मप्र : शिवराज की छवि और पार्टी से समन्वय ने रखी भाजपा की जीत की आधारशिला
Wednesday, 11 November 2020 14:59

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भोपाल: मध्यप्रदेश में एक बड़े दल-बदल के बाद हुए उप-चुनाव में भाजपा को बड़ी जीत मिली है और इस जीत के पीछे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि के साथ बेहतर समन्वय को माना जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री चौहान की छवि मिस्टर रिलायवल (भरोसेमंद) की बन गई है।

राज्य में 28 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव में जीत भाजपा के लिए आसान नहीं थी क्योंकि 27 उन स्थानों पर उपचुनाव होना थे, जहां लगभग डेढ़ साल पहले कांग्रेस के उम्मीदवार जीते थे। यही कारण था कि भाजपा ने समन्वय पर जोर दिया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चेहरे को आगे रखा।

भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के हमले दल बदल करने वालों को 'गददार' का जवाब देने की थी और भाजपा ने उसका अपने ही तरह से जवाब दिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा लगातार यही कहते रहे की गद्दारी तो वाकई में पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने की थी, क्योंकि उन्होंने जो वादे किए थे वह पूरे नहीं किए। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ जिन विधायकों ने अपनी सदस्यता छोड़ी है, उन्होंने तो प्रदेश के भविष्य के लिए बड़ा त्याग किया क्योंकि वर्तमान दौर में तो कोई सरपंच जैसा पद नहीं छोड़ता, इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान की योजनाओं को लगातार गिनाते रहे।

एक तरफ जहां भाजपा शिवराज सिंह चौहान को महिला-बालिका, किसान, गरीब का हितैषी बताती रही तो वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में लगे रहे। बीते लगभग सात माह के कार्यकाल में शिवराज ने सबसे बड़ा फैसला जो लिया वह था किसानों को चार हजार रुपये की वार्षिक सम्मान निधि देने का। यह फैसला ही नहीं था बल्कि किसानों के खाते में राशि भेजी गई। केंद्र सरकार जहां छह रुपये वार्षिक किसानों को सम्मान निधि देती है वहीं राज्य में चार हजार रुपये अतिरिक्त दिए गए। इस तरह राज्य के किसानों को सम्मान निधि में कुल 10 हजार रुपये सालाना मिलेंगे।

चौहान ने मुख्यमंत्री बनने के बाद गरीबों की योजना संबल को शुरु किया, मेधावी छात्रों के खातों में लेपटॉप की रकम डाली। किसानों को मुआवजा की रािश का भुगतान किया गया। इसके साथ कन्यादान योजना की लंबित राशि का भुगतान किया गया। सरकार ने चुनाव के दौरान लगभग हर दिन एक योजना को आगे बढ़ाने का काम जारी रखा।

वहीं दूसरी ओर भाजपा ने मालवा निमाड़ अंचल में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को जिम्मेदारी सौंपी। यहां कई हिस्से ऐसे थे जहां असंतोष भी था और इस असंतोष को दबाना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शर्मा, मुख्यमंत्री चौहान जहां लगातार इन असंतुष्टों के संपर्क में थे और उन्हें मनाने में लगे थे तो दूसरी ओर कैलाश विजयवर्गीय जमीनी स्तर पर रूठे को मनाने में लगे रहे। एक तरफ जहां शिवराज सिंह चौहान की छवि को लेकर पार्टी चल रही थी तो वहीं दूसरी ओर संगठन में बेहतर समन्वय था। यही कारण रहा कि मालवा निमाड़ अंचल में सिर्फ एक स्थान आगर मालवा में ही हारी।

राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटेरिया का कहना है कि राज्य में मुख्यमंत्री चौहान की छवि विश्वसनीय राजनेता की बन गई है, उन पर एक बड़ा वर्ग भरोसा करता है। इसके साथ ही पार्टी के भीतर किसी तरह की खींचतान नहीं थी, सभी ने चौहान के नेतृत्व को स्वीकार करके चुनाव लड़ा और उसका भाजपा को लाभ मिला।

--आईएएनएस

एसएनपी-एसकेपी

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