नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की नेता मायावती द्वारा निजी हमले करना दिखाता है कि वह किसी भी सार्वजनिक पद को संभालने के योग्य नहीं है।

जेटली ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।

मंत्री ने ट्वीट कर कहा, "ममता दीदी-बंगाल में लोकतंत्र की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। विपक्षी कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है, प्रत्याशियों पर हमले किए जा रहे हैं। मतदाता केंद्रों पर कब्जा किया जा रहा है और विपक्षी नेताओं को रैली करने की इजाजत नहीं दी जा रही।"

एक सामाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में, मायावती ने प्रधानमंत्री पर निजी हमले किए और कहा कि उनसे दूसरों की बहनों और पत्नियों का सम्मान करने की उम्मीद नहीं की जा सकती, जब उन्होंने राजनीतिक फायदा उठाने के लिए अपनी पत्नी को ही छोड़ दिया।

जेटली ने ट्वीट कर कहा, "बहन मायावती-वह प्रधानमंत्री बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी गवर्नेस, नैतिकता, विचारधारा अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। उनका प्रधानमंत्री पर निजी हमला दिखाता है कि वह सार्वजनिक जीवन के लिए अयोग्य है।"

भाजपा ने भी बनर्जी पर अमित शाह के हेलीकॉप्टर को बंगाल में नहीं उतरने देने ओर जाधवपुर में रैली नहीं करने देने को लेकर निशाना साधा।

भाजपा मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि बनर्जी लोकतंत्र की हत्या कर रही है और लोग उन्हें बेलेट के जरिए माकूल जवाब देंगे।

जावड़ेकर ने कहा, "अमित शाह को जाधवपुर में रैली करनी थी। इस संबंध में इजाजत चार-पांच दिन पहले ले ली गई थी। प्रशासन ने बिना कोई कारण बताए रविवार रात 8.30 बजे इजाजत नामंजूर कर दी, उन्होंने भाजपा अध्यक्ष के हेलीकॉप्टर को भी यहां उतरने से इजाजत देने से मना कर दिया।"

उन्होंने चुनाव आयोग से इस पर संज्ञान लेने का आग्रह किया।

जावड़ेकर ने कहा कि बनर्जी इतनी व्याकुल हो गई हैं कि वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्यों के तौर पर देखती हैं।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को अपने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया था कि 'उलरिक मैकनाइट भले ही अमेरिकी नागरिक हैं, लेकिन वह राहुल गांधी के सामाजिक गिरोह के एक सदस्य हैं।'

मैकनाइट बैकॉप्स में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के व्यापारिक साझेदार थे। ब्रिटेन स्थित इस कंपनी को दोनों ने खोला था और 2009 में यह कंपनी बंद हो गई। यह इस लिहाज से एक संकटपूर्ण रिश्ता रहा कि इसी के कारण राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता का विवाद कंपनी के निगमीकरण के दौरान पैदा हुआ था। निगमीकरण के दस्तावेजों में राहुल गांधी को एक ब्रिटिश नागरिकता बताया गया था।

यह कहना कठिन है कि मैकनाइट कांग्रेस अध्यक्ष के 'सामाजिक गिरोह' का हिस्सा हैं या नहीं, लेकिन दोनों के बीच का संबंध महज पूर्व कारोबारी साझेदार तक सीमित नहीं है।

यह संबध वास्तव में बिल्कुल सीधा-सा है। मैकनाइट पूर्व केंद्रीय मंत्री, गोवा के जाने-माने नेता और कांग्रेस के वफादार एडुआडरे फलेरियो के दामाद हैं। मैकनाइट की पत्नी व पूर्व मंत्री की बेटी सोनिया फलेरियो लंदन में रहने वाली एक लेखिका हैं। उनकी पहली किताब 'ब्यूटीफुल थिंग : इनसाइड द सीक्रेट वल्र्ड ऑफ बॉम्बेज डांस बार्स' को अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी।

एक परिवार के रूप में, फलेरियो और अब मैकनाइट ने कभी भी कांग्रेस के प्रथम परिवार के साथ अपने करीबी संबंधों का खुलासा करने में शर्म नहीं किया। उन्होंने अपनी बेटी का नाम इंदिरा फ्रेया मैकनाइट रखा।

मैकनाइट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं की नजर में सिर्फ बैकॉप्स मामले और राहुल गांधी की नागरिकता के मुद्दे को लेकर ही नहीं आए हैं, बल्कि कहानी इसके आगे भी है। मैकनाइट का संबंध भारत को छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की आपूर्ति से भी जुड़ा रहा। जिस रक्षा कंपनी के साथ इस आपूर्ति के लिए 20,000 करोड़ रुपये का करार किया गया था, उस कंपनी से मैकनाइट जुड़े हुए थे।

रक्षा सौदा करने वाली इन कंपनियों के बारे में कहा गया कि इन्होंने रिश्वतखोरी से पैसे बनाए।

हालांकि, फलेरियो-मैकनाइट स्पष्ट रूप से एक साधारण, मगर सुखद जीवन जीते हैं। सोनिया फलेरियो की कुछ तस्वीरें, जो उनके साक्षात्कारों के साथ प्रकाशित हुईं, उनमें एक दिल को छू लेने वाली क्रेडिटलाइन है : उलरिक मैकनाइट।

किताब 'ब्यूटीफुल थिंग्स : इनसाइड..' के प्रकाशन के बाद एक साक्षात्कार में उन्होंने पति के साथ अपनी जिंदगी के बारे में बात की थी।

2012 में नोए वैली (सैन फ्रांसिस्को) के एक स्थानीय प्रकाशन को सोनिया फलेरियो ने बताया था, "मैं गोवा में पैदा हुई, दिल्ली और बम्बई (मुंबई) में रही, एडिनबर्ग में पढ़ाई की और तीन साल पहले बे एरिया से अच्छी तरह से वाकिफ हूं। वह एल्बनी से हैं। हम भारत में मिले, वहां कई साल तक रहे। और तीन साल पहले फैसला किया कि हम नए रोमांस के लिए तैयार हैं। तब हम शिफ्ट कर गए।"

उन्होंेने कहा, "इससे पहले सैन फ्रांसिस्को मैं बस एक बार बुक टूर के सिलसिले में आई थी। तो, मुझे इसके अलग-अलग मुहल्लों का पता नहीं था। मेरे पति उलरिक ने नोए को इसलिए याद किया, क्योंकि वह स्टैनफोर्ड में छात्र होने के दौरान ब्लिस बार आए थे। एक दोस्त ने नोए का सुझाव दिया और जब हमने इसे देखा तो हमें यह बहुत प्यारा लगा। हम परिवारों और बच्चों, कुत्तों, नोए वैली बेकरी की खूशबू, मित्रता पसंद करते हैं।"

हालांकि, भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी, जो राहुल गांधी के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज होते देखना चाहते हैं, उन्होंने हाल ही में ट्वीट किया था, "एक और मामला बैम्बिनो (स्वामी कांग्रेस अध्यक्ष के लिए इस नाम का इस्तेमाल करते हैं) का इंतजार कर रहा है : ईडी बर्कले में एक अवैध बैंक खाता संचालित करने के लिए फेरा (अब मौजूद नहीं) और धनशोधन का मामला दर्ज करे। संभवत: एडुआडरे फलेरियो के दामाद के साथ मिलकर बैकॉप्स के जरिए स्कॉर्पीन पनडुब्बी मामले में की गई रिश्वतखोरी के पैसे के शोधन के लिए। वित्त मंत्रालय को यह मामला बंद नहीं करना चाहिए।"

जेटली ने बैकॉप्स पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा, "इस बैकॉप्स का क्या मतलब था? कि एक बैक ऑफिस होगा और आपकी मदद करेगा?"

इस बीच, एडुआडरे फलेरो को 78 साल की उम्र में भी नहीं भुलाया गया है। वह बीमार हैं और सक्रिय राजनीति में नहीं हैं। वर्तमान लोकसभा चुनाव के लिए, उन्हें गोवा घोषणा-पत्र समिति में नामित किया गया।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: राहुल गांधी पर रक्षा ऑफसेट कांट्रेक्ट मामले में उनके पूर्व व्यापार सहयोगी को लेकर निशाना साधते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष एक ऐसे व्यक्ति हैं 'जो 'डिफेंस डील पुशर' बनने के इच्छुक थे और आज भारत केप्रधानमंत्री बनने की इच्छा रखते हैं।'

जेटली ने एक प्रेस वार्ता में कहा, "राहुल गांधी ने ट्रांजेक्शन को कैग और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सही ठहराए जाने पर आरोप लगाए। एक कंपनी द्वारा ऑफसेट कांट्रेक्ट पाने पर, उन्होंने उस व्यक्ति पर हमला किया जो किसी भी तरह से उस कंपनी से जुड़ा हुआ नहीं था। और आप यहां एक अन्य रक्षा सौदे में ऑफसेट अनुबंध पाने वाली कंपनी से सीधे जुड़े हुए हैं।"

उन्होंने कहा, "अब आप खुद को कैसे जज करना चाहेंगे जबकि आप दूसरों को बिना किसी सबूत के जज कर रहे थे।"

जेटली ने कहा कि राहुल के पूर्व व्यापारिक सहयोगी उलरिक मेकनाइट को उसकी ब्रिटेन स्थित कंपनी बैकॉप्स लिमिटेड के लिए 2011 में संप्रग के कार्यकाल में फ्रांस की डिफेंस सप्लायर से स्कॉर्पीन सबमैरीन का ऑफसेट रक्षा सौदा प्राप्त होता है।

उन्होंने कहा कि बैकॉप्स में वर्ष 2003 से 2009 के दौरान राहुल की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। बाद में कंपनी ने अपना संचालन बंद कर दिया।

उन्होंने कहा, "मेकनाइट के ऑफसेट कांट्रेक्ट पाने के बाद उसने स्कार्पीन सबमेरीन मिसाइलों के क्रिटिकल भागों की आपूर्ति के लिए विशाखापत्तनम स्थित कंपनी के साथ कांट्रेक्ट पर हस्ताक्षर किए थे।"

जेटली ने दावा करते हुए कहा, "यूरिक मेकनाइट एक अमेरिकी नागरिक है, लेकिन वह राहुल के सोशल गैंग के सदस्य भी हैं।"

उन्होंने कहा, "यह उस व्यक्ति की कहानी है जो डिफेंस डील पुशर बनने का इच्छुक था और आज देश का प्रधानंत्री बनना चाहता है।"

राहुल ने एक प्रेस वार्ता में इन आरोपों और भाजपा नेता के हमलों का जवाब देते हुए कहा, "कृपया आप जो भी जांच कराना चाहते हैं या कार्रवाई करना चाहते हैं, कर लें। मुझे कुछ समस्या नहीं है, क्योंकि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। लेकिन कृपया राफेल की जांच भी कराइए, तथ्यों को छुपाइए नहीं।"

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: स्कॉर्पीन पनडुब्बी सौदे में आफसेट कांट्रैक्ट को लेकर अरुण जेटली ने राहुल गांधी से जवाब मांगा है। केंद्रीय वित्त मंत्री के अनुसार, स्कॉर्पीन सौदे में जिस कंपनी को आफसेट कांट्रैक्ट मिला है, वह राहुल गांधी की एक कंपनी में साझीदार है। जेटली ने कहा कि बिना सुबूत के प्रधानमंत्री के खिलाफ आरोप लगाने वाले कांग्रेस अध्यक्ष 'खुद आफसेट का लाभ लेने वाले निकले।'

जेटली ने बताया कि किस तरह 2002 में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नाम से भारत में बैकअप्स प्राइवेट लिमिटेड और एक साल बाद लंदन में इसी नाम से दूसरी कंपनी बनाई जाती है। लंदन की कंपनी में उनके साझीदार उलरिक मैक्नाइट वैसे तो अमेरिकी नागरिक हैं, लेकिन गोवा के एक कांग्रेसी नेता के दामाद भी हैं। आरोप है कि लंदन की इसी कंपनी के सालाना रिटर्न में राहुल गांधी की ओर से ब्रिटिश नागरिक होने की बात कही गई थी। 

जेटली ने कहा कि नए रहस्योद्घाटन में राहुल के साझीदार उलरिक मैक्नाइट से जुड़ी कंपनी को फ्रांसीसी कंपनी के साथ हुई स्कॉर्पीन पनडुब्बी सौदे का आफेसट कांट्रैक्ट मिला था। उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस अध्यक्ष खुद बताएं कि स्कॉर्पीन डील में अपने साझीदार को कांट्रैक्ट दिलाने में उनका आंकलन कैसे किया जाए। एक तरफ वे सीएजी और सुप्रीम कोर्ट के क्लीन चिट मिलने के बाद भी वे बिना सुबूत राफेल सौदे में प्रधानमंत्री के खिलाफ आरोप लगाते जा रहे हैं, दूसरी तरफ उनकी कंपनी में साझीदार आफसेट में भागीदार बन जाते हैं।

जेटली ने कहा कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व को इसका जवाब देना पड़ेगा कि स्कॉर्पीन सौदे में राहुल की भूमिका क्या है? क्या एक डिफेंस डीलर के रूप में उनकी शुरुआत थी या फिर वह प्राक्सी डिफेंस डीलर की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने कहा कि देश के लिए बेहतर यही होगा कि कांग्रेस अध्यक्ष सार्वजनिक जीवन के बजाय डिफेंस डील में ही रहें।

जेटली ने उलरिक मैक्नाइट को राहुल के सोशल गैंग का सदस्य बताते हुए कहा कि ब्रिटिश कंपनी में दोनों ने लंदन का एक ही पता दिया था। उन्होंने उलरिक को वृहत्तर गांधी परिवार का सदस्य बताया। जेटली के अनुसार, दोनों कंपनियों के पास कोई मैन्युफैक्च¨रग या सर्विस सेक्टर का काम नहीं था। बैकअप्स को बैक आफिस आपरेशंस का संक्षिप्त रूप बताते हुए जेटली ने कहा कि लगता है कि इसे विशेष रूप से डिफेंस डील की दलाली लेने के लिए ही बनाया गया था।

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नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को 'संस्थागत अस्थिरता लाने वालों' पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका पूरी तरह से असत्यापित आरोपों को समर्थन देना भारत के मुख्य न्यायाधीश की संस्था को अस्थिर कर रहा है।

उन्होंने कहा कि कहा कि झूठ बोलकर संस्थान को बदनाम करने वालों के खिलाफ अगर अनुकरणीय तरीके से कार्रवाई नहीं की जाती है फिर इस तरह की प्रवृत्ति में सिर्फ तेजी आएगी।

भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद एक ब्लॉग पोस्ट में जेटली ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की एक पूर्व जूनियर महिला कर्मचारी द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने को अनुचित तव्वजो दिया गया।

वित्त मंत्री ने कहा, "ऐसी शिकायतें जब किसी भी प्रशासनिक कामकाज के सामान्य रूप से की जाती हैं तो उन्हें उपयुक्त समिति के पास भेजा जाता है। हालांकि, जब शिकायतकर्ता अपने आरोपों को सनसनीखेज बनाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के अन्य और मीडिया को अपने ज्ञापन की प्रतियां वितरित करती है। तो इसे सामान्य तौर पर यही खत्म कर देना चाहिए।

जेटली ने कहा कि जब चार डिजिटल मीडिया संस्थान 'संस्थागत अवरोध' के अनोखे ट्रैक रिकॉर्ड के साथ एक ही तरह के प्रश्न भारत के प्रधान न्यायाधीश को भेजते हैं तो निश्चित रूप से हम जो देख रहे हैं, समझ रहे हैं, मामला उससे कहीं ज्यादा है।

अपने ब्लॉग 'इट्स टाइम टू स्टैंड अप विद द ज्यूडिशियरी' में जेटली ने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका पर गर्व किया है।

प्रधान न्यायाधीश ने अपने खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोप को शनिवार को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को अस्थिर करने के लिए एक 'बड़ी साजिश' है, जिसके बारे में उन्होंने कहा, "यह बहुत गंभीर खतरे में है।"

सर्वोच्च न्यायालय की एक पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोप के बाद मीडिया के एक वर्ग द्वारा इसकी रिपोर्ड किए जाने के बाद न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना सहित प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली एक पीठ ने शनिवार को विशेष सुनवाई की थी।

जेटली ने कहा कि वर्तमान प्रधान न्यायाधीश का व्यक्तिगत शालीनता, मूल्यों, नैतिकता और अखंडता के मामले में बहुत सम्मान है।

उन्होंने कहा, "यहां तक कि जब आलोचक उनके न्यायिक दृष्टिकोण से असहमत होते हैं, तब भी उनकी मूल्य प्रणाली पर सवाल नहीं उठाया गया है। एक असंतुष्ट व्यक्ति के पूरी तरह से अपुष्ट आरोपों का समर्थन करना प्रधान न्यायाधीश की संस्था को अस्थिर करने की प्रक्रिया की सहायता करना है।"

जेटली ने कहा कि प्रतिष्ठा किसी व्यक्ति के सम्मान के साथ जीने के मौलिक अधिकार का एक अभिन्न अंग है। एक अभित्रस्त न्यायाधीश एक संभावित दृष्टिकोण के परिणामों से डर सकता है। "इसलिए, यह आवश्यक है कि सभी अच्छे लोग न्यायिक संस्था के साथ तब खड़े हों, जब अवरोधक इस पर हमला करने के लिए तैयार हो जाए। "

उन्होंने कहा कि चूंकि आरोपों से संबंधित मामला अदालत की पीठ के समक्ष न्यायिक पक्ष में लंबित है, इसलिए इसे अदालत की बुद्धिमत्ता पर छोड़ देना चाहिए कि वे इससे कैसे निपटना चाहते हैं।

इनमें से कई अवरोधक वाम या अति वाम विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके पास कोई चुनावी आधार या लोकप्रिय समर्थन नहीं है। फिर भी, मीडिया और शिक्षा में अब भी उनकी अनुचित रूप से उपस्थिति है। जब मुख्यधारा की मीडिया से बाहर हो गए तो उन्होंने डिजिटल और सोशल मीडिया की शरण ले ली है। वे पुराने मार्क्‍सवादी दर्शन में 'सिस्टम को अंदर से खत्म करने' पर विश्वास करते रहे हैं।

भाजपा नेता ने कहा कि एक स्वतंत्र लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया दोनों आवश्यक हैं और कोई एक दूसरे को नष्ट करने का काम स्वयं अपने हाथ में नहीं ले सकता।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: बंद हो चुकी जेट एयरवेज के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की और उनसे आग्रह किया कि बैंकों को निर्देश दें कि कम से कम एक महीने का वेतन जारी करे।

जेट ने पिछले तीन महीनों में अपने ज्यादातर कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं किया है, जिसके कारण वे गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं।

विमानन कंपनी ने पिछले हफ्ते अपना कामकाज बंद कर दिया था और उसके कर्मचारियों को जल्द वेतन मिलने की कोई आशा नहीं दिख रही है।

नेशनल एविएटर गिल्ड के उपाध्यक्ष कैप्टन असीम वालियानी ने आईएएनएस को बताया कि वित्त मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि एयरलाइन कर्मचारियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर वे विचार करेंगे।

वालियानी ने जेटली के साथ बैठक के बाद बताया, "वित्त मंत्री से कोई ठोस आश्वासन तो नहीं मिला, लेकिन उन्होंने कहा कि वे सभी मुद्दों पर गौर करेंगे।"

एयरलाइन के अधिकारियों के साथ महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुगतीवार ने भी मंत्री से गुजारिश की कि जेट एयरवेज के स्लॉट को सुरक्षित रखा जाए।

वालियानी ने कहा, "हमने उनसे अपने स्लॉट को बचाए रखने का आग्रह किया है, ताकि नए खरीदारों के लिए कुछ तो हो। हमने उनसे यह भी आग्रह किया कि जेट एयरवेज के विमानों का पंजीकरण रद्द नहीं किया जाए और ना ही उन्हें दूसरी जगह जाने दिया जाए।"

वरिष्ठ पायलट ने कहा, "वित्त मंत्री ने कहा कि वे जेट एयरवेज को पुनर्जीवित करने की कोशिश करेंगे।"

जेट एयरवेज ने बुधवार की रात से अपनी सभी सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी।

--आईएएनएस

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पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को यहां खुलासा करते हुए दावा किया कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद ने चारा घोटाला मामले में मदद के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात की थी और कहा था कि अगर उन्हें मदद मिलती है तो 24 घंटे के अंदर नीतीश कुमार का 'इलाज' कर देंगे।

पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय ने चारा घोटाले के मामले में फंसे लालू प्रसाद के पक्ष में तब फैसला सुनाते हुए कहा कि था इस घोटाले से जुड़े अन्य मामलों में ट्रायल की जरूरत नहीं है क्योंकि सभी मामले एक तरह के हैं। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय गई थी। मोदी ने कहा, "लालू प्रसाद ने इसके बाद अपने दूत प्रेमचंद गुप्ता को भाजपा नेता अरुण जेटली के पास भेजा और मदद मांगी।"

उस समय लालू ने कहा था कि अगर उन्हें मदद मिलती है तो 24 घंटे के अंदर नीतीश कुमार का इलाज कर देंगे। मोदी ने कहा कि लालू ने नीतीश की सरकार गिराने की पेशकश की थी।

मोदी ने दावा किया कि इसके बाद प्रेमचंद गुप्ता के साथ लालू ने खुद जेटली से मुलाकात की थी। मोदी ने कहा कि उस समय हालांकि जेटली ने लालू को मदद देने से इनकार करते हुए कहा था कि हम सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते, क्योंकि यह एक स्वायत्त संस्थान है।

मोदी ने लालू पर निशाना साधते हुए कहा कि लालू प्रसाद अपने फायदे के लिए किसी के भी पैर पकड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा की आलोचना करने वाले लालू ने बिहार में सरकार भी भाजपा की मदद से बनाई थी। मोदी ने कहा कि इसके लिए लालू खुद भाजपा से मदद मांगने भाजपा दफ्तर गए थे।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के मद्देनजर सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की निंदा करते हुए कहा कि वह एक 'नए निचले स्तर' पर गिर गए हैं क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रचार के लिए अदालत के एक आदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र 'वंशानुगत शासकों' को अदालत के आदेशों को 'फिर से लिखने' की अनुमति नहीं देता।

सर्वोच्च न्यायालय ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी 'चौकीदार चोर है' को गलत ढंग से अदालत के साथ जोड़कर पेश किया गया है और इसी के साथ अदालत ने उन्हें 22 अप्रैल तक इस पर स्पष्टीकरण देने को कहा है।

जेटली ने कहा, "राजनीतिक प्रचार के लिए अदालत के एक आदेश को तोड़-मरोड़कर पेश करना राहुल गांधी का एक नए निचले स्तर पर गिरना है। वह जितना नीचे डूबेंगे, हम उतना ही ऊंचा उठेंगे।"

उन्होंने कहा, "राहुल गांधी की राजनीति में अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार में झूठ का अधिकार भी शामिल है। सच्चाई एकजुट होती है। झूठ बिखर जाता है। राहुल गांधी को यह सार्वजनिक संभाषण के इस प्राथमिक पाठ को सीखने की जरूरत है।"

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 23 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है।

मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने कांग्रेस अध्यक्ष से उनके विवादास्पद बयान पर प्रतिक्रिया मांगते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल राफेल मामले से संबंधित कुछ दस्तावेजों की स्वीकार्यता के मामले को डील किया था।

अदालत का आदेश भारतीय जनता पार्टी की नेता मीनाक्षी लेखी द्वारा राहुल के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की मांग को लेकर अवमानना याचिका दायर करने पर आया है।

--आईएएनएस

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नई दिल्ली: वित्तमंत्री अरुण जेटली ने स्मृति ईरानी की शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाने के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए शनिवार को कहा कि कांग्रेस यह भूल गई है कि गांधी की अकादमिक योग्यता की एक सार्वजनिक जांच से कई सारे प्रश्न खड़े हो सकते हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने किसी परास्नातक की डिग्री बगैर एम.फिल की डिग्री हासिल कर ली है।

जेटली ने फेसबुक पर कहा, "भाजपा उम्मीदवार की शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाने वाले पूरी तरह भूल गए हैं कि राहुल गांधी की अकादमिक साख की एक सार्वजनिक जांच से ढेर सारे सवाल उठ सकते हैं। आखिर उन्होंने किसी परास्नातक डिग्री के बगैर एम.फिल की डिग्री हासिल की है।"

जेटली की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब एक दिन पहले भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने गांधी के एक परोक्ष संदर्भ में आरोप लगाया था कि "उनका कैम्ब्रिज का सर्टिफिकेट कहता है कि उनका नाम राहुल विंसी है और उन्होंने एम.फिल किया है और नेशनल इकॉनॉमिक प्लानिंग एंड पॉलिसी में फेल हैं।"

स्वामी ने कैम्ब्रिज युनिवर्सिटी का एक सर्टिफिकेट भी ट्विटर पर पोस्ट किया था, जिसमें कहा गया है कि राहुल विंसी को नेशनल इकॉनॉमिक प्लानिंग एंड पॉलिसी में 58 प्रतिशत अंक, जबकि कुल 62.8 प्रतिशत अंक हासिल हुआ है। सर्टिफिकेट कहता है कि पासिंग मार्क 60 प्रतिशत है।

स्वामी ने इसके पहले राहुल गांधी पर चार पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए थे, और उन्होंने कहा था कि उसमें से एक पासपोर्ट राहुल विंसी के नाम से है। उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी के फेल होने का सर्टिफिकेट है।

इसके पहले कांग्रेस ने स्मृति ईरानी द्वारा अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में निर्वाचन आयोग को विरोधाभासी हलफनामे सौंपने के खिलाफ आयोग से शिकायत की थी।

--आईएएनएस

 

 

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नई दिल्ली: वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मध्यप्रदेश और कर्नाटक में आयकर विभाग के छापों को राजनीतिक बदले की भावना बताए जाने को लेकर बुधवार को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की आलोचना की।

जेटली ने एक ब्लॉग में कहा कि दोनों राज्यों में सरकारी निधियों की हेराफरी की गई जिसको लेकर आयकर विभाग द्वारा छापे मारे गए, लेकिन इन आरोपों पर अब तक किसी ने जवाब नहीं दिया है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने कहा, "भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताना नियमित प्रथा बन गई है। भ्रष्टाचार के मामले में बदले की भावना का दावा करना कभी भी उचित बचाव नहीं होता। जो लोग इतने बड़े भ्रष्टाचार का काम करते हैं उनका आकलन कार्रवाई के आधार पर ही किया जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "कर्नाटक के संबंध में साक्ष्य सार्वजनिक हो चुका है कि जनकल्याण के लिए लोक निर्माण विभाग को किए गए आवंटन का इस्तेमाल इंजीनियरों द्वारा राजनीतिक उद्देश्य के लिए किया किया।"

जेटली ने कहा कि मध्यप्रदेश में एक संस्थागत तंत्र बनाया गया है जहां विकास और कमजोर वर्गो के सामाजिक कल्याण के लिए आवंटित धन राजनीति में लगाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "दुखद है कि दोनों से किसी भी प्रदेश की सरकार ने आरोपों पर जवाब नहीं दिया है।"

आरोपियों की दलील है कि सिर्फ उन पर ही कार्रवाई क्यों हो रही है और उनके राजनीतिक विरोधियों की तलाशी क्यों नहीं हो रही है। इस पर जेटली ने कहा, "क्या कोई समानता का अधिकार है कि तब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकती जब तक विरोधियों पर आरोप न लगाया जाए? राजस्व विभाग उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करता है और वह तभी कार्रवाई करता है जब इस बात से संतुष्ट होता है कि तलाशी लेने का मामला है।"

उन्होंने कहा कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए खर्च होने वाले पैसे की हेराफेरी हो रही है जिससे ऐसे कार्य में लिप्त लोगोंे की मानसिकता का पता चलता है।

जेटली ने कहा, "वे गरीबों को भी नहीं छोड़ते हैं। यह भारतीय राजनीति का पाखंड है। इस प्रकार का अन्याय करने के बाद वे न्याय की बात करने की धृष्टता करते हैं।"

--आईएएनएस

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