कर्नाटक ने 65वें स्थापना दिवस का जश्न मनाया
Sunday, 01 November 2020 17:14

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बेंगलुरु: कर्नाटक ने रविवार को अपने स्थापना दिवस का 65वां साल 'राजोत्सव' मनाया। इस राज्य को 1 नवंबर, 1956 को दक्षिणी भारत में एक अलग राज्य के रूप दर्जा दिया गया। एक अधिकारी ने यहां आईएएनएस से कहा, "मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने पीले और लाल रंग में राजकीय ध्वज फहराया और शहर के केंद्र में श्री कांतीरवा स्टेडियम में दिनभर के समारोहों का उद्घाटन किया, इस दौरान कोविड महामारी के मद्देनजर केंद्र के दिशानिर्देशों को ध्यान में रखा गया था।"

सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी सभा पर प्रतिबंध के कारण सिर्फ 100 लोगों को मुख्य समारोह में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। कार्यक्रम काफी साधारण तौर पर मनाया गया।

वहीं मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने भी देवी भुवनेश्वरी को पुष्प अर्पित किए। भुवनेश्वरी देवी को इस दक्षिणी राज्य की 'माता' माना जाता है।

देशभर में राज्यों के पुनर्गठन के दौरान कर्नाटक का गठन कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को शामिल किया गया था। दक्कन के पठार, मद्रास प्रेसीडेंसी, तत्कालीन बॉम्बे प्रांत का उत्तर-पश्चिम क्षेत्र, तत्कालीन हैदराबाद राज्य में उत्तरी क्षेत्र और फिर हैदराबाद राज्य और मलनाड क्षेत्र को मिलाकर कर्नाटक बना था।

हालांकि राज्य को मूल रूप से 'मैसूर' के रूप में नामांकित किया गया था, इसे एक विशिष्ट पहचान देने के लिए 1 नवंबर, 1973 को कर्नाटक के रूप में फिर से नामकरण किया गया था।

राज्य के शहरों और कस्बों में कार्यालयों, घरों और सार्वजनिक भवनों की छतों पर भी राज्य ध्वज फहराया गया।

राज्य के एंथम, 'जय भारत जननि तनुजते', प्रसिद्ध कन्नड़ कवि और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कुवेम्पु को भी इस अवसर पर याद किया गया।

राज्य सरकार ने इस साल (2020) के लिए राज्योत्सव नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित करने के लिए राज्यभर के 35 विविध क्षेत्रों में 60 हस्तियों का चयन किया है।

पुरस्कार पाने वालों में सुप्रीम कोर्ट के वकील के.एन. भट्ट, जिन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदू देवता 'राम लला' का प्रतिनिधित्व किया और कोंकणी के कवि वलेरियन डिसूजा भी थे।

--आईएएनएस

एमएनएस/एसजीके

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