अधिकांश वंशवादी चेहरे हारे
Friday, 24 May 2019 12:12

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नई दिल्ली: इस बार लोकसभा चुनाव में न केवल जातीय गणित फेल हुआ है, बल्कि वंशवादी राजनीति को भी भारी झटका लगा है। राजनीतिक परिवार से आने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को इस बार हार का सामना करना पड़ा है।

उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह का परिवार हो, या बिहार में लालू प्रसाद का परिवार हो, या फिर हरियाणा में हुड्डा परिवार और महाराष्ट्र का पवार परिवार। सभी परिवारों के उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिह हुड्डा के बेटे कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक सीट पर मामूली मतों से पीछे चल रहे हैं। उनके पिता सोनीपत सीट हार गए।

हरियाणा में ही पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह के बेटे भाजपा उम्मीदवार ब्रिजेंद्र सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पौत्र दुष्यंत चौटाला और पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के परिवार की तीसरी पीढ़ी के भव्य बिश्ननोई को पराजित किया।

उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल रालोद के नेता अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी भी चुनाव हार रहे हैं। मुलायम सिंह यादव की बहू और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भी कन्नौज में पीछे चल रही हैं। बदायूं में मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेद्र यादव पीछे चल रहे हैं। एक अन्य भतीजे अक्षय यादव फिरोजपुर में पीछे चल रहे हैं।

हालांकि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव क्रमश: मैनपुरी और आजमगढ़ में आगे चल रहे हैं।

कांग्रेस के दिवंगत नेता जितेंद्र प्रसाद के पुत्र जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश की धौरहरा सीट पर तीसरे स्थान पर हैं। कांग्रेस नेता माधव राव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश की गुना सीट से चुनाव हार गए। सिंधिया के लिए यह दोहरी हार है, क्योंकि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी थे, जहां पार्टी का पूरी तरह सफाया हो गया है।

एक अन्य कांग्रेस नेता दिवंगत मुरली देवड़ा के पुत्र मिलिंद देवड़ा मुंबई दक्षिण सीट हार गए।

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत जोधपुर सीट हार गए। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह झालवाड़-बारन सीट से चुनाव जीत गए। बगल के मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ भी अपने पिता की सीट छिंदवाड़ा से चुनाव जीत गए।

महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले-पवार बारामती से तीसरी बार जीत गईं, लेकिन उनके भतीजे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पुत्र पार्थ मावल से चुनाव हार गए।

बिहार में लालू प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का खाता तक नहीं खुला। लालू के जेल में होने के कारण पार्टी की कमान उनके पुत्र तेजस्वी यादव के हाथों में है। तेजस्वी की बहन मीसा भारती पाटलिपुत्र से पीछे चल रही हैं।

पंजाब में हालांकि शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बाद और उनकी पत्नी हरसिमरत कौर बादल क्रमश: फिरोजपुर और बठिंडा से जीत गए हैं। तमिलनाडु में भी पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके के संस्थापक एम. करुणानिधि की बेटी के. कनिमोझी थूथुक्कु डी से आगे चल रही हैं।

जबकि तेलंगाना में मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी कविता कलवाकुंतला निजामाबाद से हार गईं।

कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते प्राज्वल रेवन्ना हासन से जीत गए, लेकिन एक अन्य पोते निखिल कुमारस्वामी मांड्या से चुनाव हार गए। निखिल मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के बेटे हैं। एच.डी. देवेगौड़ा खुद तुममुर सीट से चुनाव हार गए।

--आईएएनएस

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