नई दिल्ली: भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के दो अधिकारियों के बीच में टकराव जारी है और संघ के महासचिव राजीव मेहता ने कहा है कि हाल ही में अध्यक्ष नरेंद्र बत्रा द्वारा गठित की गई समितियों को दोबारा गठित करने को लेकर उन्होंने अपनी मंजूरी नहीं दी थी।

मेहता ने नोटिस में साफ तौर पर कहा है कि 19 मई को बत्रा ने जो आईओए की एथिक्स समिति को भंग किया था वो गैरकानूनी पाया गया है और कमिशन को दोबारा बहाल कर दिया गया है।

मेहता ने कहा, "इस मामले पर आईओए के कानूनी समिति के चेयरमैन ने जांच शुरू कर दी है। समितियों के गठन का मुद्दा आईओए की अगली कार्यकारी परिषद की बैठक में चर्चा में लाया जाएगा।"

मेहता और बत्रा के बीच तनाव की स्थिति तब शुरू हुई थी जब मेहता ने खिलाड़ियों की ट्रेनिंग शुरू करने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी और कहा था कि इस समय कोरोनावायरस के मामले बढ़ रहे हैं इसलिए खिलाड़ियों की ट्रेनिंग शुरू करने को लेकर जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

--आईएएनएस

 

 

 

नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर का मानना है कि अगर वह इस समय खेल रहे होते तो वो और विराट कोहली दोस्त भी होते और दुश्मन भी।

अख्तर ने वेबसाइट ईएसपीएनक्रिकइंफो को दिए इंटरव्यू में कहा, "हम दोनों पंजाबी हैं बड़े दिलवाले..हम मैदान के बाहर अच्छे दोस्त होते और मैदान के अंदर दुश्मन।"

उन्होंने कहा, "विराट के साथ है कि अगर आप उनसे लड़ाई करते हो तो वो और ज्यादा फोकस हो जाते हैं। इसलिए उन्हें आउट करने के लिए मैं उनका फोकस तोड़ता। मैं उनके सिर पर चढ़ता। अपने बेहतरीन तेजी से मैं उन्हें गेंद को कट करने और पुल करने को मजबूर करता क्योंकि उनके पास यह दोनों शॉट्स नहीं हैं।"

उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि उन्हें ड्राइव करना पसंद है। तो मैं अपनी तेज गेंदबाजी से उन्हें ड्राइव करवाता और बीच-बीच में उनसे बात करता रहता। इसी तरह का कुछ जेम्स एंडरसन ने इंग्लैंड में किया था।"

अख्तर से जब पूछा गया कि वो किस बल्लेबाज को आउट नहीं कर पाते तो उन्होंने अपने पूर्व कप्तान इंजमान उल हक का नाम लिया।

अख्तर ने कहा, "ईमानदारी से कहूं तो इंजमाम उल हक। मेरा एक्शन काफी अलग है, लेकिन मैं 10 साल में एक भी बार उन्हें नेट्स में आउट नहीं कर पाया। मुझे लगता है कि वह दूसरों की अपेक्षा एक सेकेंड पहले मेरी गेंद को पढ़ लेते थे।"

--आईएएनएस

लाहौर: पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने एक बार फिर से अपने उस अपमानजनक दावे का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने भारत में लोगों पर अत्याचार होने की बात कही थी। हाल में अफरीदी के इस बयान के लिए हरभजन सिंह, युवराज सिंह और गौतम गंभीर सहित कई पूर्व भारतीय क्रिकेटरों ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी, लेकिन अफरीदी अभी नहीं रुके हैं।

अफरीदी ने पाकिस्तानी चैनल हम न्यूज से कहा, " हरभजन और युवराज ने मेरे फाउंडेशन के लिए जो किया उसके लिए मैं हमेशा उनका आभारी रहूंगा। लेकिन सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि वो लोग एक मजबूर हालात में जी रहे हैं। वो वहां रह रहे हैं ऐसे में उनकी यह मजबूरी है। मुझे पता है कि लोग वहां क्या महसूस कर रहे हैं। इसके आगे मैं कुछ नहीं कह सकता हूं।"

अफरीदी ने हाल में कश्मीर पर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बयान दिया था। हरभजन ने इस पर कहा था अब से उनका पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी के साथ कोई रिश्ता नहीं है।

हरभजन ने स्पोटर्स तक से कहा था , "शाहिद अफरीदी ने हमारे देश और हमारे प्रधानमंत्री के बारे में बात करते हुए बहुत परेशान किया है। ये स्वीकार्य नहीं है।"

स्टार आफ स्पिनर ने कहा था, " ईमानदारी से कहूं तो उन्होंने (अफरीदी) हमें अपनी मदद के लिए कहा। ऐसे में, हमने इसे मानवता के लिए और कोरोनावायरस के कारण पीड़ित लोगों की मदद के लिए किया था। लेकिन अंत में अफरीदी ने हमारे साथ ये किया।"

हरभजन ने आगे कहा, "ये एक बीमार आदमी है जो हमारे देश के बारे में ऐसा सोचता है। मुझे बस इतना कहना है कि शाहिद अफरीदी से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। अफरीदी को अपने देश पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए और अपनी सीमा में रहना चाहिए। मुझे केवल इतना ही कहना है कि हमारे देश के खिलाफ उसने जो भी बोला वो बर्दाश्त के बाहर है और मैं आज से उसके साथ सभी रिश्ते तोड़ता हूं।"

वहीं, युवराज ने ट्वीट करके कहा था, "अफरीदी के हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान से बेहद निराश हूं। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते जो भारत के लिए खेला हो, मैं इस तरह के शब्द स्वीकार नहीं कर सकता। मैंने वो अपील आपके (अफरीदी के) कहने पर इंसानियत के नाते की थी, लेकिन अब दोबारा नहीं।"

- -आईएएनएस

लॉस एंजेलिस: अमेरिकी अभिनेता जॉनी डेप ने आखिरकार अपनी वाइन बोतल वाली पेंटिंग पूरी कर ली है, जिसे पेंट करना उन्होंने 14 साल पहले शुरू किया था।

डेप ने इंस्टाग्राम पर अपनी पेंटिंग की तस्वीर साझा की, जिसे बनाना उन्होंने 2006 में शुरू किया था।

उन्होंने कैप्शन में लिखा, "यह अजीब है, जिस चीज के लिए हमने पूरी तरह से लगातार महीनों फोकस किया, फिर अचानक सबकुछ बदल जाता है और उस पर ध्यान हटाकर हम नई चीजों में लग जाते हैं और लंबे अरसे तक ये जुनून, दिलचस्पी दरकिनार हो जाती है।"

अभिनेता ने बताया कि अचानक से लॉकडाउन के बीच उनकी नजर अधूरी पेंटिंग पर पड़ी और वह इसे पूरा करना चाहते थे।

उन्होंने कहा, "मुझे यह पेंटिंग मिली, जिसे मैंने 2006 में बनाना शुरू किया था और पिछले 14 सालों से मैंने इसे नहीं छुआ था, हालांकि इस अधूरी पेंटिंग का ख्याल हमेशा मेरे मन में आता रहता था।"

--आईएएनएस

केरल: आगामी मलयालम फिल्म 'मिन्नल मुरली' के सेट पर तोड़-फोड़ की गई है। अभिनेता टोविनो थॉमस के अनुसार, हमलावर 'नस्लवादियों का एक समूह' था। अब निर्माताओं ने कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

टोविनो ने ट्विटर पर एक नोट और नष्ट किए गए सेट की तस्वीरें साझा कीं। यहां तक कि उन्होंने फिल्म की शूटिंग के लिए ली गई अनुमति पत्र की एक तस्वीर भी साझा की। इस नोट में टोविनो ने सोमवार को घटी घटना के बारे में लिखा है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, "वायनाड में मिन्नल मुरली का पहला शेड्यूल प्रगति पर था तब दूसरे शेड्यूल के लिए कलाडी में सेट का निर्माण शुरू हुआ। इसे कला निर्देशक मनु जगद और उनकी टीम ने स्टंट कोरियोग्राफर व्लादिमीर विंबर्ग के विशेष निर्देशों के तहत किया था। इसके लिए हमने संबंधित अधिकारियों से सही अनुमति भी ली थी।"

उन्होंने आगे कहा कि एक चर्च का सेट 'काफी लागत' से बनाया गया था। "और जैसा कि इस काफी लागत से बने इस सेट में हम शूटिंग शुरू करने वाले थे, तभी पूरे देश में लॉकडाउन हो गया। इसके बाद हमारी शूटिंग को रोक दिया गया था।"

अभिनेता ने कहा कि समूह द्वारा की गई इस विनाशकारी कार्रवाई का कारण स्पष्ट नहीं।

किसी भी फिल्म या व्यक्ति का नाम लिए बिना, टोविनो ने देश के उत्तरी भाग में हो रहे फिल्म सेट नष्ट किए जाने के उदाहरणों को साझा किया।

उन्होंने कहा, "हमने उन फिल्म के सेटों के बारे में सुना है, जो उत्तरी भारत में धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा नष्ट किए गए। अब, यही हमारे साथ यहां हो रहा है।"

उन्होंने लिखा, "इससे हमें बहुत तकलीफ हुई और चिंता भी हुई। हमने कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाने का फैसला किया है।"

--आईएएनएस

नई दिल्ली: शुभमन गिल बेशक अभी सिर्फ 20 साल के हैं, लेकिन भारत की सीमित ओवरों की टीम के कप्तान रोहित शर्मा उन्हें भविष्य का सितारा मानते हैं। यहां तक कि कप्तान कोहली को भी लगता है कि जब वह गिल की उम्र में थे तो उनका 10 फीसदी भी नहीं थी। कोहली ने यह बात गिल को नेट्स में बल्लेबाजी करते हुए देखने के बाद कही थी।

ये दोनों विश्व क्रिकेट के बड़े नाम हैं और इन लोगों से इस तरह के कमेंट मिलना निश्चित तौर पर हौसला तो बढ़ाता ही है, साथ ही दबाव भी लाता है, लेकिन गिल के लिए नहीं।

गिल ने आईएएनएस से बात करते हुए रोहित, कोहली की सलाह, आईपीएल के 13वें सीजन, कोरोनावायरस के कारण मिले ब्रेक पर बात की।

गिल ने रोहित को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दी थीं, जिस पर रोहित ने गिल के मैसेज का जवाब देते हुए लिखा था, 'थैंक्यू फ्यूचर'। इससे क्या दबाव बढ़ा। इस पर गिल ने कहा कि इस तरह की शाबाशी से सिर्फ अच्छा लगता है।

गिल ने कहा, "रोहित शर्मा जैसा खिलाड़ी जब कुछ कहता है तो अच्छा लगता है। मैं कोई दबाव महसूस नहीं कर रहा क्योंकि मैं इसी तरह हूं। जब कोई मेरी बढ़ाई करता है या मेरी आलोचना करता है तो मैं दबाव नहीं लेता।"

गिल युवा हैं और अपने आप को मैदान पर पूरी तरह से झोंक देते हैं। अच्छी बात यह है कि उनके पास कप्तान भी ऐसा है जो अपने खिलाड़ियों को पूरी छूट देता है। गिल को लगता है कि कोहली जैसा कप्तान होना खिलाड़ियों के लिए काफी फायदेमंद है।

उन्होंने कहा, "हां, अगर आपका कप्तान चाहता है कि आप खुलकर अपना खेल खेलो तो यह निश्चित तौर पर फायदेमंद है और इससे दबाव भी नहीं बढ़ता। आपको नहीं लगता कि जब आप मैदान पर जाओगे तो आप एक फीसदी भी अपना वापस रख पाओगे। इसलिए जब एक कप्तान आपको पूरी तरह सहयोग देता है तो यह युवा खिलाड़ी के लिए हमेशा अच्छी बात है।"

गिल से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने कोहली से अपनी बल्लेबाजी को लेकर बात की? तो उन्होंने कहा, "मैंने उनसे कुछ दफा बात की। उन्होंने मुझसे कहा कि जो तुम कर रहे हो करते रहो, ताकि मैदान पर निरंतरता बनी रहे। निरंतरता काफी अहम है।"

कोविड-19 के कारण पूरा क्रिकेट जगत रुका हुआ है। ऐसे में क्या गिल आईपीएल में मैदान पर वापसी करन के बारे में सोच रहे हैं?

कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलने वाले गिल ने कहा, "हां, यह एक और कारण है(लॉकडाउन) कि मैं आईपीएल में खेलने का इंतजार कर रहा हूं। मुझे लगता है कि इस बार खिलाड़ी पहले से कई ज्यादा प्रेरित होंगे, क्योंकि ये काफी लंबा ब्रेक हो गया और दोबारा मैदान पर वापस आकर हर कोई मैदान पर अपनी छाप छोड़ना चाहता है।"

दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा, "पहले जब हम आईपीएल के लिए आते थे, तो उस समय काफी क्रिकेट चल रही होती थी। लेकिन इस बार खिलाड़ी तरोताजा होंगे और वापसी को तैयार रहेंगे।"

उन्होंने कहा, "किसी भी खिलाड़ी के लिए यह लॉकडाउन पीरियड काफी अलग है। लेकिन मैं निजी तौर पर इसे जिस तरह से देखता हूं, यह मेरे लिए एक बहुत अच्छा मौका है कि मैं अपने ऊपर और अपने शरीर पर काम कर सकूं, क्योंकि जब हम खेल रहे होते हैं तो हम सीजन में होते हैं। हमें अपने शरीर पर काम करने का इतना मौका नहीं मिलता। इसलिए यह मेरे लिए अपने ऊपर काम करने के लिए अच्छा समय है।"

लेकिन क्या लय बिगड़ी?, "हां, इससे पूरी लय बिगड़ गई, लेकिन यह हर किसी के लिए समान हैं। एक बार जब क्रिकेट वापस लौटेगी हमें पूरी लय हासिल करने के लिए दोगुना समय लेना होगा। वापस लय में आने में समय लगेगा।"

--आईएएनएस

 

 

 

मुंबई: दिवंगत राजनेता विलासराव देशमुख की 75वीं जयंती पर उनके बेटे रितेश देशमुख ने सोशल मीडिया पर एक खास वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में रितेश अपने पिता के कुर्ते के आस्तीन में अपना हाथ घुसाकर खुद को गले लगाते, सहलाते और थपथपाते नजर आ रहे हैं।

इसके साथ वह लिखते हैं, "जन्मदिन मुबारक हो पापा..हर दिन आपकी याद आती है!! हैशटैगविलासरावदेशमुख75।"

रितेश की पत्नी जिनेलिया डीसूजा ने भी इस खास मौके पर अपने ससुर को याद किया।

उन्होंने एक तस्वीर साझा कीं, जिसमें वह विलासराव की प्रतिमा के आगे हाथ जोड़े खड़ी नजर आ रही हैं।

इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, "रियान के टीचर ने उससे पूछा तुम्हें किस पर सबसे ज्यादा गर्व है..उसका जवाब था मेरे अजोबा..आप हमारी शान हैं पापा..हम हर रोज आपकी मौजूदगी को महसूस करते हैं और जानते हैं कि आप जहां कहीं भी हैं, वहीं से हमारा ख्याल रख रहे हैं..आप हममें जीते हैं और हम हर रोज आपको याद करते हैं। जन्मदिन मुबारक हो पापा।"

विलासराव देशमुख ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में दो साल का कार्यकाल संभाला। साल 2012 में कई अंगों के विफल होने के चलते उनका निधन हो गया।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: केन्द्र में मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा करने जा रही है। लेकिन इस बार देश भर में जारी कोरोना संकट को देखते हुये पार्टी ने पहली सालगिरह के मौके को अलग तरीके से मनाने की तैयारी की है। इस अवसर पर भाजपा देश की जनता तक सरकार की एक साल की उपलब्धियों को डिजिटली पहुंचाएगी। इसके साथ ही पार्टी विशेष तौर पर 10 करोड़ लोगों तक प्रधानमंत्री द्वारा लिखे गए पत्र को पहुंचायेगी, जिसमें पिछले एक साल की उपलब्धियों का ब्योरा होगा।

इस सिलसिले में पार्टी 27 मई से डिजिटल कैम्पेन शुरू कर रही है, जो 29 मई तक देश के कोने-कोने में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम का केन्द्र बिन्दु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गये 'आत्मनिर्भर भारत' और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना है। वैसे तो पार्टी कमल संदेश के जरिये सरकार की एक साल की उपलब्धियों को डिजिटल बुलेटिन के जरिये घर-घर तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर ही रही है।

इसके साथ ही पार्टी विशेष तौर पर 10 करोड़ घरों तक प्रधानमंत्री द्वारा लिखे गए पत्र को पहुंचायेगी, जिसमें पिछले एक साल की उपलब्धियों के बखान के साथ-साथ कोरोना काल में हासिल की गई उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा होगा। इसमें 20 लाख करोड़ के 'आत्मनिर्भर भारत' पैकेज का जिक्र तो होगा ही, साथ ही इस बात का भी विस्तृत उल्लेख होगा कि किस तरह 'लोकल से ग्लोबल' कायक्र्रम पर जोर दिया जा रहा है।

इस बारे में भाजपा प्रवक्ता सुदेश वर्मा ने कहा, "निश्चित रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जिस तरह से हमने आत्मनिर्भर होने की दिशा में पहल की है, वह उल्लेखनीय है। पीपीई किट, मास्क या अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण बनाने की दिशा में आज हम स्वावलंबी हो रहे हैं। इसके साथ ही साथ हम सरकार की पिछले एक साल की उपलब्धियों को जनता तक पत्र के माध्यम से पहुंचायेंगे।"

पार्टी सूत्रों के मुताबिक 10 करोड़ लोगों तक जो पत्र भेजा जायेगा उसमें आत्म निर्भर भारत का संकल्प, विश्व कल्याण हेतु भारत की भूमिका, कोविड-19 से बचाव हेतु सावधानियां, स्वस्थ रहने के लिये अच्छी आदतों के संकल्प समेत धारा 370 खत्म किये जाने, नागरिकता संशोधन कानून, राम मंदिर और ट्रिपल तलाक खत्म करने जैसे मुद्दों का उल्लेख होगा।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस को देश में फैलने से रोकने के लिए सरकार ने कई फैसले लिये हैं। इसके साथ ही सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और लोगों की मदद के लिए 20 लाख करोड़ रुपयों के आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की है। इन तमाम चीजों का जिक्र भी पत्र में हो सकता है।

माना जा रहा है कि पत्र में कोरोना को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े का भी उल्लेख हो सकता है, जिसमें कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रति लाख जनसंख्या पर वैश्विक औसत 62 दिखाया गया है। वहीं भारत में यह औसत 7.9 बताया गया है। इसके अलावा कोरोना काल में सरकार द्वारा किये गये तमाम कड़े निर्णय और उसके प्रभाव का भी विस्तृत उल्लेख हो सकता है।

--आईएएनएस

 

नई दिल्ली: विपक्षी नेताओं ने महाराष्ट्र में कोविड-19 संकट को हल न कर पाने के आरोपों के बीच राज्य सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है। इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी महाराष्ट्र सरकार को चलाने में प्रमुख भूमिका में नहीं है। कांग्रेस 'महा विकास अघाड़ी' का हिस्सा है और उसके पास प्रमुख मंत्रालय है, लेकिन राहुल गांधी ने कहा, "हम केवल सरकार को मदद कर रहे हैं और राज्य में 'प्रमुख भूमिका' में नहीं हैं।"

हालांकि, राहुल गांधी ने राज्य सरकार का बचाव किया और कहा कि मुंबई पूरे देश से जुड़ा हुआ है और यही कारण है कि वहां कोविड के मामले बढ़ रहे हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी जहां अपनी सरकार चला रही है, वहां वह बेहतर काम कर रही है।

राहुल गांधी का बयान महाराष्ट्र में एमवीए सरकार के लिए एक झटका हो सकता है, जहां राजनीति में पहले से ही तनातनी चल रही है। राकांपा प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को राज्यपाल से मुलाकात की थी, हालांकि मंगलवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने सभी अटकलों को खारिज कर दिया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार राजभवन में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने गए थे। दोनों ही पक्षों ने इसे "शिष्टाचार भेंट" बताया है।

राकांपा सांसद प्रफुल्ल पटेल के साथ पवार ने पहली बार राज्यपाल के साथ बैठक की, जबकि राज्यपाल की नियुक्ति सितंबर 2019 में हुई थी।

बाद में सोमवार दोपहर को भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने राज्यपाल से मुलाकात की और कथित तौर पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की।

विभिन्न घटनाक्रमों के बीच, राणे ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली सरकार राज्य में कोविड-19 महामारी संकट को संभालने में विफल रही है।

राणे की यह मांग विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस की कोश्यारी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद आई और उन्होंने शिकायत की थी कि ठाकरे सरकार कोरोनोवायरस स्थिति को संभालने में फेल हो गई है।

राज्यपाल ने इसके बाद संकट की समीक्षा बैठक की जिसमें ठाकरे नहीं गए, बल्कि अपने करीबी विश्वासपात्र मिलिंद नार्वेकर को भेज दिया।

कुछ दिनों पहले, कोश्यारी ने उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत द्वारा यूजीसी को लिखे गए एक पत्र पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसमें अंतिम वर्ष के विश्वविद्यालय परीक्षाओं को रद्द करने की सिफारिश की गई थी, जिसे राज्यपाल ने दिशानिर्देशों के खिलाफ बताया।

इसके बाद सेना सांसद संजय राउत ने राज्यपाल को फोन किया। इसके एक दिन बाद ही ठाकरे ने घोषणा की कि अचानक लागू किया गया लॉकडाउन उचित नहीं था और अब इसे अचानक हटाना लोगों के लिए हानिकारक होगा।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज कर्सन घावरी ने भारत के 2013 के बाद से कोई भी आईसीसी ट्रॉफी न जीतने का बचाव किया है। उन्होंने साथ ही टीम की निरंतरता की तारीफ करते हुए कहा कि टीम लगातार फाइनल और सेमीफाइनल में पहुंच रही है यही बड़ी बात है।

घावरी ने कहा है कि देश के लोग ट्रॉफी जीतने के इतने आदी हो गए हैं कि वह सेमीफाइनल और फाइनल में जगह बनाने को कुछ समझते नहीं हैं।

भारत ने 2013 में आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी जीती थी, लेकिन इसके बाद वह 2014 टी-20 विश्व कप के फाइनल में हारी और 2016 टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल में से बाहर हो गई। आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी-2017 में फाइनल में उसे पाकिस्तान के हाथों हार मिली। 2019 विश्व कप में टीम सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से हार कर लौट आई।

घावरी ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा, "लेकिन भारतीय टीम नॉकआउट्स तक पहुंच रही है, है ना? देखिए, बीते कुछ वर्षो से, 1983 से, हम कई बार फाइनल में पहुंचे हैं। हमने कई ट्रॉफियां जीती हैं।"

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ट्रॉफी जीतने की जो आदत हमने बनाई है उससे हुआ यह है कि जब तक हमारे हाथ में ट्रॉफी नहीं आती तो हमें सुकून नहीं मिलता। हम इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि हमारी टीम सेमीफाइनल या फाइनल में पहुंची है।"

उन्होंने कहा, "सभी नौ टीमों से खेलना और विश्व कप में ग्रुप में शीर्ष पर रहना बहुत बड़ी बात है।"

--आईएएनएस

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