मप्र में चुनाव हारे मंत्रियों और असंतुष्ट नेताओं के पुनर्वास की तैयारी
Wednesday, 18 November 2020 18:16

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भोपाल: मध्यप्रदेश में उप चुनाव जीतने के बाद भाजपा संगठन और प्रदेश सरकार चुनाव हारने वाले मंत्रियों और असंतुष्ट नेताओं के पुनर्वास की योजना पर काम कर रहे हैं।

राज्य में 28 विधानसभा क्षेत्रों में उप-चुनाव हुआ है। भाजपा ने दल बदल करने वाले 25 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, इसके चलते पार्टी के कई नेताओं में असंतोष पनपा था और नेता बगावत करने के मूड में थे। बहुसंख्यक नेताओं को मना लिया गया, यही कारण रहा कि गिनती के ही बागियों ने चुनाव लड़ा। भाजपा ने 28 में से 19 स्थानों पर जीत दर्ज की है और अब राज्य सरकार को किसी तरह का खतरा नहीं है।

भाजपा ने असंतुष्ट नेताओं के पुनर्वास की मुहिम शुरू कर दी है और ग्वालियर के प्रमुख नेता तथा पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को पार्टी ने महाराष्ट्र का सह प्रभारी बनाया है। पवैया की गिनती ज्योतिरादित्य सिंधिया के बड़े विरोधियों में होती रही है। इसी तरह पार्टी अन्य क्षेत्रों के असंतुष्टों को संतुष्ट करने की योजना बना रही है। पूर्व सांसद प्रभात झा, दीपक जोशी, अजय विश्नोई ,भंवर सिंह शेखावत की गिनती असंतुष्टों में रही और पार्टी को इनको समायोजित करना है। वहीं तीन मंत्री इमरती देवी, एदल सिंह कंसाना और गिर्राज दंडोतिया चुनाव हार गए हैं। इनका भी पार्टी को पुनर्वास करना है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि जो तीन मंत्री उप चुनाव हारे हैं, उनमें इमरती देवी, गिर्राज दंडोतिया की गिनती ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबियों में होती है। वहीं कंसाना भाजपा के वरिष्ठ नेता के माध्यम से पार्टी में शामिल हुए थे। लिहाजा इन तीनों मंत्रियों को क्या और किस तरह की जिम्मेदारी दी जाए, इस पर पार्टी में मंथन चल रहा है।

भाजपा के मीडिया विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक विजयवर्गीय पार्टी में संतुष्ट और असंतुष्ट जैसी बात मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है और कार्यकर्ता पार्टी के निर्देशों का पालन करते हैं। पार्टी में संतुष्ट और असंतुष्ट जैसी कोई परंपरा नहीं है। जो मंत्री चुनाव हारे हैं, उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है तो भी कोई वैधानिक समस्या नहीं है। उनके संदर्भ में पार्टी और संगठन फैसला लेगा।

राज्य में भाजपा की सरकार पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के तत्कालीन 22 विधायकों के कांग्रेस का साथ छोड़ने के कारण बनी थी। उसके बाद तीन और विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। वहीं तीन विधायकों के निधन से स्थान रिक्त थे। कुल मिलाकर के 28 विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव हुए, जिनमें से 19 पर भाजपा जीती और नौ पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की।

--आईएएनएस

एसएनपी/एएनएम

 

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