आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज ने गोली मारकर खुदकुशी की, सुसाइड नोट में लिखा- जिंदगी के तनाव से परेशान हो गया हूं

इंदौर: मध्य प्रदेश के मशहूर भय्यूजी महाराज का निधन हो गया है. भय्यूजी महाराज ने खुद को गोली मार ली थी. बाद में गंभीर हालत में उन्हें इंदौर के बॉम्बे अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उनको बचाया नहीं जा सका. जानकारी के मुताबिक भय्यूजी महाराज के कमरे से अंग्रेजी में लिखा एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है. इसमें लिखा है कि जिंदगी के तनाव से परेशान हो गया हूं. मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है.

जिस वक्त भय्यू जी महाराज ने खुद को गोली मारी उनकी मां और पत्नी घर में ही मौजूद थीं. एक सहयोगी की मदद से दरवाजा तोड़ कर बाहर निकाला गया. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. इंदौर के आईजी मकरंद देउस्कर ने कहा कि सुसाइड नोट और पिस्टल जब्त कर ली गई है, सभी पहलुओं की जांच हो रही है. घर के सदस्यों से भी पूछताछ की जाएगी. लाइसेंसी हथियार से ही सुसाइड किया.

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने शोक व्यक्त किया

मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौरान ने भय्यू जी महाराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है. मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ''राष्ट्रसंत श्री भय्यू जी महाराज के अवसान से उन अनगिनत लोगों को व्यक्तिगत क्षति हुई है जिन्हें अपने आध्यात्मिक ज्ञान से उन्होंने जीवन जीने की राह दिखाई. नर्मदा सेवा मिशन से उनके जुड़ाव एवं पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में किए गए कार्य को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा.''

कांग्रेस ने की सीबीआई जांच की मांग

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भय्यू जी महाराज की मौत की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. कांग्रेस नेता मयंक अग्रवाल ने कहा, ''मध्य प्रदेश सरकार ने सुवुधाओं और समर्थन के लिए उनके ऊपर दबाव डाला, जिसके लिए वो इनकार कर चुके थे. वे मानसिक रूप से दबाव में थे.''

एमपी सरकार ने दिया था राज्यमंत्री का दर्जा
पिछले साल अपनी शादी को लेकर भय्यूजी महाराज विवादों में फंस गए थे.  मल्लिका राजपूत नाम की एक्ट्रेस ने उनपर 'मोहजाल' में बांधकर रखने का आरोप लगाया था.बता दें कि इसी साल अप्रेल में मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार की तरफ से पांच हिंदू धार्मिक और आध्यात्मिक चेहरों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था. इन पांच आध्यात्मिक चेहरों में भय्यूजी महाराज भी शामिल थे.

कौन हैं भय्यू महाराज
मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाले भय्यू जी महाराज ने आध्यात्म की ओर रुख किया. उनका असली नाम उदय सिंह देशमुख है. भय्यू जी महाराज को उनके हाई प्रोफाइल लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता था. उनके काफिले में मर्सडीज से लेकर कई महंगी गाड़ियां शामिल होती थीं. मध्यप्रदेश के साथ साथ महाराष्ट्र में उनका काफी प्रभाव था. महाराष्ट्र के दिवंगत मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख से उनके बेहद करीबी संबंध थे. उनका मुख्य आश्रम इंदौर के बापट चौराहे पर है.

पहली पत्नी माधवी का 2015 में हो गया था निधन

आध्यात्म के साथ साथ भय्यू जी महाराज का प्रभाव राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में भी था. उनके फॉलोअर में कई दलों के नेता और दिग्गज बिजनेस मैन भी शामिल हैं. भय्यू महाराज की वेबसाइट पर दावा किया गया है कि वह एक आध्यात्मिक नेता, समाज सुधारक और मोटिवेटर हैं. जिनका मात्र एक उद्देश्य है देश के गरीब-गुरबों के चेहरे पर खुशी लाना है. पिछले साल वह तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने इंदौर की एक लड़की डॉ. आयुषी से शादी की थी. उनकी पहली पत्नी माधवी का 2015 में निधन हो गया था. पहली पत्नी से उनकी एक बेटी भी है.

लोकपाल आंदोलन के समय बड़ी भूमिका निभाई

साल 2011 के देशव्यापी अन्ना आंदोलन में भय्यूजी महाराज ने सरकार और आंदोनकारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. बताया जाता है कि अन्ना का अनशन तुड़वाने के लिए केंद्र सरकार ने दूत बनाकर भेजा था. बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सद्भावना उपवास भय्यू जी महाराज ने ही तुड़वाया था.

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने भी लगाई दरबार में हाजिरी
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देखमुख, शरद पवार, लता मंगेशकर, उद्धव ठाकरे और मनसे के राज ठाकरे, आशा भोंसले, अनुराधा पौडवाल, फिल्म एक्टर मिलिंद गुणाजी भी उनके आश्रम आ चुके हैं.

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