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बच्चा बेचने का मामला: मिशनरीज ऑफ चैरिटी केस की हो सीबीआई जांच

लोकसभा में आज भाजपा के एक सदस्य ने झारखंड में ‘मिशनरीज आॅफ चैरिटी’ से जुड़ी एक संस्था से कथित तौर पर बच्चों को बेचे जाने का मुद्दा उठाया और सरकार से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने मांग की। भाजपा के निशिकांत दुबे ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि सेवा के नाम पर धर्मांतरण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मिशनरीज और चैरिटी’ से जुड़ा मामला बहुत गंभीर है और सरकार को इसकी सीबीआई जांच करानी चाहिए।दुबे ने यह भी कहा कि सरकार को धर्मांतरण रोकने के लिए कड़ा कानून बनाना चाहिए। गौरतलब है कि झारखंड में ‘मिशनरीज आॅफ चैरिटी’ से जुड़ी एक संस्था से कथित तौर पर बच्चों को बेचे जाने की खबरें आई हैं । इस मामले के प्रकाश में आने के बाद केंद्रीय महिला एवं विकास मंत्री मेनका गांधी ने झारखंड सरकार से इसकी तत्काल जांच कराने को कहा था।

गौरतलब है कि 2 दिन पहले ही इस मामले को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने भी अपना बयान जारी करते हुए सभी बाल देखभाल गृहों को के तुरंत निरीक्षण करने के आदेश दिए थे।   मंत्रालय के अनुसार, मेनका ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी बच्चों के देखभाल की संस्थाएं (सीसीआई) पंजीकृत हों और महीने भर के अंदर केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) से जोड़ी जाएं।

 

किशोर न्याय (बाल देखभाल एवं सुरक्षा) अधिनियम 2015 के तहत सीसीआई में पंजीकरण व कारा से जोड़े जाने की अनिवार्यता है। यह अधिनियम दो साल पहले लागू किया गया था, लेकिन कुछ अनाथालय इसकी वैधता को चुनौती देते हैं।  सर्वोच्च न्यायालय ने वैधता को चुनौती देने के मामले में याचिकाओं को खारिज कर दिया है और 2015 के अधिनियम की वैधता को अपने दिसंबर 2017 के आदेश में कायम रखा है। इसके बाद से करीब 2,300 सीसीआई को कारा से जोड़ा गया है और करीब 4,000 अभी भी जोड़े जाने के लिए लंबित हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कारा से जुड़े 2,300 संस्थानों पर भी नाराजगी जताई है, क्योंकि बच्चों को अभी भी गोद लेने की प्रणाली में नहीं लाया गया है।

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