'पे टू स्टे' स्टिंग के बाद अमेरिका से लौटे 30 तेलुगू छात्र
Thursday, 07 February 2019 22:27

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हैदराबाद: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कम से कम 30 छात्र अमेरिका से लौट आए हैं। यह वे छात्र हैं, जिन्हें 'पे टू स्टे' घोटाले में हिरासत में नहीं लिया गया या अमेरिकी अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी किया गया है। तेलुगू संगठनों ने इस बात की जानकारी दी। आव्रजन रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए फर्जी विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले छात्रों के साथ काम कर रहे तेलुगू संगठनों ने कहा कि उन छात्रों के लिए घर लौटना सबसे सुरक्षित विकल्प था, जिन्हें हिरासत में नहीं लिया गया या आव्रजन कानून के उल्लंघन के लिए नोटिस प्राप्त किया था।

पिछले सप्ताह पर्दाफाश किए गए रैकेट के बाद से दो तेलुगू राज्यों के करीब 129 छात्र अभी भी प्रशासनिक हिरासत में हैं।

एक स्टिंग ऑपरेश्न के अंतर्गत अमेरिकी आधिकारियों द्वारा तैयार किए गए फर्जी फार्मिगटन विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले करीब 600 विदेशी छात्रों में से 90 फीसदी भारतीय हैं। इनमें 80 फीसदी से ज्यादा छात्र इन दो तेलुगू राज्य से हैं।

नियोक्ता के रूप में काम करने वाले आठ छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि 129 को विभिन्न स्थानों पर प्रशासनिक हिरासत में रखा गया है।

आंध्र प्रदेश नॉन रेजीडेंट तेलुगू (एपीएनआरटी) सोसायटी के मुख्य समन्वयक बुचीराम कलपातापु ने आईएएनएस को बताया, "जिन्हें अन्य विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित किया गया है वे सुरक्षित हैं लेकिन बाकियों के लिए घर लौटने में कोई दिक्कत नहीं है।"

'पीड़ित' छात्रों के साथ काम करने वालों का मानना है कि घर लौटने वाले छात्रों के लिए भारत में नौकरी ढूंढने की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। वे पहले ही अन्य विश्वविद्यालयों से एमएस कर चुके हैं और इसके बाद उनके पास ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) भी है। ओपीटी एक साल का वर्क परमिट है।

बुचीराम ने कहा, "अमेरिका में रहने और काम करने के लिए छात्रों ने एक बार फिर से एमएस करने के लिए इस विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था क्योंकि इसने छात्रों को इस प्रस्ताव के साथ फुसलाया कि उन्हें कक्षाओं में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है।" 

--आईएएनएस

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