नई दिल्ली: फेसबुक के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम ने कोरोनावायरस संकट के दौरान भारत में छोटे व्यवसायों का समर्थन करने के लिए ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म स्विगी और जोमैटो के साथ साझेदारी की गुरुवार को घोषणा की।

फोटो-मैसेजिंग एप ने भारत में फूड ऑर्डर स्टिकर के रोलआउट की भी घोषणा की, जो खाद्य उद्योग के व्यवसायों को अपने ग्राहकों के संपर्क में रहने में मदद करेगा और ग्राहकों को अपने पसंदीदा व्यवसायों को भी समर्थन करने की अनुमति देगा।

इंटाग्राम स्टोरिज पर रेस्टोरेंट अपने फूड ऑर्डर स्टिकर शेयर कर सकते हैं, जिससे ग्राहक एक ही टैब में जोमैटो और स्विगी से ऑर्डर करने के लिए सीधे वेबसाइट के लिंक पर पहुंच जाएंगे।

फेसबुक इंडिया के उद्योग प्रमुख ई-कॉमर्स एंड रिटेल नितिन चोपड़ा ने कहा, "हम फूड ऑर्डर स्टिकर को रोल आउट कर रहे हैं, जो ऑर्डर डिस्कवरी और स्प्यूर एंगेजमेंट में मदद करेगा और हम स्विगी और जोमैटो के साथ साझेदारी करके खुश हैं।"

चोपड़ा ने कहा, "हम इस सुविधा के माध्यम से छोटे रेस्टोरेंट संचालकों को ग्राहकों तक अपनी सेवा देने में मदद करेंगे।"

जोमैटो के सीएमओ ग्रोथ मार्केटिंग संदीप आनंद ने कहा, "इंस्टाग्राम का फूड ऑर्डर स्टिकर न केवल रेस्टोरेंट को अधिक ग्राहकों तक पहुंचने में मदद करेगा, बल्कि उनके व्यवसाय में रेवेन्यू जनरेट करने का नया तरीका भी होगा।"

--आईएएनएस

नई दिल्ली: केंद्र ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि कोविड-19 के कारण व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) का उपयोग करने वाले स्वास्थ्यकर्मी कोविड-19 के कारण संक्रमण और किसी भी संभावित जोखिम से पर्याप्त रूप से सुरक्षित हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक हलफनामे में कहा, कार्यस्थल पर पीपीई द्वारा सुरक्षित रूप से संरक्षित एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने परिवार या बच्चों को कोई अतिरिक्त जोखिम नहीं पहुंचाता है।

केंद्र ने कहा कि कोविड-19 मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और निकट भविष्य में मौजूदा अस्पतालों के अलावा बड़ी संख्या में अस्थायी मेक-शिफ्ट अस्पतालों का निर्माण करना होगा। इसके अलावा रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भी केंद्र ने स्वास्थ्य कार्यबल को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।

डॉक्टर आरुषि जैन द्वारा यह याचिका दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कई जगह दो डॉक्टरों को एक कमरे में रखा गया है और वहां साझा टॉयलेट है, इससे संक्रमण का खतरा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हॉस्पिटल के नजदीक होटल या भवन में बंदोबस्त किया जाए।

जैन के वकील ने जोर देकर कहा कि केंद्र को इस व्यवस्था में बदलाव करना चाहिए और इसके बजाय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जहां सामाजिक दूरी संभव हो, वहां पर इंतजाम किए जाने चाहिए। जैन ने यह भी बताया कि कोविड-19 रोगियों के उपचार में शामिल डॉक्टरों के लिए उचित पीपीई उपलब्ध नहीं हैं।

केंद्र ने कहा कि याचिकाकर्ता ने डॉक्टरों की ओर से पर्याप्त पीपीई का इस्तेमाल करने के बाद भी कोविड-19 के लिए पॉजिटिव पाए जाने को लेकर कोई भी सबूत पेश नहीं किया है।

केंद्र ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों या शिकायतों पर संज्ञान लेने के लिए विशेषज्ञों ने मना कर दिया है।

हलफनामे में कहा गया है कि कोरोना और अस्पतालों के गैर-कोरोना क्षेत्रों में काम करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की 15 मई को दी गई सलाह सही दिशा में उठाया गया एक कदम है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि याचिका प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए योग्य है, जो पहले से ही लागू हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि भारत के डब्ल्यूएचओ का सदस्य होने के नाते, किसी भी राष्ट्रीय प्रोटोकॉल या दिशानिर्देशों को लागू करने से पहले डब्ल्यूएचओ से परामर्श करना अनिवार्य है।

--आईएएनएस

पटना: बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राहत की बात है कि बहुत से संक्रमित लोग इलाज के बाद ठीक भी हो रहे हैं। गुरुवार को राज्य में कोरोना के 126 नए मामले मिले, इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4,452 हो गई। ठीक होने वाले मरीजों की संख्या अब 2,120 पहुंच तक चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने गुरुवार को बताया कि अब तक कुल 88,313 नमूनों की जांच की गई है और अब कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 4,452 हो गई है।

उन्होंने कहा, "पिछले 24 घंटे में 95 लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौटे हैं, जिससे राज्य में अब तक 2,120 लोग स्वस्थ होकर अपने घरों को लौट चुके हैं।"

उन्होंने कहा कि बिहार के 38 जिलों में कोरोना संक्रमण के 2,271 एक्टिव मामले हैं। 3 मई के बाद बाहर से बिहार आने वाले लोगों में से 3,187 व्यक्तियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। अब तक कोरोना संक्रमित 28 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार ने बताया कि गुरुवार तक ब्लॉक क्वारंटाइन सेंटर की संख्या 10,739 है जिनमें 3 लाख 72 हजार 222 लोग रह रहे हैं। ब्लॉक क्वारंटाइन सेंटरों में अब तक 15 लाख 3 हजार 800 लोग रह चुके हैं, जिनमें से 11 लाख 31 हजार 578 लोग क्वारंटाइन की निर्धारित अवधि पूरा कर अपने घर वापस जा चुके हैं।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: कोरोनावायरस के प्रकोप के बीच राज्यों को राहत मुहैया कराने के एक कदम के तहत वित्त मंत्रालय ने दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 की अवधि के जीएसटी मुआवजे के रूप में राज्यों को 36,400 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।

इसके साथ ही केंद्र ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए राज्यों के बकाया पूरे जीएसटी मुआवजे को जारी कर दिया है, और फरवरी का अतिरिक्त मुआवजा भी दे दिया है, जिसकी गणना मौजूदा वित्त वर्ष 2021 में होनी है।

केंद्र ने राज्यों को मुआवजा ऐसे समय में जारी किया है, जब वे लॉकडाउन और कारोबार पर उसके असर के कारण अप्रैल और मई में जीएसटी संग्रह में भारी गिरावट का सामना कर रहे हैं। कुछ राज्यों ने कहा है कि उनके अप्रैल जीएसटी संग्रह में 85-90 प्रतिशत तक की गिरावट हुई है।

वित्त मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, "कोविड-19 के कारण मौजूदा परस्थिति को ध्यान में रखते हुए, जहां राज्य सरकारों को अपने खर्च चलाने की जरूरत है, वहीं उनके संसाधनों पर विपरीत असर पड़ा है, केंद्र सरकार ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को दिसंबर 2019 से फरवरी 2020 तक की अवधि के लिए जीएसटी मुआवजे के रूप में 36,400 करोड़ रुपये आज चार जून, 2020 को जारी कर दिए।"

अप्रैल से नवंबर की अवधि तक के जीएसटी मुआवजे के रूप में केंद्र ने कई चरणों में 1,15,096 करोड़ रुपये पहले ही जारी कर दिए हैं।

जीएसटी मुआवजा प्रत्येक दो महीने के अंत में जारी किया जाता है।

--आईएएनएस

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) ने गुरुवार को हिंदू साम्राज्य दिवस बनाया। आरएसएस के सर कार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने इस दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज को मुगलों के दौर में हिंदू समाज का रक्षक बताया। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के दिन को संघ अपने स्थापना काल से ही हिंदू साम्राज्य दिवस के रूप में मनाता आया है। संघ का मानना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के बाद ही देश में हिंदू साम्राज्य की पुनस्र्थापना हुई।

आरएसएस के सर कार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने नागपुर महानगर इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वर्चुअल संबोधन में कहा कि मोहम्मद कासिम ने देश पर आक्रमण किया और संपत्ति लूटकर चला गया। भारत पर बाहर के आक्रांताओं की यह पहली विजय थी। इस बीच का एक कालखंड चलता रहा। चार सौ वर्षो के बाद फिर घटना की पुनरावृत्ति हुई। मोहम्मद गोरी ने आक्रमण किया। इस दौरान संघर्ष करते हुए पृथ्वीराज चौहान बलिदान हो गए।

आठ सौ से नौ साल के कालखंड में हिंदू भिन्न प्रकार की मानसिकता में अनुभव करता है। हिंदू कभी गुलाम तो कभी पराजित अनुभव करता है। मानसिकता में हताशा घर कर जाती है। दिल्ली की गद्दी पर बैठा इंसान उसे ईश्वर लगने लगता है। हिंदू समाज की दीन-हीन अवस्था हो गई थी। भारत के दो तिहाई हिस्से पर मुगलों का साम्राज्य हो चुका था। उसी कालखंड में 1630 में एक बालक जन्म लेता है। यह बालक भविष्य में शिवाजी के नाम से जाना जाता है। राज्याभिषेक के बाद से छत्रपति शिवाजी महराज ने अपने शौर्य और साहस का उपयोग जीवन भर किया। उन्होंने देशहित और हिंदू समाज की रक्षा में शौर्य और साहस का उपयोग किया।

आरएसएसस के सर कार्यवाह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने राज्य की जनता में विश्वास जगाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि मेरे स्वराज्य में महिलाओं पर अत्याचार नहीं होगा। किसानों को हम पीड़ित नहीं करेंगे। अगर अनाज लेंगे तो किसानों को पैसे देंगे। निस्वार्थ भाव से वह काम करते रहे। इतिहास में पहली बार किसी राजा को योगी कहा गया तो वह छत्रपति शिवाजी महाराज थे। राष्ट्र, देश और समाज के लिए उनका जीवन हमेशा समर्पित रहा।

--आईएएनएस

भोपाल: मध्यप्रदेश में बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में 174 मामले और बढ़ गए। मौत का आंकड़ा भी 377 तक पहुंच गया। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को जारी बुलेटिन के बताया गया है कि राज्य में बीते 24 घंटों के दौरान174 नए मरीज सामने आने से मरीजों की संख्या 8762 हो गई। राज्य में सबसे ज्यादा मरीज इंदौर में हैं, यहां कुल मरीजों की संख्या 3633 हो गई है। राजधानी भोपाल में मरीजों की संख्या बढ़कर 1630 हो गई। उज्जैन में मरीजों का आंकड़ा 698 तक पहुंच गया है।

बुलेटिन के अनुसार, राज्य में संक्रमित मरीजों के मरने की संख्या 377 हो गई है। अब तक इंदौर में 145, भोपाल में 61, उज्जैन में 58 मरीजों की मौत हुई है। वहीं अब तक कुल 537 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। बीते 24 घंटों में 192 मरीज स्वस्थ हुए। स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या इंदौर में 2184 और भोपाल में 1111 है।

--आईएएनएस

बीजिंग: कोरोना संकट के बीच अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी हुई चुनौती को साधने के लिए मोदी सरकार ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद शुरू कर दी है। भारत को फिर से तेज विकास की राह पर चलने के लिए 5 चीजों इंटेंट (इरादा), इंक्लूजन (समावेश), इन्वेस्टमेंट (निवेश), इन्फ्रास्ट्रक्च र (बुनियादी संरचना) और इनोवेशन (नवाचार) का होना जरूरी बताया है। लेकिन यहीं सवाल उठता है कि आखिर चीन ने ऐसा क्या किया जो वह आत्मनिर्भर बना। चीन पिछले 40 सालों में आत्मनिर्भर बना और दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन कर उभरा।

आज चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। दुनिया को सुई से लेकर जहाज तक हर चीज निर्यात करता है। आज वह एक प्रमुख आर्थिक शक्ति बन चुका है। चीन ने पिछले तीन-चार दशक में जो हासिल किया है, वो काबिल-ए-तारीफ है। सबसे ज्यादा आबादी वाले देश चीन की अर्थव्यवस्था भारत की तुलना में चार गुनी बड़ी है, और कुछ ही सालों में इसके अमेरिका से भी आगे बढ़ जाने की उम्मीद है।

आखिर चीन ने ऐसा क्या किया जो वह आत्मनिर्भर बना और आर्थिक विकास के झंडे गाड़े। दरअसल, साल 1978 में चीन ने पहला कदम उठाया, जब विदेशी निवेश के लिए अपने दरवाजे खोले। चीन जिस आबादी को अपने विकास का रोड़ा मानता था, उसे अपनी शक्ति बनायी और सस्ते मजदूरों का लाभ दिखाते हुए विदेशी निवेशकों को लुभाया। चीन भांप गया था कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए विदेशी निवेश और तकनीकी मदद की जरूरत है, और यह विदेशी निवेशकों के आने से ही संभव हो सकता है।

चीनी नेता तंग श्याओ फिंग ने साल 1976 में चीनी चेयरमैन माओ त्से तुंग की मृत्यु के बाद देश की कमान संभाली। उनकी प्रबल आर्थिक सोच के साथ, चीन ने उत्पादन बढ़ाने पर खासा ध्यान दिया, साथ ही दुनिया के अन्य देशों के साथ संबंध सुधारने की शुरूआत की। उन्होंने अर्थव्यवस्था को समाजवादी नीतियों से अलग करने की शुरूआत की।

चीनी नेता तंग श्याओ फिंग ने आर्थिक सुधारों की शुरूआत के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसइजेड) बनाने का फैसला किया। दक्षिणी चीन के क्वांगतोंग प्रांत के शनचन शहर को पहला स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाने के लिए चुना गया। हांगकांग के सबसे पास होने की वजह से यह शहर प्रयोग के लिहाज से उत्तम था। आज शनचन आसमान छूती इमारतों से भरा हुआ सबसे युवा और तरक्की करने वाला शहर है। साल 1979 तक यह एक छोटा-सा गांव हुआ करता था, जहां सिर्फ मछुआरे रहा करते थे। तंग श्याओ फिंग ने यहां एसइजेड की शुरूआत की। यहां उन्होंने प्रायोगिक आधार पर कई सारी सुविधाएं दी, जो अव्वल दर्जे की थी। धीरे-धीरे शनचन में कुशल मजदूरों की भरमार होने लगी।

आज चीन का सामान लगभग हर देश में बिकता है, वो दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है। इसी निर्यात की वजह से चीन के पास सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार भी है। जिन्होंने भी चीन के विकास की कहानी लिखी, उन्होंने ऐसी आर्थिक नीतियां बनाईं जिससे ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेश हो और आय का मुख्य स्रोत निर्यात से होने वाली आमदनी हो। चीन के विकास के इस मॉडल में शनचन जैसे एसइजेड की अहम भूमिका रही है। शनचन आज चीन की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा और सबसे मजबूत इंजन है।

शनचन की तरह चीन में कुल 6 स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं, जो काफी बड़े हैं। जहां भारत में सिर्फ 10 हेक्टेयर जमीन पर भी स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाया जा सकता है, वहीं चीन का कोई भी एसइजेड 30 हजार हेक्टेयर से छोटा नहीं है। यहां पर बिजली, सड़क, पानी आदि की कोई समस्या नहीं हैं। इसके साथ ही चीन ने अपने प्रांतों में स्पेशल डेवलपमेंट जोन बनाये। एक डेवलपमेंट जोन में एक तरह के उत्पाद बनाने वाली फैक्टरी होती है, इसलिये अगर चीन का एक प्रांत सिर्फ खिलौने बनाने के लिये मशहूर है तो दूसरा कपड़े के लिए।

अगर किसी निवेशक को चीन में निवेश करना है तो उसे वहां जाकर किसी को ढ़ूंढने की जरूरत नहीं होती। चीन सरकार में कुछ विभाग ऐसे है जो उन्हें आमंत्रित करते हैं, लगातार उनके संपर्क में रहते हैं। चीन में निर्णय भी जल्दी से लिए जाते हैं और ज्यादातर निर्णय स्थानीय स्तर पर ही ले लिये जाते हैं। चाहे मामला जमीन अधिग्रहण का हो या सड़क, बिजली, पानी का। विकास के शुरूआती दौर में चीन सरकार की नजर आर्थिक विकास पर रही। उसके सामने किसी भी तरह के विरोध को जगह नहीं दी गई।

चीन की राजनीति ने विकास के आगे विरोध और बहस को दरकिनार कर दिया। उसने आर्थिक निवेश को विचारधारा और राजनीति के चश्मे से नहीं देखा। आर्थिक सुधार के शुरूआती दिनों में चीनी नेता तंग श्याओ फिंग ने एक बड़ा कदम उठाया था, वो था भूमि सुधार का। उस समय तक जमीन किसी एक व्यक्ति या परिवार की सपंत्ति नहीं होती थी। भूमि सुधार के तहत जमीन किसानों को दी गई। जमीन एक हाथ से दी गयी और दूसरे हाथ से ले ली गयी। जैसे ही बिजली घर, बांध, स्पेशल इकोनॉमिक जोन और फैक्टरी लगाने की बात शुरू हुई तो सरकार ने बड़े पैमाने पर जमीन वापस लेकर निजी हाथों में दे दी।

चीन की प्रांतीय सरकार अपने अपने यहां छोटे और मझौले उद्योगों पर खासा ध्यान देती है। वह देखती है कि ज्यादा से ज्यादा लोन कैसे दिया जा सकता है, टैक्स में सब्सिडी कैसे दी जा सकती है। छोटे और मझोले उद्योगों को जमीन और बिजली कैसे दी जाए, ताकि बिजनेस के लिए बेहतर माहौल और सुविधा मिल सके। किसी भी विदेशी के लिए चीन में कंपनी खड़ी करना और बिजनेस शुरू करना थोड़ा आसान होता है। यही नहीं, कम्युनिस्ट देश होने के बावजूद चीन में भारत की तरह कड़े श्रम कानून नहीं हैं।

क्या भारत में ऐसे कानूनों की कल्पना की जा सकती है? चीन अगर आज दुनिया में एक आर्थिक महाशक्ति के तौर पर जाना जाता है तो उसकी वजह और भी हैं। सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना, अपने यहां कुशल मजदूर तैयार करना, ऐसी नीतियां बनाना जो कारोबार बढ़ाने में मददगार साबित हों और इन सबकी मदद से दुनिया की हर वो चीज बनाना जिसकी जरूरत लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में पड़ती है। यही वजह है कि दुनिया के बाजार मेड इन चाइना चीजों से भरे पड़े हैं। '

लगातार तीन दशक तक चीन की विकास दर 10 फीसदी से ज्यादा रही है। इसमें चीन सरकार की इन नीतियों का बड़ा हाथ रहा है। नीतियों में फेरबदल न के बराबर हुआ है। इतना ही नहीं हाई एंड टेक्नोलॉजी जिस पर कभी अमेरिका, जर्मनी और जापान जैसे देशों का कब्जा था, उसमें भी चीन ने महारत हासिल कर ली। चीन ने आर्थिक क्षेत्र में पिछले 40 सालों में जो हासिल किया है वो दुनिया के किसी भी देश ने नहीं किया।

पिछले 4 दशक के आर्थिक सुधार और खुलेपन और आधुनिकीकरण के बाद, चीन ने बुनियादी तौर से योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था से सामाजिक बाजार अर्थव्यवस्था में कदम रख लिया है। सामाजिक बाजार अर्थव्यवस्था भी लगातार मजबूत होती जा रही है। बाजार के खुलेपन का पैमाना लगातार बढ़ता जा रहा है और निवेश करने के माहौल में बराबर सुधार हो रहा है। इसके अलावा बैंकिग व्यवस्था का सुधार स्थिरता से आगे बढ़ रहा है। इन सभी ने चीनी अर्थव्यवस्था के निरंतर आगे बढ़ने की बुनियाद तैयार की है।

अब, सवाल है कि क्या चीन के विकास मॉडल से भारत 'आत्मनिर्भर' बनने के लिए कुछ सीख सकता है? यदि भारत चीन के साथ सहयोग करते हुए धीरे-धीरे अपने उद्योग, कारोबार, इन्वेस्टमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्च र और इनोवेशन बढ़ाता है, तो उसका आत्मनिर्भर बनने का सपना दूर नहीं है।

वैसे भी वैश्वीकरण के युग में, सभी देश संसाधनों और आर्थिक अवसरों का दोहन करने के लिए निर्धारित प्रयासों के साथ एक दूसरे के साथ गहराई से जुड़े हैं। इस समय भारत को अपनी 'मेक इन इंडिया' मुहिम को मजबूत बनाने के लिए बुनियादी संरचना, तकनीक और कच्चे माल की आवश्यकता है, जिसके लिए कहीं न कहीं चीन और अन्य देशों पर निर्भर रहने की जरूरत है। भारत सहयोग के रास्ते से ही अपनी मंजिल पर पहुंच सकता है।

(लेखक : अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप में पत्रकार हैं। साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )

--आईएएनएस

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली की पटेल नगर सीट से विधायक राज कुमार आनंद गुरुवार को अपने भाई के साथ कोरोना पाजिटिव पाए गए।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, विधायक को बीमारी का कोई लक्षण नहीं है और उन्हें घर पर ही क्वोरंटीन में रखा गया है।

पार्टी के एक नेता ने आईएएनएस से कहा, "विधायक को गुरुवार को पॉजिटिव पाया गया। वह और उनके भाई घर पर ही क्वोरंटीन में हैं।"

इसके पहले आप के करोल बाग से विधायक विशेष रवि पहली मई को अपने भाई के साथ कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। रवि को भी कोई लक्षण नहीं था, और उन्हें भी घर पर क्वोरंटीन रहने की सलाह दी गई थी। रवि की रिपोर्ट 24 मई को नेगेटिव आ गई थी।

--आईएएनएस

पटना: आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली से राज्यसभा सांसद संजय सिंह गुरुवार की शाम 180 प्रवासी मजदूर यात्रियों को लेकर हवाईजहाज से पटना पहुंचे। पटना हवाईअड्डा पहुंचने पर उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूर ही सही में 'राष्ट्र-निर्माता' हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में फंसे प्रवासी मजदूरों को शुक्रवार को भी दो बसों से बिहार के लिए रवाना किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे पहले 42 बसों से प्रवासी मजदूरों को दिल्ली से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार भेजा जा चुका है।

उन्होंने कहा, "ये प्रवासी मजदूर ही राष्ट्र-निर्माता हैं, लेकिन इन्हें अंतिम पायदान पर रखा गया है। सही समय पर उन्हें उनके घर तक नहीं पहुंचाया गया।"

उन्होंने कहा कि ट्रेनों से प्रवासी मजदूरों को जब उनके घरों व गांवों तक पहुंचाया जाने लगा, तब तक काफी देर हो चुकी थी, यही वजह है कि मजदूरों के बच्चों को सूटकेस पर सोकर सफर करना पड़ा। मजदूरों के पैरों में छाले पड़ गए। इस दौरान कई मजदूरों की मौत हो गई।

उन्होंने कहा, "जान गंवाने वाले इन मजदूरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि इस मुश्किल घड़ी में हम सब मिलकर उनके परिवार की मदद करें। उनका सहयोग करें।"

हवाईजहाज से अपने राज्य पहुंचे प्रवासी मजदूरों के चेहरे पर भी संतोष और खुशी देखी गई।

--आईएएनएस

बीजिंग: तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में वैश्विक सांस्कृतिक विरासत पोताला महल और नोबुर्लीगका पार्क 3 जून को फिर से खुले जबकि महामारी फैलने की वजह से इन्हें चार महीनों के लिए बन्द कर दिया गया था।

महामारी की रोकथाम के लिए पोताला महल ने ऑनलाइन बुकिंग और पर्यटकों की संख्या को सीमित करने का उपाय अपनाया। पोताला महल का जाने वाले पर्यटकों को ऑनलाइन बुकिंग करनी होती है। उधर, नोबुर्लीगका पार्क का दौरा करने के लिए हर दिन के नियमित समय में जाना पड़ता है। पार्क के दरवाजे पर पर्यटकों को मास्क पहनकर आईडी कार्ड और 'स्वास्थ्य कोड' के साथ रजिस्टर करना पड़ता है।

अभी तक ल्हासा शहर में जोखांग मंदिर को छोड़कर दूसरे तीर्थस्थल खुल चुके हैं।

( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )

--आईएएनएस

 

 

 

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