कर्नाटक संकट गहराया, 2 और कांग्रेस विधायकों का इस्तीफा
Thursday, 11 July 2019 07:33

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नई दिल्ली/बेंगलुरू: कर्नाटक में सियासी उठापटक बुधवार को और तेज हो गई, जब कांग्रेस और जद(एस) के बागी विधायक विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गए। वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टी भाजपा ने राज्यपाल वजुभाई वाला से आग्रह किया कि वह एच. डी. कुमारस्वामी सरकार को शक्ति परीक्षण कराने का निर्देश दें। इस बीच, कर्नाटक कांग्रेस के दो और विधायकों, एम. टी. बी. नागराज और डी. सुधाकर ने बुधवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अब एक जुलाई से इस्तीफा सौंपने वाले पार्टी के विधायकों की संख्या 13 हो गई है।

अगर ये सभी इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं, तो विधानसभा में अध्यक्ष सहित पार्टी की ताकत 79 से घटकर महज 66 रह जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार से शुरू होने वाले विधानसभा के 10 दिवसीय मॉनसून सत्र से पहले तीन-चार और कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे की संभावना है।

कर्नाटक में अपनी सरकार को बचाने के लिए बेताब कांग्रेस ने संसद में हंगामा किया और बेंगलुरू की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और के. सी. वेणुगोपाल को विरोध मार्च निकालते हुए कई पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में ले लिया गया।

मुंबई में भी हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जहां डी. के. शिवकुमार सहित कई कांग्रेसी नेताओं को एक होटल के बाहर हिरासत में ले लिया गया। ये नेता बागी विधायकों को मनाने पहुंचे थे।

सरकार की मुसीबत उस समय और भी बढ़ गई, जब एक क्षेत्रीय पार्टी केपीजेपी के विधायक सहित एक निर्दलीय विधायक ने भी इस्तीफा दे दिया और सत्ताधारी गठबंधन से समर्थन वापस ले लिया।

केपीजेपी विधायक और निर्दलीय विधायक द्वारा इस्तीफा देने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन की संयुक्त ताकत बहुमत से कम हो गई है।

सभी इस्तीफे स्वीकार किए जाते हैं, तो विधानसभा की ताकत 209 रह जाएगी और बहुमत का नया आंकड़ा 105 हो जाएगा।

हालांकि, अध्यक्ष के. आर. रमेश कुमार ने विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है।

जिन 10 विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उन्होंने अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत से तत्काल सुनवाई की मांग की है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी के माध्यम से दायर अपनी याचिका में, विद्रोही विधायकों ने आरोप लगाया है कि विधानसभा अध्यक्ष अपने संवैधानिक कर्तव्य का पालन नहीं कर रहे हैं और जानबूझकर विधानसभा से उनके इस्तीफे की स्वीकृति में देरी कर रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने रोहतगी को याचिका पर सुनवाई पर आश्वासन तो दिया, मगर इसके लिए बाद में तारीख रखने की बात कही। शीर्ष अदालत की ओर से गुरुवार को मामले की सुनवाई होने की संभावना है।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मुख्यमंत्री अल्पमत में हैं और विश्वास मत हासिल करने से इंकार कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने संविधान में प्रदत्त लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपने असाधारण अधिकार को क्रियान्वित करने की मांग की।

याचिकाकर्ताओं का कहना है, "विधायिका का कोई भी निर्वाचित सदस्य अपनी अंतरात्मा की आवाज या अन्य जरूरी परिस्थितियों के आधार पर अपनी सदस्यता से इस्तीफा देने का हकदार है।"

--आईएएनएस

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