श्रद्धालु दर्शन करने वाले दिन ही आधार शिविर लौट आते हैं।

दोनों आधार शिविरों पर हालांकि तीर्थ यात्रियों के लिए हैलीकॉप्टर की भी सेवाएं हैं।

स्थानीय मुस्लिमों ने भी हिंदू तीर्थयात्रियों की सुविधा और आसानी से यात्रा सुनिश्चित कराने के लिए बढ़-चढ़कर सहायता की है।

पवित्र गुफा की खोज सन 1850 में एक मुस्लिम चरवाहा बूटा मलिक ने की थी।

किवदंतियों के अनुसार, एक सूफी संत ने चरवाहे को कोयले से भरा एक बैग दिया था, बाद में कोयला सोने में बदल गया था।

लगभग 150 सालों से चरवाहे के वंशजों को पवित्र गुफा पर आने वाले चड़ावे का कुछ भाग दिया जाता है।

इस साल 45 दिवसीय अमरनाथ यात्रा का समापन 15 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा।

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काठमांडू: मोतिहारी-अमलेखगंज ऑयल पाइपलाइन परियोजना अगले माह से शुरू होगी। हिमालयन टाइम्स ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में कहा कि दोनों देशों के कार्यकारी प्रमुखों द्वारा नेपाल-भारत द्विपक्षीय परियोजना के उद्घाटन के बाद अगस्त से पाइपलाइन परियोजना का वाणिज्यिक संचालन शुरू होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी के साथ परियोजना का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे, जिसके बाद से नेपाल आधिकारिक तौर पर भारत के साथ ऑयल पाइपलाइन के जरिए तेल का व्यापार करेगा।

हिमालयन टाइम्स ने कहा कि विदेश मंत्रालय और नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (एनओसी) ने अगस्त के पहले हफ्ते में होने वाले उद्घाटन की तैयारियों की पुष्टि की है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह भी संभावना है कि परियोजना का शुभारंभ दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों द्वारा किया जाए, क्योंकि राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने अपनी भारत यात्रा के दौरान भारत में अपने समकक्ष रामनाथ कोविंद को नेपाल की आधिकारिक यात्रा पर आने का निमंत्रण दिया था।

सूत्रों ने कहा कि हालांकि इस बाबत तारीख निश्चित नहीं की गई है, लेकिन राष्ट्रपति कोविंद की नेपाल यात्रा की तैयारियां की जा रही हैं।

मोतिहारी-अमलेखगंज ऑयल पाइपलाइन परियोजना सर्वप्रथम 1996 में प्रस्तावित की गई थी। हालांकि, वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 की काठमांडू की यात्रा के बाद इसमें तेजी आई।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: केंद्र और असम सरकार ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के 20 प्रतिशत डाटा के पुनर्सत्यापन का हवाला देकर एनआरसी की अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और असम सरकार से पुनर्सत्यापन की जरूरत पर सवाल किया है। एनआरसी की रिपोर्ट 31 जुलाई को प्रकाशित होनी है। महान्यायवादी तुषार मेहता ने केंद्र और असम सरकार का पक्ष रखते हुए कहा, "हम दुनिया की शरणार्थी राजधानी नहीं बन सकते।" उन्होंने पुनर्सत्यापन के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की।

मामले की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए मेहता ने आवेग में तर्क दिया, "प्रत्यक्ष तौर पर छोटे अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारण सूची में और भी गलत लोगों के नाम शामिल हैं। इसलिए हमें पुनर्सत्यापन की जरूरत है। हमने बांग्लादेश की सीमा से लगने वाले जिलों में इसका एहसास किया है।"

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि एनआरसी राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लगभग 80 लाख नामों का सत्यापन पहले ही किया जा चुका है।

गोगोई ने मेहता से सवाल किया, "ऐसी स्थिति में सांकेतिक पुनर्सत्यापन की जरूरत क्यों है? अगर हम संतुष्ट हैं कि सत्यापन उपयुक्त तरीके से किया गया है तो आपको नहीं लगता कि पुनर्सत्यापन की कोई जरूरत नहीं है।"

इस पर मेहता ने कहा कि पुनर्सत्यापन से प्रशासन को ऐसे अवैध प्रवासियों को निकालने में मदद मिलेगी, जिन्होंने एनआरसी अधिकारियों को रिश्वत देकर सूची में अपना नाम शामिल कराया है।

--आईएएनएस