नई दिल्‍ली: मतगणना के दौरान हिंसा की संभावना को देखते हुए गृहमंत्रालय सतर्क हो गया है। गृहमंत्रालय ने इसी के मद्देनजर सभी राज्‍यों के मुख्य सचिवों और डीएसजीपी को अलर्ट रहने के लिए कहा है। गृहमंत्रालय ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में कानून और शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

बता दें कि सात चरणों में चले लोकसभा चुनाव के नतीजे कल यानी गुरुवार को आएंगे। मतों की गिनती 23 मई को है, इसलिए गृहमंत्रालय को ऐसा अंदेशा है कि इस दौरान हिंसा भड़क सकती है। इस बार लोकसभा चुनाव में इवीएम पर रार मची हुई है। कई विपक्षी दल अनेकों बार चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं।

मतगणना से पहले कई पार्टियों ने इवीएम और वीवीपैट में गड़बड़ी की आशंका लेकर और साथ ही हर विधानसभा में कम से कम 50 फीसद से ज्‍यादा पर्चियों को मिलान करनेे की मांग की। इस मांग के ठुकराए जाने के बाद से ही कई नेता तीखे बयान दे रहे हैं। इसी के मद्देनजर गृहमंत्रालय को स्‍ट्रॉग रूम की सुरक्षा और अन्‍य किसी प्रकार की हिंसा से निपटने के लिए सतर्कता अलर्ट जारी करना पड़ा। गृहमंत्रालय ने साफ किया है कि मतगणना वाले स्‍थल पर सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं करना पड़े।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और महागठबंधन के घटक रालोसपा के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार को एक्जिट पोल के नतीजे से नाराजगी जताते हुए कहा कि भाजपा रिजल्ट लूटने की कोशिश कर रही। उसके इस रवैये से सड़कों पर खून बहेगा। कुशवाहा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि रिजल्ट लूट की कोई कोशिश हुई तो हथियार भी उठाने से परहेज नहीं करेंगे। जनता का आक्रोश संभल नहीं पाएगा।

भभुआ के पूर्व विधायक और लोकसभा चुनाव में बक्सर लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार रामचंद्र यादव ने कैमूर ईवीएम मामले में हथियार लहराते हुए प्रेस कान्फ्रेंस किया। उन्‍होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए हथियार उठाना पड़े तो उठाऊंगा। रिजल्ट फेवर में नहीं आने पर अब लड़ना पड़ेगा, अब चुप बैठने से काम नहीं चलेगा। उनके इस बयान का वीडियो वायरल हो रहा है।

 

 

 

रामपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खां ने बुधवार को चुनाव आयोग पर तंज कसा और सवाल किया कि चुनाव आयोग पर किसी को भरोसा क्यों नहीं है?

आजम खान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि "चुनाव परिणाम को लेकर जो एग्जिट पोल आएं हैं, उसको लेकर इतने परेशान क्यों हैं, चुनाव आयोग पर किसी को भरोसा क्यों नहीं है।"

रामपुर संसदीय सीट से महागठबंधन के प्रत्याशी आजम ने कहा, "चुनाव अगर लोकतंत्र का महापर्व है तो फिर इतनी मायूसी क्यों है। सरकार चाहे किसी की भी आए, लोग इतने डरे हुए क्यों हैं।"

उन्होंने कहा, "हमारे एजेंट्स और कार्यकर्ता चौकन्ने रहेंगे। जिला प्रशासन बेईमानी कराने के बारे में सोचे भी नहीं।"

सपा नेता ने कहा कि जब तक पहले राउंड की मतगणना संपन्न न हो जाए, तब तक दूसरे राउंड की मशीनों को छुआ भी न जाए।

उन्होंने कहा, "सभी राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग को इस पर विचार करना चाहिए। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन उसने अपना भरोसा खोया है। ऐसे में सिवाय मायूसी के क्या हो सकता है।"

--आईएएनएस

 

 

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने ईवीएम को लेकर विपक्ष के संदेह को खारिज करते हुए बुधवार को कहा कि ईवीएम का परिवहन और रखरखाव पूरी तरह सुरक्षित है। 

विपक्षी दलों ने ईवीएम के परिवहन और भंडारण के दौरान उनमें कथित तौर बदलाव या छेड़छाड़ करने का संदेह जताया था।

पिछले दो दिनों से कुछ वीडियो क्लिप वायरल हो रहे हैं जिनमें विभिन्न जगहों पर ईवीएम के अनधिकृत परिवहन दिखाया गया है।

चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान की पूरी प्रक्रिया और उसके बाद ईवीएम का स्ट्रांग रूम में भंडारण की पूरी प्रक्रिया दुरुस्त है।

दिशानिर्देश के अनुसार, केंद्रीय अर्धसैनिक बल और प्रदेश पुलिस की उचित निगरानी में ईवीएम विभिन्न केंद्रों पर वापस मंगाए जाते हैं।

किसी खास मतदान केंद्र की पूरी कंट्रोल युनिट (सीयू), बैलट युनिट और वोटर वेरीफायड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) स्ट्रांग रूप में रखे जाते हैं।

उम्मीदवारों या उनके एजेंटों और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में रूम को डबल लॉक से सील किया जाता है।

उपयोग नहीं किए गए वीवीपैट और ईवीएम अगल स्ट्रांग रूप में रखे जाते हैं।

आयोग ने कहा कि तारीख के साथ वीडियो और डिजिटल फोटोग्राफी किया जाता है और ईवीएम के परिवहन व भंडारण का समय दर्ज किया जाता है।

स्ट्रांग रूप की निगरानी में कम से कम केंद्रीय पुलिस बल का एक पलटन तैनात रहता है।

स्ट्रांग रूम में वातानुकूलन की कोई जरूरत नहीं होती है। बैलट बॉक्स के मामले में इस बात की जांच की जाती है कि कक्ष धूल, नमी और चूहे से रहित हो।

--आईएएनएस

 

 

पटना: लोकसभा चुनाव के परिणाम आने से पहले ही बिहार की राजनीति गर्म है। महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा द्वारा 'खून की नदियां बहा देने' वाले बयान पर विवाद अभी थमा नहीं था कि भभुआ के पूर्व विधायक और बक्सर संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी रामचंद्र यादव ने एक संवाददाता सम्मेलन में हथियार लहराकर इस विवाद को और गर्म कर दिया।

पूर्व विधायक यादव ने भभुआ में बुधवार को एक प्रेस वार्ता में हाथ में हथियार लिए कहा, "लोकतंत्र बचाने के लिए हथियार उठाना पड़े तो उठाऊंगा। पक्ष में नतीजे नहीं आने पर खून की नदियां भी बहा दूंगा।"

उन्होंने कहा, "तेजस्वी यादव और उपेंद्र कुशवाहा जी के कहने से कुछ नहीं होगा, करना पड़ेगा। लड़ना पड़ेगा। बग्ैार लड़े हुए अधिकार नहीं मिलने वाला। लोकतंत्र की रक्षा, संविधान की रक्षा के लिए हमलोग मरने, लड़ने और जेल जाने के लिए तैयार हैं। मगर आपको आगे आना होगा। आप आदेश दीजिए। इसी सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने बात कही, उस पर सभी नेता को एकजुट होना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में, मात्र 379 लोगों, चंद मुट्ठी भर लोगों के हाथों में आज देश की व्यवस्था चरमरा रही है। अब फॉरवर्ड और बैकवर्ड का मामला नहीं है।"

इस प्रेस वार्ता का वीडियो वायरल होने पर निर्वाचन आयोग ने इसे संज्ञान में लेते हुए पुलिस मुख्यालय को निर्देश दिया है।

अपर पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने कहा, "पूर्व विधायक के घर में पुलिस द्वारा छापेमारी की गई है। उनके हथियार के लाइसेंस को निरस्त कर हथियार जब्त किया जाएगा तथा उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है।"

उन्होंने कहा कि हथियार का लाइसेंस प्रदर्शन के लिए नहीं दिया जाता है।

इससे पूर्व मंगलवार को राजग के पूर्व साथी कुशवाहा ने पटना में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था, "पहले मतदान केंद्र लूटा जाता था। अब भाजपा एग्जिट पोल के परिणाम को शस्त्र बनाकर रिजल्ट लूटना चाहती है। ईवीएम को इधर-उधर किए जाने की बातें सामने आई हैं।"

उन्होंने कहा था, "रिजल्ट लूट की कोई कोशिश हुई तो वह हथियार भी उठाने से परहेज नहीं करेंगे। जनता का आक्रोश संभल नहीं पाएगा।"

उन्होंने कहा, "वोट की रक्षा के लिए हथियार भी उठाना हो तो उठाइए। आज जो रिजल्ट लूट की कोशिश हो रही है, इसको रोकने के लिए हथियार भी उठाना हो तो उठाना चाहिए।"

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इससे सड़कों पर खून की नदियां बहेंगी।

--आईएएनएस

 

 

भोपाल: मध्य प्रदेश के 29 संसदीय सीटों के लिए गुरुवार को 51 जिला मुख्यालयों पर मतगणना होगी। इस काम में 15 हजार कर्मचारी लगेंगे। मतगणना के जरिए कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांति लाल भूरिया, अरुण यादव, मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ और भाजपा की साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, पूर्व भाजपा अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के भविष्य का फैसला होगा। कमलनाथ की छिंदवाड़ा विधानसभा सीट का भी परिणाम आएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, राज्य के 29 संसदीय क्षेत्रों की 51 जिला मुख्यालय पर मतगणना सुबह आठ बजे शुरू होगी। कुल 311 मतगणना कक्ष बनाए गए हैं। मतगणना की शुरुआत डाक मतपत्रों से होगी। डाक मतपत्रों की गणना शुरू होने के 30 मिनट बाद ईवीएम में दर्ज मतों की गणना शुरू होगी।

बयान के अनुसार, प्रत्येक मतगणना टेबिल पर एक-एक मतगणना सुपरवाइजर, एक सहायक, एक माइक्रो आब्जर्वर एवं एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त किया गया है। मतगणना कार्य के लिए कुल 15 हजार कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। मतगणना स्थलों पर अधिक डाक मतपत्र होने के कारण उनकी गणना के लिए आयोग से अनुमोदन के बाद अलग से 19 कक्ष बनाए गए हैं।

बयान में कहा गया है कि ईवीएम मतों की गणना के लिए प्रदेश में कुल 292 कक्ष बनाए गए हैं। इनमें से 124 कक्ष में सात टेबल, 164 कक्ष में 14 टेबल एवं चार कक्ष में 21 टेबल (कटनी जिले में) लगाए गए हैं। डाक मतपत्रों की गणना के लिए बनाए गए 19 मतगणना कक्षों सहित कुल 311 कक्षों में कुल 3409 टेबल होंगे। शान्तिपूर्वक एवं पारदर्शी तरीके से मतगणना सम्पन्न कराने के लिए जिलों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

आयोग के निर्देशानुसार, जिस मतगणना कक्ष में डाक मतपत्रों की गणना होगी, वहां ईवीएम में दर्ज मतों की गणना डाक मतपत्रों की गणना प्रारंभ होने के 30 मिनट बाद प्रारंभ की जाएगी। शेष मतगणना कक्षों में ईवीएम की मतगणना निर्धारित समय सुबह आठ बजे से प्रारंभ होगी। सभी ईवीएम की मतगणना पूर्ण होने के उपरान्त प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पांच वीवीपैट पर्चियों की गणना की जाएगी। इन पांच वीवीपैट की पर्चियों की गणना क्रमबद्घ तरीके से (एक के बाद एक) की जाएगी।

बयान के अनुसार, मतगणना स्थल पर त्रिचक्रीय सुरक्षा-व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के लिए समस्त मतगणना स्थल पर कुल 9000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।

मतगणना परिसर, स्ट्रांग रूम से मतगणना कक्ष तक ईवीएम के लाने-ले जाने वाले मार्ग एवं मतगणना कक्ष में कुल 1800 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं मतगणना स्थल पर वाई-फाई का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

राज्य का इस बार का चुनाव कई महत्वपूर्ण नेताओं के भविष्य को तय करने वाला होगा। भोपाल में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का मुकाबला भाजपा की साध्वी प्रज्ञा ठाकुर से हैं। वहीं खंडवा में कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव और भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान आमने-सामने हैं। इसके अलावा छिंदवाड़ा से कांग्रेस उम्मीदवार व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ, गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया, मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, सीधी से अजय सिंह, मुरैना से भाजपा के केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

राज्य के 29 संसदीय क्षेत्रों के अलावा छिंदवाड़ा विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव भी हुआ है। यहां से मुख्यमंत्री कमलनाथ चुनाव लड़ रहे हैं। कमलनाथ दिसंबर में राज्य के मुख्यमंत्री बने थे और उन्हें छह माह के भीतर विधायक निर्वाचित होना आवश्यक है। छिंदवाड़ा से दीपक सक्सेना ने विधायक पद से इस्तीफा देकर सीट कमलनाथ के लिए खाली की थी।

--आईएएनएस

मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता जयदत्त क्षीरसागर बुधवार को शिवसेना में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि राकांपा में उन्हें घुटन महसूस हो रही थी।

शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें शिव बंधन के प्रतीक स्वरूप एक लाल धागा बांध कर तथा पार्टी का एक छोटा झंडा भेंट कर उनका पार्टी में स्वागत किया।

इस मौके पर क्षीरसागर ने कहा कि राकांपा में वह घुटन महसूस कर रहे थे और उन्होंने पार्टी अध्यक्ष शरद पवार की इन परिस्थिति के लिए आलोचना की, जिनके कारण उन्हें शिवसेना में शामिल होना पड़ा।

ठाकरे ने कहा कि क्षीरसागर जैसे एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता के आने से उनकी पार्टी बीड और मराठवाड़ा में और मजबूत होगी।

हालांकि उद्धव ने नई दिल्ली में मंगलवार को हुए राजग के रात्रिभोज के बारे में कुछ बताने से इंकार कर दिया।

ठाकरे ने एक्जिट पोल के अनुमानों पर भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, जिसमें भाजपा को भारी बहुमत मिलता दिखाया गया है।

क्षीरसागर ने इसके पहले बुधवार को ही राकांपा से और विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस-राकांपा की पूर्व सरकार के दौरान उन्होंने मंत्री के रूप में कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी।

लेकिन पिछले कुछ वर्षो से बीड में और क्षेत्रीय राजनीति में अपने भतीजे संदीप क्षीरसागर और नेता प्रतिपक्ष (विधान परिषद) धनंजय मुंडे द्वारा दरकिनार किए जाने से नाराज थे।

लोकसभा चुनाव में क्षीरसागर ने राकांपा उम्मीदवार बजरंग सोनावने की खुलकर खिलाफत की थी और भाजपा उम्मीदवार प्रीतम मुंडे का समर्थन किया था।

--आईएएनएस

जयपुर: इसे राजनीतिक शत्रुता कहें या राजनीतिक मजबूरी कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार को एक ही उड़ान में यात्रा की, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे से बातचीत नहीं की।

दोनों अपराह्न् में दिल्ली से एक ही उड़ान पर सवार हुए थे, और वे जयपुर उतरे।

गहलोत ने जयपुर हवाईअड्डे पर मीडिया से बातचीत में कहा, "राजे बिजनेस क्लास में थीं, और मैं इकॉनॉमी क्लास में। मुझे नहीं पता कि वह आगे बैठी हुई हैं। यदि मुझे पता होता, तो जाकर उनसे बातचीत किया होता।"

गहलोत ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के बारे में अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस बारे में कई शिकायतें हैं।

गहलोत ने सवाल किया, "उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में ईवीएम की सुरक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए। मैं मानता हूं कि अदालत ने भी स्वीकार किया है कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ किया जा सकता है। इसीलिए उन्होंने वीवीपैट की व्यवस्था की है। यदि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हो सकती है, फिर उससे चुनाव क्यों कराया जाना चाहिए? अमेरिका और इंग्लैंड में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता। हम भी ऐसा क्यों नहीं करते?"

इस बीच, राजे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भाजपा राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के प्रयासों के कारण भाजपा सभी राज्यों में जोरदार प्रदर्शन करेगी।

राजे और गहलोत दोनों हवाईअड्डे से अलग-अलग गेट से बाहर निकले।

--आईएएनएस

 

 

नई दिल्ली: दूध पीने से पहले दो बार सोचिए कि आप जो दूध पी रहे हैं उसमें मिलावट तो नहीं है। मिलावट में पेंट और डिटर्जेट भी हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के डेयरी प्लांटों में छापेमारी के दौरान पाया गया कि दूध में डिटर्जेट और यूरिया जैसे रासायनिक पदार्थ खुलेआम मिलाए जा रहे हैं।

प्रदेश के खाद्य विभाग ने मंगलवार को वाराणसी में एक बड़े डेयरी प्लांट से 10 हजार लीटर से ज्यादा नकली दूध बरामद किया जिसमें डिटर्जेट मिलाया गया था।

यह प्लांट प्योर डेयरी सॉल्यूशंस का है जो काशी संयोग ब्रांड के नाम से दूध बेचता है। पिछले कुछ दिनों से उपभोक्ता दूध की गुणवत्ता में खराबी की शिकायत कर रहे थे जिसके बाद छापेमारी की गई।

विभाग के अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया कि छापेमारी के दौरान नकली दूध आपूर्ति करने वालों पर शिकंजा कसा गया और प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी इसी प्रकार नकली दूध बरामद किया गया।

पिछले कुछ महीने के दौरान की गई छापेमारी में पता चला कि डिटर्जेट, यूरिया और स्टार्च का इस्तेमाल करके दूध बनाकर बाजार में बेचा जा रहा है।

पिछले साल पटियाला में एक बड़े डेयरी प्लांट में की गई छापेमारी में 7000 लीटर मिलावटी दूध पकड़ा गया जिसमें डिटर्जेट का इस्तेमाल किया गया था।

दिल्ली खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में देश की राजधानी से लिए गए दूध के कई नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए।

विभाग की रिपोर्ट में कहा गया, "जनवरी 2018 से अप्रैल 2019 तक 477 नमूनों की जांच सरकारी लैब में की गई जिसमें दूध की गुणवत्ता निम्न स्तर की पाई गई।"

उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में अधिकतर स्थानीय डेयर प्लांट गर्मियों में दूध की मांग बढ़ने पर मिलावटी दूध की आपूर्ति करते हैं।

पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य मोहन सिह अहलूवालिया ने पहले कहा था कि देश में बेचे जा रहे 68.7 फीसदी दूध एफएसएसएआई के मानक से निम्न स्तर के बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिलावटी दूध में आमतौर पर डिटर्जेट, कास्टिक सोड, ग्लूकोज, सफेद पेंट और रिफाइंड तेल मिलाए जाते हैं।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: मतगणना से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में हेरफेर के आरोपों के बीच बुधवार को स्वतंत्र शोध संस्थान पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने बताया कि मतगणना किस तरह से की जाएगी।

सवालों के घेरे में आई ईवीएम का इस्तेमाल साल 2000 के चुनावों से हो रहा है।

चुनाव आयोग अब तक 113 विधानसभाओं के चुनाव और लोकसभा के तीन चुनाव ईवीएम से करा चुका है।

पारदर्शिता और व्यवस्था में मतदाता का विश्वास बढ़ाने के लिए साल 2013 में ईवीएम से वीवीपैट सिस्टम को जोड़ा गया।

मतगणना प्रक्रिया को इस तरह स्पष्ट किया गया है :

मतों की गिनती के लिए कौन जिम्मेदार है?

किसी क्षेत्र में चुनाव कराने के लिए चुनाव अधिकारी (आरओ) उत्तरदायी होता है। इसमें मतों की गणना भी शामिल है। आरओ की तैनाती प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए चुनाव आयोग, राज्य सरकार के परामर्श से करता है।

मतगणना कहां होती है?

आरओ यह तय करता है कि संसदीय क्षेत्र की मतगणना कहां कराई जानी है। आदर्श स्थिति यही है कि मतगणना एक ही स्थान पर कराई जानी चाहिए और इसमें भी निर्वाचन क्षेत्र के आरओ के मुख्यालय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मतगणना आरओ के प्रत्यक्ष निरीक्षण में होनी चाहिए।

लेकिन, हर संसदीय क्षेत्र में कई विधानसभा क्षेत्र होते हैं। इस हालत में मतगणना एक से अधिक स्थानों पर सहायक चुनाव अधिकारी (एआरओ) की निगरानी में हो सकती है।

संसदीय क्षेत्र के हर विधानसभा खंड में मतगणना एक हाल में की जाती है। मतगणना के हर दौर में 14 ईवीएम के मत गिने जाते हैं।

अगर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए हों, जैसे इस बार ओडिशा, आंध्र में हुए हैं, तो पहली सात मेज विधानसभा चुनाव के मतों की गिनती के लिए आरक्षित की जाती हैं, बाकी पर लोकसभा चुनाव की मतगणना होती है।

अगर किसी क्षेत्र में उम्मीदवारों की संख्या बहुत अधिक है तो चुनाव आयोग की अनुमति से हाल और मेजों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। हाल में एक बार में एक ही विधानसभा खंड के मतों की गिनती की जा सकती है। यह जरूर है कि इस खंड की गिनती पूरी होने पर दूसरे विधानसभा खंड के मतों की गिनती इसी हाल में की जा सकती है।

मतगणना की प्रक्रिया :

मतगणना आरओ द्वारा नियुक्त मतगणना सुपरवाइजरों द्वारा की जाती है। मतगणना हाल में उम्मीदवार अपने मतगणना एवं चुनाव एजेंटों के साथ मौजूद रहते हैं।

मतों की गिनती इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट (ईटीपीबी) और पोस्टल बैलेट (पीबी) की गणना से शुरू होती है। इन मतों को सीधे आरओ की निगरानी में गिना जाता है। पीबी की गणना शुरू होने के आधा घंटे बाद ईवीएम मतों की गणना शुरू की जाती है। हर राउंड की समाप्ति पर 14 ईवीएम के नतीजों का ऐलान किया जाता है।

वीवीपैट पर्चियों की गणना की प्रक्रिया क्या है :

प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के हर विधानसभा खंड की एक-एक ईवीएम को रैंडम तरीके से वीवीपैट मिलान के लिए चुना जाता है। वीवीपैट पर्चियों का सत्यापन हाल में स्थित एक सुरक्षित वीवीपैट मतगणना बूथ के अंदर किया जाता है। ईवीएम मतों की गिनती के बाद हाल में किसी भी मतगणना मेज को वीवीपैट मतगणना बूथ में बदला जा सकता है।

संसदीय क्षेत्र में आम तौर से पांच से दस विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

इस बार सर्वोच्च न्यायालय ने तय किया है कि हर विधानसभा खंड के पांच रैंडम तरीके से चुने गए मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का मिलान ईवीएम के नतीजों से किया जाएगा। इसका अर्थ यह हुआ कि हर संसदीय क्षेत्र में वीवीपैट पर्चियों का मिलान 25 से 50 ईवीएम से करना होगा। यह प्रक्रिया सीधे आरओ-एआरओ की निगरानी में होगी।

चुनाव आयोग ने तय किया है कि पांच वीवीपैट की गणना क्रमानुसार की जाएगी। वीवीपैट मिलान प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरओ निर्वाचन क्षेत्र के अंतिम नतीजों का ऐलान कर सकता है।

अगर वीवीपैट गणना और ईवीएम के नतीजों में समानता नहीं रही तो छपी हुई पेपर स्लिप की गणना को अंतिम माना जाएगा। चुनाव आयोग ने इसका खुलासा नहीं किया है कि पांच वीवीपैट में से किसी एक की गणना में भी असंगति पाए जाने पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

--आईएएनएस

भोपाल: लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले आए एग्जिट पोल में भाजपा को बहुमत मिलने के रुझान ने मध्य प्रदेश की सियासत में गर्माहट ला दी है। भाजपा को एग्जिट पोल के अनुसार लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राज्य सरकार के अस्थिर होने की संभावना नजर आने लगी है तो दूसरी ओर कांग्रेस इन रुझानों को महज 'मनोरंजन पोल' करार दे रही है। इसी के चलते भाजपा और कांग्रेस के बीच 'पत्र-युद्ध (लेटर वार) शुरू हो गया है।

लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण का मतदान होने के बाद रविवार की शाम से विभिन्न समाचार माध्यमों के एग्जिट पोल के नतीजे आने लगे। इन एग्जिट पोल में भाजपा को बहुमत मिलने की संभावना जताई गई है। इसके बाद से ही मध्य प्रदेश की सरकार के भविष्य पर सवाल उठने लगे क्योंकि वर्तमान कांग्रेस सरकार बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के सहयोग से चल रही है।

राज्य के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सोमवार को राज्यपाल को पत्र लिखकर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। इसमें उन्होंने ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा कराने की इच्छा जाहिर की। इस पत्र की प्रतिलिपि भार्गव ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी भेजी थी। कमलनाथ ने नेता प्रतिपक्ष भार्गव को जवाब देते हुए उनकी जानकारी पर न केवल सवाल उठाया बल्कि सरकार द्वारा 73 दिनों में किए गए कामों का ब्योरा भी दिया।

मुख्यमंत्री कमलनाथ के जवाब पर नेता प्रतिपक्ष ने मंगलवार रात को एक और पत्र लिखा। इस पत्र में भार्गव ने कमलनाथ की ओर से दिए गए जवाब को सतही जवाब करार दिया, साथ ही समस्याओं की गंभीरता को कम करने का आरोप लगाया। भार्गव की ओर से दोबारा लिखे गए पत्र में कहा गया कि समस्याएं इतनी विकराल हैं कि दो पृष्ठों के पत्र के माध्यम से इनका उत्तर नहीं दिया जा सकता है।

एक तरफ जहां नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखा, जिसका कमलनाथ ने जवाब दिया, उस पर भार्गव ने दोबारा खत लिखा। इसके अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी एक पत्र लिखा। इस पत्र में किसान कर्ज माफी से लेकर किसानों को फसल के भुगतान का ब्योरा दिया गया है। साथ ही चौहान पर चुनाव के दौरान किसानों और आम जनता के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया गया है।

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले राज्य में प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा के बीच शुरू हुआ पत्र-युद्ध चुनाव नतीजे आने के बाद दलों में तोड़फोड़ की हद तक पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री कमलनाथ कांग्रेस के 10 विधायकों को भाजपा की ओर से प्रलोभन देने की बात कह चुके हैं। यह बात कमलनाथ को स्वयं विधायकों ने बताई है।

राजनीतिक विश्लेषक सॉजी थामस का कहना है, "भाजपा विधानसभा के विशेष सत्र के जरिए कमलनाथ सरकार को निर्दलीय व सपा और बसपा से मिल रहे समर्थन की हकीकत का आकलन करना चाहती है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री कमलनाथ आक्रामक होकर भाजपा के हर हमले का करारा जवाब देना चाहते हैं, ताकि उनकी सरकार की कमजोरी जाहिर न हो। लिहाजा लेटर वार इसी का नतीजा है। यह लेटर-वार आगे कहां तक जाएगा, इसका अभी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।"

राज्य की वर्तमान विधानसभा की स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि कमलनाथ सरकार सपा-बसपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से चल रही है। विधानसभा में 230 विधायक हैं, जिसमें कांग्रेस के 114 और भाजपा के 109 विधायक हैं। वहीं बसपा के दो, सपा का एक और चार निर्दलीय विधायक हैं। भाजपा की नजर बसपा-सपा और निर्दलीय विधायकों पर है। यह विधायक कई बार सरकार को नजरें दिखा चुकी है। लोकसभा के नतीजे भाजपा के समर्थन में आते हैं तो कमलनाथ सरकार के लिए मुसीबत हो सकती है, इसे कोई नकार नहीं सकता।

--आईएएनएस

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