अनुच्छेद 370 की समाप्ति की वर्षगांठ पर जम्मू-कश्मीर की पंचायतों को 1700 करोड़ रुपये की सौगात
Wednesday, 05 August 2020 16:14

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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए, प्रशासन ने नवगठित पंचायतों को सशक्त बनाने और पंचों और सरपंचों के अधीन आने वाले 21 विभागों को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी उन्हें देने के लिए 1,700 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है।

अनुच्छेद 370 निरस्त होने की पहली वर्षगांठ पर केंद्र शासित प्रशासन ने आईएएनएस के साथ योजना साझा की, जिसके तहत इसने कहा है कि प्रशासन ने 1,000 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है, जबकि 700 करोड़ रुपये की परियोजना पाईपलाइन में है। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि पंचायत चुनाव के तुरंत बाद लगभग 4,500 पंचायत हलकों के लिए योजना तैयार की गई थी।

इसके अलावा, डेटा में उल्लेख किाय गया है कि एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) केंद्रों, मिड डे मील और कुछ पदाधिकारियों के वेतन जैसे कार्यों को भी औपचारिक रूप से पंचायतों को सौंपा गया है।

साथ ही पंचायतों के कामकाज को संस्थागत बनाने और सक्रिय करने और धन का उपयोग करने में किसी भी तरह की बाधाओं का सामना करने पर उनकी सहायता करने का एक निरंतर प्रयास भी है।

पंचायतें, विभिन्न सरकारी कल्याण योजनाओं के लिए पात्र लाभार्थियों के चयन में शामिल होने के अलावा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, समग्र शिक्षा जैसी प्रमुख राष्ट्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए प्रति वर्ष 50 लाख-80 लाख रुपये प्राप्त कर सकती हैं। वरिष्ठता के सभी स्तरों के लगभग 5,000 राजपत्रित अधिकारियों का एक समूह (प्रत्येक पंचायत के लिए एक) भी दो दिन और एक रात के लिए गांवों में रहेगा, और पंचायतों द्वारा सामना किए जाने वाली समस्याओं को हल करेगा।

जम्मू-कश्मीर के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "वास्तव में, एक विजिटिंग ऑफिसर द्वारा विशेष रूप से प्रश्नावली भरी जाएगी।"

प्रमुख सचिव (बिजली और सूचना) रोहित कंसल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा पंचायत स्तर और अन्य विकासात्मक परियोजनाएं विशेष रूप से जमीनी स्तर के लोकतंत्र और भागीदारी विकास को मजबूत करने के लिए शुरू की गई हैं।

हालांकि, चुने जाने के लगभग एक साल बाद, पंचों और सरपंचों का कहना है कि उन्हें उस तरह की मदद मिलना अभी बाकी है, जिसकी वे उम्मीद कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस के कारण घाटी में तीन महीने से अधिक समय तक लॉकडाउन लगे रहना इसका एक कारण हो सकता है। आईएएनएस से बात करते हुए, दो पंचों ने नाम जाहिर नहीं करने का अनुरोध करते हुए बताया कि वे ग्रामीण स्तर पर बेहतर विकास की उम्मीद करते हैं। कुपवाड़ा जिले के पंचों में से एक ने कहा, "हमें चुनाव के दौरान अपेक्षित मदद नहीं मिली है। शुरुआती दो महीने सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे जो कानून-व्यवस्था के प्रबंधन में व्यस्त थे। पिछले तीन महीनों से अधिक समय से, कोविड-19 के कारण घाटी में लॉकडाउन है। सरकार द्वारा कई कदम उठाए गए लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन बहुत अधिक वांछनीय है। हम आने वाले दिनों में बेहतर स्थिति की उम्मीद करते हैं।"

--आईएएनएस

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