ब्रिटिश चिकित्सकों ने महाराष्ट्र में बिखेरी नई मुस्कान
Sunday, 06 October 2013 19:47

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औरंगाबाद (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के दौरे पर आए ब्रिटिश चिकित्सकों के कारण 65 साल की दौलतबी चंद पठान के चेहरे पर एक नई मुस्कान लौट आई है। इसी महीने के प्रारंभ में उनके विकृत होंठ का सर्जिकल उपचार किया गया है। अब दौलतबी को घर से बाहर जाने और अजनबियों को अपना चेहरा दिखाने में शर्मिदा नहीं होना पड़ेगा।

खेतों में काम करने वाली गरीब श्रमिक दौलतबी ने आईएएनएस को बताया, "ऑपरेशन से पहले मुझे बोलने में दिक्कत होती थी। खाना मुश्किल था और मैं लोगों में अपना चेहरा नहीं दिखा सकती थी। मैंने घृणा भरी प्रतिकूल नजरों का सामना किया है।"

दौरे पर आए ब्रिटिश चिकित्सकों के एक दल ने उनके कटे होंठ को ठीक करने के लिए ऑपरेशन और प्लास्टिक सर्जरी की है।

औरंगाबाद के हेडगेवार अस्पताल में गरीब लोगों का इलाज करने आए ब्रिटिश चिकित्सकों के दल ने दौलतबी के साथ-साथ 86 लोगों के विकृत होंठों और विकृत तालू का मुफ्त ऑपरेशन किया। दौलतबी के दो साल के पोते का भी ऑपरेशन हुआ है।

हेडगेवार अस्पताल के ईएनटी प्रमुख भारत देशमुख के मुताबिक, शनिवार को खत्म हुए विशेष शिविर का आयोजन ब्रिटेन के नॉदर्न क्लेफ्ट फाउंडेशन और भारत के सेवा इंटरनेशनल के सहयोग से किया गया।

देशमुख ने आईएएनएस को बताया, "यह धर्मार्थ संगठन भारत में 11 साल से मुफ्त शिविर लगा रहा है और 750 गरीब मरीजों का ऑपरेशन कर चुका है। इस साल विकृत होंठ और तालु वाले मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा थी।"

मूल रूप से पुडुचेरी निवासी जॉर्ज तुत्तुरस्वामी जो अब ब्रिटेन में रहते हैं के नेतृत्व वाले दल में सर्जन और अन्य विशेष सहयोगी कर्मचारी हैं। चिकित्सक और दल के अन्य सदस्यों ने अपनी यात्रा का खर्च स्वयं वहन किया।

गरीब रोगियों और उनके परिवारों और राज्य के अन्य दूर दराज के गांवों के गरीब रोगियों को अस्पताल लाने का खर्च हेडगेवार अस्पताल ने वहन किया।

देशमुख ने बताया, "जन्म से यह विकृति होना आम है। हर 1,500 बच्चों के जन्म में एक बच्चे को यह विकृति होती है। हालांकि इसके ऑपरेशन और अन्य चीजों में लगभग 50,000 रुपयों का ही खर्चा है फिर भी यह गरीब लोगों की पहुंच से बाहर है।"

लाभार्थियों और उनके परिवारों के चेहरों पर मुस्कान देकर नॉदर्न क्लेफ्ट फाउंडेशन दल सोमवार को भारत से रवाना हो रहा है। अगले साल यह दल फिर से औरंगाबाद, नासिक और नागपुर में शिविर लगाने के लिए लौटेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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