पटना: बिहार सरकार की विकास योजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर लिए गए निर्णयों की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए अब सूचना जनसंपर्क विभाग की पत्रिका 'बिहार समाचार' पंचायतों तक पहुंचाई जाएगी। इस पत्रिका में सामाजिक और राज्य के सरोकार से जुड़े लेखकों के आलेख भी शामिल किए जाएंगे। बिहार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार ने यहां कहा कि 'बिहार समाचार' पत्रिका का अब नियमित प्रकाशन होगा। इसके लिए चल रही निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा कि इस पत्रिका के गांवों तक पहुंचने से लोग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जानकर उसका लाभ ले सकेंगे।

मंत्री ने कहा कि बिहार के जानेमाने लेखकों के सामाजिक लेख भी इस पत्रिका में शामिल करने की कोशिश की जाएगी। इस पत्रिका में ऐसे लेखों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें सामाजिक जड़ता को खत्म करने के लिए जागरूकता का संदेश हो।

उन्होंने कहा कि पत्रिका लोक भाषाओं में भी प्रकशित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी भाषाओं को लेकर विचार किया जा रहा है। आज के दौर में अधिकांश लोग सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं, यही कारण है कि सरकार सोशल मीडिया के माध्यम से भी सूचनाओं का प्रसार करने की तैयारी में है।

--आईएएनएस

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पटना: बिहार में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन की परीक्षा में एक प्रश्न को गलत तरीके से पूछे जाने पर बीपीएससी ने खेद जताया है। साथ ही बीपीएससी ने प्रश्न पत्र बनाने वाले शिक्षक को काली सूची में डाल दिया है। इस बीच, राज्य के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है।

बीपीएससी ने मंगलवार को एक प्रेस नोट जारी कर कहा है कि 64वीं मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन द्वितीय पत्र में संवैधानिक पद के गलत तरीके से प्रश्न सेट करने वाले शिक्षक को काली सूची में डाल दिया गया है।

आयोग ने अपनी इस गलती पर खेद भी जताया है।

उल्लेखनीय है कि बीपीएससी की मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन द्वितीय पत्र की रविवार को हुई परीक्षा में खंड-1 के प्रश्न संख्या-2 इस प्रकार था : भारत में राज्य की राजनीति में राज्यपाल की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए, विशेष रूप से बिहार के संदर्भ में। क्या वह केवल एक कठपुतली हैं?

इस प्रश्न को लेकर उठे विवाद के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

बीपीएससी की 64वीं मुख्य परीक्षा 12 जुलाई से शुरू हुई जो 16 जलाई तक चली।

--आईएएनएस

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पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य की बंद पड़ी 12 चीनी मिलों की 2,442 एकड़ जमीन नए उद्योगों की स्थापना के लिए शीध्र बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) को हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य निवेश प्रोत्साहन नीति-2016 के अंतर्गत प्राप्त 14,885 करोड़ रुपये के 1,246 निवेश प्रस्तावों में से 1104 को सहमति प्रदान की जा चुकी है, जिनमें 1419 करोड़ का निवेश कर 168 इकाइयां कार्यरत हैं तथा उनमें 4031 लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

उपमुख्यमंत्री मोदी ने सोमवार की शाम एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू कराने के लिए पांच बार निविदा आमंत्रित किए जाने के बावजूद कोई निवेशक जब सामने नहीं आया तो बंद पड़ी चीनी मिलों की खाली जमीनों का अन्य उद्योगों के लिए आए नए निवेश प्रस्तावों के मद्देनजर बियाडा को देने का सरकार ने निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा, "बियाडा के चार औद्योगिक प्रांगणों में 1642 इकाइयां कार्यरत हैं और 369 स्थापित होने की प्रक्रिया में है। राज्य लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों के तहत खाजा, राईस मिल, सीप बटन व कांसा-पीतल आदि के अलग-अलग जिलों में स्थापित सात कलस्टरों में 28़83 करोड़ के निवेश प्रस्तावों में अब तक 15़61 करोड़ के निवेश हुए हैं।"

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति, जनजाति उद्यमी योजना के तहत 4,868 उद्यमियों को 340 करोड़ के ऋण की स्वीकृति दी गई है, जिसके तहत उद्यमियों को 10 लाख तक की परियोजना के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत यानी पांच लाख रुपये का अनुदान व पांच लाख ब्याजमुक्त ऋण देने का प्रावधान है।

--आईएएनएस

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मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सदर थाना क्षेत्र में मंगलवार को तड़के सुमेरा पंचायत की मुखिया अंगूरी खातून के पति मोहम्मद अलीशान की अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, मुखिया के पति अलीशान गोबरसही गांव से एक मोटरसाइकिल से सुमेरा वापस लौट रहे थे, तभी फरदो पुल के समीप अपराधियों ने उन्हें घेरकर उन पर गोलियों की बौछार कर दी। मुखिया के पति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

मुजफ्फरपुर के पुलिस अधीक्षक (नगर) नीरज कुमर सिंह के अनुसार, घटना के पीछे पुरानी रंजिश बताई जा रही है। पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है।

इधर, घटना से आक्रोशित लोग राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 को जाम कर अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। लोगों ने इस दौरान कई वाहनों में तोड़फोड़ भी की। पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई है।

--आईएएनएस

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पटना: बिहार के 12 जिलों में बाढ़ की स्थिति भयावह हो चुकी है। नेपाल के तराई इलाके और उत्तर बिहार में बारिश के कारण राज्य के विभिन्न जिलों में बाढ़ का संकट और गहरा गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 12 जिलों के 78 प्रखंडों के 555 पंचायतों में बाढ़ से हालात गंभीर हो चुके हैं, जिससे 25 लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित है। इस दौरान बाढ़ के पानी में डूबने से 25 लोगों की मौत हो गई है जबकि हजारों घर तबाह हो चुके हैं। बिहार जल संसाधन विभाग के मुताबिक, बिहार की प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्घि दर्ज की जा रही है, जबकि वीरपुर बैराज में कोसी नदी का जलस्तर में भी वृद्घि दर्ज की गई है।

वीरपुर बैराज के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक सुबह छह बजे वीरपुर बैराज में कोसी नदी का जलस्तर 1.53 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया था जो आठ बजे बढ़कर 1.68 लाख क्यूसेक पहुंच गया।

इधर, वाल्मीकिनगर बैराज में गंडक नदी स्थिर बनी हुई है। यहां आठ बजे गंडक का जलस्तर 92,900 क्यूसेक था।

जल संसाधन विभाग के प्रवक्ता अरविंद सिंह ने आईएएनएस को मंगलवार को बताया कि बागमती नदी ढेंग, सोनाखान, डुबाधार व बेनीबाद में, जबकि कमला बलान नदी भी झंझारपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। अधवारा, ललबकईया और महानंदा नदी भी कई स्थानों पर खतरों के निशान को पार कर गई है।

राज्य में शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चपांरण, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सहरसा, कटिहार आर पूर्णिया जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है जबकि कुछ जिलों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है।

आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने मंगलवार को बताया कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं।

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, दरभंगा में है। प्रभावित गांवों में राहत एवं बचाव के लिए 125 मोटरबोट को तैनात किया गया है। एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की 26 टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनात की गई हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए 199 राहत शिविरों में 1़16 लाख लोग शरण लिए हुए हैं। अब तक 12 जिलों के 78 प्रखंडों की 555 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी घुस गया है जिनमें अधिकांश ग्राम पंचायतें पूर्णरूप से जलमग्न हैं।

--आईएएनएस

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पटना: बिहार के उत्तरी हिस्सों के लगभग सभी जिलों में शहर से गांव तक बाढ़ का पानी कहर ढा रहा है। लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। बाढ़ से राज्य में अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। बिहार के जिन इलाकों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर है, उनमें अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और सहरसा जिला शामिल हैं।

आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 77 प्रखंडों की 546 पंचायतों के 25 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से अब तक 24 लोगों की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री ने लगातार दूसरे दिन बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को अररिया जिले के फारबिसगंज, सिकटी, पलासी, जोकीहाट, किशनगंज जिले के ठाकुरगंज, कोचाधामन, टेढ़ागाछ और कटिहार जिले के बलरामपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का विस्तृत हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद पूर्णिया के चूनापुर हवाईअड्डे पर पूर्णिया, अररिया, कटिहार एवं किशनगंज जिले के जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ एवं बचाव व राहत कार्य के बारे में विस्तृत समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित सभी क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया है। ग्रामीण कार्य विभाग एवं पथ निर्माण विभाग के अधिकरियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लेने और संपर्क से कटे हुए स्थानों की संपर्कता तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है।

हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्य सचिव दीपक कुमार, जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार भी साथ थे।

इस बीच नेपाल से आने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ता देखा जा रहा है। बिहार जल संसाधन विभाग के प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने सोमवार को बताया कि बागमती ढेंग, सोनाखान, डूबाधार, कनसार और बेनीबाद में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, वहीं कमला बलान नदी जयनगर व झंझारपुर में तथा महानंदा ढेंगराघाट व झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

आपदा प्रबंधन विभाग का दावा है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 26 टीमें लगाई गई हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में 196 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।

मुजफ्फरपुर जिले में बागमती के उफानाने से कटरा व औराई में बाढ़ ने भयावह रूप ले लिया है। दो हजार से अधिक घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। पूर्वी चंपारण के नए इलाकों में पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है। सुपौल में भी नए क्षेत्रों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।

बाढ़ से सीतामढ़ी के गांवों की स्थिति और बदतर हो गई है। सीतामढ़ी के कई गांवों के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि अभी तक राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है। शिवहर में भी बाढ़ से लोगों का बुरा हाल है। कई शहरी इलाकों में भी पानी घुस चुका है। अररिया और किशनगंज में भी बाढ़ का पानी नए क्षेत्रों में फैल रहा है।

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पटना: बिहार में चल रही बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की मुख्य परीक्षा के सामान्य ज्ञान की परीक्षा में पूछा गया एक प्रश्न चर्चा का विषय बना हुआ है। पूछा गया कि बिहार के राज्यपाल क्या केवल एक कठपुतली हैं?" सामान्य अध्ययन द्वितीय पत्र की रविवार को हुई परीक्षा में खंड-1 के प्रश्न संख्या 2 में प्रश्न था, "भारत में राज्य की राजनीति में राज्यपाल की भूमिका का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए, विशेष रूप से बिहार के संदर्भ में। क्या वह केवल एक कठपुतली हैं?"

परीक्षार्थियों के मुताबिक, कई ऐसे सवाल पूछे गए जो अवधारणा पर आधारित थे।

इस प्रश्न को लेकर उठे विवाद के बाद बिहार लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार का कहना है कि ऐसे सवाल पूर्व में भी परीक्षार्थियों से पूछे जाते रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि आयोग के सदस्यों या अधिकारियों को यह जानकारी नहीं होती कि प्रश्नपत्र में क्या-क्या पूछे जा रहे हैं। कुमार ने हालांकि कहा कि प्रश्नपत्र सेट करने वालों से इस बारे में पूछा जाएगा।

बीपीएससी की 64वीं मुख्य परीक्षा 12 जुलाई से शुरू हुई है, जो 16 जलाई तक चलेगी। इस परीक्षा में तीन विषयों की परीक्षाएं हो चुकी हैं। 16 जुलाई को ऐच्छिक विषय की परीक्षा ली जाएगी।

--आईएएनएस

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पटना: बिहार के मत्स्यपालक अब अन्य राज्यों में जाकर मछली पालने के आधुनिक गुर सिखेंगे। बिहार सरकार इस साल 6500 से अधिक मछली पालकों को मछली पालन की आधुनिक तकनीक सीखने के लिए मुंबई और पश्चिम बंगाल प्रशिक्षण के लिए भेजने वाली है। पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग का लक्ष्य राज्य को मछली उत्पादन के मामले में आत्म्निर्भर बनाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मछली पालकों को अन्य राज्यों में नई तकनीक की जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा जाएगा। फिलहाल इस वर्ष 6500 मछली पालकों को प्रशिक्षण के लिए भेजे जाने का लक्ष्य रखा गया है।

सभी चयनित मछली पालकों को मुंबई, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, भुवनेश्वर सहित 10 स्थानों पर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। इसके अलावा इन मछली पालकों के प्रशिक्षण विस्तार के लिए कार्यशाला, सेमिनार का भी आयोजन किया जाएगा।

अधिकारी का कहना है कि अधिकांश स्थानों पर 30-30 लोगों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

सरकार का मानना है कि बिहार में जलाशयों, नदियों की कोई कमी नहीं है, परंतु बिहार आज भी मछली के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बन सका है। एक आंकड़े के मुताबिक वर्तमान में राज्य में 6.02 लाख टन मछली का उत्पादन होता है, जबकि खपत 6.42 लाख टन होती है। राज्य में 40 हजार टन मछली का आयात होता है।

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पटना: बिहार के उत्तरी हिस्सों के करीब सभी जिलों में शहर से गांव तक बाढ़ का पानी कहर ढा रहा है। लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। इस बीच नदियों के जलस्तर में वृद्घि के बाद नए क्षेत्रों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है। बिहार के जिन इलाकों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर है, उनमें अररिया, किशनगंज, सुपौल, दरभंगा, शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, मुजफ्फरपुर जिला शामिल हैं। अधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 55 प्रखंड के 352 पंचायत के 18 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

इस बीच, नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में वृद्घि देखी जा रही है।

बिहार जल संसाधन विभाग के प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने सोमवार को बताया कि बागमती जहां ढेंग, सोनाखान, डूबाधार, कनसार, बेनीबाद में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, वहीं कमला बलान नदी जयनगर, झंझारपुर में तथा महानंदा ढेंगराघाट व झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

इधर, कोसी के जलस्तर में सोमवार को वृद्घि देखी जा रही है। कोसी का जलस्तर वीरपुर बैराज के पास सोमवार को सुबह छह बजे 1.94 लाख क्यूसेक था जो आठ बजे 2.01 लाख क्यूसेक हो गया।

गंडक नदी का जलस्तर बाल्मीकिनगर बराज के पास सुबह छह बजे 75.5 हजार क्यूसेक था जो आठ 79.7 हजार क्यूसेक हो गया।

इस बीच आपदा प्रबंधन विभाग का दावा है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 19 टीमें लगाई गई हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में 152 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जिसमें 45 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं।

इस बीच, मुजफ्फरपुर जिले में बागमती के उफान से कटरा व औराई में बाढ़ की स्थिति नाजुक बनी है। दो हजार से अधिक घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। पूर्वी चंपारण के नए इलाकों में पानी तेजी से प्रवेश कर रहा है। सुपौल में भी नए क्षेत्रों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है।

सीतामढ़ी के गांवों की स्थिति और बदतर है। सीतामढ़ी के कई गांवों के बाढ़ पीड़ितों का आरोप है कि अभी तक राहत और बचाव कार्य प्रारंभ नहीं किए गए हैं। शिवहर में भी बाढ़ से हालात खराब हो रहे हैं और कई शहरी इलाकों में भी पानी घुस चुका है। अररिया और किशनगंज में भी बाढ़ का पानी नए क्षेत्रों में फैल रहा है।

उल्लेखनीय है कि रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर अधिकारियों को राहत अैर बचाव कार्य तेज करने का निर्देश दिया था।

--आईएएनएस

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पटना: बिहार के साथ नेपाल में हो रही बारिश के कारण राज्य में बाढ़ का पानी नए इलाकों में बढ़ने लगा है। राज्य की सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है, जिससे राज्य की प्रमुख नदियां रविवार को कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, राज्य के छह जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, जहां राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। राज्य में प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि जारी है, जिससे नए क्षेत्रों में बाढ़ के पानी के घुसने की आशंका है।

बिहार के साथ नेपाल में भी हुई बारिश के कारण नेपाल से आने वाली नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।

बिहार जल संसाधन विभाग के प्रवक्ता अरविंद कुमार सिंह ने रविवार को बताया कि लखनदेई नदी मुजफ्फरपुर के गायघाट, बागमती मुजफ्फरपुर के औराई, कमला बलान और अधवाड़ा नदी दरभंगा में खतरे के निशाना से ऊपर बह रही है।

इसके अलावा बागमती नदी हायाघाट, बेनीबाद, डुबाधार, सोनाखान और ढेंग में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि कमला बलान जयनगर और झंझारपुर में, महानंदा ढंगराघाट और झावा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

राहत की बात है कि कोसी के जलस्तर में मामूली कमी आई है। कोसी का जलस्तर वीरपुर बैराज के पास रविवार सुबह छह बजे 2़ 90 लाख क्यूसेक था जो आठ बजे घटकर 2़ 64 लाख क्यूसेक हो गया।

गंडक नदी का जलस्तर वाल्मीकिनगर बराज के पास सुबह आठ बजे 90 हजार क्यूसेक था।

सीतामढ़ी के कई इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। बाढ़ ने रीगा में सरकारी कार्यालयों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। दरभंगा जिले में 15 पंचायतों के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। शिवहर में भी बाढ़ से हालात खराब हो रहे हैं और कई शहरी इलाकों में भी पानी घुस चुका है। अररिया और किशनगंज में भी बाढ़ का पानी नए क्षेत्रों में फैल रहा है।

पूर्वी चंपारण में भी कई गांवों के लोग ऊंची जगहों पर शरण लिए हुए हैं। इस बीच आपदा प्रबंधन विभाग का दावा है कि राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं। कई स्थानों पर सामुदायिक रसोई चलाई जा रही है।

--आईएएनएस

 

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