पंजाब में ग्रामीणों ने कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए खुद को 'आइसोलेट' किया
Tuesday, 07 April 2020 09:18

  • Print
  • Email

चंडीगढ़: पंजाब के क्षेत्रों में लोगों ने 'सेल्फ आइसोलेशन' के माध्यम से कड़े कर्फ्यू प्रतिबंधों के बीच कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने का रास्ता दिखाया है, साथ ही आवश्यक वस्तुओं की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित की है। अधिकारियों ने कहा कि 13,240 गांवों में 7,842 लोगों ने महामारी के प्रसार को रोकने के लिए खुद को 'आइसोलेट' कर लिया है।

गाव के पुलिस अधिकारी या वीपीओ, जिन्हें हाल ही में पंजाब पुलिस ने अपनी अनूठी 'वन कॉप फॉर वन विलेज' योजना के तहत नियुक्त किया है, वे 'सेल्फ आइसोलेशन' की सुविधा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

ग्रामीणों ने स्वैच्छिक लॉकडाउन के लिए पुलिस के साथ हाथ मिलाया है और अपने गांव में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के प्रवेश को रोकने के लिए पुलिस गश्ती दलों की सहायता कर रहे हैं।

एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि कर्फ्यू पासधारकों या आवश्यक सेवाओं को ले जाने वालों को गांवों में प्रवेश की अनुमति है। खास बात यह है कि इन गांवों में मादक पदार्थो के धंधे पर गहरी चोट पहुंची है।

पुलिस महानिदेशक दिनकर गुप्ता ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्रामीण एक दूसरे को पहचानते हैं और किसी भी परेशानी पैदा करने वाले को तुरंत पहचान सकते हैं।

'सेल्फ आइसोलेशन' अभ्यास लॉकडाउन के शुरुआती चरण में शुरू हुआ जब कर्फ्यू प्रतिबंधों को लागू करने के लिए पुलिस अधिकारियों द्वारा ग्राम पंचायतों को प्रेरित किया गया था।

उन्हें कोरोनोवायरस के प्रसार को नियंत्रित करने में स्वैच्छिक ग्राम सीलिंग के लाभ के बारे में अवगत कराया गया।

सोशल मीडिया अभियानों ने 'सेल्फ आइसोलेशन' को प्रेरित करने में मदद की।

डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इन गांवों के 'सेल्फ आइसोलेशन' को सुनिश्चित करने में वीपीओ द्वारा निभाई गई भूमिका के लिए उनकी सराहना की है, जिन्होंने 'सेल्फ आइसोलेशन' को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए समितियों का गठन किया है।

समितियों में गांव के सरपंच, प्रधान और वार्ड पंच शामिल हैं, वीपीओ एक व्हाट्सएप समूह के माध्यम से घरों के साथ नियमित संपर्क में रहते हैं जिसमें गांव और वार्ड समिति सदस्य शामिल हैं।

इन समितियों को स्थानीय पुलिस द्वारा दवाइयों और भोजन की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ गांवों में चारे और पशु आहार की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।

पशु चिकित्सकों को इन 'सेल्फ आइसोलेटेड' गांवों में जाने की अनुमति है। गांवों से दूध उठाने की सुविधा भी दी जा रही है।

अमृतसर शहर में सभी 25 गांवों ने स्वेच्छा से लॉकडाउन किया है, जबकि अमृतसर (ग्रामीण) में 840 गांवों में से 158 'सेल्फ आइसोलेशन' में हैं।

--आईएएनएस

Leave a comment

Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

Don't Miss