नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी स्थित कांग्रेस मुख्यालय में गुरुवार को सन्नाटा छाया हुआ है। मतगणना के रुझानों में पार्टी के आंकड़े में पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले बहुत कम बढ़ोतरी होती दिख रही है।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी 298 सीटों पर आगे है, जबकि कांग्रेस 52 सीटों पर आगे चल रही है। पार्टी मुख्यालय में मौजूद कांग्रेस प्रवक्ता अपनी राय जाहिर करने से पहले रुझानों को जान लेना चाहते हैं।

पार्टी कार्यालय के बाहर कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पार्टी के विरुद्ध रुझानों का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा। उन्होंने तख्तियां लेकर प्रदर्शन भी किए जिसमें ईवीएम का प्रयोग नहीं करने की मांग की गई।

इससे पहले सुबह, कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं ने अच्छे नतीजे के लिए पार्टी कार्यालय के बाहर हवन किया।

कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने कहा कि पार्टी ने आम आदमी से जुड़े मुद्दों को लेकर लोकसभा चुनाव लड़ा था और विकास के मुद्दों पर ध्यान दिया था।

उन्होंने कहा, "चलिए अंतिम नतीजे का इंतजार करते हैं।"

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: कांग्रेस नेता उदित राज ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय के संबंध में विवादास्पद बयान दिया।

कांग्रेस नेता ने बुधवार को कहा कि जिस तरह से सर्वोच्च न्यायालय ने ईवीएम धांधली की शिकायतों और मतगणना के दिन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ 100 फीसदी वीवीपैट पर्चियों के मिलान की याचिकाओं का निपटारा किया है, उस पर सवाल उठता है कि क्या न्यायालय भी इस धांधली में शामिल है?

उदित राज ने बुधवार को ट्वीट किया, "सर्वोच्च न्यायालय कोर्ट क्यों नहीं चाहता की वीवीपैट की सारी पर्चियों को गिना जाए? क्या वो भी धांधली में शामिल है? चुनावी प्रक्रिया में जब लगभग तीन महीने से सारे सरकारी काम मंद पड़ा हुआ है तो गिनती में दो-तीन दिन लग जाएं तो क्या फर्क पड़ता है।"

गौरतलब है कि 23 मई को मतगणना के दौरान वेरिफाइबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की पर्चियों का ईवीएम के साथ 100 फीसदी मिलान की मांग करने वाली जनहित याचिका को मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था।

याचिका चेन्नई स्थित एक संगठन टेक फॉर ऑल ने दायर की थी।

इससे पहले सात मई को शीर्ष अदालत ने 21 विपक्षी दलों द्वारा उसके अप्रैल के फैसले की समीक्षा करने के लिए दायर याचिका को खारिज कर दिया था।

इससे पहले आठ अप्रैल को प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली शीर्ष अदालत की एक पीठ ने चुनाव आयोग (ईसी) को आम चुनावों में प्रति विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग बूथों पर पांच वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम से मिलान करने का निर्देश दिया था। अब तक सिर्फ एक वीवीपैट का मिलान होता रहा है।

अदालत ने कहा था कि संख्या में वृद्धि से मतदाताओं के साथ-साथ राजनीतिक दलों को भी अधिक संतुष्टि मिलेगी।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीपीपैट के प्रयोग पर 20 विपक्षी नेताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं के समाधान के लिए बुधवार को बैठक करेगा।

इन नेताओं न मंगलवार को इस बाबत चुनाव आयोग से मुलाकात की।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "हम बीते ढेड़ महीने से इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी..आयोग ने हमें करीब एक घंटे तक सुना। उन्होंने हमें आश्वस्त किया कि वे मुख्यत: इन दो मुद्दों को सुलझाने के लिए बुधवार सुबह एक बार फिर मुलाकात करेंगे।"

प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रफुल्ल पटेल, द्रमुक की कनिमोझी, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, समाजवादी पार्टी (सपा) के रामगोपाल यादव, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सतीश चंद्र मिश्र, राजद के मनोज झा, माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी. राजा और आम आदमी पार्टी (आप) के अरविंद केजरीवाल शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि पांच अचानक से (रेंडमली) चुने गए मतदाता केंद्रों में वीवीपैट पर्चियों का सत्यापन मतगणना शुरू होने से पहले किया जाना चाहिए ना कि अंतिम चरण की समाप्ति के बाद किया जाना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने इसके अलावा यह भी मांग की है कि वीवीपैट सत्यापन में कहीं भी विसंगति पाई जाती है तो उस विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट पर्चियों का 100 प्रतिशत सत्यापन होना चाहिए।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के बाद जारी एग्जिट पोल (Exit Poll) के आंकड़ों में एक बार फिर भाजपा की  नेतृत्व वाली एनडीए (NDA) की सरकार बनती हुई नजर आ रही है। एग्जिट पोल के आंकड़ों के सामने आने के बाद कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra ) ने कार्यकर्ताओं से स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर डटे रहने की अपील की है।

एग्जिट पोल के आंकड़ों पर कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी है। कार्यकर्ताओं को जारी ऑडियो संदेश में प्रियंका ने कहा, 'आप लोग अफवाहों और एग्जिट पोल से हिम्मत मत हारिए। यह अफवाहें आपका हौसला तोड़ने के लिए फैलाई जा रही है। इस बीच आपकी सावधानी और भी महत्वपूर्ण बन जाती है। स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना केंद्रों पर डटे रहिए और चौकन्ना रहिए।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने कार्यकर्ताओं से आगे कहा, 'हमें पूरी उम्मीद है कि हमारी और आपकी मेहनत का फल मिलेगा।'

बता दें कि एग्जिट पोल के आंकड़ों के मुताबिक, देश में एक बार फिर मोदी सरकार बनती हुई दिखाई दे रही है। सभी एक्जिट पोल्स में एनडीए बहुमत के आंकड़े को पार करती हुई नजर आ रही है। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में भाजपा की नेतृत्व वाली एनडीए को 300 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं कांग्रेस की बात करें तो साल 2014 के मुकाबले कांग्रेस का प्रदर्शन इस बार थोड़ा बेहतर है। नतीजों के मुताबिक कांग्रेस को 96 से 107 सीटों का अनुमान है, लेकिन सत्ता में आने के लिए उसे 5 साल और इंतजार करना पड़ सकता है।

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को कहा कि 23 मई को लोकसभा चुनाव के परिणाम एक्जिट पोल से बेहतर होंगे, जिसमें भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सत्ता में लौटने का अनुमान जाहिर किया गया है।

कांग्रेस ने कहा कि एक्जिट पोल अतीत में गलत साबित हो चुके हैं और उसने भरोसा जताया कि पार्टी के लिए परिणाम रविवार के एक्जिट पोल से बेहतर होंगे।

आम आदमी पार्टी (आप) ने भी कहा कि अतीत में एक्जिट पोल गलत साबित हुए हैं और भाजपा की जीत दिलाने वाले टीवी वैज्ञानिकों का प्रचार विफल होगा।

नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने हालांकि कहा कि सभी एक्जिट पोल गलत नहीं हो सकते।

उमर ने ट्वीट किया, "हरेक एक्जिट पोल गलत नहीं हो सकता। समय टीवी बंद करने और सोशल मीडिया बंद करने और इस बात का इंतजार करने का है कि क्या 23 मई को दुनिया अभी भी घूम सकती है।"

भाजपा प्रवक्ता बिजय सोनकर शास्त्री ने कहा कि पार्टी एक्जिट पोल के अनुमान से बेहतर करेगी और यह अपने दम पर 300 सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा कि राजग को 350 सीटें मिलेंगी।

उन्होंने कहा, "यह एक्जिट पोल, सटीक नहीं है।"

शास्त्री ने कहा कि मोदी सरकार ने जमीन पर काम किया है और शौचालय निर्माण तथा गैस कनेक्शन प्रदान कर विश्वास अर्जित किया है।

उन्होंने कहा, "इसने एक स्थिर अर्थव्यवस्था प्रदान की, जिसने मध्य वर्ग की मदद की।"

उन्होंने कहा, "बड़ा बदलाव यह है कि राजनीतिक चर्चा जाति से विकास और आपूर्ति की तरफ मुड़ गई है।"

कांग्रेस प्रवक्ता राजीव गौड़ा ने कहा कि एक्जिट पोल हमेशा गलत होते हैं, और सीटों व वोट प्रतिशत का अनुमान लगाना बहुत कठिन है।

उन्होंने कहा, "डर के मारे ढेर सारे लोग अपनी सही पसंद बताने से हिचकते हैं। हमें 23 मई का इंतजार करना चाहिए, परिणाम काफी अलग होंगे।"

कांग्रेस नेता पी.सी. चाको ने भी कहा कि परिणाम एक्जिट पोल से अलग होंगे और कई सारी संभावनाएं हैं, जो 23 मई को स्पष्ट होंगी।

आप नेता संजय सिंह ने एक ट्वीट में कहा कि यदि टीवी वैज्ञानिकों को कोई शर्म है तो उन्हें दिल्ली के बारे में 2004, 2013 और 2015 के एक्जिट पोल को, और हाल में हुए राजस्थान व छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के एक्जिट पोल को याद करना चाहिए।

माकपा नेता वृंदा करात ने एक्जिट पोल पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर कहा, "हमें 23 मई को इंतजार करना चाहिए।"

--आईएएनएस

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लखनऊ: लोकसभा चुनाव के सातों चरण पूरे होते ही रविवार की शाम मतदान सर्वेक्षण (एग्जिट पोल) दिखाने की चैनलों के बीच मची होड़ के बीच कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि लगता है कि ये सब मोदी सरकार के प्रचार के लिए रचा गया है, जबकि भाजपा ने कहा कि जो अभी दिखाया जा रहा है, ऐसा ही मत सर्वेक्षण (ओपिनियन पोल) में पहले ही दिखाया जा चुका है।

तिवारी ने कहा, "हम नहीं जानते मतदान सर्वेक्षकों को ये आंकड़े कहां से मिले। हमने चुनाव के दौरान व्यापक दौरा किया था और जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। मैं तो इस बात को तरजीह दूंगा कि टिप्पणी करने से पहले नतीजों का इंतजार किया जाए, क्योंकि अतीत में एग्जिट पोल बुरी तरह गलत साबित हो चुके हैं।"

वहीं, उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि एग्जिट पोल वैसा ही बता रहा है जैसा ओपिनियन पोल में दिखाया गया था। उन्होंने कहा, "कांग्रेस को समझ लेना चाहिए कि उसका राफेल मुद्दा फ्लॉप हो चुका है। भाजपा एग्जिट पोल में जो दिखाया जा रहा है, उससे भी बेहतर करेगी।"

उधर, समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता जूही सिंह ने कहा, "एग्जिट पोल में विरोधाभासी आकड़े दिए जा रहे हैं। हमें तो पता है कि सपा-बसपा गठबंधन ने बहुत ही अच्छा किया है। नतीजे यह साबित करेंगे।"

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने शनिवार को मध्यप्रदेश के खंडवा के कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के लिए एक नोटिस जारी किया है। कांग्रेस उम्मीदवार अरुण सुभाषचंद्र यादव को पार्टी के प्रस्तावित न्याय योजना का नामांकन फार्म वितरित करने और भरवाने के लिए नोटिस जारी किया गया है। यहां रविवार को मतदान होने वाला है।

यादव को 24 घंटे के अंदर जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है।

चुनाव आयोग के बयान के अनुसार, "प्रथमदृष्टया पता चला है कि उक्त कार्य(न्याय नामांकन पत्रों के वितरण और भरवाने का काम) खंडवा से कांग्रेस उम्मीदवार अरुण सुभाषचंद्र यादव द्वारा किया गया या करवाया गया या फिर उनकी जानकारी में किया गया।"

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक सदस्य ने तीन मई को एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मध्यप्रदेश के तीन जिलों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और यादव की तस्वीर और पार्टी चिह्न् वाले न्याय योजना के नामांकन फार्म का अवैध रूप से वितरण किया गया और इसे भरवाया गया।

प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी जांच के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यादव के विरुद्ध मामला बनता है, क्योंकि उनके सहयोगी सुधानसिंह ठाकुर ने खंडवा जिले में फार्म का वितरण किया। ठाकुर के विरुद्ध पांच मई को एक एफआईआर दर्ज किया गया।

यादव के खिलाफ दस्तावेजी सबूतों की जांच करने के बाद, चुनाव आयोग ने उनसे एक दिन के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा और ऐसा न करने पर आयोग बिना उन्हें सूचित किए निर्णय लेगा।

कांग्रेस ने सत्ता में आने की स्थिति में अपनी न्याय योजना के अंतर्गत गरीब लोगों को 72,000 रुपये प्रतिवर्ष देने का वादा किया है।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: सातवें और अंतिम चरण के लोकसभा चुनाव की 59 संसदीय सीटों पर चुनाव प्रचार शुक्रवार शाम को समाप्त हो गया, जिसके बाद विभिन्न राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के करीब 10.17 करोड़ मतदाता रविवार को 918 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे।

रविवार को जिन राज्यों में मतदाना होगा, उसमें पंजाब(13), उत्तरप्रदेश (13), पश्चिम बंगाल(9), बिहार (8), मध्यप्रदेश (8), हिमाचल प्रदेश (4), झारखंड (4), चंडीगढ़ (1)शामिल हैं।

भाजपा ने 2014 में इस अंतिम चरण की 59 सीटों में से 30 पर विजय हासिल की थी।

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण की महत्वपूर्ण सीटों का ब्योरा इस प्रकार है-

वाराणसी(उत्तरप्रदेश)

महत्वपूर्ण उम्मीदवार : नरेंद्र मोदी(भाजपा), अजय राय(कांग्रेस), शालिनी यादव(सपा)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : मोदी न सिर्फ वाराणसी में बल्कि पूरे देश में अपने विकास के एंजेडे पर निर्भर हैं। भाजपा यहां से उनके लिए बड़े अंतर से जीत सुनिश्चित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि लोग कुछ सवाल उठा सकते हैं, लेकिन वास्तव में वाराणसी में कोई मुकाबला नहीं है। मोदी ने अपने नामांकन के दिन यहां एक रोडशो किया था।

वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी अपने प्रत्याशी अजय राय के समर्थन में रोडशो किया था और बहुज समाज पार्टी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शालिनी यादव के समर्थन में एक संयुक्त रैली आयोजित की थी।

गोरखपुर(उत्तरप्रदेश)

महत्वपूर्ण उम्मीदवार : रवि किशन (भाजपा), रामभुआल निषाद (सपा), मधुसूदन त्रिपाठी (कांग्रेस)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र से भाजपा की तरफ से भोजपुरी अभिनेता रविकिशन चुनाव लड़ रहे हैं। यहां मुख्य मुकाबला किशन और गठबंधन के प्रत्याशी निषाद के बीच माना जा रहा है।

यह ऐसी सीट है जिसे भाजपा समाजवादी पार्टी से छीनना चाहेगी। यहां पार्टी को 2018 उपचुनाव में महागठबंधन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, जिसे प्रदेश में भाजपा विरोधी मोर्चे का प्रयोगात्मक शुरुआत माना गया था।

भाजपा को झटका देने वाले मौजूदा सांसद प्रवीण निषाद ने अब भाजपा का ही दामन थाम लिया है।

गाजीपुर(उत्तरप्रदेश)

मुख्य उम्मीदवार : मनोज सिन्हा(भाजपा), अफजाल अंसारी (बसपा)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : सिन्हा अपने विकास कार्यो और प्रधानमंत्री मोदी की छवि पर निर्भर हैं तो अंसारी सपा-बसपा के सामाजिक संयोजन की वजह से मजबूत दिख रहे हैं। अंसारी जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई हैं, जिन्हें अभी भी अच्छा स्थानीय समर्थन प्राप्त है।

मिर्जापुर(उत्तरप्रदेश)

मुख्य उम्मीदवार : अनुप्रिया पटेल(अपना दल), ललितेश त्रिपाठी(कांग्रेस), राजेंद्र बिंद (सपा)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : यहां के 1,405,539 मतदाताओं में से कुर्मी समुदाय की अच्छी खासी संख्या है, जिससे अनुप्रिया पटेल आती हैं। हालांकि अपना दल के एक अलग गुट ने कांग्रेस को अपना समर्थन दिया है, इस गुट की अगुवाई पटेल की मां करती हैं। कांग्रेस को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) का भी समर्थन हासिल है, जिसकी अगुवाई पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर करते हैं।

पटना साहिब(बिहार)

मुख्य उम्मीदवार : रविशंकर प्रसाद(भाजपा), शत्रुघ्न सिन्हा(कांग्रेस)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : सिन्हा ने भाजपा के टिकट पर इस सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन इसबार वह कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहे हैं। यहां पर कायस्थ समुदाय का वोट निर्णायक होगा। सिन्हा जहां खुद की लोकप्रियता और राजद के समर्थन पर निर्भर हैं, वहीं प्रसाद पुरी तरह से शहर के साथ अपने लंबे संपर्क और मोदी सरकार की उपलब्धियों पर निर्भर हैं।

आरा(बिहार)

मुख्य उम्मीदवार : राजकुमार सिंह (भाजपा), राजू यादव(भाकपा-माले)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : आरा एकमात्र सीट है जिसके लिए लालू प्रसाद की अगुवाई वाली राजद ने भाकपा-माले के लिए सीट छोड़ा था। राजू यादव का यहां सीधा सामना भाजपा के उम्मीदवार और मौजूदा सांसद राजकुमार सिंह से है। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव ऊर्जा क्षेत्र में अपने विकास कार्य और मोदी की छवि पर निर्भर हैं।

बक्सर(बिहार)

मुख्य उम्मीदवार : अश्विनी कुमार चौबे(भाजपा), जगदानंद सिंह (राजद)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : मोदी सरकार में राज्य मंत्री होने के बावजूद चौबे पूरी तरह से मोदी की छवि पर निर्भर हैं। स्थानीय लोग उनके प्रदर्शन से नाखुश हैं, लेकिन बालाकोट हवाई हमले के बाद वह अपनी नैया पार लगने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

ब्राह्मण बहुल सीट पर राजपूत वोट एक महत्वपूर्ण कारक है। अगर जगदानंद सिंह को राजपूत वोटों का 30 प्रतिशत वोट भी मिल जाता है तो चौबे मुश्किल में पर जाएंगे। यादव और मुस्लिम सिंह के पीछे खड़े हैं।

पाटलीपुत्र(बिहार)

मुख्य उम्मीदवार : रामकृपाल यादव (भाजपा), मीसा भारती(राजद)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : राजद प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के पूर्व सहयोगी राम कृपाल यादव मोदी की अपील और विकास कार्यो पर निर्भर हैं। लालू प्रसाद की बेटी अपने पिता के लिए लोगों की सहानुभूति पाने की उम्मीद कर रही है।

गुरदासपुर(पंजाब)

मुख्य उम्मीदवार : सनी देओल(भाजपा), सुनील जाखड़(कांग्रेस)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : भाजपा ने राष्ट्रीय सुरक्षा को अपना चुनावी मुद्दा बनाया है और सनी देओल भी देशभक्ति फिल्मों के लिए मशहूर हैं। वह अपने फिल्मों के दृश्यों को रिक्रिएट कर और अपने मशहूर संवाद 'ढाइ किलो का हाथ' और 'हिंदुस्तान जिंदाबाद है, जिंदाबाद रहेगा' से लोगों को लुभा रहे हैं।

मौजूदा सांसद जाखड़ कांग्रेस के दिग्गज बलराम जाखड़ के बेटे हैं और वह विकास कार्यो के सहारे उन्हें अपनी नैया पार लगने की उम्मीद है।

अमृतसर(पंजाब)

मुख्य उम्मीदवार : हरदीप सिंह पुरी(भाजपा), गुरजीत सिंह औजला(कांग्रेस)

मुख्य फैक्टर और मुद्दे : कैप्टन अमरिंदर सिंह जिन्होंने 2014 में भाजपा के अरुण जेटली को हराया था, वह इस बार पुरी को हराने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं पुरी 1984 सिख-विरोधी दंगे के संबंध में सैम पित्रोदा के 'हुआ तो हुआ' बयान पर कांग्रेस पर जमकर निशाना साध रहे हैं।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने शनिवार को निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा के मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखे पत्र को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। इस पत्र में लवासा ने निर्वाचन आयोग के निर्णयों में अपनी असहमति को रिकॉर्ड नहीं किए जाने पर असंतुष्टि जताई थी। इसके साथ ही पार्टी ने कहा कि यह 'चुनाव आयोग है या चूक आयोग'।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में, निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को उनके भाषणों पर क्लीन चिट दिए जाने के मामले में उनके 'अल्पमत निर्णयों' को रिकॉर्ड नहीं किए जाने के बाद आदर्श आचार संहिता से संबंधित आयोग की पूर्ण बैठकों से खुद को अलग कर लिया।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, "चुनाव आयोग या चूक आयोग। लोकतंत्र का एक और काला दिवस। जब निर्वाचन आयोग मोदी-शाह की जोड़ी को क्लीन चिट देने में लगा हुआ था, तब सीईसी के सदस्य अशोक लवासा ने कई मौकों पर अपनी असहमति जताई। और चूंकि ईसीआई ने उनकी असहमति को रिकॉर्ड करने तक से इनकार कर दिया इसलिए उन्होंने ईसी से बाहर होने का फैसला किया।"

उन्होंने आगे कहा, "संस्थागत गरिमा को कम करना मोदी सरकार का हॉलमार्क है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश सार्वजनिक बयान देते हैं, आरबीआई के गवर्नर इस्तीफा देते हैं, सीबीआई निदेशक को हटा दिया जाता है, सीवीसी खोखली रिपोर्ट देती है और अब निर्वाचन आयोग में मतभेद हो रहे हैं। क्या ईसी लवासा के असहमति वाले नोट को रिकॉर्ड करके खुद को शर्मिदगी से बचाएगा।"

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर आरोप लगाया कि वे अपनी पार्टी के नेताओं को देश के स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रीय योद्धाओं और शहीदों को गाली देने की खुली छूट दे रखी है। 

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मीडिया से कहा, "मोदी और शाह ने भाजपा के नेताओं को देश के स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रीय योद्धाओं और शहीदों का अपमान करने की छूट दे रखी है।"

भाजपा के तीन नेताओं के नाम लेते हुए उन्होंने कहा, "अनंत कुमार हेगड़े, नलिन कतील और अनिल सौमित्र ने फिर 'बापू' के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है।"

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा, "ऐसा लगता है, जैसे मोदी-शाह ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और शहीदों पर वार करना शुरू कर दिया है। प्रत्येक दिन एक मोदीभक्त मुखौटा लगाकर महात्मा की आत्मा का अपमान करने का प्रयास करता है। यह एक तरह से देश की गरिमा के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध है।"

उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि देश में कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार बनेगी और इसके नेतृत्व में देश के 130 करोड़ लोगों को 'न्याय' (न्यूनतम आय योजना) मिलेगा।

--आईएएनएस

 

 

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