भारत से बातचीत के लिए अमेरिका से की थी अपील, पाकिस्तान को मिली दोतरफा फटकार

भारत से द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका से दखल देने की अपील की है। लेकिन अमेरिका ने मध्यस्थता की मांग अस्वीकार करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर तय करें। वहीं भारत ने कहा है कि वार्ता के लिए समुचित माहौल तैयार करने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है। भारत ने कहा कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपनी अमेरिका यात्रा में वहां के विदेश मंत्री माइक पोंपिओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन से मुलाकात की। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी ब्योरे के मुताबिक, कुरैशी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता शुरू कराने में अमेरिका मदद करे। दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संवाद अभी बंद है। बातचीत नहीं होने से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।

अमेरिका ने इस संबंध में पाकिस्तान के अनुरोध को खारिज कर दिया है। पोंपिओ और बोल्टन दोनों ही ने कुरैशी से स्पष्ट कर दिया कि भारत अपने पड़ोसी देश के साथ संबंधों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता का विरोध करता है। कश्मीर समेत विभिन्न द्विपक्षी मुद्दों पर भारत लगातार बातचीत पर जोर देता रहा है। कुरैशी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने गुरुवार को साफ किया कि वार्ता नहीं होने की वजह पाकिस्तान का रवैया है। हाल में वार्ता का मौका था, लेकिन पाकिस्तान के द्वारा आतंकियों के पोषण का विकृत उदाहरण सामने आने पर कवायद रोकनी पड़ी। भारत का कहना है कि पाकिस्तान इस बारे में लगातार गलतबयानी करता रहा है। हाल में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भारत ने कई बार पाकिस्तान को बेनकाब किया। ऐसे में वाशिंगटन में पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी का बयान हकीकत से कोसों दूर सिर्फ दिखावा है।

कुरैशी ने अमेरिकी थिंक टैंक यूएस इंस्टीट्यूट आॅफ पीस के एक आयोजन में कहा, ‘जब हमने अमेरिका से वार्ता में भूमिका निभाने के लिए कहा, तो हमने क्यों कहा? सिर्फ इसलिए कि हमारे बीच द्विपक्षीय वार्ता बंद है। हम सीमा के पश्चिमी ओर ध्यान लगाते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं। यह हम नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि हमें पूर्वी ओर (भारत के साथ सीमा पर) मुड़कर देखना होता है।’ अमेरिका से मदद मांगते हुए उन्होंने कहा, ‘अब क्या आप (अमेरिका) मदद कर सकते हैं?’ कुरैशी ने माना कि पोंपिओ और बोल्टन ने छूटते ही इससे इनकार कर दिया। अमेरिकी प्रतिनिधियों का जवाब था कि द्विपक्षीय संवाद होना चाहिए। अमेरिका में कुरैशी ने दावा किया कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री इमरान खान की नई सरकार बातचीत से कतरा नहीं रही है।

न्यूयार्क में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ बैठक रद्द होने का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पीछे हट गया। इसके लिए डाक टिकट जारी कर आतंकवादियों के महिमामंडन और भारतीय सुरक्षाबल के जवानों की क्रूर हत्याओं को भारत की ओर से वजह बताए जाने पर कुरैशी ने कहा, ‘अगर भारतीयों के पास कोई बेहतर विकल्प है तो हमारे साथ साझा करें। अगर एक-दूसरे से बातचीत नहीं करने से मुद्दे हल होंगे और क्षेत्र में स्थिरता आएगी तो ठीक है। अगर यह उनका आकलन है तो फिर ठीक है।’ बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चलने के भारत के रुख पर कुरैशी ने इमरान खान के एक बयान का हवाला दिया जब वह विपक्ष के नेता थे और नई दिल्ली की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे। तब उन्होंने कहा था कि हमेशा वार्ता को विफल करने वाले तत्व सामने आएंगे। कुरैशी ने खान के हवाले से कहा, ‘हमेशा वार्ता को विफल करने वाले तत्व होंगे। हमेशा ऐसे तत्व होंगे जो शांति प्रक्रिया को बाधित करेंगे, लेकिन जब वे ऐसा करें तो चलिए एक साथ मिलकर उनका मुकाबला करें। वे हमें वापस भेजेंगे लेकिन हमें देखना होगा कि हमारे हित में क्या है, हमारे क्षेत्रीय हित में क्या है।’