खनन मामले में पर्रिकर ने सर्वोच्च न्यायालय को आड़े हाथ लिया

पणजी, 17 मार्च (आईएएनएस)| गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर ने सर्वोच्च न्यायालय को आड़े हाथ लेते हुए कहा है कि इसका न्यायिक आयोग जब गोवा पहुंचा तब उसने न्यायिक सिद्धांत 'न्याय में देरी, न्याय से वंचना' का पालन नहीं किया।

शनिवार को कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) की वार्षिक सभा में पर्रिकर ने कहा, "'जब न्याय में देरी, न्याय से वंचना है तब सर्वोच्च न्यायालय राज्य की प्रमुख गतिविधि खनन पर छह महीनों के लिए रोक कैसे लगा सकता है?"

उन्होंने कहा, "मुझे मौका मिला तो उनसे दो टूक यह बात कहूंगा। मैं कहूंगा कि आप सच्चाई से बहुत दूर हैं।"

ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल अक्टूबर में प्रख्यात वकील प्रशांत भूषण और स्थानीय गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद राज्य के खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

गोवा में न्यायिक आयोग के प्रमुख न्यायाधीश एम.बी. शाह ने अपनी एक रिपोर्ट में 35 हजार करोड़ के खनन घोटाले का खुलासा किया था, जिसके बाद यह याचिका दायर की गई थी।

गोवा सरकार ने पिछले महीने जनहित याचिका के जवाब में एक हलफनामे के माध्यम से कहा था कि शाह आयोग और सर्वोच्च न्यायालय की अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट गलत है।

सरकार ने हलफनामे में अनुरोध किया था कि राज्य में खनन से प्रतिबंध हटा लिया जाए और दावा किया था कि इस प्रतिबंध के बाद से राज्य की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

 

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