बचपन में तय हो जाता है जीवनसाथी
Thursday, 25 April 2013 16:49

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रामदयाल दांगी अभी नौवीं कक्षा में पढ़ता है, लेकिन उसकी शादी पांच साल पहले ही चुकी है। शिव सिंह 12वीं का छात्र है और वह भी सात साल पहले ही विवाह बंधन में बंध चुका है। ऐसे और भी कई बच्चे हैं, जो कम उम्र में शादी जैसे ताउम्र के बंधन में बंध चुके हैं।

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर विकासखंड में कई ऐसे गांव हैं, जहां अधिकतर शादियां बचपन में ही हो जाती हैं। इस इलाके में लड़के-लड़कियों पर खेलने व पढ़ने की उम्र में ही शादी का बोझ साफ नजर आता है।

गांव बडबेली में नौवीं का छात्र रामदयाल दांगी परिणय सूत्र में बंध चुका है, हालांकि इस उम्र में उसे विवाह का अर्थ भी नहीं मालूम। इसी गांव के शिव सिंह की भी शादी सात साल पहले हो चुकी है। इस समय वह 12वीं कक्षा में पढ़ता है। उसकी पत्नी अब तक एक बार उसके गांव आई है। शादी का फैसला परिवार का था, जिसे उसने सिर झुकाकर मान लिया। अब वह पढ़कर नौकरी करना चाहता है।

इस इलाके के गांवों में लड़कियों की पढ़ाई को महत्व नहीं दिया जाता। लड़की अगर पढ़ना भी चाहे तो परिवार व समाज के लिए उसकी यह इच्छा नहीं, बल्कि उसका जल्दी शादी कर देना अधिक महत्वपूर्ण होता है। सोंधिया परिवार की शीला की कहानी भी कुछ इसी तरह की है। उसकी उम्र केवल 16 साल है और उसकी एक साल पहले ही शादी हो चुकी है। उसने स्कूल नहीं देखा है। वह पढ़ना चाहती थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। शादी के बाद से वह मायके में ही है। पति भी पढ़ा-लिखा नहीं है और आमदनी का भी कोई खास जरिया नहीं है।

राज्य के महिला बाल विकास विभाग ने बाल विवाह रोकने के लिए एक कार्य योजना बनाई है। लेकिन यह सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गई है। राजगढ़ के सोनकच्छ में मंगलवार को सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इसमें कई ऐसे जोड़े मिले, जो अभी 10वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं या जिन्होंने एक-दो साल पहले पढ़ाई छोड़ी है।

महिला बाल विकास की सहायक संचालक नीति पांडे ने आईएएनएस को बताया कि उनके विभाग ने बाल विवाह रोकने तथा इसके लिए लोगों को जागरूक करने की योजना बनाई है। इसके लिए कदम भी उठाए जा रहे हैं।

विभाग की इस कार्ययोजना का शोर हालांकि सिर्फ राजधानी व बड़े शहरों तक ही सीमित है। सरपंचों तक को इसकी खबर नहीं है। पीपलबे गांव के सरपंच तेज सिंह ने बताया कि उन्हें बाल विवाह को रोकने जैसा कोई निर्देश नहीं मिला, पिछले साल जरूर इस संबंध में निर्देश दिए गए थे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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