दो हजार करोड़ के लोन फ्रॉड में कंपनी का एमडी अरेस्ट

द सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) की एक टीम ने गुरुवार को भूषण स्टील लिमिटेड के पूर्व प्रमोटर और एमडी नीरज सिंघल को गिरफ्तार किया है। नीरज सिंघल पर आरोप है कि उन्होंने करीब 80 एसोसिएट कंपनियों का इस्तेमाल कर विभिन्न बैंकों से करीब 2000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। नीरज सिंघल को फिलहाल 14 अगस्त तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बता दें कि भूषण स्टील को दिवालियापन के चलते टाटा ग्रुप की एक कंपनी ने अधिग्रहित कर लिया है। भूषण स्टील उन 12 बड़ी एस्सेट में शामिल थी, जिन्हें रिजर्व बैंक ने पिछले साल नेशनल कंपनी लॉ ट्रब्यूनल के हवाले किया था।

गौरतलब है कि नीरज सिंघल को कंपनी एक्ट, 2013 की धारा 447 के तहत गिरफ्तार किया गया है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे न्यूनतम 6 माह और अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है। इसके साथ ही दोषी के खिलाफ धोखाधड़ी की न्यूनतम रकम के बराबर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है। लेकिन यदि धोखाधड़ी में जनता के हित जुड़े हुए हैं तो फिर सजा न्यूनतम 3 साल तक हो सकती है। नीरज सिंघल की गिरफ्तारी पर सरकार की तरफ से एक बयान में कहा गया है कि ‘यह गिरफ्तारी भूषण स्टील और इस ग्रुप की कई अन्य कंपनियों की एसएफआईओ द्वारा की जा रही जांच के संबंध में की गई है। जांच का आदेश मिनिस्टरी ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स ने कंपनी के खिलाफ मिली कई शिकायतों के आधार पर दिया है।’ SFIO की जांच में पता चला है कि भूषण स्टील के प्रमोटर्स ने भूषण स्टील लिमिटेड के मैनेजमेंट द्वारा विभिन्न बैंकों से हजारों करोड़ रुपए का लोन लिया। जिससे विभिन्न बैंकों और कंपनी के निवेशकों को नकुसान उठाना पड़ा।

इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने भी एक ट्वीट कर कहा है कि धोखाधड़ी के कारण कंपनी दिवालिया हो गई। भूषण स्टील लिमिटेड उन 12 बड़े मामलों में से एक है, जिन्हें बैंकों ने दिवालिया करार दिया था। टाटा ग्रुप ने अधिग्रहण के बाद मैनेजमेंट अपने हाथ में ले लिया था। फिलहाल इस मामले में SFIO की जांच चल रही है।