सरसों का तेल लगाने या खाने से ही नहीं, सूघंने से भी होते हैं ढेरों फायदे

सरसों के तेल को बहुत पौष्टिक माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग खाना बनाने के लिए भी किया जाता है। इसकी तासीर गर्म होने से सर्दियों में यह अत्यंत लाभकारी माना जाता है। सरसों के तेल की मालिश करने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है। यह शरीर में गर्माहट पैदा करने में भी मददगार होता है। हाल ही में हुए एक शोध में भारतीयों डाइट और हृदय रोग से उसके संबंध की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि भोजन पकाने में मुख्य रूप से सरसों का उपयोग करने से कोरोनरी हृदय रोग (सीएचडी) के खतरों में 71 फीसदी की कमी आई है। इसके अलावा स्किन के लिए भी सरसों का तेल काफी फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन ई भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो त्वचा को अल्‍ट्रावाइलेट किरणों और पल्‍यूशन से बचाता है। साथ ही यह झाइयों और झुर्रियों से भी काफी हद तक राहत दिलाने में मदद करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं सरसों के तेल को सूघंने से भी कई तरह के फायदे होते हैं, आइए जानते हैं।

सरसों का तेल सूंघने से होने वाले फायदे इस प्रकार हैं-

1. सरसों तेल की झांस से सांस नली की बाधा दूर करने में लाभ मिलता है।

2. सरसों तेल का कश खींचने और छाती पर इससे मालिश करने से खांसी और जुकाम से भी निजात मिलती है।

3. इसे सूंघने से दमा रोग के मरीजों को फायदा हो सकता है।

4. एक दो बार सरसों का तेल एक नासिका से सूंघने पर दांत का दर्द कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है।

5. इसे सूंघने से नाक, कान, नेत्र और सिर को शक्ति मिलती है।

ऐसे करें सरसों तेल की गुणवत्ता की पहचान: सरसों के तेल की गुणवत्ता पहचानने का सबसे अच्छा तरीक तेल को सूंघने से पता चलती है। सरसों के तेल की झांस व खुशबू कुछ अलग ही होती है, जो गले को झनझना देती है और नाक से पानी निकलने लगता है। बस सूंघने से ही आपको पता चल जाएगा कि तेल उच्च गुणवत्ता से युक्त है। जब सरसों की पेराई की जाती है तो उससे माइरोंसिनेस नामक एन्जाइम (पाचक रस) निकलता है। माइरोंसिनेस और सिनिग्रीन के मिलने से एआईटीसी पैदा होता है, जिसके कारण सरसों तेल में झांस आती है।

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