कांग्रेस का आरोप- महाराष्ट्र के करदाताओं के पैसे से हो रहा गुजरात का विकास

कांग्रेस ने प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना के जरिए महाराष्ट्र के करदाताओं के पैसे से गुजरात का विकास सुनिश्चित करने का राज्य सरकार पर आरोप लगाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य के पक्ष में लागत का असमान बंटवारे का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता अनंत गाडगिल ने कहा कि प्रस्तावित अहमदाबाद – मुंबई बुलेट ट्रेन के 12 में से सिर्फ सात स्टेशन महाराष्ट्र में पड़ते है। विधान परिषद के सदस्य ने कहा ‘‘ कुल लागत का 2/3 गुजरात को और 1/3 हिस्सा महाराष्ट्र को लेने के बजाय हम (प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना) की 50 फीसदी लागत को साझा कर रहे हैं। इसका मतलब है कि गुजरात का विकास महाराष्ट्र के करदाताओं के पैसों से हो रहा है। क्या इसे गुजरात मॉडल कहा जाए ? ’’ महत्त्वाकांक्षी योजना पर कुल करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह पैसा जापान कर्ज के रूप में दे रहा है। पहली बुलेट ट्रेन के 2023 तक चलने की उम्मीद है। कांग्रेस एवं अन्य राजनीतिक दल परियोजना का विरोध कर रहे हैं और इसे पैसे की बर्बादी बता रहे हैं। गाडगिल ने ननार रिफाइनरी जैसी परियोजनाओं का आवंटन विदेशी कंपनियों को देने का प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया।

जबकि बुधवार को ही रेलमंत्री पीयूष गोयल का बयान आया था कि पूर्व की सरकारें बुलेट ट्रेन लाने में अक्षम साबित हुईं और रेलवे का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों के लिए किया गया। लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में गोयल ने कहा, “पूर्व में रेलवे का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों के लिए किया गया। इसलिए अनेक परियोजनाओं की घोषणा नहीं हो पाई और सभी परियोजनओं पर कार्य के लिए बजट का अभाव बना रहा। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि जहां कहीं भी जमीन उपलब्ध है और कार्य महत्वपूर्ण है वहां उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है।

उन्होंने सदन को बताया, “पुरुष और महिलाओं के अलग-अलग शौचालय बनाने की हमारी योजना है। इसके अलावा, देशभर के स्टेशनों पर पानी की सुविधा, प्रतीक्षालयों को उन्नत बनाना और अन्य सुविधाएं मुहैया करवाना हमारी प्राथमिकता में शामिल है। गोयल ने कहा था प्रधानमंत्री का सपना है कि भारत प्रौद्योगिकी की शक्ति बने ताकि लोगों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्राप्त हों। भारत में 50 साल के बाद बुलेट ट्रेन परियोजना तब आई, जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने। उन्होंने कहा, “हमने 0.1 फीसदी की ब्याज दर पर जापान से 50 साल के लिए 1.08 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। हम देश में द्रुतगामी रेल नेटवर्क विकसित करना चाहते हैं।”