पटना: अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले बिहार के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडय ऐसे तो सोशल मीडिया पर पहले से ही सक्रिय हैं, लेकिन अब उन्होंने अपने नाम से वेबसाइट भी बनवा ली है। इस वेबसाइट के जरिए वे अधिक से अधिक युवाओं से जुड़ने की कोशिश में हैं।

आईपीएस गुप्तेश्वर पांडेय डॉट कॉम के नाम से बने इस वेबसाइट में उनके बारे में पूरी जानकारी दी गई है तथा उनके कई कार्यक्रमों में भाग लेते हुए तस्वीर को सामने रखा गया है। इस वेबसाइट में 'ज्वाइन यूथ बिग्रेड' एक भाग बना हुआ है, जिसमें नाम पता, मोबाइल नंबर भर कर युवा उनके साथ जुड़ सकते हैं।

इसके अलावे इस वेबसाइट में 'अल्कोहल फ्री सोसाइटी' का भी एक भाग बना हुआ है।

वेबसाइट बनाने के उद्देश्य के संबंध में जब आईएएनएस ने डीजीपी से बात की, तब उन्होंने कहा कि बिहार को नशामुक्त बनाने के लिए युवाओं को इससे जोड़ना है। उन्होंने कहा कि वे प्रारंभ से ही युवाओं को जोड़कर बिहार को नशामुक्त बनाने में जुटे हैं।

डीजीपी ने अपने फेसबुक पेज पर भी शुक्रवार को लिखा है, "बिहार को नशामुक्त बनाने के लिए अब आप हमारे वेबसाइट के माध्यम से जुड़ सकते हैं।"

वेबसासइट में इसके अलावे उनके पीसी का लिंक, खबरों का लिंक दिया गया है। कई कार्यक्रम का फोटो भी अपलोड है। वेबसाइट से पहले भी पांडेय अपने नाम यूट्यूब चैनल भी चला रहे हैं, जिसमें प्रेस कन्फ्रेंस और इंटरव्यू का वीडियो अपलोड किए गए हैं। इस यूट्यूब चैनल को कई लोग सब्सक्राइबर भी है।

पांडेय फेसबुक पर भी काफी सक्रिय रहते हैं। इनके निजी फेसबुक को 5़ 40 लाख से ज्यादा लोग पसंद करते हैं। कई मौकों पर पेज पर लाइव आते हैं। इसके अलावे पांडेय ट्विटर पर भी हैं, जहां इनके चाहने वालों की संख्या 20 हजार से अधिक है।

उल्लेखनीय है कि बिहार में पुलिस महानिदेशक बनने से पहले भी ये नशामुक्ति का अभियान चलाते रहे हैं। कहा भी जाता है कि बिहार में शराब बंदी कानून को सफल बनाने में पांडेय अहम भूमिका निभा रहे हैं।

गौरतलब है कि पुलिस विभाग में पांडेय की पहचान एक अधिकारी से ज्यादा अभिभावक के रूप में की जाती है। पुलिस अधिकारी से ये फोन कर उनकी समस्याओं की जानकारी पाते हैं और उनके समाधान में भी जुटे होते हैं।

पांडेय खुद कहते हैं कि वे प्रतिदिन किसी ना किसी पुलिसकर्मी को फोनकर उससे बात करते हैं और सामान्य तौर पर उनका हालचाल जानते हैें।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को गन्ना किसान की खुदकुशी का मामला सामने आने पर उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। प्रियंका ने ट्वीट कर कहा, "अपनी गन्ने की फसल को खेत में सूखता देख और पर्ची न मिलने के चलते मुजफ्फरनगर के एक गन्ना किसान ने आत्महत्या कर ली। भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) का दावा था कि 14 दिनों में पूरा भुगतान किया जाएगा, लेकिन हजारों करोड़ रुपया दबाकर चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "मैंने दो दिन पहले ही सरकार को इसके प्रति आगाह किया था। सोचिए, इस आर्थिक तंगी के दौर में भुगतान न पाने वाले किसान परिवारों पर क्या बीत रही होगी। लेकिन भाजपा सरकार अब 14 दिन में गन्ना भुगतान का नाम तक नहीं लेती।"

उन्होंने अपने ट्वीट के साथ मुजफ्फरनगर के गन्ना किसान द्वारा आत्महत्या की खबर को भी संलग्न किया है।

--आईएएनएस

लखनऊ: कोरोना संकट के कारण दूसरे प्रदेशों में रह रहे श्रमिकों और कामगारों की वापसी उप्र सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अब तक करीब 32 लाख श्रमिकों की सुरक्षित और ससम्मान वापसी हो चुकी है। अब यह सिलसिला थमता सा नजर आ रहा है। अब सरकार के सामने दूसरी सबसे बड़ी चुनौती वापस आने वाले श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है। सरकार ने इस समस्या के हल की भी मुकम्मल कार्ययोजना तैयार कर ली है। जो हुनरमंद हैं उनको सरकार रोजगार देगी और जो अकुशल या अद्र्घकुशल हैं, प्रशिक्षण के जरिए उनका हुनर निखारेगी। इसका इन श्रमिकों को दीर्घकालिक लाभ होगा।

ऐसे श्रमिक जिनको किसी खास प्रशिक्षण की जरूरत होगी, उनको कौशल विकास मिशन के जरिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। यदि मिशन में इसकी व्यवस्था नहीं है तो सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग(एमएसएमई) विभाग द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों (एक जिला एक उत्पाद, विश्वकर्मा श्रम सम्मान और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों) के तहत उनको प्रशिक्षण दिया जाएगा। यदि सरकार द्वारा संचालित किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम में संबंधित के हुनर के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है तो उपायुक्त उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन ब्यूरो कौशल मिशन की ओर से जारी अप्रेंटिस कार्यक्रमों के तहत उसी उद्योग में उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था करेगा।

यदि किसी भी योजना में प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं है तो इसकी व्यवस्था सरकार करेगी। ऐसे प्रशिक्षण के लिए एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजना होगा। हर श्रमिक को बीमा की सुरक्षा भी देने की योजना है। अगर श्रमिक किसी और जिले में काम पर जाता है तो उसकी आवसीय व्यवस्था भी सरकार करेगी।

मालूम हो कि दूसरे प्रदेशों से अब तक करीब 30 लाख से अधिक कामगार एवं श्रमिक अब तक वापस आ चुके हैं। इनमें से करीब 24 लाख के स्किल की मैपिंग हो चुकी है। इसमें अकेले 22 लाख से अधिक संख्या निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों की है। बाकी लौटने वाले श्रमिक दूसरे प्रदेशों में रंग-रोगन, बढ़ई, ड्राइवर, दर्जी, कुक, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, नाई, ब्यूटी पार्लर, धोबी, माली हाउस कीपिंग, आटो रिपेयरिंग और सेल्स एंड मार्केटिर्ंग आदि का काम करते रहे हैं। इनमें से करीब 17 लाख संख्या अकुशल श्रमिकों की है। मुख्यमंत्री बार-बार दूसरे प्रदेशों से आने वाले हर श्रमिक को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने और जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण के जरिए उनका हुनर निखारने के प्रति प्रतिबद्घता जता चुके हैं।

इस पर काम भी शुरू हो चुका है। 29 मई को मुख्यमंत्री की पहल पर उनके आवास पर आयोजित कार्यक्रम में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, लघु भारती, नारडेको (नेशनल रीयल इस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल) और फिक्की (फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री) से 11 लाख श्रमिकों को रोजगार देने का समझौता हुआ था। आगे भी इस तरह के और एमओयू होंगे।

प्रमुख सचिव एमएसएमई नवनीत सहगल ने बताया, "सभी कामगारों-श्रमिकों को प्रदेश में ही रोजगार के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देने की योगी सरकार की तैयारी है। इन सबको कामगार-श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) कल्याण आयोग के जरिए उनकी दक्षता के अनुसार स्थानीय स्तर पर काम दिया जाएगा।"

--आईएएनएस

भोपाल: कोरोना महामारी के संकट के दौर में सुखद तस्वीरें भी नजर आ रही है। भोपाल से गुजरती एक गाड़ी में सवार तीन माह की बच्ची की भूख को मिटाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल के जवान ने दूध का पैकेट बच्चे की मां तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस घटनाक्रम के वीडियों को रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अपने ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा है कि 'एक हाथ में राइफल और एक हाथ में दूध। किस तरह भारतीय रेलवे ने उसैन बोल्ट को पछाड़ा।'

वाक्या भोपाल के रेलवे स्टेशन का है, कर्नाटक के बेलगांव से गोरखपुर श्रमिक ट्रेन जा रही थी। इसमें साफिया अपनी तीन माह की बच्ची के साथ सफर कर रही थी। वे जब गाड़ी में सवार हुई तो बच्ची क लिए दूध रखना भूल गई। बच्ची दो दिन से भूखी थी। भोपाल रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ जवान इंदर सिंह यादव को साफिया ने बच्ची के लिए दूध लाने की बात कही।

आरपीएफ जवान इंदर यादव से साफिया ने बच्ची के लिए दूध लाने का आग्रह किया। इंदर स्टेशन के बाहर दूध लेने गया, जब लौटा तो गाड़ी चल दी थी। इंदर उस कोच की तरफ दौड़ा जिसमें साफिया सवार थी। वह अपनी कोशिश में कामयाब रहा। एक हाथ में रायफल और दूसरे में दूध लिए इंदर की भागते हुए तस्वीर प्लेटफार्म पर लगे सीसीटीवी में कैद हो गई। इंदर की यह कोशिश जरुरतमंद की मदद का संदेश देने वाली है।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस घटनाक्रम के वीडियो को अपने ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा है। 'एक हाथ में राइफल और एक हाथ में दूध : देखिये किस तरह भारतीय रेलवे ने उसैन बोल्ट को पछाड़ा।'

--आईएएनएस

इस्लामाबाद: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान से सरकारी कर्मचारियों के वेतन को फ्रीज करने और नए बजट में मामूली प्राथमिक घाटा दिखाते हुए राजकोषीय समेकन मार्ग का अनुसरण करने का आग्रह किया है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, आईएमएफ ने जोर दिया कि पाकिस्तान को राजकोषीय समेकन मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, क्योंकि उच्च और अस्थिर सार्वजनिक ऋण के कारण राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के कुल मूल्य का 90 प्रतिशत को प्रभावित किया जाना निर्धारित है।

कोरोनोवायरस के प्रकोप ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करके रख दिया।

सूत्रों ने कहा कि मौजूदा तंग राजकोषीय स्थिति के कारण और जी 20 देशों से कर्ज से राहत पाने के पाकिस्तान के फैसले से सार्वजनिक कर्ज बढ़ता जा रहा है। आईएमएफ इस्लामाबाद को सरकारी कर्मचारियों का वेतन फ्रीज करने के लिए कह रहा है।

हालांकि, सरकार उच्च मुद्रास्फीति के कारण मांग का विरोध कर रही है जिसने लोगों की वास्तविक आय को खत्म कर दिया है।

बहरहाल, यह 67,000 से अधिक पदों को समाप्त करने के लिए इच्छुक है जो एक वर्ष से अधिक समय से खाली हैं और वाहनों की खरीद पर प्रतिबंध सहित वर्तमान खर्च को और अधिक कम के लिए तैयार हैं।

पाकिस्तान सरकार 12 जून को बजट का पेश करने के लिए तैयार है।

--आईएएनएस

 

 

 

नई दिल्ली: दिल्ली में पीतमपुरा इलाके के तरुण एनक्लेव में 20 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, जिसे अब कन्टेंमनेट जोन घोषित कर दिया गया है। डीएम के मुताबिक, 24 मई को कोरोना पॉजिटिव का पहला केस आया था। लेकिन उसके बाद यहां 20 और मामले सामने आए। कोरोना मरीजों का मामला सामने आने के बाद ही 24 मई को ही इस एरिया को सील कर दिया गया था और डीसी,नॉर्थ एमसीडी को इस बाबत सैनिटाइजेशन कराने को कहा गया था।

फिलहाल कोरोना के मामले को बढ़ता देख 3 जून को इस पूरे एरिया को कन्टेंमनेट जोन घोषित कर दिया गया है। साथ ही तरुण एनक्लेव में मकान नम्बर 130 से लेकर 340 तक के 750 से ज्यादा लोगो को सेल्फ क्वारेंटीन में रहने को कहा गय है।

बताया गया है कि इस इलाके में कोरोना का संक्रमण एक घर से हुआ है, जहां नियमित रूप से एक काम करने वाली महिला आया करती थी। इस महिला से पहले बच्चों को संक्रमण हुआ और फिर घर के सभी लोगो को। बच्चों से यह संक्रमण कॉलोनी में खेलने वाले अन्य बच्चों को हुआ और फिर उन बच्चों से परिवार वालों में। घर के बड़े लोग रोज शाम पार्क भी जाया करते थे, जहां से संक्रमण अन्य लोगों में हुआ और फिर अन्य घरों तक फैल गया। ये सिलसिला तब तक जारी रहा, जब एक व्यक्ति ने बुखार और कोरोना जैसे लक्षण होने पर जांच करवाया।

--आईएएनएस

 

 

 

मेरठ: आईएमईआई (इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी) डिवाइस को पहचानने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नंबर है।

मामला तब सामने आया जब एक पुलिसकर्मी ने ही अपना मोबाइल फोन साइबर क्राइम सेल में कर्मचारियों को जांच के लिए दिया, क्योंकि मरम्मत के बाद भी उसका फोन ठीक से काम नहीं कर रहा था।

मेरठ के एसपी (शहर) अखिलेश एन. सिंह ने कहा कि साइबर सेल ने पाया कि लगभग 13,500 अन्य मोबाइल भी उसी आईएमईआई पर चल रहे थे।

उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे का केस था।

सिंह ने कहा, "शुरूआती तौर पर यह मोबाइल फोन कंपनी की ओर से हुई लापरवाही लगती है और अपराधी इसका फायदा उठा सकते हैं।"

उन्होंने कहा कि कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और इस मामले को देखने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम को बुलाया गया है।

--आईएएनएस

तिरुवनंतपुरम: केरल वन विभाग ने शुक्रवार को पलक्कड़ में एक गर्भवती हथिनी की हत्या के मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। इस घटना से देश भर के लाखों लोग व्यथित हो उठे थे और सभी जानवर को इंसाफ दिलाने की बात कह रहे थे। जांच टीम इस बात का भी पता लगा रही है कि हत्या का यह कृत्य अवैध शराब बनाने वालों का काम तो नहीं था, जो जंगलों में अपना काम करते हैं।

विभाग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा, "केएफडी (केरल वन विभाग) ने दोषियों की धर पकड़ शुरू कर दी है और जंगली हाथी की मौत के मामले में पहली गिरफ्तारी हुई है।"

केरल पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जांच कर रहे हैं।

गर्भवती हथिनी के मूल निवास स्थान साइलेंट वैली नेशनल पार्क के वन्यजीव वार्डन सैमुअल पचुआऊ ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मामले में गिरफ्तारी की गई है।"

उन्होंने आगे कहा, "संयुक्त जांच बहुत अच्छे से आगे बढ़ रही है। उम्मीद है मामले में और अधिक गिरफ्तारियां होंगी। अभी कुछ तय नहीं है और हम सिर्फ अनानास (जिसमें पटाखा रख के हथिनी को दिया गया) वाली थ्योरी को ही नहीं देख रहे हैं। हम उचित समय पर जवाब देंगे"

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के अनुसार, तीन लोगों को गुरुवार तक हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि, जंगलों में अवैध शराब बनाने वाले लोगों की भागीदारी जैसे अन्य पहलुओं पर भी जांच दल विचार कर रहा है।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय 200 से ज्यादा शहरों में वन क्षेत्र को बढ़ाएगी। इस के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिये शहरो में वन क्षेत्र बनाये जाएंगे। इस बात का एलान केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर किया। इस पोजेक्ट का नाम 'नगर वन' रखा गया है।

प्रोजेक्ट की शुरुआत करते हुए केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री ने कहा कि आज देश की आबादी विश्व के 16 फीसदी के बराबर है, जबकि विश्व के 16 फीसदी जानवर भारत में ही पाए जाते हैं। लेकिन भारत मे वन क्षेत्र विश्व का ढाई प्रतिशत है। इसको बढ़ाए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गांवों में वनों की संख्या ठीक-ठाक है,लेकिन शहरों में यह नही के बराबर है। इस मौके पर राजस्थान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां 300 लोगों ने पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अपना बलिदान दिया है। हमें पर्यावरण संरक्षण के लिये आगे आना होगा।

जावड़ेकर ने कहा कि शहरों में उद्यान और पार्क मिलते हैं, लेकिन जंगल नहीं मिलते। लिहाजा 200 शहरों में 'नगर वन' योजना लांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हमें 2.5 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

साथ ही उन्होंने अधिकारियों से अपील की है ऐसे शहरों में ऐसे क्षेत्र को चिन्हित करें जहां वन क्षेत्र बढाया जा सकता है। इसके लिए जन आंदोलन भी शुरू किया जाए। जावड़ेकर का कहना था कि जिन शहरो में अच्छा वन बनेगा,उन शहरों को पुरस्कृत भी किया जाएगा । उन्होंने यह भी कहा प्रकृति के साथ ही जीवन है और यही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में कही थी। हमे प्रकृति की रक्षा करनी होगी,तभी प्रकृति हमारी रक्षा करेगा।

--आईएएनएस

हाजीपुर: लोगों को सुविधा उपलब्ध कराते हुए पर्यावरण संरक्षण का प्रयास रेलवे की दिनचर्या में शामिल है। रेलवे का दावा है कि अपनी सेवा देने के साथ पर्यावरण संरक्षण को लेकर काम करते रहे हैं। ग्लोबल वार्मिग को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी पूर्व-मध्य रेल हरित पहलुओं पर कार्य कर रही है।

रेलवे का मानना है कि रेलवे में गैर परम्परागत ऊर्जा को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन देने से न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि जलवायु की भी रक्षा होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। इसी के तहत पूर्व मध्य रेलवे ने स्टेशनों पर ग्रीन कवर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, ऊर्जा प्रबंधन और आईएसओ और ग्रीन प्रमाणन के दिशा में भी कई कार्य किए गए हैं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेलवे द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में कई कार्य किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि पूर्व मध्य रेल द्वारा अपने क्षेत्राधिकार से खुलने वाली 44 गाड़ियों के 59 रेक में हेड ऑन जनरेशन सिस्टम लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यह सिस्टम पावर कारों में डीजी सेट के उपयोग को समाप्त करता है जो ध्वनि और वायु प्रदूषण पैदा करता है। इससे पूर्व मध्य रेल को डीजल, ईंधन के मद में होने वाले व्यय से प्रतिवर्ष लगभग 104 करोड़ की बचत हो रही है।

कुमार कहते हैं कि रेलवे लोगों को सुविधा देने के साथ-साथ प्र्यावरण संरक्षण को लेकर भी अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है।

उन्होंने कहा कि दानापुर में जल पुनर्चक्रण संयंत्र स्थापित किया गया है। इसके अलावा, पटना जंक्शन, राजेन्द्रनगर, दानापुर, पाटलिपुत्र, धनबाद, बरकाकाना, गोमो, बरवाडीह, चोपन, टोरी सहित 10 स्टेशन भवनों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली स्थापित की गई है।

उन्होंने बताया, "पूर्व मध्य रेल के सभी रेलवे क्वार्टरों और सेवा भवनों को ऊर्जा कुशल फिटिंग और एलईडी बल्ब प्रदान की गई है। यही नहीं पूर्व मध्य रेल क्षेत्राधिकार के खाली पड़े जमीनों पर कुल 1.70 लाख वृक्ष लगाए गए हैं।"

पूर्व मध्य रेलवे के पांचों मंडलों के 52 चिन्हित स्टेशनों का जल और ऊर्जा लेखा परीक्षण किया गया है तथा हरित ऊर्जा उत्पादन की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाते हुए विभिन्न स्टेशनों एवं कार्यालय भवन के छतों पर 5.79 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाया जा रहा है।

उन्होंने दावा करते हुए कहा, "क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित सर्वेक्षण में संपूर्ण भारतीय रेलवे के 16 क्षेत्रीय रेलों में पूर्व मध्य रेल 12 स्थानों के उल्लेखनीय सुधार के साथ तीसरे स्थान पहुंचा। इसके साथ ही संपूर्ण भारतीय रेल के 720 स्टेशनों में ग्रीन स्टेशन रैंकिंग में 95.5 प्रतिशत प्राप्तांक के साथ राजेंद्र नगर टर्मिनल पहले स्थान पर रहा।"

उन्होंने कहा कि राजेंद्र नगर स्टेशन, मुजफ्फरपुर, सोनपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, जयनगर, सहरसा और रक्सौल में जैविक अपशिष्ट खाद संयंत्र स्थापित किया गया है।

--आईएएनएस

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