मप्र के ट्रक ऑपरेटर आश्वासन से संतुष्ट नहीं, बेमियादी हड़ताल करेंगे
Friday, 14 August 2020 08:19

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सागर: मध्यप्रदेश के ट्रक ऑपरेटर और परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के बीच हुई बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई। मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन से ट्रक-बस ऑपरेटर संतुष्ट नहीं हैं। वे अब अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की बात कह रहे हैं। राज्य के ट्रक ऑपरेटर बीते दिनों तीन दिन हड़ताल पर रहे, जिसके बाद परिवहन मंत्री राजपूत ने ट्रक ऑपरेटरों को बातचीत के लिए सागर बुलाया। अधिकारियों की मौजूदगी में गुरुवार को ट्रक ऑपरेटर और मंत्री के बीच बातचीत हुई। ट्रक ऑपरेटर ने डीजल पर लगने वाले वैट को कम करने, परिवहन चौकी पर वसूली बंद कराने और वाहन कर किस्तों में चुकाने की सहूलियत देने की मांग उठाई। इस पर राजपूत ने उन्हें आश्वासन दिया कि इस मसले पर वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व वाणिज्यकर मंत्री जगदीश देवड़ा से चर्चा करेंगे।

परिवहन मंत्री ने संवाददाताओं को बताया कि बसों और ट्रकों के संचालन और समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों से चर्चा करके सभी के हित में निर्णय लिया जाएगा। तीन-चार दिन में भोपाल जाकर मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे और जो उचित मांगे होंगी, उन पर निर्णय लेंगे। सरकार कर को आजीवन किस्तों में भरने की सुविधा देने का वादा पहले ही कर चुकी है।

परिवहन मंत्री ने कहा कि बस और ट्रक ऑपरेटरों ने अपनी मांगें रखी हैं। ट्रक मालिकों ने डीजल पर वैट कम करने और लॉकडाउन अवधि का कर माफ करने की मांग रखी। वैट वाणिज्यकर मंत्री तय करेंगे।

उन्होंने कहा कि नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के समय लिए जाने वाले कर को किस्तों में लेने की बात सामने आई है। चूंकि लॉकडाउन में बसें नहीं चली हैं, इसलिए बस मालिकों ने इस अवधि के कर की माफी की बात कही है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री से चर्चा कर तय किया जाएगा। साथ ही परिवहन चेक पोस्ट पर बस-ट्रक वालों को परेशान किए जाने की शिकायत की जांच होगी।

उधर, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के उपाध्यक्ष विजय कालरा ने कहा, "बैठक में हमें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। मंत्री ने डीजल पर वैट कम करने और कर माफी पर मुख्यमंत्री से चर्चा करके समस्या हल करने की बात कही। कोई ठोस नतीजा नही निकला है। यदि जल्द ही मांगें हल नहीं हुईं तो हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने पर विचार करेंगे।"

बस मालिक ऑपरेटर संघ के जयकुमार जैन का कहना है कि लॉकडाउन में सरकार के आदेश पर ही बसें नहीं चलीं। लंबा समय खिंच गया। इसलिए इस अवधि के कर को माफ किया जाए।

--आईएएनएस

एसएनपी/एसजीके

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