इमरजेंसी में संजय गांधी ने यूं बनाया था गिरफ्तारी का प्लान

25-26 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने देश में आपातकाल लागू करने संबंधी अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए थे। अगली सुबह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो पर खुद इसकी घोषणा की। उन्होंने तब रेडियो पर कहा था, “भाइयों और बहनों, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है लेकिन इससे सामान्य लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।” इसके बाद विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं को आधी रात में ही गिरफ्तार कर लिया गया था। दरअसल, इंदिरा गांधी और उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने देश में आपातकाल लगाने की तैयारी पहले से ही कर ली थी। 25-26 जून की रात में बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित अखबारों के दफ्तर की बिजली काट दी गई थी ताकि सुबह अखबार नहीं निकल सके। इसके अलावा इंदिरा गांधी के सहायक आर के धवन और संजय गांधी ने मिलकर रातों-रात उन लोगों की लिस्ट बनाई थी जिन्हें गिरफ्तार किया जाना था।

25 जून की आधी रात में उधर इंदिरा गांधी ने अपने खास शख्स को राष्ट्रपति के पास आपातकाल के कागजात पर दस्तखत करने भेजा और इधर आईटीओ स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान से सोते हुए जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया था। मशहूर लेखिका उमा भारती ने अपनी किताब में तत्कालीन मंत्री सिद्धार्थ शंकर रे के हवाले से लिखा है, “25 जून की शाम में आपातकाल लगाने संबंधी राष्ट्रपति को भेजे जाने वाला पत्र तैयार प्रधानमंत्री आवास पर तैयार हो रहा था। जिसमें राष्ट्रपति को आपातकाल की उद्धोषणा का सुझाव देना था। पत्र में दो पंक्तियां ही तैयार करनी थीं, जिसे प्रधानमंत्री गांधी पहले पढ़तीं, फिर उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता। तब इंदिरा गांधी के छोटे बेटे बार-बार पूछते कि “इसमें इतना ज्यादा समय क्यों लग रहा है?”

 

उमा वासुदेव लिखती हैं कि प्रत्येक पांच मिनट में संजय गांधी दूसरे कमरे से आते और कहते “मम्मी, एक मिनट के लिए आइए।” और वह चली जाती। दरअसल, संजय उस वक्त देश के सभी मुख्यमंत्रियों के नम्बर मिलाने में व्यस्त थे जो संयोग से दिल्ली में मौजूद थे या राज्यों की राजधानियों में थे, और इसीलिए हर बार उनसे बात कराने के लिए अपनी मां को बुला रहे थे। सभी मुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री आवास से गुप्त संदेश भेजा जा रहा था और राज्य में सुरक्षाबल को मुस्तैद करने समेत बड़े विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया जा रहा था।