नई दिल्ली: यहां की एक अदालत ने गुरुवार को आईएनएक्स मीडिया की पूर्व निदेशक इंद्राणी मुखर्जी की आईएनएक्स मीडिया मामले में सरकारी गवाह (अप्रवूर) बनने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

अदालत मामले में 29 मई को फैसला सुनाएगी।

अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के मामले में मुंबई की भायखाला जेल में बंद इंद्राणी को विशेष न्यायाधीश अनुराग एस के समक्ष पेश किया गया।

सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस बात की जांच कर रहे हैं कि कार्ति चिदंबरम को 2007 में कैसे विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से आईएनएक्स मीडिया के लिए मंजूरी मिली, जब उनके पिता पी. चिदंबरम केंद्रीय वित्तमंत्री थे।

अबतक की जांच से पता चला है कि एफआईपीबी की स्वीकृति के लिए, आईएनएक्स मीडिया के निदेशकों पीटर और इंद्राणी मुखर्जी ने पी. चिदंबरम से मुलाकात की थी ताकि उनके आवदेश में कोई देरी नहीं हो।

एजेंसी ने मुखर्जी की याचिका का समर्थन किया है।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: भारतीय समाज की पारंपरिक महिला की छवि को तोड़ते हुए मराठी नाटककार विजय तेंदुलकर ने एक युवा लड़की मीता को केंद्र बनाकर 'मीता की कहानी' नाम का एक प्रासंगिक नाटक लिखा है। श्रीराम सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स (एसआरसीपीए) रेपेट्री तेंदुलकर के इसी नाटक का मंचन 25 व 26 मई को करेगा। 

विजय तेंदुलकर द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन समीप सिंह (एनएसडी के पूर्व छात्र और फिलहाल एसआरसीपीए रेपेट्री के चीफ) ने किया है। नाटक की अवधि 90 मिनट की है।

विजय तेंदुलकर के नाटक की मुख्य पात्र मीता अपने संघर्ष के जद्दोजहद के दौरान एक अन्य लड़की, नामा से मिलती है। नामा उसे उन चीजों का अहसास कराती है जिसे उसने अपनी जिंदगी में पहले कभी महसूस नहीं किया। क्या वह अपनी अनोखी भावनाओं को समाज के सामने जाहिर कर पाएगी? क्या समाज उसकी चॉइस पर कोई सवाल उठाए बगैर उसे उसकी भावनाओं के साथ स्वीकार करेगा? इस दौरान एक और चरित्र, बापू उसकी यात्रा को आगे बढ़ाता है और मीता की जिंदगी के उतार-चढ़ाव एवम् संवेदनशील घटनाओं के स्पर्श व उतार-चढ़ाव के साथ उसे रूढ़ियों से निजात दिलाता है।

विजय तेंदुलकर ने इस अपने समय से काफी आगे रहकर इस नाटक को लिखा था, हालांकि, आज इसकी प्रासंगिकता कहीं अधिक है। आज की युवा पीढ़ी अपनी आंखों में हजारों इच्छाएं लेकर मेट्रोज में रहने का सपना देखती है, फिर चाहे शिक्षा पाना हो या अपनी ड्रीम जॉब करना। यही कारण है कि हॉस्टल, शेयरिंग रूम्स और लिव-इन रिलेशनशिप्स खूब फैशन में हैं।

ऐसी लाइफस्टाइल में जहां कोई जिंदगी की जटिलताओं से संघर्ष कर रहा है, प्यार का अहसास और दूसरे से प्यार पाने की इच्छा होमोसेक्सुअल संबंधों को भी बढ़ावा देती है।

अनुच्छेद 377 से सम्मान मिलने के बावजूद, क्या समाज मानसिक अवरोध को तोड़ने और इसे स्वींकार करने में सक्षम हुआ है? एक महिला अगर किसी पुरूष के स्वभाव को समझती है तो क्या वह पितृसत्तार के उत्पीड़न को खत्म कर देती है? मीता जैसे लोग, समाधान नहीं मिलने के कारण क्या अपनी जिंदगी को खत्म कर रहे हैं? यह नाटक मीता की कहानी हमें ऐसे मुद्दों पर सोचने और सवाल करने के लिए मजबूर करता है।

नाटक को संबंधों की जटिलताओं के इर्दगिर्द बुना गया है और यह धारणाओं एवं नैतिक मूल्यों की समझ पर आधारित है जोकि खासतौर से महिलाओं के लिए बनाए गए हैं। बापू का किरदार काफी खास है जिसे समाज द्वारा महिलाओं तक सीमित मान लिया जाता है जबकि मीता एक बोल्ड किरदार के रूप में अकेली खड़ी है और अपने समय से काफी आगे है।

विजय तेदुलकर के यथार्थवाद से विपरीत, इस नाटक को यथार्थवादी डिजाइन को समर्पित किया गया है, जोकि खुलेपन को प्रस्तुत करता है और पूरी कहानी धाराप्रवाह चलती है। यह नाटक अवधारणा से लेकर विवेचना तक, जिंदगी की जटिलताओं एवं सादगी के बीच घूमता है और इन्हें जब गलत तरह से समझा जाता है, तो यह एक अवांछित अंत तक पहुंच जाता है।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्‍ली: मतगणना के दौरान हिंसा की संभावना को देखते हुए गृहमंत्रालय सतर्क हो गया है। गृहमंत्रालय ने इसी के मद्देनजर सभी राज्‍यों के मुख्य सचिवों और डीएसजीपी को अलर्ट रहने के लिए कहा है। गृहमंत्रालय ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में कानून और शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

बता दें कि सात चरणों में चले लोकसभा चुनाव के नतीजे कल यानी गुरुवार को आएंगे। मतों की गिनती 23 मई को है, इसलिए गृहमंत्रालय को ऐसा अंदेशा है कि इस दौरान हिंसा भड़क सकती है। इस बार लोकसभा चुनाव में इवीएम पर रार मची हुई है। कई विपक्षी दल अनेकों बार चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं।

मतगणना से पहले कई पार्टियों ने इवीएम और वीवीपैट में गड़बड़ी की आशंका लेकर और साथ ही हर विधानसभा में कम से कम 50 फीसद से ज्‍यादा पर्चियों को मिलान करनेे की मांग की। इस मांग के ठुकराए जाने के बाद से ही कई नेता तीखे बयान दे रहे हैं। इसी के मद्देनजर गृहमंत्रालय को स्‍ट्रॉग रूम की सुरक्षा और अन्‍य किसी प्रकार की हिंसा से निपटने के लिए सतर्कता अलर्ट जारी करना पड़ा। गृहमंत्रालय ने साफ किया है कि मतगणना वाले स्‍थल पर सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं करना पड़े।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और महागठबंधन के घटक रालोसपा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को एक्जिट पोल के नतीजे से नाराजगी जताते हुए कहा कि भाजपा रिजल्ट लूटने की कोशिश कर रही। उसके इस रवैये से सड़कों पर खून बहेगा। कुशवाहा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि रिजल्ट लूट की कोई कोशिश हुई तो हथियार भी उठाने से परहेज नहीं करेंगे। जनता का आक्रोश संभल नहीं पाएगा।

भभुआ के पूर्व विधायक और लोकसभा चुनाव में बक्सर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार रामचंद्र यादव ने कैमूर ईवीएम मामले में हथियार लहराते हुए प्रेस कान्फ्रेंस किया। उन्‍होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए हथियार उठाना पड़े तो उठाऊंगा। रिजल्ट फेवर में नहीं आने पर अब लड़ना पड़ेगा, अब चुप बैठने से काम नहीं चलेगा। उनके इस बयान का वीडियो वायरल हो रहा है।

 

 

 

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मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता जयदत्त क्षीरसागर बुधवार को शिवसेना में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि राकांपा में उन्हें घुटन महसूस हो रही थी।

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शिव बंधन के प्रतीक स्वरूप एक लाल धागा बांध कर तथा पार्टी का एक छोटा झंडा भेंट कर उनका पार्टी में स्वागत किया।

इस मौके पर क्षीरसागर ने कहा कि राकांपा में वह घुटन महसूस कर रहे थे और उन्होंने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार की इन परिस्थिति के लिए आलोचना की, जिनके कारण उन्हें शिवसेना में शामिल होना पड़ा।

ठाकरे ने कहा कि क्षीरसागर जैसे एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता के आने से उनकी पार्टी बीड और मराठवाड़ा में और मजबूत होगी।

हालांकि उद्धव ने नई दिल्ली में मंगलवार को हुए राजग के रात्रिभोज के बारे में कुछ बताने से इंकार कर दिया।

ठाकरे ने एक्जिट पोल के अनुमानों पर भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, जिसमें भाजपा को भारी बहुमत मिलता दिखाया गया है।

क्षीरसागर ने इसके पहले बुधवार को ही राकांपा से और विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस-राकांपा की पूर्व सरकार के दौरान उन्होंने मंत्री के रूप में कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी।

लेकिन पिछले कुछ वर्षो से बीड में और क्षेत्रीय राजनीति में अपने भतीजे संदीप क्षीरसागर और नेता प्रतिपक्ष (विधान परिषद) धनंजय मुंडे द्वारा दरकिनार किए जाने से नाराज थे।

लोकसभा चुनाव में क्षीरसागर ने राकांपा उम्मीदवार बजरंग सोनावने की खुलकर खिलाफत की थी और भाजपा उम्मीदवार प्रीतम मुंडे का समर्थन किया था।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: मतगणना से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में हेरफेर के आरोपों के बीच बुधवार को स्वतंत्र शोध संस्थान पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने बताया कि मतगणना किस तरह से की जाएगी।

सवालों के घेरे में आई ईवीएम का इस्तेमाल साल 2000 के चुनावों से हो रहा है।

चुनाव आयोग अब तक 113 विधानसभाओं के चुनाव और लोकसभा के तीन चुनाव ईवीएम से करा चुका है।

पारदर्शिता और व्यवस्था में मतदाता का विश्वास बढ़ाने के लिए साल 2013 में ईवीएम से वीवीपैट सिस्टम को जोड़ा गया।

मतगणना प्रक्रिया को इस तरह स्पष्ट किया गया है :

मतों की गिनती के लिए कौन जिम्मेदार है?

किसी क्षेत्र में चुनाव कराने के लिए चुनाव अधिकारी (आरओ) उत्तरदायी होता है। इसमें मतों की गणना भी शामिल है। आरओ की तैनाती प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए चुनाव आयोग, राज्य सरकार के परामर्श से करता है।

मतगणना कहां होती है?

आरओ यह तय करता है कि संसदीय क्षेत्र की मतगणना कहां कराई जानी है। आदर्श स्थिति यही है कि मतगणना एक ही स्थान पर कराई जानी चाहिए और इसमें भी निर्वाचन क्षेत्र के आरओ के मुख्यालय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मतगणना आरओ के प्रत्यक्ष निरीक्षण में होनी चाहिए।

लेकिन, हर संसदीय क्षेत्र में कई विधानसभा क्षेत्र होते हैं। इस हालत में मतगणना एक से अधिक स्थानों पर सहायक चुनाव अधिकारी (एआरओ) की निगरानी में हो सकती है।

संसदीय क्षेत्र के हर विधानसभा खंड में मतगणना एक हाल में की जाती है। मतगणना के हर दौर में 14 ईवीएम के मत गिने जाते हैं।

अगर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए हों, जैसे इस बार ओडिशा, आंध्र में हुए हैं, तो पहली सात मेज विधानसभा चुनाव के मतों की गिनती के लिए आरक्षित की जाती हैं, बाकी पर लोकसभा चुनाव की मतगणना होती है।

अगर किसी क्षेत्र में उम्मीदवारों की संख्या बहुत अधिक है तो चुनाव आयोग की अनुमति से हाल और मेजों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। हाल में एक बार में एक ही विधानसभा खंड के मतों की गिनती की जा सकती है। यह जरूर है कि इस खंड की गिनती पूरी होने पर दूसरे विधानसभा खंड के मतों की गिनती इसी हाल में की जा सकती है।

मतगणना की प्रक्रिया :

मतगणना आरओ द्वारा नियुक्त मतगणना सुपरवाइजरों द्वारा की जाती है। मतगणना हाल में उम्मीदवार अपने मतगणना एवं चुनाव एजेंटों के साथ मौजूद रहते हैं।

मतों की गिनती इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट (ईटीपीबी) और पोस्टल बैलेट (पीबी) की गणना से शुरू होती है। इन मतों को सीधे आरओ की निगरानी में गिना जाता है। पीबी की गणना शुरू होने के आधा घंटे बाद ईवीएम मतों की गणना शुरू की जाती है। हर राउंड की समाप्ति पर 14 ईवीएम के नतीजों का ऐलान किया जाता है।

वीवीपैट पर्चियों की गणना की प्रक्रिया क्या है :

प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के हर विधानसभा खंड की एक-एक ईवीएम को रैंडम तरीके से वीवीपैट मिलान के लिए चुना जाता है। वीवीपैट पर्चियों का सत्यापन हाल में स्थित एक सुरक्षित वीवीपैट मतगणना बूथ के अंदर किया जाता है। ईवीएम मतों की गिनती के बाद हाल में किसी भी मतगणना मेज को वीवीपैट मतगणना बूथ में बदला जा सकता है।

संसदीय क्षेत्र में आम तौर से पांच से दस विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

इस बार सर्वोच्च न्यायालय ने तय किया है कि हर विधानसभा खंड के पांच रैंडम तरीके से चुने गए मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का मिलान ईवीएम के नतीजों से किया जाएगा। इसका अर्थ यह हुआ कि हर संसदीय क्षेत्र में वीवीपैट पर्चियों का मिलान 25 से 50 ईवीएम से करना होगा। यह प्रक्रिया सीधे आरओ-एआरओ की निगरानी में होगी।

चुनाव आयोग ने तय किया है कि पांच वीवीपैट की गणना क्रमानुसार की जाएगी। वीवीपैट मिलान प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरओ निर्वाचन क्षेत्र के अंतिम नतीजों का ऐलान कर सकता है।

अगर वीवीपैट गणना और ईवीएम के नतीजों में समानता नहीं रही तो छपी हुई पेपर स्लिप की गणना को अंतिम माना जाएगा। चुनाव आयोग ने इसका खुलासा नहीं किया है कि पांच वीवीपैट में से किसी एक की गणना में भी असंगति पाए जाने पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: हिंसा के स्थानीय सौदागर हुर्रियत के समर्थन से पाकिस्तान के छद्म युद्ध का एक दरवाजा बंद होते ही दूसरा दरवाजा इस्लामिक खिलाफत लिखे मार्ग के साथ खुलता है, जिसमें क्रूर स्पर्धा है और कुछ हद तक घाटी में कश्मीर के लोगों को कमजोर बना रहा है।

दूसरा दरवाजा थोड़ा ही खुला है, लेकिन इसे स्थानीय युवक आदिल अहमद डार द्वारा पुलवामा में किए गए आत्मघाती बम विस्फोट की शक्तिशाली कल्पना के जरिए ठोकर मारकर खोला जा रहा है।

अफजल गुरु, बुरहान वानी और जाकिर मूसा से शुरू हुई स्थानीय जंगियों और विचारकों के पोस्टर की लंबी फेहरिस्त में डार नया नाम बन कर उभरा है।

ये सभी जंगी युवक सोशल मीडिया और आजादी की नई परिभाषा से जन्मी 'आजादी' की पीढ़ी के हैं। राजनीतिक इस्लाम खुद को नैतिकतावादी धार्मिक इस्लाम के रूप में ढाल रहा है।

भारत का सुरक्षा तंत्र आईएस में आस्था रखने वाले देसी आतंकवाद के सिर उठाने को लेकर चिंचित है। इस बात पर पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के आला पुलिस अधिकारी और कश्मीर रेंज के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एस.एम. सहाय ने मुहर लगाई थी।

विश्व समुदाय के अपने आप में सिमट जाने और अधिक संकीर्ण बनकर हस्तक्षेप करने वाले इस्लामिक जिहादी के लिए दरवाजा बंद कर लेने से अब सभ्यताओं का टकराव कड़वी सच्चाई बन गई है।

यह इस्लाम बनाम ईसाई या इस्लाम बनाम हिंदू धर्म या शुद्धतावादी इस्लाम बनाम अशुद्धतावादी इस्लाम हो सकता है, जिसका खेल दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहा है।

आस्तिकों और नास्तिकों के बीच दुनिया बंट चुकी है। भारत में रक्तपात को अंजाम देने के पाकिस्तान के इरादे का मुख्य केंद्र कश्मीर बन गया है, जोकि भारत के खुफिया और सुरक्षा तंत्र के लिए चिंता का विषय है।

श्रीलंका में बमबारी की घटनाओं के बाद भय का माहौल बना हुआ है। इस्लामी कट्टरपंथी के मन में तकफीर समाया हुआ है, जिसके कारण वह धर्म पथ से भटके लोगों को निशाना बनाते हैं। इसलिए तकफीर में तीन तरह का अलगाव है, जिसके लिए वह अशुद्ध मुस्लिम को भी निशाना बनात हैं। इसलिए निशाने पर अहमदिया, शिया और सूफी हो सकते हैं, जो पूरी दुनिया में क्रमबद्ध तरीके के देखे जा रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर बांग्लादेश में हिफाजत-ए-इस्लाम ने खुद को चर्चा में लाने के लिए अहमदिया को निशाना बनाया।

मई 2013 में शाप्ला स्क्वेयर विरोध या मोतीझील जनसंहार, जिसे ऑपरेशन शाप्ला या ऑपरेशन फ्लैश आउट कहा जाता है, वह इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

इस्लामी दबाव समूह हिफाजत-ए-इस्लाम ने मीडिया में इस्लाम के प्रति पूर्वाग्रह बंद करने के मकसद से ईशनिंदा कानून को हटाने की मांग को लेकर ढाका में भारी प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने रैपिट एक्शन बटालियन और बॉर्डर गार्ड को उतारा। इसके फलस्वरूप पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हुआ, जिसमें तकरीबन 20 से लेकर 61 लोग मारे गए।

कश्मीर घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी कमांडर बुरहान वानी ने अगस्त 2015 में अपने पहले वीडियो में खिलाफत को स्थापित करने के लिए दक्षिण कश्मीर में युवाओं से हथियार उठाने की अपील की।

छह मिनट का यह वीडियो काफी प्रभावी साबित हुआ, क्योंकि इसे मोबाइल संदेश व अन्य सोशल मीडिया नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित किया गया।

वीडियो में वाणी को एक बाग में राइफल और पवित्र कुरान की एक प्रति के साथ दिखाया गया है और उसके बगल में दो आतंकी खड़े हैं। इस नए तरह के आतंक के उभरने से सुरक्षा तंत्र हैरान था, क्योंकि इसमें महज भारत विरोधी अभियान के लिए समर्थन नहीं मांगा गया था, बल्कि इसमें घाटी में खिलाफत को स्थापित करने का एक बड़ा इस्लामी एजेंडा था।

उसका शागिर्द जाकिर मूसा ने इसका अनुकरण किया और उसने खुद को हुर्रियरत से दूर रखकर उनको चुनौती पेश की।

पहली बार अंसार गजवा-ए-हिंद को मजबूत आधार मिला। मई 2017 में मूसा ने कश्मीर में शरिया लागू करने की राह में अड़चन डालने वालों का शिर काटने का आह्वान किया।

--आईएएनएस

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वाराणसी: शनि, राहु और गुरु की तिकड़ी एग्जिट पोल के आंकड़ों को बिगाड़ सकती है और इससे केंद्र में नई सरकार बनाने में कुछ परेशानी आ सकती है।

वाराणसी के ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहों की यह स्थिति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी तो बना सकती है, लेकिन हो सकता है भाजपा बहुमत तक न पहुंच सके।

पंडित ऋषि द्विवेदी के अनुसार, ग्रहों की स्थित के कारण लोकतंत्र में अस्थिरता है और यह चुनाव के परिणामों में दिखेगा।

उन्होंने कहा, "ग्रहों की इस स्थिति के कारण कोई भी सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को 220-240 सीटें मिल सकती हैं, वहीं भाजपा 140-160 सीटों तक रह सकती है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) को 110-140 सीटें मिल सकती हैं।"

द्विवेदी ने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा)-बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जो अपना आधार भी बढ़ाएंगी।

एक अन्य ज्योतिषी पंडित दीपक मालवीय ने भी कहा कि सरकार गठन में काफी परेशानी आ सकती है और नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत भविष्य भी संकेत देता है कि सरकार गठन के लिए उन्हें समझौते करने पड़ सकते हैं।

मालवीय ने कहा, "पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मेघालय, मिजोरम, आंध्र प्रदेश और केरल की पार्टियां सरकार गठन के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी।"

कांग्रेस के बारे में उन्होंने कहा कि पार्टी अपना स्थिति मजबूत करेगी और उसका वोट प्रतिशत भी बढ़ेगा, लेकिन दिल्ली की कुर्सी से दूर रहेगी।

ज्योतिषी गणेश प्रसाद मिश्र भी अन्य दोनों ज्योतिषियों के अनुमान से सहमत हैं, बल्कि वह यह भी कहते हैं कि ग्रहों की स्थित के कारण 16वीं लोकसभा के कई चेहरे 17वीं लोकसभा में नहीं दिखाई देंगे।

--आईएएनएस

 

 

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संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर 0.6 प्रतिशत घटा कर सात प्रतिशत कर दिया है। इसके बावजूद यह दुनिया की सर्वाधिक वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्था बनी हुई है।

'विश्व आर्थिक स्थिति और संभावना' रपट पर अर्धवार्षिक अपडेट जारी करने के मौके पर वैश्विक आर्थिक निगरानी की प्रमुख डॉन हॉलैंड ने कहा कि संभावित मंदी के बावजूद "मैं यह रेखांकित करना चाहूंगी कि सभी देशों में खासकर वृहत अर्थव्यवस्थाओं में भारत शीर्ष देशों में शामिल है।"

उन्होंने कहा, "2.7 प्रतिशत की वैश्विक वृद्धि दर की तुलना में, निश्चित ही यह विश्व में वृद्धि का एक अत्यधिक उच्च दर है। हम अभी भी 2019 में सात प्रतिशत और 2020 में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं।"

संयुक्त राष्ट्र का यह अनुमान पिछले महीने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और एशियाई विकास बैंक के अनुमान से कम है।

आईएमएफ ने जनवरी में भारत के विकास दर अनुमान 7.5 प्रतिशत में 0.2 प्रतिशत की कटौती कर दी थी, जिससे यह 7.3 प्रतिशत हो गया था। वहीं इसने अगले वर्ष के लिए 7.5 प्रतिशत का अनुमान लगाया था, जोकि पहले के 7.7 प्रतिशत के अनुमान से कम है।

एशियाई विकास बैंक ने कहा है कि भारत की विकास दर इस वर्ष 7.2 प्रतिशत और अगले वर्ष 7.3 प्रतिशत रहेगी।

हॉलैंड ने कहा कि नोटबंदी का असर अर्थव्यवस्था पर लगातार नहीं रहेगा।

उन्होंने कहा, "नोटबंदी को जब लागू किया गया था तब अर्थव्यवस्था पर इसका काफी असर पड़ा था। लेकिन यह अपेक्षाकृत जल्द ही गुजर गया और हम यह नहीं कह सकते कि मौजूदा वृद्धि के आंकड़े पर इसका बहुत बड़ा असर पड़ा है।"

संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम वैश्विक वृद्धि दर में, जनवरी में अनुमानित तीन प्रतिशत की वृद्धि दर में 0.3 प्रतिशत की कटौती की गई है, और यह 2.7 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने अगले वित्त वर्ष के लिए अपने वृद्धि अनुमान में 0.1 प्रतिशत की कमी की है, जिससे यह घटकर 2.9 प्रतिशत हो गई है।

चीन की वृद्धि दर में जनवरी के अनुमान 6.3 प्रतिशत और अगले वर्ष के लिए 6.2 प्रतिशत में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

वहीं अमेरिका के लिए इस वर्ष 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर और अगले वर्ष के लिए 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया था, जिसमें क्रमश: 0.2 व 0.1 प्रतिशत की कटौती की गई है।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया जिसमें उसने रिश्वत मामले में अपने पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज मामले में जांच पूरी करने के लिए और समय मांगा है।

जांच एजेंसी ने अस्थाना, पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) देवेंद्र कुमार और दो अन्य लोगों पर दिसंबर 2017 से अक्टूबर 2018 के बीच मोइन कुरैशी मामले में कम से कम पांच बार रिश्वत लेने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

अदालत ने इसी साल 11 जनवरी को अस्थाना, कुमार और कथित बिचौलिए मनोज प्रसाद के खिलाफ दर्ज मामले को खत्म करने से इनकार कर सीबीआई को 10 सप्ताह के अंदर जांच करने का आदेश दिया था। यह समय सीमा 24 मार्च को खत्म हो गई थी।

अदालत ने कहा कि अधिकारियों के खिलाफ गंभीर आरोप हैं।

सीबीआई के अनुसार, कुमार ने उद्योगपति मोइन कुरैशी मामले में गवाह सतीश साना बाबू के बयान को बदलकर यह दिखाया था कि यह बयान 26 सितंबर 2018 में दिल्ली में दर्ज हुआ था।

एजेंसी के अनुसार, जांच में बाद में सामने आया कि बाबू उस दिन दिल्ली में नहीं हैदराबाद में था। वह जांच में एक अक्टूबर 2018 को शामिल हुआ।

--आईएएनएस

 

 

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पटना: बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के 'खून की नदियां बहा देने वाले' बयान की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने आलोचना की है। कुशवाहा ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा चुनाव रिजल्ट(नतीजे) लूट करने की कोशिश करने के रवैये से सड़कों पर खून बहेगा।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने उनके इस बयान की आलोचना करते हुए इसे महागठबंधन की खीज बताया है।

राजग के पूर्व साथी कुशवाहा ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "पहले मतदान केंद्र लूटा जाता था। अब भाजपा एग्जिट पोल के परिणाम को शस्त्र बनाकर रिजल्ट लूटना चाहती है। ईवीएम को इधर-उधर किए जाने की बातें सामने आई हैं।"

उन्होंने कहा कि रिजल्ट लूट की कोई कोशिश हुई तो वे हथियार भी उठाने से परहेज नहीं करेंगे। जनता का आक्रोश संभल नहीं पाएगा।

उन्होंने कहा, "वोट की रक्षा के लिए हथियार भी उठाना हो तो उठाइए। आज जो रिजल्ट लूट की कोशिश हो रही है, इसको रोकने के लिए हथियार भी उठाना हो तो उठाना चाहिए।"

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे सडकों पर खून की नदियां बहेंगी।

इस बयान के बाद बिहार की सियासत गर्मा गई है।

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता संजय सिंह ने बुधवार को कुशवाहा को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया और कहा, "हम लोगों ने भी चूडियां नहीं पहनी हैं। खून बहाने की बात करते हैं। हम लोगों के शरीर में भी खून ही है। फरियाना है फरिया लें।"

भाजपा के प्रवक्ता निखिल आनंद ने कुशवाहा की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को लोकतंत्र में सही नहीं कहा जा सकता।

लोकतांत्रिक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के चिराग पासवान ने कहा कि महागठबंधन एग्जिट पोल के बाद हताशा, निराशा, मायूसी में है। यही कारण है कि ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, "ऐसे बयानों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। ऐसे बयान कहीं से सही नहीं हैं।"

उल्लेखनीय है कि सभी चैनलों के एग्जिट पोल में राजग को बढ़त दिखाई गई है।

--आईएएनएस

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